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411 समाचार
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कोसला

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कोसला यह भारतीय लेखक भालचंद्र नेमाडे द्वारा १९६३ में प्रकाशित एक मराठी भाषा का उपन्यास है। इसे नेमाडे की सर्वोत्तम रचना के रूप में माना जाता है, और मराठी साहित्य के एक आधुनिक क्लासिक साहित्य के रूप में स्वीकार किया जाता है। उपन्यास की कथा एक युवक, पांडुरंग संगविकर और उसके दोस्तों के महाविद्यालय के वर्षों से आगे की यात्रा को बयान करता है। इस उपन्यास में लेखक ने आत्मकथा के रूप का उपयोग किया है। कोसला को मराठी साहित्य में पहला अस्तित्ववादी उपन्यास माना जाता है। प्रकाशन के बाद से, इसके खुले अंत और विभिन्न विवेचनों के लिए इस उपन्यास को अनेक रूप में देखा गया है। यह उपन्यास १९६० के बाद के मराठी उपन्यासों का एक आधुनिक क्लासिक बन गया है, और इसका आठ दक्षिण एशियाई भाषाओं में और अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। इसके प्रकाशन के साथ नेमाडे तेजी से अपनी पीढ़ी के प्रतिनिधि लेखक माने जाने लगे। कोसला पर आधारित नाटक मी, पांडुरंग संगविकर , का निर्देशन मंदार देशपांडे ने किया हैं। https://www.hindustantimes.com/art-and-culture/pratibimb-marathi-natya-utsav-a-mix-of-commercial-and-experimental-plays/story-U4aGM5aNQhQvt5FxqRJR3L.html Pratibimb Marathi Natya Utsav: A mix of commercial and experimental plays – art and culture Banerjee Kaushani 31 July 2016 Hindustan Times 8 July 2018 https://web.archive.org/web/20180708133610/https://www.hindustantimes.com/art-and-culture/pratibimb-marathi-natya-utsav-a-mix-of-commercial-and-experimental-plays/story-U4aGM5aNQhQvt5FxqRJR3L.html 8 जुलाई 2018 live प्रकाशन thumb|right|200px|लेखक भालचंद्र नेमाडे कोसला यह भालचंद्र नेमाडे का पहला उपन्यास है और इसकी कल्पना और लेखन उन्होंने अपने जीवन के मुम्बई के चरण के दौरान किया था।Chitre Dilip Dilip Chitre 1969 Alienation in Four Marathi Novels Humanist Review Bombay Modern Education Foundation 1 2 161–175 1752400 २१ साल की उम्र में, नेमाडे अपनी पत्रकारिता आकांक्षाओं में विफल हो गयें, और अपने गांव लौट आए। उन्हे अपने पिता द्वारा वहाँ पर झिड़क दिया गया था, क्योंकि वें निराश थे कि उनके बेटे ने एक महंगी शिक्षा को खत्म करने का जोखिम उठाया और डरपोक की तरह पिछे मुड़ गए। सन् १९६३ में, नेमाडे २५ वर्ष के थे और अपने गाँव में रह रहें थे। खुद को वे हिंदू राजा त्रिशंकु की तुलना में देखते थें, क्योंकि उन्हें भी न तो शहर और न ही उनके गांव के परिवार द्वारा स्वीकारा गया। उन्होंने घर के एक कमरे में खुद को बंद कर दिया और तीन सप्ताह की अवधि में अपना उपन्यास लिखा। कोसला को उसी साल सितम्बर में जे. जे. देशमुख द्वारा प्रकाशित किया गया, जो नेमाडे को मुम्बई से जानते थे और उन्हे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे।Chitre Dilip Dilip Chitre 1969 Alienation in Four Marathi Novels Humanist Review Bombay Modern Education Foundation 1 2 161–175 1752400 कथा कोसला पांडुरंग संगविकर के जीवन के पहले पच्चीस वर्षों को दिखाने के लिए प्रथम-व्यक्ति कथा तकनीक का उपयोग करता है।Chitre Dilip Dilip Chitre 1969 Alienation in Four Marathi Novels Humanist Review Bombay Modern Education Foundation 1 2 161–175 1752400 यह एक ग्रामीण परवरिश का युवक है जो अपनी उच्च शिक्षा के लिए पुणे जाता है। वह अपनी नई सामाजिक स्थिती में अलग महसूस करता है, और निरंतरता की यह भावना उसे घर लौटने के लिए प्रेरित करती है। वहाँ, वह अपनी बहन की मृत्यु, उसके पिता के प्रभुत्व और अपनी स्वयं की वित्तीय निर्भरता के साथ आगे के मोहभंग का सामना करता है।https://books.google.com/books?id=1lTnv6o-d_oC&pg=PA233 Handbook of Twentieth-century Literatures of India Nalini Natarajan Emmanuel Sampath Nelson Greenwood Publishing Group 1996 978-0-313-28778-7 Westport 233 5 मई 2020 https://web.archive.org/web/20200213061632/https://books.google.com/books?id=1lTnv6o-d_oC 13 फ़रवरी 2020 live उपन्यास का उद्देश्य पांडुरंग, एक युवा लड़के के दृष्टिकोण से समाज को चित्रित करने का है। पात्र उपन्यास के मुख्य पात्र है: https://books.google.com/books?id=dXFOAAAAYAAJ Masterpieces of Indian Literature National Book Trust 1997 978-81-237-1978-8 George K. M. New Delhi 875–877 5 मई 2020 https://web.archive.org/web/20161221041043/https://books.google.com/books?id=dXFOAAAAYAAJ 21 दिसंबर 2016 live पांडुरंग संगविकर - उपन्यास के नायक, और एक गाँव के अमीर किसान का इकलौता बेटा। उनके हॉस्टल के साथी छात्र उन्हें उनके उपनाम पांडु से बुलाते हैं। पांडुरंग के पिता - एक संयुक्त परिवार के मुखिया और उनके गाँव के एक अमीर और सम्मानित व्यक्ति। मणी - पांडुरंग की छोटी बहन। गिरिधर - पांडुरंग का ग्राम मित्र। सुरेश बापट - पुणे में पांडुरंग का कॉलेज मित्र। अनुवाद कोसला का आठ भारतीय भाषाओं में और अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। उपन्यास के उपलब्ध अनुवाद इस प्रकार हैं: + शीर्षक भाषा अनुवादक साल प्रकाशक संदर्भ ककून अंग्रेज़ी सुधाकर मराठे १९९७ मैकमिलन पब्लिशर्स इंडिया, चेन्नई https://books.google.com/books?id=KyHhAAAAMAAJ The Book Review C. Chari for Perspective Publications 2000 31 कोसला हिन्दी भगवानदास वर्मा १९९२ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली https://books.google.co.in/books?id=DjNEAAAAIAAJ Kosalā Nemade Bhalchandra National Book Trust 1992 New Delhi hi Verma Bhagwandas 614973397 कोशेतो गुजराती उषा शेठ १९९५ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली Kośeṭo Nemade Bhalchandra National Book Trust 1995 8123713584 New Delhi gu Sheth Usha कोशला कन्नड़ वामन दत्तात्रेय बेंद्रे १९९५ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली https://books.google.com/books?id=QA1V7sICaIwC&pg=PA127 Who's who of Indian Writers, 1999: A-M Kartik Chandra Dutt Sahitya Akademi 1999 978-81-260-0873-5 New Delhi 127 5 मई 2020 https://web.archive.org/web/20160505234322/https://books.google.com/books?id=QA1V7sICaIwC 5 मई 2016 live पलूर वाह असमिया किशोरीमोहन शर्मा १९९६ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली Palur Vaah Nemade Bhalchandra National Book Trust 1996 New Delhi as Sharma Kishorimohan कोशल पंजाबी अजित सिंह १९९६ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली Kosalā Nemade Bhalchandra National Book Trust 1996 8123717652 New Delhi pa Singh Ajeet नीड बंगाली वंदना अलसे हजरा २००१ साहित्य अकादमी, नई दिल्ली https://books.google.com/books?id=8JDsBBDoMccC&pg=PA11 Five Decades: The National Academy of Letters, India : a Short History of Sahitya Akademi Rao D. S. Sahitya Akademi 2004 978-81-260-2060-7 New Delhi 11 कोसला उर्दू मुशर्रफ आलम जौकी २००२ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली Kosala Nemade Bhalchandra National Book Trust 2002 New Delhi ur Jauki Musharraf Alam कोशापोक Odia चेरश्री इंद्रसिंह २००५ नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली Koshapok Nemade Bhalchandra National Book Trust 2005 New Delhi or Indrasingh Cheershree संदर्भ श्रेणी:उपन्यास श्रेणी:मराठी साहित्य