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भीलवाड़ा
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भीलवाड़ा नगर राजस्थान की वस्त्रनगरी India Rajasthan#India right राजस्थान, भारत में अवस्थिति 25.35 N 74.63 E inline,title देश भारत राज्य ज़िला राजस्थान भीलवाड़ा जिला राजा भलराज भील Metric 421 370,009 2011 auto भाषाएँ आधिकारिक IST +5:30 पिन 311001 RJ-06 लिंगानुपात 1000/915http://www.census2011.co.in/census/city/87-bhilwara.html Bhilwara city population Census, 2011 2 जनवरी 2017 https://web.archive.org/web/20161221230308/http://www.census2011.co.in/census/city/87-bhilwara.html 21 दिसंबर 2016 dead ♂/♀ www.bhilwara.rajasthan.gov.in/ RJ-IN हिन्दी, मेवाड़ी
भीलवाड़ा भारत के राजस्थान राज्य में स्थित एक शहर है। यह शहर भीलवाड़ा ज़िले का मुख्यालय है। यह राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में स्थित है तथा उदयपुर से १५२ कि.मी. दूर स्थित है। राजस्थान में यह अपने वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है, इस कारण इसे राज्य की वस्त्रनगरी भी कहते हैं। पूरा ज़िला पारम्परिक "फड़ चित्रकला" के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
इतिहास
भीलवाड़ा का इतिहास 11वीं शताब्दी से संबंधित है और उस समय भील राजा भलराज भील ने जटाऊ शिव मंदिर का निर्माण करवाया, राजा भलराज भीलवाड़ा के प्रथम ज्ञात भील राजा हैhttps://www.patrika.com/bhilwara-news/balraj-bhils-statue-will-be-installed-in-bhilwara-18906031 भीलवाड़ा में लगेगी बलराज भील की प्रतिमा विश्व आदिवासी दिवस पर भीलवाड़ा में निकाली रैली 2024-08-10 Patrika News hi 2024-08-11भीलवाड़ा में आने और तलाशने के लिए आकर्षण और जगहें http://www.tourism.rajasthan.gov.in/hi/bhilwara.html 1 मई 2022https://rajasthan.ndtv.in/know-your-state/rajasthan-district-bhilwara-profile-4188452 ऐतिहासिक गाथाओं का शहर भीलवाड़ा बन गया टेक्सटाइल सिटी rajasthan.ndtv.in hi 2024-08-11 11 अगस्त 2024 https://web.archive.org/web/20240811031218/https://rajasthan.ndtv.in/know-your-state/rajasthan-district-bhilwara-profile-4188452 dead हालांकि, इस जगह की स्थापना की असल तारीख और समय का अब तक पता नहीं चल पाया है। पुष्टि के अनुसार, वर्तमान भीलवाड़ा शहर में एक टकसाल था जहां 'भिलाडी' के नाम से जाने जाने वाले सिक्कों का खनन किया जाता था और इसी संप्रदाय से जिले का नाम लिया गया था। और दूसरी कहानी इस प्रकार है कि भील नामक एक जनजाति ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ युद्ध में महाराणा प्रताप की मदद की थी, राजा अकबर भीलवाड़ा क्षेत्र में रहते थे, इस क्षेत्र को भील + बड़ा (भील का क्षेत्र) भीलवाड़ा के नाम से जाना जाने लगा। वर्षों से यह राजस्थान के प्रमुख शहरों में से एक के रूप में उभरा है। आजकल भीलवाड़ा को देश में टेक्सटाइल सिटी के रूप में जाना जाता है।भीलवाड़ा के बारे में।।।। https://bhilwara.rajasthan.gov.in/home/district-info/28 1 मई 2022 1948 में राजस्थान का भाग बनने से पूर्व भीलवाड़ा भूतपूर्व उदयपुर रियासत का हिस्सा था।
पर्यटन
थला की माता जी देवली भीलवाड़ा शहर से 15 किलोमीटर दूर बनास नदी के किनारे बहुत पुराना और विशाल बढ़ा देवी का मंदिर है यह बहुत विख्यात है यहां पर बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं यहां पर नवरात्रा में रामायण वह बड़े-बड़े कलाकारों का ताता लगा रहता है वह अष्टमी के दिन बड़े मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें राष्ट्रीय स्तर केेे कलाकार आते है वह अष्टमी के दिन देवली मैं भव्य जुलूस निकलता है बाद में माता जी के यहां पर आते हैं यहां पर आने के लिए भीलवाड़ा से पुर देवली से 2 किलोमीटर है। https://www.patrika.com/bhilwara-news/visit-our-clothing-city-see-the-tourist-and-historical-places-here-5149294/ पधारो हमारी वस्त्रनगरी, देखो यहां के पर्यटन एवं एतिहासिक स्थल Patrika https://web.archive.org/web/20191209012238/https://www.patrika.com/bhilwara-news/visit-our-clothing-city-see-the-tourist-and-historical-places-here-5149294/ 9 दिसंबर 2019 live
चावण्डिया तालाब
भीलवाड़ा से 15 किलोमीटर कोटा रोड़ कि तरफ चावंडिया तालाब स्थित है जहां तालाब के मध्य माता चामुंडा का मंदिर स्थित है। यहां हर वर्ष अक्टूबर से मार्च के मध्य विदेशी प्रवासी पक्षी आते है और इसी कारण इसे पक्षी ग्राम के नाम से जाना जाता है।यह पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए बहुत ही सुन्दर जगह है। हर वर्ष ज़िला प्रशासन और कुछ संस्थाओं के द्वारा हर वर्ष पक्षी महोत्सव का आयोजन किया जाता है जहां देश विदेश से पक्षी विशेषज्ञ पक्षी अवलोकन के लिए आते है।
दरगाह हजरत गुल अली बाबा
शहर के सांगानेरी गेट पर स्थित यह दरगाह आस्ताना हज़रत गुल अली बाबा रहमतुल्लाह अलेही के नाम से मशहूर है यहाँ सभी धर्मो के लोग आस्था रखते है दरगाह पर प्रति वर्ष 1 से 3 नवम्बर तक उर्स का आयोजन होता है जो बड़ी धूमधाम से मनाया जामुहम्मद मुजाहिद दरगाह हज़रत गुल अली बाबा दरगाह हजरत गुल अली बाबा https://www.bhaskar.com/RAJ-BHIL-MAT-latest-bhilwara-news-044005-783740-NOR.html/ 15 नवम्बर 2016 हिंदी ता हैl दरगाह के पास ही एक विशाल मस्जिद भी स्थित है जो रज़ा मस्जिद के नाम से जानी जाती है | आस्ताना गुल अली में ही एक दारुल उलूम भी संचालित है जिसका नाम सुल्तानुल हिन्द ओ रज़ा दारुल उलूम है इस दारुल उलूम में देश के कई राज्यों से आये बच्चे इल्म हासिल करते है
गाँधी सागर तालाब
यह तालाब शहर के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित है किसी ज़माने में यह लोगो के लिए प्रमुख पेयजल स्रोत हुआ करता था इस तालाब के मध्य में एक विशाल टापू स्थित है यह तालाब लोगो के लिए महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है इसके उत्तरी छोर पर एक तरफ तेजाजी का मंदिर, दूसरी तरफ बालाजी का मंदिर तथा मध्य में हज़रत मंसूर अली बाबा और हज़रत जलाल शाह बाबा की दरगाह स्थित हे इस पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए इसके दक्षिणी किनारे पर एक मनोरम पार्क का निर्माण कराया गया है जिसका नाम गांधी सागर पार्क रखा गया है बरसात के मोसम में इस तालाब से गिरते पानी का मनोरम दृश्य देखते ही बनता है
हरणी महोदव
भीलवाड़ा से 6 किलोमीटर दूर मंगरोप रोड़ पर शिवालय है। जो कि हरणी महोदव के नाम से प्रसिद्ध है। जहां पर प्रत्येक शिवरात्रि पर 3 दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है। मेले का आयोजना जिला प्रशासन द्वारा नगर परिषद के सहयोग से किया जाता है। जिसमें 3 दिन तक प्रत्येक रात्रि में अलग-अलग कार्यक्रम यथा धार्मिक भजन संध्या (रात्रि जागरण), कवि सम्मेलन व सांस्क़तिक संध्या का आयोजन किया जाता है।
यह मन्दिर पहाड़ी की तलहटी पर स्थित है। प्राचीन समय में यहां घना आरण्य होने से आरण्य वन कहा जाता था, जिसका अपभ्रंश हो कर हरणी नाम से प्रचलित हो गया।
बदनोर
भीलवाडा शहर से 72 किलोमीटर दूर स्थित इस कस्बे का इतिहास में एक अलग ही महत्व हे जब मेड़ता के राजा जयमल ने राणा उदेसिंह से सहायता के लिए कहा तो राणा ने जयमल को बदनोर जागीर के रूप में दिया बदनोर में कई देखने योग्य स्थल हे उनमे से निम्न हे - छाचल देव। अक्षय सागर। जयमल सागर। बैराट मंदिर। धम धम शाह बाबा की दरगाह। आंजन धाम। केशर बाग़। जल महल। आदि
बनेड़ा
यह भीलवाडा जिले का सबसे पुराना शहर हे बनेड़ा में दुर्ग हे, जो महाराजा सरदार सिंह ने बनवाया था। ये ऐक तहसील व् उपखंड कार्यालय है यह ऐक ऐतिहासिक सत्र हे सबसे पुराना जेन मंदिर हे व् बहुत बड़ा दुर्ग के परकोटा बना हुआ है।
मेनाल
माण्डलगढ से 20 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ की सीमा पर स्थित पुरातात्विक एवं प्राकृतिक सौन्दर्य स्थल मेनाल में 12 वीं शताब्दी के चौहानकला के लाल पत्थरों से निर्मित महानालेश्वर मंदिर, हजारेश्वर मंदिर देखने योग्य हैं। सैकडों फीट ऊंचाई से गिरता मेनाली नदी का जल प्रपात भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केन्द्र हैं।
कोटड़ी :
जहाजपुर
भीलवाडा का प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल, जिसका इतिहास बड़ा रंगबिरंगा रहा हैं। कर्नल जेम्स टॉड 1820 में उदयपुर जाते समय यहाँ आये थे। यहाँ का बड़ा देवरा (पुराने मंदिरों का समूह), पुराना किला और गैबीपीर के नाम से प्रसिद्ध मस्जिद दर्शनीय हैं।यहा पर जैन धर्म का मंदिर भी है जो स्वस्तिधाम के नाम से जाना जाता हे इस मंदिर श्री मुनि सुवर्तनाथ की प्राकट्य प्रतिमा है जो बहुत अदभुद हे यह प्रतिमा चमत्कारी है यह मंदिर शाहपुरा रोड पर स्थित है|जहाजपुर से 12 किलोमीटर दूर श्री घटारानी माता जी का मंदिर है जो अतिसुन्दर व् दर्शनीय है तथा इस मंदिर से 2 किलोमीटर दूर पंचानपुर चारभुजा का प्राकट्य स्थान मंदिर है|जहाजपुर क्षेत्र में एक नागदी बांध है जो अतिसूंदर व् आकर्षक है यहाँ एक नदी भी हे जिसे नागदी नदी के नाम से जाना जाता हैं इसे जहाजपुर की गंगा भी कहते है| जहाजपुर में देखने के लिए अनेको मंदिर व् धर्मस्तल है| जहाजपुर की भाषा व् जीवन शैली अदभुद है|जहाजपुर क्षेत्र में मीणा जाति सर्वाधिक निवास करती हैं|जहाजपुर में एक पहाड़ी पर मांगट देव का मंदिर है जो मोटिस (मीणाओ) का प्रमुख धार्मिक स्थान है|जहाजपुर बसस्टैंड के पास देवली रोड पर एसबीआई बैंक के सामने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी का एक सर्किल भी है जिस पर बाबा साहेब की विशाल मूर्ति लगी है|
बिजोलिया
माण्डलगढ से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित बिजौलिया में प्रसिद्ध मंदाकिनी मंदिर एवं बावडियाँ स्थित हैं। ये मंदिर 12 वीं शताब्दी के बने हुए हैं। लाल पत्थरों से बने ये मंदिर पुरातात्विक व ऐतिहासिक महत्व के स्थल इतिहास प्रसिद्ध किसान आन्दोलन के लिए भी बिजौलियाँ प्रसिद्ध रहा हैं। यहाँ पर बना भूमिज शैली का विष्णु भगवान का मंदीर 1000 वर्ष सै भी पुराना है , जो भीलवाडा का एक मात्र मंदिर है। यहा बिजोलिया अभिलेख हैं जिससे चौहानो की जानकारी मिलती हैं व इसमे चौहनो को ब्राह्मण बताया गया हैं
शाहपुरा
भीलवाडा तहसील मुख्यालय से 50 किलोमीटर पूर्व में शाहपुरा राज्य की राजधानी था। यहाँ रेल्वे स्टेशन नहीं ह परन्तु यह सडक मार्ग द्वारा जिला मुख्यालय से जुडा हुआ हैं। यह स्थान रामस्नेही सम्प्रदाय के श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। जिसे रामद्वारा के नाम से जानते है,मुख्य मंदिर रामद्वारा के नाम से जाना जाता हैं। यहाँ पूरे भारत से और बर्मा तक तक से तीर्थ यात्री आते हैं। यहाँ लोक देवताओं की फड पेंटिंग्स भी बनाई जाती हैं। यहाँ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ की हवेली एक स्मारक के रूप में विद्यमान हैं। जो वर्तमान में एक संग्रहालय के रूप में है जिसे देखने लोग आते हैं,शाहपुरा में प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्रतापसिंह बारहट के नाम से महाविधालय है जिसके प्रांगण मे प्रतापसिंह बारहट की मूर्ति लगी है,यहाँ होली के दूसरे दिन प्रसिद्ध फूलडोल मेला लगता हैं, जो लोगों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र होता हैं। यहाँ शाहपुरा से 30 किलो मीटर दूर धनोप माता का मंदिर भी हे और खारी नदी के तट पर शिव मंदिर छतरी भी लोगों को काफी पसंद है।
माण्डल
भीलवाडा से 14 किलोमीटर दूर स्थित माण्डल कस्बे में प्राचीन स्तम्भ मिंदारा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ से कुछ ही दूर मेजा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ कछवाह की बतीस खम्भों की विशाल छतरी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का स्थल हैं। छह मिलोकमीटर दूर भीलवाडा का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मेजा बांध हैं। होली के तेरह दिन पश्चात रंग तेरस पर आयोजित नाहर नृत्य लोगों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र होता हैं। कहते हैं कि शाहजहाँ के शासनकाल से ही यहाँ यह नृत्य होता चला आ रहा हैं। यहां के तालाब के पाल पर प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। जिसे भूतेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
माण्डल से 27 किलोमीटर दूर बागौर नामक कस्बा है, जो कि अपनी मध्यपाषाण कालीन सभ्यता के प्रमुख स्थल के रूप में जाना जाता हैं। और यहाँ कलगीधर साहिब गुरुद्वारा भी स्थित हैं।
मांडलगढ़
भीलवाड़ा से 55 किलोमीटर दूर त्रिभुजाकार पठार पर स्थित 'मांडलगढ़ दुर्ग' राजस्थान का प्राचीन किला है।https://www.google.co.in/books/edition/Svatantrat%C4%81_ke_puj%C4%81r%C4%AB_Mah%C4%81r%C4%81%E1%B9%87%C4%81_P/gFRuAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&printsec=frontcover Svatantratā ke pujārī Mahārāṇā Pratāpasiṃha Maṇḍāvā Devīsiṅgha 1993 Raṇabān̐kurā Prakāśana hihttps://www.google.co.in/books/edition/R%C4%81jasth%C4%81na/3BBuAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&printsec=frontcover Rājasthāna: jilevāra sāṃskr̥tika evaṃ aitihāsika adhyayana Guptā Mohanalāla 2004 Rājasthānī Granthāgāra hihttps://www.google.co.in/books/edition/R%C4%81jasth%C4%81na_ke_jala_sa%E1%B9%83s%C4%81dhana/SP7sAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97&printsec=frontcover Rājasthāna ke jala-saṃsādhana: Mevāṛa ke sandarbha meṃ : 16 vīṃ evaṃ 17 vīṃ Śatābdī Rāṇāvata Īśvarasiṃha 2004 Cirāga Prakāśana hi जनश्रुति के अनुसार, इसका निर्माण चांदना गुर्जर ने मांडिया भील के नाम पर करवाया था। मंडलाकार आकृति वाले इस ऐतिहासिक दुर्ग पर विभिन्न कालखंडों में चौहानों, मुगलों और राजपूतों का आधिपत्य रहा। किले में सागर-सागरी जलाशय एवं प्राचीन मंदिर स्थित हैं।https://ignca.gov.in/coilnet/rj068.htm Mewar Bhaugolik Prishthbhumi ignca.gov.in 2026-08-14
अन्य स्थल
भीलवाडा-उदयपुर मार्ग पर 45 मिलोमीटर दूर गगापुर में गंगाबाई की प्रसिद्ध छतरी पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस छतरी का निर्माण सिंधिया महारानी गंगाबाई की याद में महादजी सिंधिया ने करवाया था।
भीलवाड से 55 किलोमीटर दूर खारी नदी के बायें किनारे पर स्थित भीलवाडा का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल। राजस्थान के लोक देवता देवनारायण जी का यह तीर्थ स्थल ह और इनका यहाँ एक भव्य मंदिर स्थित हैं। इसे इसके निर्माता भोजराव के नाम पर सवाईभोज कहते हैं।
इन्हें भी देखें
भीलवाड़ा ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:राजस्थान के शहर
श्रेणी:भीलवाड़ा ज़िला
श्रेणी:भीलवाड़ा ज़िले के नगर