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ऑपेरा हाउस (१९६१ फ़िल्म)
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मई 2016
ऑपेरा हाउस पी.एल. संतोषी ए.ए. नादिआदवाला अजीत, बी. सरोजा देवी, के एन सिंह, ललिता पवार चित्रगुप्त धरमवीर भारत हिन्दी
ऑपेरा हाउस सन् १९६१ में बनी एक हिन्दी मर्डर मिस्ट्री (कत्ल का रहस्य) फ़िल्म है।
संक्षेप
सरोज (बी. सरोजा देवी) एक ग़रीब घर की लड़की है जो नागपुर में अपनी विधवा माँ लीला (ललिता पवार) और छोटी बहन नन्ही के साथ रहती है। उसे मुम्बई में एक ड्रामा कम्पनी में गायिका और नर्तकी की नौकरी मिल जाती है और वह वहाँ रहने लग जाती है। वहाँ उसकी मुलाकात अजीत राय (अजीत) नाम के आदमी से होती है और दोनों को आपस में प्रेम हो जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण उसे वापस नागपुर आना पड़ जाता है जहाँ उसे चुन्नीलाल नाम के आदमी द्वारा चलाई जा रही एक ड्रामा कम्पनी में काम मिल जाता है। अजीत भी उसके पीछे-पीछे नागपुर पहुँच जाता है और उसकी माँ और बहन से मिलता है। उनसे सरोज की ड्रामा कम्पनी का पता पूछकर वह सरोज से मिलने जाता है और पाता है कि सरोज ने अपना नाम बदलकर मैरी डिसूज़ा रख लिया है। फ़िल्म में आगे चलकर अजीत को पता चलता है कि सरोज चुन्नीलाल के क़त्ल की चश्मदीद है और कातिल उसे भी मारने की कोशिश कर रहा/रहे है/हैं। और उन्हें भी जो उसके/उनके रास्ते में आयेंगे...
चरित्र
चरित्रकलाकार अजीत रायअजीत सरोज शर्मा/मैरी डिसूज़ाबी. सरोजा देवी लीला शर्माललिता पवारडैनिअलके एन सिंहपीटरमारुती रावलिलीबेला बोसश्रीमती रंजीत रायमुमताज़ बेग़मनन्ही शर्मालीला
दल
संगीत
इस फ़िल्म में चित्रगुप्त ने संगीत दिया है और गीतकार मजरूह सुलतानपुरी हैं।
#गानागायक१देखो मौसम क्या बहार हैमुकेश, लता मंगेशकर२''बलमा माने ना, बैरी चुप न रहेलता मंगेशकर
रोचक तथ्य
परिणाम
बौक्स ऑफिस
समीक्षाएँ
नामांकन और पुरस्कार
बाहरी कड़ियाँ
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श्रेणी:भारतीय फ़िल्में
श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में