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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

लोक देवता

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लोक देवता ऐसे देवता होते हैं, जो प्रसिद्ध या ऐतिहासिक व्यक्ति हैं जिनकी किसी क्षेत्र विशेष में गहरी मान्यता है; लेकिन पूरे भारत में वे समान रूप से नहीं जाने जाते हैं। देवनारायण अंगूठाकार|दाएँ|देवनारायण स्टैंप तेजाजी अंगूठाकार|दाएँ|तेजाजी महाराज रामदेव पीर अंगूठाकार|दाएँ|पीरो के पीर अंगूठाकार|दाएँ|बाबा रामदेव शिरडी साईं बाबा अंगूठाकार|दाएँ|फकीर अंगूठाकार|दाएँ|साईं बाबा बिगगा जी मल्लिनाथ जी गोगा जी कल्ला जी राठौर बावलिया बाबा तल्लीनाथ जी जांभो जी देव बाबा सोलंकी लोक देवता का अर्थ लोक देवता उसे कहा जाता है जिसे किसी विशेष क्षेत्र, समाज या समुदाय के लोग अपनी आस्था, परंपरा और विश्वास के आधार पर देवता मानकर पूजते हैं।Dhali, Rajshree Popular Religion in Rajasthan: A Study of Four Deities and Their Worship in Nineteenth and Twentieth Century, 2014, p. 229 लोक देवता के अवतार विभिन्न क्षेत्रों में लोक देवताओं को प्रमुख देवी-देवताओं का अवतार माना जाता है। उदाहरण के लिए, लोक मान्यताओं के अनुसार तेजाजी और गोगाजी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। पाबू जी की कथा प्रचलित वाचिक कथा के अनुसार पाबूजी राठौड़ का जन्म कोलूगढ़ के दुर्गपति के घर हुआ था। यह कथा देवल नामक एक चारणी के साथ शुरू होती है जो मारवाड़ के इलाके में गायें पालती और चराती थी। कथा में देवल को अद्वितीय सुंदरी और शक्ति का अवतार माना गया है। देवल के पास काले रंग की एक घोड़ी है जिसका नाम कालिमी (या केसर कालमी) है। जयाल के सामंत जींद राव को कालिमी घोड़ी पसंद आ जाती है और वह उसे प्राप्त करने का प्रयास करता है। सुरक्षा के लिए देवल कोलूगढ़ के सामंत के यहाँ चली आती है जो उसे अपनी पुत्री की तरह शरण देते हैं और साथ ही उसकी गायों की रक्षा करने का वचन भी देते हैं। इसी दौरान जींद राव देवल की गायें हँका ले जाता है। देवल अपनी कालिमी घोड़ी पाबूजी को दे देती है और पाबूजी अपने आदमियों के साथ देवल की गायों को छुड़ाने जाते हैं। युद्ध में गायों की रक्षा करते हुए पाबूजी वीरगति को प्राप्त होते हैं।The epic of Pābūjī https://bombay.indology.info/pabuji/statement.html 2022-06-11 bombay.indology.info गोगा जी की कथा लोक देवता गोगाजी (जाहरवीर) का जन्म चुरू के ददरेवा में चौहान शासक जेवर सिंह व माता बाछल के घर गुरु गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। वे सांपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। गौ-रक्षा हेतु महमूद गजनवी से युद्ध करते हुए उन्होंने 47 पुत्रों व 60 भतीजों सहित वीरगति पाई। उनकी वीरता से प्रसन्न होकर गजनवी ने उन्हें 'जाहरपीर' (साक्षात देवता) की उपाधि दी थी।https://newsbeats.in/gogaji-ki-katha/ गोगा जी का इतिहास : गोगाजी की कथा - News Beats en-US 2021-09-09 9 सितंबर 2021 https://web.archive.org/web/20210909155141/https://newsbeats.in/gogaji-ki-katha/ dead संदर्भ श्रेणी:देवी-देवता श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता