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धर्म, मत, पंथ और संप्रदाय
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अक्टूबर 2025
हम सभी लोग अक्सर हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन के आगे "धर्म" लिखने या बोलने में प्रयोग करते हैं। लेकिन अगर देखा जाए तो धर्म की परिभाषा को सदियों से चला आ रहा सबसे प्राचीन "सनातन धर्म या हिन्दू धर्म" ही सार्थक करता है। लेकिन इन विषयों पर बिना ध्यान दिए समाज भेड़चाल में लोगों की काही सुनी बातें सुन कर अन्य मत, पंथ, संप्रदायों, रिलीजन और मजहब को धर्म कहने लगा।
चर्चा
मत - एक व्यक्ति की भावनाएं अथवा विचार
पंथ - किसी निश्चित धार्मिक उद्देश्य के के लिए बनाया गया समूह होता है, यह किसी भी मत-पंथ-संप्रदाय की शाखा होती है।
संप्रदाय - भक्ति के मार्ग में शुरू की गई नई परम्पराएं और नियम संप्रदाय के रूप मे स्थापित होती हैं।
रिलीजन - रिलीजन शब्द का अर्थ क्षेत्रीय होता है अर्थात किसी क्षेत्र की जलवायु, भौगोलिक स्थिति और लोगों की मनोदशा के आधार पर बनी हुई परंपरा रिलीजन कहलाती हैं।
मजहब - अरबी शब्द है और इसका अर्थ भी बिल्कुल कुछ रिलीजन जैसा ही है।
धर्म - धर्म को परिभाषित करने का बहुत विशाल दृष्टिकोण होना चाहिए जो प्रकृति से लेकर जीव मात्र के संरक्षण और सर्व स्वीकार्यता के आधार पर स्थापित नियम, व्यवस्थाएं अथवा परम्पराएं धर्म कहलाती हैं। धर्म कभी किसी को क्षति नहीं पहुंचाता और सभी के विकास और कल्याण का मार्ग खोजता है।
धर्म कौन?
धर्म कौन सा है इसका निर्णय करना बहुत ही सरल है। विश्व में स्वयं को "धर्म" कहने वाले बहुत से मत, पंथ और संप्रदाय हैं जैसे इस्लाम, ईसाई, बौद्ध, जैन और सिख। और हो सकता है भविष्य में "अम्बेडकरवाद" भी स्वयं को धर्म घोषित कर खड़ा हो जाये।
अब धर्म का निर्णय करने के लिए हमें स्वयं को धर्म कहने वाले सभी समूहों के 50-50 लोगों को बुला लेना है और उनसे केवल 2 प्रश्न पूछने हैं।
तुम किसकी पूजा करते हो?
तुम्हारी धर्म की पुस्तक या किताब कौन सी है?
तो इसका उत्तर क्या होगा......
मुसलमानों का उत्तर होगा - अल्लाह और कुरान।
ईसाइयों का उत्तर होगा - जीसस (यीशु) और बाइबल।
बौद्धों का उत्तर होगा - त्रिपिटक और बुद्ध।
जैनियों का उत्तर होगा - आगम और तीर्थंकर।
सिखों का उत्तर होगा - गुरुग्रंथ साहिब और गुरुग्रंथ साहिब।
हिंदुओं का उत्तर होगा - बजरंग बली, श्रीराम, श्रीकृष्ण, महादेव, विष्णु, दुर्गा माता, काली माता आदि आदि और गीता, रामायण, वेद, पुराण, चालीसा आदि आदि।
मतलब हिन्दुओं अर्थात सनातनियों के समूह के अलावा सभी समूहों के 50 के 50 लोगों का उत्तर एक ही जैसा होगा..! क्योंकि हिन्दुत्व या सनातन की स्थापना किसी एक व्यक्ति के दिमाग की उपज नहीं है। जैसे इस्लाम केवल मोहम्मद के दिमाग की राजनैतिक उपज है, ईसाई केवल ईसा मसीह के दिमाग की राजनैतिक उपज है, बौद्ध केवल गौतम बुद्ध के धार्मिक सामाजिक प्रयास है, जैन परंपरम्परा में भी तीर्थंकरों के धार्मिक व सामाजिक प्रयास थे। लेकिन हिन्दू धर्म अथवा सनातन धर्म में विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों ने अपनी अपनी परंपराओं और मान्यताओं को प्रस्तुत किया और समाज ने उन्हें स्वीकार कर आत्मसात किया।
हिन्दू धर्म की एक और विशेषता यह है की यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति अल्लाह को न माने तो वह मुसलमान नहीं माना जाता, यदि कोई ईसाई व्यक्ति जीसस को न माने तो वह ईसाई नहीं माना जाएगा, इसी तरह जैन, बौद्ध और सिख में भी होगा और तो और उनका समाज भी उन्हें अपने समाज का नहीं कहेगा लेकिन यदि कोई व्यक्ति भगवान को नहीं मानता और नास्तिक हो जाता है तब भी वह व्यक्ति हिन्दू ही कहा जाएगा। हिन्दू समाज ने तो एक घोर नास्तिक ऋषि चार्वाक के को भी संत माना। जिस प्रकार भारत देश में विविधता में एकता है उसका कारण और कुछ नहीं बल्कि उदार हिन्दुत्व ही है। विश्व में केवल हिन्दुत्व ही विश्व के कल्याण का बिना भेदभाव किए उद्घोष करता है कि - "धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो।" "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणी पश्यन्तु, मा कदश्चित दुख भाग भवेत॥"
इसीलिए विश्व में केवल एक ही धर्म है और वह है "हिन्दू धर्म यानि सनातन धर्म" बाकी सब मत पंथ और संप्रदाय हैं!