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बाँसुरी
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the whole family of side-blown, end-blown, globe, and duct instruments the flute commonly used in orchestras Western concert flute
right|thumb|320px|दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन
बांसुरी काष्ठ वाद्य परिवार का एक संगीत उपकरण है। नरकट वाले काष्ठ वाद्य उपकरणों के विपरीत, बांसुरी एक एरोफोन या बिना नरकट वाला वायु उपकरण है जो एक छिद्र के पार हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न करता है। होर्नबोस्टल-सैश्स के उपकरण वर्गीकरण के अनुसार, बांसुरी को तीव्र-आघात एरोफोन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
बांसुरीवादक को एक फ्लूट प्लेयर, एक फ्लाउटिस्ट, एक फ्लूटिस्ट, या कभी कभी एक फ्लूटर के रूप में संदर्भित किया जाता है।
बांसुरी पूर्वकालीन ज्ञात संगीत उपकरणों में से एक है। करीब 40,000 से 35,000 साल पहले की तिथि की कई बांसुरियां जर्मनी के स्वाबियन अल्ब क्षेत्र में पाई गई हैं। यह बांसुरियां दर्शाती हैं कि यूरोप में एक विकसित संगीत परंपरा आधुनिक मानव की उपस्थिति के प्रारंभिक काल से ही अस्तित्व में है। Wilford John N. Flutes Offer Clues to Stone-Age Music दि न्यू यॉर्क टाइम्स 459 248 June 24, 2009 http://www.nytimes.com/2009/06/25/science/25flute.html June 29, 2009 10.1038/nature07995 https://web.archive.org/web/20100728182556/http://www.nytimes.com/2009/06/25/science/25flute.html 28 जुलाई 2010 live
इतिहास
खोजी गई सबसे पुरानी बांसुरी गुफा में रहने वाले एक तरुण भालू की जाँघ की हड्डी का एक टुकड़ा हो सकती है, जिसमें दो से चार छेद हो सकते हैं, यह स्लोवेनिया के डिव्जे बेब में पाई गई है और करीब 43,000 साल पुरानी है। हालांकि, इस तथ्य की प्रामाणिकता अक्सर विवादित रहती है। Tenenbaum, David
June
2000
http://whyfiles.org/114music/4.html
Neanderthal jam
The Why Files
University of Wisconsin, Board of Regents
14 मार्च 2006
https://web.archive.org/web/20060216111710/http://whyfiles.org/114music/4.html
16 फ़रवरी 2006
live
Flute History https://web.archive.org/web/20110608211720/http://cogweb.ucla.edu/ep/FluteDebate.html 8 जून 2011 , यू सी एल ए (UCLA). पुनः प्राप्त जून 2007. 2008 में जर्मनी के उल्म के पास होहल फेल्स गुहा में एक और कम से कम 35,000 साल पुरानी बांसुरी पाई गई।http://news.bbc.co.uk/2/hi/science/nature/8117915.stm BBC: 'Oldest musical instrument' found 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101001180212/http://news.bbc.co.uk/2/hi/science/nature/8117915.stm 1 अक्तूबर 2010 live इस पाँच छेद वाली बांसुरी में एक वी-आकार का मुखपत्र है और यह एक गिद्ध के पंख की हड्डी से बनी है। खोज में शामिल शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्षों को अगस्त 2009 में नेचर नामक जर्नल में आधिकारिक तौर पर प्रकाशित किया। 10.1038/nature08169 2009 August Nicholas J. Conard, Maria Malina, and Susanne C. Münzel New Flutes Document the Earliest Musical Tradition in Southwestern Germany https://archive.org/details/sim_nature-uk_2009-08-06_460_7256/page/736 460 737–40 0028-0836 19553935 Nature 7256 यह खोज इतिहास में किसी भी वाद्य यंत्र की सबसे पुरानी मान्य खोज भी है।'Oldest musical instrument' found BBC news 2009-06-25 http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/8117915.stm 2009-06-26 https://web.archive.org/web/20170821033156/http://news.bbc.co.uk/1/hi/sci/tech/8117915.stm 21 अगस्त 2017 live बांसुरी, पाए गए कई यंत्रों में से एक है, यह होहल फेल्स के शुक्र के सामने और प्राचीनतम ज्ञात मानव नक्काशी से थोड़ी सी दूरी पर होहल फेल्स की गुफा में पाई गई थी।Music for cavemen MSNBC 2009-06-24 http://cosmiclog.msnbc.msn.com/archive/2009/06/24/1976108.aspx 2009-06-26 https://web.archive.org/web/20090626032243/http://cosmiclog.msnbc.msn.com/archive/2009/06/24/1976108.aspx 26 जून 2009 dead खोज की घोषणा पर, वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि "जब आधुनिक मानव ने यूरोप को उपनिवेशित किया था, खोज उस समय की एक सुतस्थापित संगीत परंपरा की उपस्थिति को प्रदर्शित करती है".Flutes Offer Clues to Stone-Age Music दि न्यू यॉर्क टाइम्स 2009-06-24 http://www.nytimes.com/2009/06/25/science/25flute.html?_r=1&partner=rss&emc=rss 2009-06-26 https://web.archive.org/web/20160114194955/http://www.nytimes.com/2009/06/25/science/25flute.html?_r=1&partner=rss&emc=rss 14 जनवरी 2016 live वैज्ञानिकों ने यह सुझाव भी दिया है कि, बांसुरी की खोज निएंदरथेल्स और प्रारंभिक आधुनिक मानव "के बीच संभवतः व्यवहारिक और सृजनात्मक खाड़ी" को समझाने में सहायता भी कर सकती है।
मेमथ के दांत से निर्मित, 18.7 सेमी लम्बी, तीन छिद्रों वाली बांसुरी (दक्षिणी जर्मन स्वाबियन अल्ब में उल्म के निकट स्थिति Geißenklösterle गुफा से प्राप्त हुई है और इसकी तिथि 30000 से 37,000 वर्ष पूर्व निश्चित की गयी है)http://www.cbc.ca/arts/story/2004/12/30/flute-prehistoric041230.html Archeologists discover ice age dwellers' flute CBC Arts Canadian Broadcasting Corporation 2004-12-30 2009-04-21 https://web.archive.org/web/20061116042750/http://www.cbc.ca/arts/story/2004/12/30/flute-prehistoric041230.html 16 नवंबर 2006 live 2004 में खोजी गयी थी और दो अन्य हंस हड्डियों से निर्मित बांसुरियां जो एक दशक पहले खुदाई में प्राप्त हुई थी (जर्मनी की इसी गुफा से, जिनकी तिथि लगभग 36,000 साल पूर्व प्राप्त होती है) प्राचीनतम ज्ञात वाद्ययंत्रों में से हैं।
पांच से आठ छिद्रों वाली नौ हज़ार वर्ष पुरानी गुडी (शाबि्दक अर्थ "हड्डी" बांसुरी), जिनकी निर्माण लाल कलगी वाले क्रेन के पंख की हड्डियों से किया गया है, को मध्य चीन के एक प्रान्त हेन्नन मँ स्थित जिअहुThe bone age flute https://web.archive.org/web/20090115103938/http://news.bbc.co.uk/1/low/sci/tech/454594.stm 15 जनवरी 2009 . बीबीसी (BBC). पुनः प्राप्त जुलाई 2007. के एक मकबरे से खनित किया गया है। Zhang, Juzhong
Xiao, Xinghua, Lee, Yun Kuen
2004
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The early development of music. Analysis of the Jiahu bone flutes
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21 सितंबर 2010
https://web.archive.org/web/20130603141434/http://antiquity.ac.uk/ant/078/Ant0780769.htm
3 जून 2013
dead
thumb|12वीं सदी की सोंग डायनेस्टी से, बांसुरी बजाती हुई चीनी महिलाएं, यह हैन क्सिज़ाई की नाईट रेवल्ज़ की रिमेक थी जो मूल रूप से गु होन्गज्होंग द्वारा थी (दसवीं सदी).
प्राचीनतम प्रचलित आड़ी बांसुरी चीन के हुबेई प्रांत के सुइज़्हौ स्थल पर जेंग के मारकिस यी की कब्र में पाई गई एक ची (篪) बांसुरी है। यह 433 ई.पू. उत्तर झाऊ वंश से संबंधित है। यह रोगन किए हुए बांस से बनी हुई बंद छोरों वाली होती है तथा इसके पांच छिद्र शीर्ष की ओर न होकर दूसरे छोर पर होते हैं। परम्परा के अनुसार, कन्फ्युशियस के द्वारा संकलित एवं संपादित शी जिंग में ची बांसुरी का वर्णन है।
बाइबिल की जेनेसिस 4:21 में जुबल को, "उन सभी का पिता जो उगब और किन्नौर बजाते हैं", बताया गया है। पूर्ववर्ती हिब्रू शब्द कुछ वायु वाद्य यंत्रों या सामान्यतः वायु यंत्रों को संदर्भित करता है, उत्तरवर्ती एक तारदार वाद्य यंत्र या सामान्यतः तारदार वाद्ययंत्र को संदर्भित करता है। अतएव, जूडियो ईसाई परंपरा में जुबल को बांसुरी (इस बाईबिल पैराग्राफ के कुछ अनुवादों में प्रयुक्त शब्द) का आविष्कारक माना जाता है। पहले के कुछ बांसुरी टिबियास(घुटने के नीचे की हड्डी) से बने हुए थे। भारतीय संस्कृति एवं पुराणों में भी बांसुरी हमेशा से आवश्यक अंग रहा है,Students' Britannica India Hoiberg Dale Ramchandani Indu 2000 Popular Prakashan Mumbai 0852297602 125 http://books.google.com/books?id=AE_LIg9G5CgC 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20130522131533/http://books.google.com/books?id=AE_LIg9G5CgC 22 मई 2013 live एवं कुछ वृतातों द्वारा क्रॉस बांसुरी का उद्भव भारतHow to Play Flute & Shehnai Chaturvedi Mamta 2001 Diamond Pocket Books (P) Ltd नई दिल्ली 8128814761 7 http://books.google.com/books?id=0rz8rvUOmSwCMusic and Music-makers Morse Constance 1968 Ayer Publishing New Hampshire 0836907248 7 http://books.google.com/books?id=XEXWVhtcuJ4C में ही माना जाता है क्योंकि 1500 ई.पू. के भारतीय साहित्य में क्रॉस बांसुरी का विस्तार से विवरण है।Choreographic Music for the Dance Arvey Verna 2007 Read Country Books London 1406758477 36 http://books.google.com/books?id=GOwFSQkpfNsC
बांसुरी ध्वनि विज्ञान
जब यंत्र के छिद्र के आर-पार वायु धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे छिद्र पर वायु कंपन होने के कारण बांसुरी ध्वनि उत्पन्न करता है।Flute acoustics https://web.archive.org/web/20100813223531/http://www.phys.unsw.edu.au/jw/fluteacoustics.html#airjet 13 अगस्त 2010 , यू एन एस डबल्यू (UNSW). पुनः प्राप्त जून 2007.Wolfe, Joe Introduction to flute acoustics UNSW Music Acoustics http://www.phys.unsw.edu.au/music/flute/ 16 जनवरी 2006 https://web.archive.org/web/20060118072227/http://www.phys.unsw.edu.au/music/flute/ 18 जनवरी 2006 live
छिद्र के पार वायु एक बरनॉली या सिफॉन सृजित करती है जिसका प्रभाव वॉन कारमन वोरटैक्स स्ट्रीट तक होता है। यह बांसुरी में सामान्यतः मौजूद बेलनाकार अनुनादी गुहिका में वायु को उत्तेजित करती है। वादक यंत्र के छिद्रों को खोल एवं बंद कर के ध्वनि के स्वर में परिवर्तन करता है, इस प्रकार यह अनुनादी की प्रभावी लंबाई एवं इसके सदृश अनुनाद आवृत्ति में परिवर्तन होता है। वायु दाब में परिवर्तन के द्वारा एवं किसी भी छिद्र को खोले और बंद किये बगैर आधारभूत आवृत्ति के अलावा भी बांसुरी को गुणित स्वर पर अनुवाद के द्वारा वादक स्वर में भी परिवर्तन कर सकता है।
अधिक ध्वनि के लिये बांसुरी को अपेक्षाकृत बड़े अनुनादक, बड़ी वायु धारा या बड़े वायु धारा वेग का प्रयोग करना होगा. सामान्यतः बांसुरी की आवाज इसके अनुनादक और ध्वनि छिद्रों को बढ़ा करके बढ़ायी जा सकती है। इसलिए पुलिस की सीटी, जो बांसुरी का एक रूप है, अपने स्वर में बहुत विस्तृत होती है एवं इसीलिये पाइप आर्गन एक कंसर्ट बांसुरी की तुलना में अधिक तेज आवाज का हो सकता है: एक बड़े ऑर्गन पाइप में कुछ क्यूबिक फीट वायु हो सकती है एवं इसके ध्वनि छिद्र कुछ चौड़े हो सकते हैं, जबकि कंसर्ट बांसुरी की वायु धारा की माप एक इंच से थोड़ी ही बड़ी होती है।
वायु धारा को एक उचित कोण एवं वेग से प्रवाहित करना चाहिये अन्यथा बांसुरी में वायु में कंपन नहीं होगा. फिलिप्ड या नलिका वाली बांसुरियों में, संक्षिप्त रूप से गठित एवं स्थापित वायु मार्ग सिकुड़ेगा एवं खुली खिड़की के पार लेबियम रैम्प किनारे तक वायु प्रवाहित होगी. पाइप ऑर्गन में, यह वायु एक नियंत्रित धौकनी (ब्लोअर) द्वारा प्रवाहित होती है।
गैर फिपिल बांसुरी में वायु धारा निश्चित रूप में वादक के होठों से प्रवाहित होती है जिसे इंबोशर कहा जाता है। इससे वादक को विशेषकर फिपिल/ नलिका बांसुरियों की तुलना में स्वर, ध्वनि व आवाज की अभिव्यक्ति की विस्तृत श्रंखला की सुविधा प्राप्त होती है। हालांकि, इससे नौसिखिए वादक को रिकॉर्डर जैसे नलिका बांसुरियों की तुलना में अंतिम सिरे से बजने वाले या अनुप्रस्थ बांसुरियों द्वारा पूरी ध्वनि उत्पन्न करने में पर्याप्त कठिनाई होती है। अनुप्रस्थ एवं अंतिम सिरे से बजने वाले बांसुरी को बजाने के लिये अधिक वायु की आवश्यकता होती है जिसमें गहरे श्वसन की आवश्यकता होती है एवं यह चक्रीय श्वसन को पर्याप्त जटिल बनाता है।
सामान्यतः गुणवत्ता या "ध्वनि रंग", जिसे स्वर कहते हैं, में परिवर्तन होता है क्योंकि बांसुरी कई भागों एवं गहनताओं में सुर उत्पन्न कर सकते हैं। ध्वनि-रंग में छिद्र की आंतरिक आकृति जैसे कि शंक्वाकार नोक में परिवर्तन के द्वारा परिवर्तन या सुधार किया जा सकता है। सुर एक आवृति है जो एक निम्न रजिस्टर पूर्णांक गुणक है या बांसुरी का "आधारभूत" नोट है। सामान्यतः उच्च सुर उच्च अंशों की उत्पत्ति में वायु धारा पतली (अधिक रूपों में कंपन), तीव्र (वायु के अनुनाद को उत्तेजित करने के लिये अधिक ऊर्जा उपलब्ध कराना) एवं छिद्र के पार कम गहरे (वायु धारा का अधिक छिछले परावर्तन हेतु) प्रवाहित की जाती है।
ध्वनि विज्ञान निष्पादन एवं स्वर के प्रति शीर्ष जोड़ ज्यामिति विशेष रूप से जटिल प्रतीत होती है, Spell Eldred Anatomy of a Headjoint The Flute Worker 1983 http://eldredspellflutes.com/Articles.htm ISSN 0737-8459 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20071116141712/http://eldredspellflutes.com/Articles.htm 16 नवंबर 2007 dead लेकिन उत्पादकों के मध्य किसी विशेष आकार को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं है। इमबोशर छिद्र की ध्वनि विज्ञान बाधा सबसे जटिल मानदंड प्रतीत होती है। Wolfe Joe Acoustic impedance of the flute Flute acoustics: an introduction http://www.phys.unsw.edu.au/~jw/fluteacoustics.html#acousticimpedance 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110304203134/http://www.phys.unsw.edu.au/%7Ejw/fluteacoustics.html#acousticimpedance 4 मार्च 2011 dead ध्वनि विज्ञान बाधा को प्रभावित करने वाले जटिल कारकों में शामिल हैं: चिमनी की लंबाई (ओठ-प्लेट और शीर्ष नली के मध्य छिद्र), चिमनी का व्यास एवं रडी या चिमनी के अंत सिरे का घुमाव तथा वाद्य यंत्र के "गले " में कोई डिजाइन प्रतिबंध जैसा कि जापानी नोहकन बांसुरी में.
एक अध्ययन में, जिसमें व्यावसायिक वादकों की आँख में पट्टी बांधी गई, यह पाया गया कि वे विभिन्न धातुओं से बने वाद्य यंत्रों में कोई अंतर नहीं खोज पाये. Widholm, G.
Linortner, R., Kausel, W. and Bertsch, M.
2001
Silver, gold, platinum—and the sound of the flute
Proc. International Symposium on Musical Acoustics
277–280
http://iwk.mdw.ac.at/Forschung/english/linortner/linortner_e.htm
21 सितंबर 2010
https://web.archive.org/web/20080313014949/http://iwk.mdw.ac.at/Forschung/english/linortner/linortner_e.htm
13 मार्च 2008
dead
आँख बंद करके सुनने पर पहली बार में कोई भी वाद्य यंत्र की सही पहचान नहीं कर पाया एवं दूसरी बार में केवल चाँदी यंत्र ही पहचाना जा सका. अध्ययन का यह निष्कर्ष है कि "दीवार की सामग्री का यंत्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि स्वर या गतिज विस्तार पर कोई गौर करने योग्य प्रभाव होने का प्रमाण नहीं मिला". दुर्भाग्यवश, यह अध्ययन शीर्षजोड़ डिजाइन पर नियंत्रण नहीं करता जो कि सामान्यतः स्वर को प्रभावित करने वाला माना जाता है (ऊपर देखें). नियंत्रित स्वर परीक्षण यह दर्शाते है कि नली का द्रव्यमान परिवर्तन उत्पन्न करता है एवं अतः नली घनत्व एवं दीवार की मोटाई परिवर्तन पैदा करेगी.http://users.cvip.net/~js210/tone.html संग्रहीत प्रति 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090107090907/http://users.cvip.net/~js210/tone.html 7 जनवरी 2009 dead हमें ध्वनि की पहचान हेतु इलैक्ट्रॉनिक संवेदकों की तुलना में मानव कानों की सीमाओं का भी ध्यान रखना चाहिये.
बांसुरी की श्रेणियाँ
thumb|right|ज़ेम्पोना, एक पूर्व इंका उपकरण और पैन बांसुरी का प्रकार बजाते हुए.
अपने आधारतम रूप में बांसुरी एक खुली नलिका हो सकती है जिसे बोतल की तरह बजाया जाता है। बांसुरी की कुछ विस्तृत श्रेणियां हैं। ज़्यादातर बांसुरियों को संगीतकार या वादक ओठ के किनारों से बजाता है। हालांकि, कुछ बांसुरियों, जैसे विस्सल, जैमशोर्न, फ्लैजिओलैट, रिकार्डर, टिन विस्सल, टोनेट, फुजारा एवं ओकारिना में एक नली होती है जो वायु को किनारे तक भेजती है ("फिपिल" नामक एक व्यवस्था). इन्हें फिपिल फ्लूट कहा जाता है। फिपिल, यंत्र को एक विशिष्ट ध्वनि देता है जो गैर-फिपिल फ्लूटों से अलग होती है एवं यह यंत्र वादन को आसान बनाता है, लेकिन इस पर संगीतकार या वादक का नियंत्रण कुछ कम होता है।
बगल से (अथवा आड़ी) बजायी जाने वाली बांसुरियों जैसे कि पश्चिमी संगीत कवल, डान्सो, शाकुहाची, अनासाज़ी फ्लूट एवं क्वीना के मध्य एक और विभाजन है। बगल से बजाई जाने वाले बांसुरियों में नलिका के अंतिम सिरे से बजाये जाने की के स्थान पर ध्वनि उत्पन्न करने के लिये नलिका के बगल में छेद होता है। अंतिम सिरे से बजाये जाने वाली बांसुरियों को फिपिल बांसुरी नहीं समझ लेना चाहिये जैसे कि रिकॉर्डर, जो ऊर्ध्ववत बजाये जाते हैं लेकिन इनमें एक आंतरिक नली होती है जोकि ध्वनि छेद के सिरे तक वायु भेजती है।
बांसुरी एक या दोनों सिरों पर खुले हो सकते हैं। ओकारिना, जुन, पैन पाइप्स, पुलिस सीटी एवं बोसुन की सीटी एक सिरे पर बंद (क्लोज़ एंडेड) होती है। सिरे पर खुली बांसुरी जैसे कि कंसर्ट-बांसुरी एवं रिकॉर्डर ज्यादा सुरीले होते हैं अतएव वादक के लिये बजाने में अधिक लोचशील तथा अधिक चटख ध्वनि वाले होते हैं। एक ऑर्गन पाइप वांछित ध्वनि के आधार पर खुला या बंद हो सकता है।
बांसुरियों को कुछ विभिन्न वायु स्त्रोतों से बजाया जा सकता है। परंपरागत बांसुरी मुँह से बजायी जाती हैं, यद्यपि कुछ संस्कृतियों में नाक से बजायी जाने वाली बांसुरी प्रयोग होती है। ऑर्गन के फ्लू पाइपों को, जोकि नलिका बांसुरी से ध्वनिक रूप में समान होते हैं, धौकनी या पंखों के द्वारा बजाया जाता है।
वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी
Western concert flute
thumb|300px|right|पश्चिमी संगीत सम्मलेन बांसुरी का एक चित्र.
वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी, 19वीं सदी के जर्मन बांसुरी का वंशज है। यह एक आढ़ी या अनुप्रस्थ बांसुरी है जोकि शीर्ष पर बंद होती है। इसके शीर्ष के नजदीक एक दरारनुमा छेद होता है जिससे वादक बजाता है। बांसुरी में गोलाकार ध्वनि छिद्र होते हैं जोकि इसके बारोक पूर्वजों के अंगुली छिद्र से बड़े होते हैं। ध्वनि छिद्र का आकार एवं स्थिति, प्रमुख कार्यप्रणाली, एवं बांसुरी के विस्तार में नोट्स को उत्पन्न करने के लिये अंगुली के प्रयोग का विकास 1832 से 1847 के मध्य थिओबाल्ड बोहम ने किया था एवं यंत्र के गतिज विस्तार एवं तान (ध्वनि का उतार चढ़ाव) में उनके उत्तराधिकारियों ने महान सुधार किया।बोहम 1964, 8-12. कुछ परिष्कारों के साथ (किंगमा प्रणाली एवं अन्य परंपरागत रूप से स्वीकृत अंगुली प्रणालियों को विरल अपवाद स्वरूप छोड़कर) वैस्टर्न कंसर्ट बांसुरी मूलतः बोहम की डिजाइन तक ही सीमित रहे एवं बोहम प्रणाली के नाम से जाने जाते है।
स्टैण्डर्ड कंसर्ट बांसुरी को सप्तक सी स्वर में स्वर बद्ध किया गया है एवं इसका विस्तार मध्य सी (या ढ़ेड़ पायदान नीचे, जब बी फुट को यंत्र के साथ जोड़ा गया हो) से प्रारंभ होकर तीसरे सप्तक तक जाता है। इसका तात्पर्य है कि कंसर्ट बांसुरी सर्वाधिक प्रचलित आर्केस्ट्रा यंत्रों में से एक है, इसका अपवाद पिकोलो है जो एक सप्तक ऊपर बजता है। जी आल्टो एवं सी बांस बांसुरी का प्रयोग यदा-कदा ही होता है एवं इन्हें क्रमशः पूर्ण चतुर्थ सप्तक एवं कंसर्ट बांसुरी से एक सप्तक नीचे स्वरबद्ध किया गया है। बांस की तुलना में आल्टो बांसुरी के अंश अधिक लिखे जाते हैं।May 2010 कॉन्ट्राबास, डबल कॉन्ट्राबास एवं हाइपरबास कुछ अन्य विरले बांसुरी रूप हैं जिन्हें मध्य सप्तक से क्रमशः दो, तीन और चार सप्तक नीचे स्वरबद्ध किया गया है।
समय-समय पर बांसुरी और पिकोलो के अन्य आकारों का प्रयोग होता है। आधुनिक स्वर बद्ध प्रणाली का एक विरला यंत्र ट्रेबल जी बांसुरी है। यंत्र पुराने स्वर मानकों के अनुसार बनाया गया है, जिसका प्रयोग सैद्धांतिक रूप से विंड-बैंड संगीत सहित डी बी पिकोलो, एब सोपरानो बांसुरी (वर्तमान कंसर्ट सी बांसुरी के समकक्ष प्राथमिक यंत्र), एफ आल्टो बांसुरी एवं बी बी बास बांसुरी में होता है।
भारतीय बांस निर्मित बांसुरी
thumb|200px|left|एक कर्नाटकीय आठ-छिद्र वाली बांस की बांसुरी.
thumb|200px|right|आठ छिद्र वाली विशेष रूप से कर्नाटकीय संगीत में प्रयोग की जाने वाली शास्त्रीय भारतीय बांस की बांसुरी.
thumb|200px|left|एक भारतीय शास्त्रीय संगीत कलाकार द्वारा बजाई जाने वाली बांसुरी.
भारतीय शास्त्रीय संगीत में बांस से निर्मित बांसुरी एक महत्वपूर्ण यंत्र है जिसका विकास पश्चिमी बांसुरी से स्वतंत्र रूप से हुआ है। हिन्दू भगवान कृष्ण को परंपरागत रूप से बांसुरी वादक माना जाता है (नीचे देखें). पश्चिमी संस्करणों की तुलना में भारतीय बांसुरी बहुत साधारण हैं; वे बांस द्वारा निर्मित होते हैं एवं चाबी रहित होती हैं।The Garland Encyclopedia of World Music Arnold Alison 2000 Taylor & Francis London 0824049462 354 http://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20140103114419/http://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC 3 जनवरी 2014 live
महान भारतीय बांसुरी वादक पन्नालाल घोष ने सर्वप्रथम छोटे से लोक वाद्ययंत्र को बांस बांसुरी (सात छिद्रों वाला 32 इंच लंबा) में परिवर्धित करके इसे परंपरागत भारतीय शास्त्रीय संगीत बजाने योग्य बनाया था तथा इसे अन्य शास्त्रीय संगीत वाद्य-यंत्रों के कद का बनाया था। अतिरिक्त छिद्र ने मध्यम बजाना संभव बनाया, जो कि कुछ परंपरागत रागों में मींदज़ (एम एन, पी एम एवं एम डी की तरह) को सरल बनाता है। फ़रवरी 2010
भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुनों और सूक्ष्मता को भलीभांति प्रकट करने के लिये पंडित रघुनाथ प्रसन्ना ने बांसुरी वादन के क्षेत्र में विभिन्न तकनीकों का विकास किया है। वास्तव में उन्होंने अपने स्वयं के परिवार सदस्यों को प्रशिक्षण के द्वारा अपने घराने को मजबूत आधार प्रदान किया। इस घराने के शिष्यों में पंडित भोलानाथ प्रसन्ना, पंडित हरी प्रसाद चौरसिया, पंडित राजेन्द्र प्रसन्ना विश्वभर में अपने मधुर संगीत के लिये प्रसिद्ध हैं।
भारतीय कंसर्ट बांसुरी मानक स्वरबद्ध लहरियों (पिचों) पर उपलब्ध हैं। कर्नाटक संगीत में इन स्वरबद्ध लहरियों को नंबर के द्वारा जाना जाता है जैसे कि (सी को स्वर मानते हुये) 1 (सी के लिये), 1-1/2 (सी#), 2 (डी), 2-1/2 (डी#), 3 (ई), 4 (एफ), 4-1/2 (एफ#), 5 (जी), 5-1/2 (जी#), 6 (ए), 6-1/2 (ए#) एवं 7(बी). हालांकि किसी रचना का स्वर अपने आप में नियत नहीं है अतः कंसर्ट के लिये किसी भी बांसुरी का प्रयोग किया जा सकता है (जब तक कि संगत वाद्ययंत्र, यदि हो, भलीभांति स्वर बद्ध न हो जाये) एवं यह मुख्यतः कलाकार की व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। फ़रवरी 2010
भारतीय बांसुरी के दो मुख्य प्रकारों का वर्तमान में प्रयोग हो रहा है। प्रथम, बांसुरी है, जिसमें अंगुलियों हेतु छह छिद्र एवं एक दरारनुमा छिद्र होता है एवं जिसका प्रयोग मुख्यतः उत्तर भारत में हिंदुस्तानी संगीत में किया जाता है। दूसरी, वेणु या पुलनगुझाल है, जिसमें आठ अंगुली छिद्र होते हैं एवं जिसका प्रयोग मुख्य रूप से दक्षिण भारत में कर्नाटक संगीत में किया जाता है। वर्तमान में कर्नाटक संगीत बांसुरी वादकों द्वारा सामान्यतः आरपार अंगुली तकनीक से चलने वाले आठ छिद्रों वाले बांसुरी का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक का प्रारंभ 20वीं शताब्दी में टी. आर. महालिंगम ने किया था। तब इसका विकास बी एन सुरेश एवं डॉ॰ एन. रमानी ने कियाJune 2009. इसके पहले, दक्षिण भारतीय बांसुरी में केवल सात अंगुली छिद्र होते थे जिसके अंगुली मानदंडों का विकास 20वीं शताब्दी के आरंभ में पल्लादम स्कूल के शराबा शास्त्री द्वारा किया गया था।The Dictionary of Hindustani Classical Music Caudhurī Vimalakānta Rôya Roychaudhuri Bimalakanta 2000 Motilal Banarsidass Publication Kolkata 8120817087 http://books.google.com/books?id=gQWLa--IHjIC 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20180706164609/https://books.google.com/books?id=gQWLa--IHjIC 6 जुलाई 2018 live
बांसुरी की ध्वनि की गुणवत्ता कुछ हद तक उसे बनाने में प्रयुक्त हुये विशेष बांस पर निर्भर करती है एवं यह सामान्यतः स्वीकृत है कि सर्वश्रेष्ठ बांस दक्षिण भारत के नागरकोइल क्षेत्र में पैदा होते हैं।The Rough Guide to South India 3 Abram David Guides Rough Edwards Nick Ford Mike Sen Devdan Wooldridge Beth 2004 Rough Guides London 1843531038 670,671 http://books.google.com/books?id=sEhJBfbhTAAC 21 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20140101234840/http://books.google.com/books?id=sEhJBfbhTAAC 1 जनवरी 2014 live
चीनी बांसुरी
चीनी बांसुरी को "डी" (笛) कहा जाता है। चीन में डी की कई किस्में हैं जो भिन्न आकार, ढांचे (अनुनाद झिल्ली सहित/रहित) एवं छिद्र संख्या (6 से 11) तथा आलाप (विभिन्न चाबियों में वादन) की हैं। ज़्यादातर बांस की बनी हुई हैं। चीनी बांसुरी की एक खास विशेषता एक छिद्र पर अनुनाद झिल्ली का चढ़ा होना है जो नली के अंदर वायु कॉलम को कंपित करती है। इस बांसुरी से मुखर ध्वनि प्राप्त होती है।
आधुनिक चीनी ऑर्केस्ट्रा में साधारणतः पाये जाने वाले बांसुरियों में बंगडी (梆笛), क्यूडी (曲笛), जिन्डी (新笛), डाडी (大笛) आदि शामिल हैं। अनुप्रस्थ या आड़े बजाये जाने वाले बांस को "जियाओ" (簫) कहते हैं जोकि चीन में वायु यंत्र की भिन्न श्रेणी है।
जापानी बांसुरी
जापानी बांसुरी को फू कहते हैं जिनमें बड़ी संख्या में जापान के संगीतमय बांसुरी शामिल हैं।
सिरिंग
सिरिंग (जिसे ब्लल भी कहा जाता है) तुलनात्मक रूप से छोटा एवं अंतिम सिरे से बजाये जाने वाली बांसुरी है जिसमें नाक द्वारा उत्पन्न स्वर की गुणवत्ता होती हैपहलेवनियन 2001 एवं पिकोलो का स्वर होता है जनवरी 2008 जो पूर्व आर्मेनिया के कॉकासस क्षेत्र में पाया जाता है। यह लकड़ी या बेंत का बना होता है जिसमें सामान्यतः सात अंगुली छिद्र एवं एक अंगूठा छिद्र होता है जो द्वि स्वर उत्पन्न करता है। सिरिंग का प्रयोग गड़रियों द्वारा अपने कार्य से संबंधित ध्वनियों एवं संकेतों को उत्पन्न करने तथा संगीतमय प्रेम गीतों, जिन्हें छबन बयाती कहा जाता है, के साथ - साथ क्रमबद्व खंडों के लिये किया जाता है। जनवरी 2008 सिरिंग का प्रयोग डेफ और ढोल के साथ नृत्य हेतु संगीत उपलब्ध कराने के लिये भी किया जाता है। जनवरी 2008 एक आर्मेनियाई संगीतज्ञ यह मानता है कि सिरिंग में राष्ट्रीय आर्मेनियाई यंत्रों के सभी गुण मौजूद हैं।कोमीटास 1994
इन्हें भी देखें
डिपल
आयरिश बांसुरी
प्लेनडेग
छोटा पियानो
पाइप और ताबोर
रिकार्डर
टिन की सीटी
वाशिंट
कावल
सन्दर्भ
2
ग्रंथ सूची
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एक्सटर्नल लिंक्स
Flutes
Flute
Essay on the Jiahu flutes हेइल्ब्रन टाइमलाइन ऑफ़ आर्ट हिस्ट्री से द मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट
द मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट पर दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन
Walking Stick Flute and Oboe, Georg Henrich Scherer, Butzbach, ca. 1750–57
Glass flute, Claude Laurent, Paris, 1813
Porcelain flute, Saxony, 1760–1790
Pair of ivory flutes by Johann Wilhelm Oberlender, mid 18th century, Nuremberg
Flute by Garion, Paris, ca. 1720–1740
nature.com New flutes document the earliest musical tradition in southwestern Germany
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right|thumb|320px|दुनिया भर से बांसुरियों का एक संकलन