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कुमारा सम्प्रदाय
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कुमारा सम्प्रदाय वैष्णव धर्म के चार प्रमुख सम्प्रदायों में से एक है। इस सम्प्रदाय की उत्पत्ति सनकादि कुमार (सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार) से मानी जाती है, जो ब्रह्मा के मानस पुत्र कहलाते हैं।
इतिहास
कुमारा संप्रदाय का आरंभ सनकादि से हुआ। उन्होंने नारद को दीक्षा दी और आगे यह परंपरा श्रीनिवास तथा अन्य आचार्यों तक पहुँची। 13वीं शताब्दी में निम्बार्काचार्य ने इस सम्प्रदाय को संगठित रूप दिया और इसे दार्शनिक आधार प्रदान किया।
दर्शन
इस सम्प्रदाय का दर्शन *द्वैताद्वैत* (Dualistic Non-dualism) कहलाता है। इसके अनुसार जीव और ईश्वर का संबंध आत्मा और परमात्मा का है। जीव और ब्रह्म भिन्न भी हैं और एक भी। भक्ति को ही मोक्ष का प्रमुख साधन माना गया है।
उपासना
कुमार संप्रदाय में विशेष रूप से राधा और कृष्ण की उपासना की जाती है। भक्ति, सदाचार और वैराग्य पर इसका विशेष बल है।
प्रमुख आचार्य
निम्बार्काचार्य
हरिव्यास देवाचार्य
श्रीनिवासाचार्य
देखें भी
वैष्णव सम्प्रदाय
निम्बार्क संप्रदाय
सनकादि कुमार
संदर्भ
भक्तिसिद्धांत सरस्वती, *वैष्णव सम्प्रदायों का संक्षिप्त परिचय*
श्रीनिवास दास, *निम्बार्काचार्य और उनका दर्शन*
श्रेणी:वैष्णव सम्प्रदाय
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