411 REFERENCE · Wikipedia
हफ्सा बिन्त उमर
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
हफ़्सा बिन्त उमर (अरबी: حفصة بنت عمر; लगभग 605–665 ईस्वी) इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद की पत्नी और दूसरे खलीफा उमर इब्न अल-ख़त्ताब की पुत्री थीं। इस्लामी परंपरा में उन्हें उम्मुल मोमिनीन ("विश्वास करने वालों की माँ") की उपाधि दी जाती है।
== प्रारंभिक जीवन ==
हफ़्सा, उमर इब्न अल-ख़त्ताब और ज़ैनब बिन्त मज़ऊन की सबसे बड़ी संतान थीं। उनका जन्म लगभग 605 ईस्वी में हुआ था। ऐतिहासिक इस्लामी स्रोतों के अनुसार, उनका जन्म उस समय हुआ जब कुरैश जनजाति मक्का में काबा का पुनर्निर्माण कर रही थी। यह समय पैगंबर मुहम्मद को पहली बार ईश्वरीय संदेश प्राप्त होने से लगभग पाँच वर्ष पूर्व का माना जाता है।
== विवाह ==
हफ़्सा का पहला विवाह सहाबी खुनैस इब्न हुज़ैफ़ा अस-सहमी से हुआ था। अगस्त 624 ईस्वी में बद्र की लड़ाई के कुछ समय बाद खुनैस का निधन हो गया, जिसके बाद वे विधवा हो गईं।
इद्दत (शोक और प्रतीक्षा की अवधि) समाप्त होने के बाद, उनके पिता उमर ने उनके विवाह का प्रस्ताव उस्मान इब्न अफ़्फ़ान और फिर अबू बक्र के समक्ष रखा, लेकिन दोनों ने ही प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। जब उमर ने पैगंबर मुहम्मद से इस विषय में बात की, तो मुहम्मद ने उत्तर दिया: "हफ़्सा का विवाह उस्मान से बेहतर व्यक्ति से होगा और उस्मान का विवाह हफ़्सा से बेहतर स्त्री से होगा।"
पैगंबर मुहम्मद ने शाबान 3 हिजरी (जनवरी के अंत या फरवरी 625 ईस्वी की शुरुआत) में हफ़्सा से विवाह किया। इस विवाह ने पैगंबर मुहम्मद और उनके प्रमुख साथी उमर इब्न अल-ख़त्ताब के बीच संबंधों को पारिवारिक रूप से भी सुदृढ़ कर दिया।
== कुरआन के संकलन में भूमिका ==
इस्लामिक इतिहास में हफ़्सा की एक महत्वपूर्ण भूमिका कुरआन के संरक्षण में रही है। पहले खलीफा अबू बक्र के समय में जब कुरआन को पहली बार एक पुस्तक (मुसहफ़) के रूप में संकलित किया गया, तो वह मूल पांडुलिपि उमर इब्न अल-ख़त्ताब के पास रखी गई। उमर के निधन के बाद यह पांडुलिपि हफ़्सा की देखरेख में रही। कालांतर में, जब तीसरे खलीफा उस्मान इब्न अफ़्फ़ान ने कुरआन के पाठ का मानकीकरण किया, तो उन्होंने उसी मूल पांडुलिपि का उपयोग किया जो हफ़्सा के पास सुरक्षित थी।
== हदीस तथा ऐतिहासिक दृष्टिकोण ==
हफ़्सा ने इस्लामी परंपराओं को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। उनसे लगभग साठ हदीसों का वर्णन मिलता है।
सहीह अल-बुख़ारी जैसे हदीस संग्रहों में हफ़्सा के जीवन से संबंधित घटनाओं, उनकी प्रतिज्ञाओं और सामाजिक न्याय के प्रसंगों का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त, कुरआन की सूरा अल-तहरीम और सूरा अल-अहज़ाब की कुछ आयतों के अवतरण (शान-ए-नुज़ूल) के ऐतिहासिक संदर्भ में भी उनका नाम आता है। हालाँकि, इस्लामी इतिहास के कुछ प्रसंगों में उनके और आयशा के वर्णन को लेकर सुन्नी और शिया परंपराओं के दृष्टिकोणों में अंतर देखा जाता है।
== मृत्यु ==
हफ़्सा का निधन शाबान 45 हिजरी (अक्टूबर या नवंबर 665 ईस्वी) में हुआ। उन्हें मदीना के जन्नत अल-बक़ी कब्रिस्तान में दफनाया गया।
== सन्दर्भ ==
== इन्हें भी देखें ==
मुहम्मद
मुहम्मद के अभियानों की सूची
उम्मुल मोमिनीन