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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

संदीपनी

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सान्दीपनि वार्ता:संदीपनी #प्रस्तावित विलय सान्दीपनि में संदीपनी दिसम्बर 2022 हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के गुरु सान्दीपनि दिसम्बर 2022 महर्षि सांदीपनि (या संदीपनी) द्वापर युग के एक परम पूजनीय वैदिक ऋषि और महान शिक्षाविद थे। प्राचीन भारतीय इतिहास और सनातन शास्त्रों के अनुसार, वे भगवान श्रीकृष्ण, उनके अग्रज बलराम और उनके परम मित्र सुदामा के मुख्य दीक्षा एवं शिक्षा गुरु थे। उनके अवंतिका (उज्जैन) स्थित आश्रम में ही श्रीकृष्ण और बलराम ने वेदों, शास्त्रों, युद्धकला और अध्यात्म की संपूर्ण शिक्षा प्राप्त की थी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आश्रम का स्थान महोपनिषद और पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार, महर्षि सांदीपनि का प्राचीन आश्रम वर्तमान मध्य प्रदेश के प्राचीन नगर उज्जैन (प्राचीन नाम: अवंतिका या उज्जयिनी) में स्थित था। द्वापर युग में यह आश्रम संपूर्ण आर्यावर्त में वैदिक शिक्षा, अस्त्र-शस्त्र संचालन और आध्यात्मिक ज्ञान का एक सर्वप्रमुख और प्रतिष्ठित केंद्र था। ६४ दिनों की अलौकिक शिक्षा श्रीमद्भागवत महापुराण (दशम स्कंध, अध्याय 45) के साक्ष्यों के अनुसार, कंस वध के उपरांत श्रीकृष्ण और बलराम यज्ञोपवीत संस्कार के पश्चात ज्ञानार्जन के लिए महर्षि सांदीपनि के गुरुकुल पहुंचे थे। यद्यपि वे स्वयं सर्वज्ञ और संपूर्ण जगत के स्वामी थे, तथापि लोक-मर्यादा की स्थापना हेतु उन्होंने एक विनीत शिक्षार्थी के रूप में गुरु की शरण ली। महर्षि सांदीपनि के कुशल मार्गदर्शन में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने मात्र 64 दिनों की अत्यंत अल्प अवधि में संपूर्ण वैदिक ज्ञान प्राप्त कर लिया: 14 विद्याएँ: इसके अंतर्गत चार वेद, छह वेदांग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष), मीमांसा, न्याय, पुराण और धर्मशास्त्र शामिल थे। 64 कलाएँ: चित्रकला, खगोल विज्ञान, गंधर्व वेद (संगीत), आयुर्वेद (चिकित्सा), अश्व-गज प्रशिक्षण, धनुर्वेद (तीरंदाजी) और राजनीति शास्त्र आदि। गुरु-दक्षिणा और गुरु-भक्ति प्रसंग शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात जब श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि से गुरु-दक्षिणा मांगने का अनुरोध किया, तब ऋषि ने अपनी पत्नी की इच्छा पर श्रीकृष्ण से अपने उस पुत्र को जीवित वापस मांगा जो प्रभास क्षेत्र (समुद्र तट) पर एक भयानक शंख असुर (पंचजन) द्वारा निगल लिया गया था। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने यमलोक जाकर यमराज से गुरुपुत्र को मुक्त कराया और सकुशल महर्षि सांदीपनि को सौंपकर अपनी अनन्य गुरु-भक्ति को सिद्ध किया। वर्तमान साक्ष्य और सांस्कृतिक धरोहर वर्तमान में उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में संरक्षित है, जहां प्राचीन इतिहास के निम्नलिखित जीवंत साक्ष्य मिलते हैं: अंकपात क्षेत्र: आश्रम के निकटवर्ती भाग को 'अंकपात' कहा जाता है, मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण अपनी लेखन पट्टिका (स्लेट) को धोकर अंक मिटाते थे। अंक शिला: आश्रम परिसर में एक प्राचीन पाषाण शिला स्थित है, जिस पर 1 से 100 तक के प्राचीन अंक उकेरे गए हैं, जिसे स्वयं महर्षि सांदीपनि द्वारा रचित माना जाता है। गोमती कुंड: पुराणों के अनुसार, अपने वृद्ध गुरुदेव को जल लेने के लिए दूर न जाना पड़े, इसलिए श्रीकृष्ण ने योगबल से सभी पवित्र नदियों के जल को इस कुंड में समाहित कर दिया था। सर्वेश्वर महादेव: परिसर में स्थित लगभग 6000 वर्ष पुराना शिवलिंग है, जिसकी आराधना महर्षि सांदीपनि स्वयं करते थे। इन्हें भी देखें उज्जैन भागवत पुराण श्रीकृष्ण बलराम अवंतिका श्रेणी:वैदिक ऋषि श्रेणी:उज्जैन का इतिहास श्रेणी:महाभारत के पात्र सन्दर्भ कृष्ण कोश https://web.archive.org/web/20220302073826/https://hi.krishnakosh.org/%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%A8 2 मार्च 2022