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राज्याभिधान
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अंगूठाकार|जेम्स षष्ठ और प्रथम
राज्याभिधान, राज्यारोहण-नामhttps://books.google.com/books?id=KC4xXI-tRkwC&dq=%22regnant+name%22&pg=PR32 Jerusalem Montefiore Simon Sebag Alfred A. Knopf 2011 978-0307266514 xxxii Simon Sebag Montefiore May 2, 2021 https://web.archive.org/web/20231103201747/https://books.google.com/books?id=KC4xXI-tRkwC&dq=%22regnant+name%22&pg=PR32 November 3, 2023 अथवा शासन-नाम वह नाम है जिसका प्रयोग सम्राटों/शासकों तथा पोपों द्वारा अपने शासनकाल की अवधि में एवं ऐतिहासिक रूप से उसके उपरांत किया जाता है। प्राचीन काल से ही, कुछ शासकों ने राज्यारोहण के समय अपने मूल नाम से भिन्न नाम धारण करने का विकल्प चुना है।
राज्याभिधान के पश्चात् प्रायः एक राजकीय क्रमांक (regnal number) होता है, जिसे रोमन अंक के रूप में लिखा जाता है, ताकि उस शासक को उसी राज्य पर शासन करने वाले समान नामधारी अन्य शासकों से पृथक् पहचाना जा सके। कुछ प्रकरणों में, शासक के एक से अधिक राज्याभिधान होते हैं, किंतु राजकीय क्रमांक केवल उन नामों में से किसी एक पर ही आधारित होता है; उदाहरणार्थ, स्वीडन के चार्ल्स दशम गुस्ताव (Charles X Gustav)। यदि कोई शासक एक से अधिक राज्यों पर शासन करता है, तो वह प्रत्येक राज्य में भिन्न क्रमसूचक अंक (ordinals) धारण कर सकता है, क्योंकि विभिन्न राज्यों में समान राज्याभिधान वाले शासकों की संख्या भिन्न-भिन्न रही हो सकती है। उदाहरणार्थ, एक ही व्यक्ति स्कॉटलैंड के राजा जेम्स षष्ठ (King James VI) तथा इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम (King James I) दोनों थे।
सामान्यतः किसी नाम के प्रथम शासक के लिए क्रमसूचक अंक का प्रयोग नहीं किया जाता, किंतु एक बार जब उस नाम का पुनः प्रयोग हो जाता है, तो ऐतिहासिक संदर्भों में इसका प्रयोग किया जाने लगता है। अतः, इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ प्रथम को लगभग चार शताब्दियों के पश्चात् १९५२ में रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के राज्यारोहण तक केवल "इंग्लैंड की एलिज़ाबेथ" ही कहा जाता था; पूर्ववर्ती रानी के उत्तरवर्ती ऐतिहासिक संदर्भों में उन्हें भूतलक्षी रूप से 'एलिज़ाबेथ प्रथम' के नाम से संदर्भित किया जाता है। तथापि, रूस के ज़ार पॉल प्रथम, इटली के राजा अम्बर्टो प्रथम, ऑस्ट्रिया के सम्राट फ़्रांज़ जोसेफ़ प्रथम, स्पेन के राजा हुआन कार्लोस प्रथम, इथियोपिया के सम्राट हैले सेलासी प्रथम तथा फ़्रांस के लुई फ़िलिप प्रथम—इन सभी ने अपने शासनकाल के समय क्रमसूचक अंक I (प्रथम) का प्रयोग किया, भले ही (कम से कम अब तक, रूस के पॉल, ऑस्ट्रिया के फ़्रांज़ जोसेफ़, स्पेन के हुआन कार्लोस, इथियोपिया के हैले सेलासी अथवा फ़्रांस के लुई फ़िलिप के संदर्भ में) उस समान नाम का कोई द्वितीय शासक कभी नहीं हुआ। मौखिक आंग्लभाषा में ऐसे नामों का उच्चारण "एलिज़ाबेथ द फ़र्स्ट", "जॉर्ज द सिक्स्थ" इत्यादि के रूप में किया जाता है।
एशिया के कतिपय देशों में शासक युग-नाम (era names) धारण करते थे अथवा धारण करते हैं। यद्यपि अनेक राजतंत्रों में यथारूप युग-नामों का प्रयोग नहीं होता, तथापि कभी-कभी युगों का नामकरण किसी शासक (प्रायः दीर्घजीवी) के नाम पर अथवा समान नाम वाले शासकों की अनुक्रम-श्रृंखला के नाम पर किया जाता है। यह प्रथागत है; इसके लिए कोई औपचारिक अथवा सर्वसामान्य नियम नहीं है। उदाहरणार्थ, ग्रेट ब्रिटेन में हैनोवर राजवंश के चार जॉर्ज-शासकों (जॉर्ज प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा चतुर्थ) के अनुक्रमिक शासन की संपूर्ण अवधि 'जॉर्जियन युग' (Georgian era) के नाम से विख्यात हुई। इसके विपरीत, यद्यपि एडवर्ड नाम के अनेक शासक हुए, तथापि 'एडवर्डियन युग' (Edwardian era) सदैव २०वीं शताब्दी के आरंभ में एडवर्ड सप्तम के शासनकाल को ही संदर्भित करता है।