Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

कृपालु महाराज

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

कृपालु महाराज Kripalu Ji Maharaj Giving Lecture (cropped).jpg 200px Kripalu Maharaj 5 अक्टूबर 1922 मनगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत राम कृपालु त्रिपाठी 2013 11 15 1922 10 5 yes गुड़गाँव, भारत भारतीय जगद्गुरु जगद्गुरु कृपालु परिषद् कृपालु महाराज (5 अक्टूबर 1922 – 15 नवम्बर 2013) एक भारतीय हिन्दू आध्यात्मिक गुरु, कवि और वेदों के विद्वान थे। उनका मूल नाम राम कृपालु त्रिपाठी था।Singh, K. 28 जनवरी 2007. Varanasi seer’s memory is phenomena. Tribune India.Ex-Nepalese King Gyanendra meets Indian Spiritual guru https://web.archive.org/web/20131203050553/http://www.thaindian.com/newsportal/business/ex-nepalese-king-gyanendra-meets-indian-spiritual-guru_100102843.html 3 December 2013 . 02/10/2008. Asian News International. उन्होंने 'जगद्गुरु कृपालु परिषद्' (JKP) नामक एक वैश्विक हिन्दू संगठन की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से भारत और विदेशों में आध्यात्मिक व परोपकारी कार्य किए जाते हैं। उनके द्वारा स्थापित आश्रमों में से भारत के बाहर सबसे प्रमुख 'राधा माधव धाम' (संयुक्त राज्य अमेरिका) है, जो उत्तरी अमेरिका के सबसे विशाल हिन्दू मन्दिरों में से एक है।Radha Madhav Dham https://web.archive.org/web/20160304023635/http://pluralism.org/files/affiliate/jain/RadhaMadhavDham.pdf 4 March 2016 The Harvard Pluralism Project. 14 जनवरी 1957 को काशी विद्वत् परिषद् ने उनके व्यापक वैदिक ज्ञान और स्मरणशक्ति को देखते हुए उन्हें जगद्गुरु की उपाधि से सम्मानित किया था।काशी में 1957 में जगद्गुरु https://web.archive.org/web/20180211071758/https://www.jagran.com/uttar-pradesh/mathura-15371222.html 11 February 2018 की उपाधि मिली थी। 15 नवम्बर 2013 को 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।http://www.jagran.com/news/national-kripalu-maharaj-is-no-more-10863471.html/ कृपालु महाराज का देहावसान दैनिक जागरण, जागरण संवाददाता, गुड़गाँव 16 नवम्बर 2013 प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा राम कृपालु त्रिपाठी का जन्म इलाहाबाद के निकट मनगढ़ ग्राम (वर्तमान प्रतापगढ़ जिले) में हुआ था। गाँव के विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वे आगे के अध्ययन के लिए महू, मध्य प्रदेश गए। वहाँ उन्होंने अल्पकाल में ही साहित्याचार्य, आयुर्वेदाचार्य एवं व्याकरणाचार्य की उपाधियाँ प्राप्त कीं। पारिवारिक जीवन की शुरुआत उन्होंने अपनी पत्नी पद्मा के साथ मनगढ़ में की, किंतु शीघ्र ही उनका रुझान राधा-कृष्ण की भक्ति और आध्यात्मिक प्रवचनों की ओर हो गया। उनकी तीन पुत्रियाँ (विशाखा, श्यामा और कृष्णा) हैं, जिन्होंने अपने पिता के आध्यात्मिक कार्यों में सहयोग करने के लिए आजीवन अविवाहित रहकर 'जगद्गुरु कृपालु परिषद्' का संचालन सँभाला।http://www.jagran.com/news/national-jagat-guru-kripalu-ji-maharaj-help-friends-10863517.html दोस्तों के दोस्त थे जगत कृपालु जी महाराज दैनिक जागरण 16 नवम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20170418162502/http://www.jagran.com/news/national-jagat-guru-kripalu-ji-maharaj-help-friends-10863517.html 18 April 2017 live सामाजिक व आध्यात्मिक कार्य कृपालु महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए: जगद्गुरु कृपालु परिषद्: इस संस्था के माध्यम से विश्वभर में आध्यात्मिक व शैक्षणिक कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। निःशुल्क चिकित्सालय: मनगढ़ और वृंदावन सहित विभिन्न स्थानों पर धर्मार्थ अस्पतालों का निर्माण करवाया गया, जहाँ निर्धन रोगियों का पूर्णतः निःशुल्क उपचार किया जाता है। इसका संपूर्ण व्यय परिषद् द्वारा वहन किया जाता है। प्रमुख मंदिर व आश्रम कृपालु महाराज की प्रेरणा से भारतीय वास्तुकला को दर्शाने वाले कई भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ: भक्ति मंदिर, मनगढ़ मनगढ़, कुंडा में स्थित 'भक्ति मंदिर' का निर्माण 2005 में पूर्ण हुआ। यह मंदिर गुलाबी बलुआ पत्थर, सफेद संगमरमर और काले ग्रेनाइट से निर्मित है तथा इसकी ऊंचाई 108 फीट है। प्रेम मन्दिर, वृन्दावन thumb|right|200px|प्रेम मन्दिर, वृंदावन मथुरा के समीप वृंदावन में स्थित यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। इसका निर्माण इटैलियन संगमरमर से किया गया है और इसे तैयार करने में लगभग एक हज़ार शिल्पकारों को 11 वर्ष का समय लगा।http://www.bhaskar.com/article/UP-1000-workers-in-11-years-built-the-temple-of-love-2882268.html 1000 कारीगरों ने 11 साल में बनाया 'प्रेम मंदिर'! भास्कर डॉट कॉम 16 नवम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20120725085215/http://www.bhaskar.com/article/UP-1000-workers-in-11-years-built-the-temple-of-love-2882268.html 25 July 2012 live प्राचीन भारतीय वास्तुकला पर आधारित इस मन्दिर में कुल 94 स्तम्भ हैं, जिन पर राधा-कृष्ण की लीलाओं और गोपियों की आकृतियों को उकेरा गया है। कीर्ति मंदिर, बरसाना 2007 में प्रारम्भ हुआ कीर्ति मन्दिर का निर्माण कार्य 12 वर्षों में पूर्ण हुआ और 10 फरवरी 2019 (बसंत पंचमी) को इसका उद्घाटन किया गया। यह मंदिर राधा की माता 'कीर्ति' को समर्पित है, जो विश्व में अपनी तरह का पहला मंदिर है। यहाँ राधा अपने बाल रूप में माता कीर्ति की गोद में विराजमान हैं। नागर और द्रविड़ शैलियों के सम्मिश्रण से बना यह मंदिर लगभग 2 एकड़ में फैला है। 111 फुट ऊंचे इस मंदिर में 24 नक्काशीदार स्तंभ, एक विशाल गुंबदाकार मंडप और 22 कलश स्थापित हैं। सन्दर्भ इन्हें भी देखें प्रेम मन्दिर कीर्ति मन्दिर काशी विद्वत परिषद बाहरी कड़ियाँ जगद्गुरु कृपालु परिषद् की आधिकारिक वेबसाइट श्रेणी:भारतीय संत श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:आध्यात्मिक गुरु श्रेणी:२०१३ में निधन