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अशोक धाम
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अशोक महा शिवरात्रि लखीसराय बिहार Ashokdham Temple.jpg
अशोक धाम मंदिर बिहार में लखीसराय जिले में स्थित है। इसे इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
7 अप्रैल 1977 को, अशोक नामक एक युवक ने जमीन के नीचे विशालकाय शिवलिंगम की खोज की। वह युवक गांव में खेला जाने वाला परंपरागत गिल्ली-डंडा खेल रहा था। इसी क्रम में अचानक से शिवलिंग का ऊपरी भाग दिखा। उस युवक के नाम पर ही इस मंदिर का नाम अशोक धाम रखा गया। 11 फरवरी 1993 को, जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया।
अशोक धाम में शिवलिंग का पाल वंश या इंद्रधनेश्वर शिवलिंग से कोई संबंध नहीं है यह शिवलिंग महाराजा कर्ण जो अंग देश के थे उन्हीं के द्वारा स्थापित किया होगा क्योंकि जहां पर यह शिवलिंग निकला है यह राजा कर्ण के समकालीन है और यह 1934 भूकंप में किसी भयंकर बाढ़ में मंदिर दब गया उस समय आबादी बहुत कम थी लोगों ने ध्यान नहीं दिया मैं आपको बताना चाहूंगा इस मंदिर को किसी मुगल ने नहीं तोड़ा था, यह समय चक्र के कारण जमीन में बाढ़ या भूकंप के कारण जमीन के नीचे दब गया जब मैं 9 साल का था तब यह शिवलिंग बाहर प्रकट हुआ था और मैं इसे पहली बार देखने के लिए गया था। शिवलिंग कहीं से भी टूटा फूटा नहीं था। और यह वीरान जंगल में था जो भैंस चराने और गीली डंडा खेलने के क्रम में बाहर निकाल यह स्थान मनकट्ठा कहलाता है।आपको सच बताऊं तो यह अंग देश यानी मुंगेर के काफी करीब है और 1934 के बिहार में जो भूकंप आया था इसमें पूरा मुंगेर और आसपास का क्षेत्र तबाह हो गया था। इस त्रासदी के कारण यहा मंदिर भी रहा होगा तो यह पाल वंश कालीन नहीं बल्कि यह द्वापर युग का मंदिर है पुरातत्व विभाग को चाहिए कि पूरा इतिहास की जानकारी ले अभी-अभी 4 जनवरी 2025 को पटना के गुलजारबाग का स्टेशन के नजदीक त्रिपोलिया नामक जगह पर भगवान शिव का मंदिर प्रकट हुआ है जो बिल्कुल ग्रेनाइट का बना हुआ है और यह काफी प्राचीन है जो पूरे कचरा और मलबे में दबा हुआ था तो यह मंदिर भी करीब हजार साल पुराना होगा जरा सोचिए या मुगलों या मुसलमान द्वारा तोड़ा गया होता तो सबूत मंदिर नहीं निकलता या मंदिर भी 1974 के बाढ़ में दब गया या फिर 1934 के भूकंप में सरपरास्त हो गया यहां का खजुरिया ईट पटना सिटी में दरभंगा महाराज का पटन देवी मंदिर में देखने को मिलता है तो इस प्रकार के ईट पुराने जमाने में देखने को मिलता है इतिहासकारों को चाहिए कि इसका पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण करावे और सही जानकारी दें महाराज कर्ण का अंतिम संस्कार भगवान श्री कृष्ण ने अपने हथेली पर रखकर किया था जिसके कारण अभी हाथीदह जंक्शन स्टेशन है और हाथीदह नमक स्थान है तो यह मंदिर भी करण के समकालीन है अशोक धाम का मंदिर द्वापर कालीन है धन्यवाद श्री राम रतन चौधरी प्रखंड मोकामा जिला पटना बिहार भारत
skyline thumb|Ahokdham
श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोकधाम
इतिहास
कहा जाता है कि यह स्थान 8वीं शताब्दी से पूजा का केंद्र रहा है। पाल साम्राज्य के छठे सम्राट नारायण पाल ने आठवीं शताब्दी में शिवलिंग की नियमित पूजा की शुरुआत की थी। 12वीं शताब्दी में राजा इंद्रद्युम्न द्वारा इस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया गया था। कहा जाता है कि मंदिर को तोड़ दिया गया था और कई सालों तक जमीन के ऊपर कोई अवशेष नहीं था। 7 अप्रैल 1977 को, अशोक और गजानन्द नाम के दो लड़कों को एक पारंपरिक गिल्ली-डंडा खेल खेलते हुए जमीन के नीचे विशालकाय शिवलिंगम की खोज की गई थी। 11 फरवरी 1993 को, जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्गठन का उद्घाटन किया। वर्तमान मंदिर परिसर भवन 15 नवंबर 2002 को श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के तहत शुरू हुआ
सन्दर्भ
बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
https://barahiya.com/?page_id=85 https://web.archive.org/web/20220202101244/https://barahiya.com/?page_id=85 2 फ़रवरी 2022
https://en.wikipedia.org/wiki/Ashokdham_Temple