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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बुद्धदेव विद्यालंकार

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अप्रैल 2025 बुद्धदेव विद्यालंकार या स्वामी समर्पणानन्द (1895-1969) संस्कृत के विद्वान एवं आर्यसमाजी लेखक थे। वे वेदों के अनन्य प्रचारक तथा शास्त्रार्थ महारथी थे। इन्होने अनेकों विषयों पर लेख लिखे और गीता , वेदों के मन्त्रों का भाष्य भी किया। इनका शतपथ ब्राह्मण का भाष्य विशेष महत्व का है। मेरठ स्थित 'गुरुकुल प्रभात आश्रम' उनके द्वारा ही स्थापित किया गया था। बुद्धदेव विद्यालंकार का जन्म 1 अगस्त, 1895 को कौलागढ़ (देहरादून) के एक सम्भ्रान्त ब्राह्मण परिवार में पंडित रामचन्द्र जी के पुत्र के रूप में हुआ था। उनके पिता स्वामी दयानन्द सरस्वती तथा आर्य समाज के अनन्य भक्त थे। अत: उन्होंने पुत्र को 7 वर्ष की आयु में गुरुकुल कांगड़ी में प्रवेश दिलाकर स्वामी श्रद्धानन्द के चरणों में समर्पित कर दिया था। वे मेधावी छात्र थे। संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी का भी उन्होंने अध्ययन किया। वैदिक साहित्य का गहन अध्ययन करने के बाद सन् 1916 में उन्होंने गुरुकुल से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की और "विद्यालंकार' की उपाधि से अलंकृत हुए। इसके बाद इनका नाम पं. बुद्धदेव विद्यालंकार पड़ा। तत्पश्चात् उन्होंने अपना जीवन वैदिक धर्म तथा आर्यसमाज के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया। वे जहां उच्च कोटि के गद्य लेखक थे, वहीं प्रभावी कवि भी थे। ओजस्वी वक्ता के रूप में युवावस्था में ही पूरे देश में उनकी ख्याति फैल गई थी।https://www.panchjanya.com/arch/2003/4/20/File20.htm स्वामी समर्पणानन्द सरस्वती 5 अगस्त 2020 24 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121024155602/http://panchjanya.com/arch/2003/4/20/File20.htm dead पंडित बुद्धदेव विद्यालंकार, स्वामी आत्मानन्द जी से संन्यास दीक्षा ग्रहण करने के बाद 'स्वामी समर्पणानन्द सरस्वती' के नाम से विख्यात हुए। उन्होंने वैदिक धर्म पर आक्षेप करने वाले अनेक ईसाई व मुस्लिम विद्वानों से शास्त्रार्थ कर उन्हें पराजित किया। जन्मना वर्ण-व्यवस्था तथा श्राद्ध आदि विषयों पर उन्होंने पौराणिक सनातनधर्मी विद्वानों से भी शास्त्रार्थ किए। स्वामी जी ने बागपत क्षेत्र में गंग नहर के किनारे "प्रभात आश्रम' की स्थापना कर संस्कृत के अध्ययन का मार्ग प्रशस्त किया। 14 जनवरी, 1968 को स्वामी समर्पणानन्द का देहान्त हुआ। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ गुरुकुल प्रभात आश्रम, मेरठ का जालघर श्रेणी:संस्कृत विद्वान