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मजरुह सुल्तानपुरी
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मजरूह सुल्तानपुरी مجروح سلطانپوری ur Majrooh Sultanpuri & Ubaid Azam Azmi(cropped on Majrooh Sultanpuri).jpg yes 1919 10 1 2000 5 24 1919 10 1 y मुंबई, महाराष्ट्र, भारत शायर, गीतकार, फिल्म non_performing_personnel सुल्तानपुर, ब्रिटिश इंडिया 1946–2000 असरारुल हसन ख़ान
200px|right|thumb| सुल्तानपुरी का हस्ताक्षर
असरारुल हसम ख़ान (1 अक्टूबर 1919 – 24 मई 2000), पेशेवर नाम मजरूह सुल्तानपुरी, एक भारतीय उर्दू कवि और गीतकार थे। हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार और प्रगतिशील आंदोलन के उर्दू के सबसे बड़े शायरों में से एक थे। Indian Literature and Popular Cinema Pauwels Heidi R. M. 2008 Routledge 0-415-44741-0 210 The Light Zaheer Sajjad Azfar, Amina 2006 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 0-19-547155-5 Majrooh Sultanpuri Biography on downmelodylane.com website https://web.archive.org/web/20120224015357/http://www.downmelodylane.com/majrooh.html 24 फ़रवरी 2012 Retrieved 11 May 2018 वह 20वीं सदी के उर्दु साहिती जगत के बेहतरीन शायरों में गिना जाता है। Majrooh Sultanpuri Profile https://web.archive.org/web/20180525001240/http://www.urdupoetry.com/profile/majrooh.html 25 मई 2018 urdupoetry.com website, Retrieved 11 May 2018
बॉलीवुड में गीतकार के रूप में प्रसिद्ध हुवे। उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए देश, समाज और साहित्य को नयी दिशा देने का काम किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सुल्तानपुर जिले के गनपत सहाय कालेज में मजरुह सुल्तानपुरी ग़ज़ल के आइने में शीर्षक से मजरूह सुल्तानपुरी पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने इस सेमिनार में हिस्सा लिया और कहा कि वे ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने उर्दू को एक नयी ऊंचाई दी है। लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰सीमा रिज़वी की अध्यक्षता व गनपत सहाय कालेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ॰जेबा महमूद के संयोजन में राष्ट्रीय सेमिनार को सम्बोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो॰अली अहमद फातिमी ने कहा मजरूह, सुल्तानपुर में पैदा हुए और उनके शायरी में यहां की झलक साफ मिलती है। वे इस देश के ऐसे तरक्की पसंद शायर थे जिनकी वजह से उर्दू को नया मुकाम हासिल हुआ। उनकी मशहूर पंक्तियों में 'मै अकेला ही चला था, जानिबे मंजिल मगर लोग पास आते गये और कारवां बनता गया' का जिक्र भी वक्ताओं ने किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो॰मलिक जादा मंजूर अहमद ने कहा कि यूजीसी ने मजरूह पर राष्ट्रीय सेमिनार उनकी जन्मस्थली सुल्तानपुर में आयोजित करके एक नयी दिशा दी है।
हिंदी फिल्मों को योगदान
मजरूह सुल्तानपुरी ने पचास से ज्यादा सालों तक हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखे। आजादी मिलने से दो साल पहले वे एक मुशायरे में हिस्सा लेने बम्बई गए थे और तब उस समय के मशहूर फिल्म-निर्माता कारदार ने उन्हें अपनी नई फिल्म शाहजहां के लिए गीत लिखने का अवसर दिया था। उनका चुनाव एक प्रतियोगिता के द्वारा किया गया था। इस फिल्म के गीत प्रसिद्ध गायक कुंदन लाल सहगल ने गाए थे। ये गीत थे-ग़म दिए मुस्तकिल और जब दिल ही टूट गया जो आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। इनके संगीतकार नौशाद थे।
जिन फिल्मों के लिए आपने गीत लिखे उनमें से कुछ के नाम हैं-सी.आई.डी., चलती का नाम गाड़ी, नौ-दो ग्यारह, तीसरी मंज़िल, पेइंग गेस्ट, काला पानी, तुम सा नहीं देखा, दिल देके देखो, दिल्ली का ठग, इत्यादि।
पंडित नेहरू की नीतियों के खिलाफ एक जोशीली कविता लिखने के कारण मजरूह सुल्तानपुरी को सवा साल जेल में रहना पड़ा। 1994 में उन्हें फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व 1980 में उन्हें ग़ालिब एवार्ड और 1992 में इकबाल एवार्ड प्राप्त हुए थे।
नासिर हुसैन के साथ कार्य में साझेदारी
मजरुह और नासीर हुसैन ने पहली बार फिल्म पेइंग गेस्ट पर सहयोग किया, जिसे नासीर ने लिखा था। नासीर के निदेशक और बाद में निर्माता बनने के बाद वे कई फिल्मों में सहयोग करने गए, जिनमें से सभी के पास बड़ी हिट थीं और कुछ महारूह के सबसे यादगार काम हैं:
तुमसा नहीं देखा (1957)
दिल देके देखो
फिर वही दिल लया हूं
तीसरी मंजिल (1966)
बहार के सपने
प्यार का मौसम
कारवां (गीत पिया तू अब तो आजा)
यादों की बारात (1973)
हम किसी से कम नही (1977)
ज़माने को दिखाना है
कयामत से कयामत तक (1988)
जो जीता वोही सिकंदर (1992)
अकेले हम अकेले तुम
कही हन कही ना
मजरूह भी टीएसरी मंजिल के लिए नासीर को आरडी बर्मन पेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। तीनों ने उपर्युक्त फिल्मों में से 7 में काम किया। बर्मन ज़मीन को दीखाना है के बाद 2 और फिल्मों में काम करने के लिए चला गया।
मृत्यु
वे जीवन के अंत तक फिल्मों से जुड़े रहे। 24 मई 2000 को मुंबई में उनका देहांत हो गया। http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/763291.stm Hindi film songwriter dies 11 May 2018 25 May 2000 बीबीसी न्यूज़ https://web.archive.org/web/20180512051747/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/763291.stm 12 मई 2018 live
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
मजरूह सुल्तान पुरी से जुडी कुछ खास बाते
सीधे-सरल और स्पष्ट इंसान थे गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी
title=%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B9_%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%80 मजरुह सुल्तानपुरी (कविता कोश)
श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार विजेता
श्रेणी:फ़िल्मी गीतकार
श्रेणी:उर्दू शायर
श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता