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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय

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गोपालचंद्र मुखोपाध्याय চিত্র:গোপালচন্দ্র মুখোপাধ্যায়.jpg गोपालचंद्र मुखोपाध्याय १३ मई १९१३ कोलकाता, बांग्ला, ब्रितानी भारत (अब पश्चिम बंगाल में) १० फरवरी २००५ (९२ वर्ष की आयु में) कलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत भारतीय गोपाल पाँठा मांस का व्यवसायी गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय (गोपालचंद्र मुखर्जी) (१३ मई १९१३ - १० फरवरी २००५) कलकाता के एक व्यवसायी थे जिन्होंने १९४६ के कुख्यात सीधी कार्यवाही दिवस के समय हिन्दुओं को दंगाई मुसलमानों से बचाने के लिये 'भारतीय जातीय बाहिनी' नामक एक सशस्त्र वाहिनी का निर्माण किया था और हिन्दुओं की रक्षा की थी। उन्हें गोपाल पाँठा के नाम से भी जाना जाता है। उनकी कोलकाता में मांस विक्रय की दुकान थी, जिसकी वजह उन्हें पाँठा कहा जाता था। 16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन‘ (सीधी कार्वाई) के घोषणा के अनुसार कोलकाता की गलियों में मुसलमान गुंडों ने निर्दोष हिन्दुओं की एकतरफा और अकारण हत्या करना शुरु कर दिया। यह अत्यन्त भयानक नरसंहार था जिसमें कोलकाता की गलियां शमशान सी दिखने लगी थीं। यह सब कुछ मोहम्मद अली जिन्ना के ईशारे पर हुआ था। वह गाँधी और नेहरू पर विभाजन का दवाब बनाना चाहता था। यह भी कहा जाता है कि कहा जाता है कि बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने भीड़ को भरोसा दिया था कि 'अगर वे शहर में अपनी गतिविधियां शुरू करने का फैसला लेत हैं तो सशस्त्र मुसलमानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। 1946 के कलकत्ता के दंगे... हजारों हिंदुओं की जान बचाने वाले गोपाल पाठा हीरो बने और बदनाम भी हुए हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को देखकर गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय को अत्यन्त पीड़ा हुई। उनका परिवार कसाई का धंधा करता था। वह 'शठे शाठयम समाचरेत' अर्थात जैसे को तैसा की नीति के पक्षधर थे। उनने अपने साथी एकत्र किये, हथियार और बम इकट्ठे किये, और दंगाइयों को सबक सिखाने निकल पड़े। उन्होंने भारतीय जातीय बाहिनी के नाम से संगठन बनाया। गोपाल के कारण मुस्लिम दंगाइयों में दहशत फैल गई। और जब हिन्दुओ का पलड़ा भारी होने लगा तो सुहरावर्दी ने सेना बुला ली। तब जाकर दंगे रुके। गोपाल ने कोलकाता को बर्बाद होने से बचा लिया। इतिहासकार संदीप बंदोपाध्याय के अनुसार गोपाल कभी भी कट्टरपंथी नहीं थे। गाँधी जी ने कोलकाता आकर अनशन प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने खुद गोपाल को दो बार बुलाया। लेकिन गोपाल ने स्पष्ट मना कर दिया। तीसरी बार जब एक कांग्रेस के स्थानीय नेता ने प्रार्थना की “कम से कम कुछ हथियार तो गाँधी जी सामने डाल दो” तब गोपाल ने कहा “जब हिन्दुओ की हत्या हो रही थी तब तुम्हारे गाँधी जी कहाँ थे। मैंने इन हथियारों से अपने इलाके की हिन्दू महिलाओ की रक्षा की है, मै हथियार नहीं डालूँगा। गोपाल मुखर्जी का एक श्रव्य साक्षात्कार 1997 में बीबीसी के रिपोर्टर एंड्रयू व्हाइटहेड ने लिया था, जिसमें वे स्पष्ट तौर पर यह कहते हैं कि वे यह नहीं चाहते थे कोलकाता में दंगा फैले, लेकिन उनके लाख प्रयासों के बावजूद हिंसा शुरू हो गयी। हिंसा के पहले और दूसरे दिन मैंने सबको रोकने की कोशिश की। मैंने अपने मुसलमान दोस्तों से भी यह कहा कि हम भाई-भाई की तरह रहते हैं और वैसे ही रहेंगे, हिंसा ठीक नहीं है, लेकिन जब मेरी बात नहीं मानी गई और 'लड़ के लेंगे पाकिस्तान' का स्लोगन गूंजने लगा तो मैंने अपने लड़कों को भी तैयार रहने को कहा और उन्हें यह स्पष्ट कर दिया कि अगर वे हमारे एक लोगों को मारेंगे तो हम उनके 10 लोगों को मारेंगे। इस इंटरव्यू में वे यह स्वीकार करते हैं कि उनकी भूमिका दंगे में थी उनके लोगों ने कितने लोगों को मारा था इस प्रश्न पर वे कहते हैं कि हमारे पास कोई लिस्ट थोड़े ना है, पर हमने मारे थे। 1997 में साक्षत्कार के समय गोपालचंद्र मुखर्जी की आयु 83 वर्ष थी। 10 हजार लोगों के नरसंहार की कहानी में क्या थी कलकत्ता के गोपाल पाठा की भूमिका? 'सीधी कार्वाई' के विरोध और उससे उपजे दंगों में गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय की क्या भूमिका थी, इसके बारे में उनके साक्षात्कार के अलावा एक पुस्तक में भी बताया गया है जिसका नाम 'कलकत्ता अन्डरवर्ल्ड' है। इन्डियन एक्सप्रेस के अनुसार गोपाल मुखर्जी ने अपने इंटरव्यू में यह भी स्वीकार किया है कि जब हिंसा के बाद लोग अपने हथियारों को गांधी जी के पास जमा करा रहे थे, मैंने ऐसा नहीं किया। इसका कारण यह था कि मैं उन हथियारों को अपने पास रखना चाहता था, जिससे मैंने अपनी बहू-बेटियों की रक्षा की थी। वे यह भी बताते हैं कि मैंने अपने लड़कों से यह कहा था कि वे दंगाइयों के अलावा किसी को निशाना ना बनाएं और ना ही महिलाओं के साथ कोई गलत हरकत करें। सीधी कार्यवाई (डायरेक्ट ऐक्शन) अंग्रेजों ने कैबिनेट मिशन प्लान के तहत जब भारत को एक संघ के रूप में आजाद करने का मन बनाया तो मुस्लिम लीग को ऐसा लगा उनकी पाकिस्तान की माँग कहीं दबकर रह जाएगी। तब उन्होंने भारत विभाजन की माँग को और भी तेज कर दिया। जिन्ना बार-बार यह कहने लगे कि हिंदू और मुसलमान दो कौमें हैं और वे एक साथ नहीं रह सकते। कांग्रेस जब विभाजन की माँग पर सहमत नहीं हो रही थी और गांधीजी देश विभाजन का पुरजोर विरोध कर रहे थे, तब मुस्लिम लीग ने 'सीधी कार्यवाई' की घोषणा की और मुसलमानों को यह कहा कि वे खुद सड़क पर उतरें और पाकिस्तान की माँग करें। 16 अगस्त 1946 को 'सीधी कार्यवाई दिवस' (डायरेक्ट एक्शन डे) के रूप में मनाने का फैसला हुआ। मुसलमान सड़क पर उतरे, जिसके बाद कलकत्ता में भयंकर दंगे हुए। यह हिंसा चार दिनों तक चली थी और इसमें 10 हजार से अधिक लोग मारे गए। उसके बाद इसका विस्तार देश के दूसरे राज्यों में भी हो गया। इस दंगे को भारत विभाजन के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक प्रमुख कारण माना जाता है। गोपाल मुखर्जी मार्ग जून २०२६ में कोलकाता नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पार्क सर्कस क्षेत्र की प्रमुख सड़क ‘सुहरावर्दी एवेन्यू’ का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी मार्ग करने का निर्णय लिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक न्याय” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि गोपाल मुखर्जी ऐसे निर्भीक व्यक्ति थे, जिन्होंने विभाजनकालीन हिंसा के दौरान हजारों निर्दोष लोगों की रक्षा की थी। उनके अनुसार, अब ऐसे सच्चे रक्षकों को सम्मान देकर ऐतिहासिक न्याय बहाल किया जा रहा है।जब इतिहास लौटा : गुमनामी से गौरव तक गोपाल पाठाजिस 'महावीर' से कांप उठी थी मुस्लिम लीग, दंगाइयों में कहर मचाकर बचाए थे हजारों हिंदुओं के प्राण ; 80 वर्ष बाद शुभेन्दु ने दिया बड़ा सम्मान सन्दर्भ इन्हें भी देखें द बंगाल फाइल्स कलकत्ता दंगा श्रेणी:2005 में निधन श्रेणी:1913 में जन्मे लोग