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कसुमलगढ़
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'''कसुमलगढ़''', जिसे '''कसुम्बी किला''' भी कहा जाता है, राजस्थान के नागौर जिले के लाडनूं तहसील में स्थित एक ऐतिहासिक ठिकाना और किला है। यह राठौड़ वंश के जोधा शाखा के केसरीसिंगोट उप-शाखा का हिस्सा था, जो जोधपुर रियासत के अधीन था। कसुम्बी गांव का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है, जब यह चौहान वंशीय मोहिल राजपूतों की राजधानी था और 1440 गांवों पर उनका आधिपत्य था। किले का निर्माण 1841 ई. में ठाकुर नारायण सिंह द्वारा किया गया, जो राठौड़ परंपरा का प्रतीक है। कुल क्षेत्र 18,000 बीघा है, जिसमें प्राचीन हथियार, मंदिर और गुप्त मार्ग हैं। कुलदेवी नागणेच्या माता हैं।
इतिहास
कसुम्बी का क्षेत्र प्रारंभ में मोहिल राजपूतों का था, जो बाद में मिंगणा चले गए। 15वीं शताब्दी में धनावंशी संत धनाजी महाराज का यहां प्रवास हुआ, जहां संवत 1532 (1475-76 ई.) में उनकी समाधि स्थापित हुई। यह धार्मिक केंद्र बना। ब्रिटिश काल में लाडनूं जागीर (जिसका कसुम्बी हिस्सा था) जोधपुर रियासत का महत्वपूर्ण भाग था, जिसमें 139 राजस्व गांव थे। 1940-41 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यहां किसान सभाएं हुईं।
प्रमुख शासक:
मोहिल राजपूत (15वीं शताब्दी): क्षेत्रीय शासक।
ठाकुर नारायण सिंह (1841): किले के संस्थापक।
राठौड़ ठाकुर (ब्रिटिश काल): जागीर प्रबंधन।
नामकरण और सांस्कृतिक महत्व
नाम 'कसुम्बी' स्थानीय 'कसूमल घास' से आया, जिससे केसरिया रंग बनता था—राजपूत साफों के लिए उपयोगी। गांव में प्राचीन बावड़ियां, राधाकृष्ण मंदिर और भभूता सिद्ध बाबा मंदिर हैं। जलझूलनी एकादशी और गणगौर पर उत्सव होते हैं। 2011 जनगणना में आबादी 3,858।
वास्तुकला
दो-तीन मंजिला किला, बुर्ज, रंग महल और गुप्त द्वार। रोहिड़ा लकड़ी और चूने की चिनाई।
वर्तमान
टिकाई ठाकुर महेंद्र सिंह, यु. गजराज सिंह ठा. राजेंद्र सिंह, रवींद्र सिंह के अधीन। पर्यटन के लिए खुला।
श्रेणी:जोधपुर के गाँव