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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ग्रेनूलाइट

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right|thumb|250px|फेल्सिक संरचना वाली ग्रेनूलाइट-फेसीज़ मेटामॉर्फिक चट्टान का एक नमूना , जिसमें गार्नेट पोर्फिरोब्लास्ट मौजूद हैं। ग्रेनूलाइट (कणिकाश्म)https://www.google.ae/books/edition/Bh%C4%81rat%C4%AB/yJFjAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE&dq=%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE&printsec=frontcover Bhāratī विश्वविद्यालय मिशिगन संस्कृतप्रचारपरिषद् राजस्थानम् 1996 9 मई 2008 उच्च-श्रेणी की रूपांतरित चट्टानों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है, जिसका निर्माण अत्यधिक तापमान तथा मध्यम दाब की परिस्थितियों में होने वाले रूपांतरण के परिणामस्वरूप होता है।शैलविज्ञान परिभाषा कोश ये चट्टानें सामान्यतः मध्यम से लेकर मोटे कणों वाली होती हैं और इनमें मुख्यतः फेल्सपार खनिज पाया जाता है, जिसके साथ अनेक बार क्वार्ट्ज तथा जलरहित लौह-मैग्नीशियमी खनिज भी उपस्थित रहते हैं। इनकी बनावट प्रायः दानेदार होती है, जबकि संरचना पट्टिकामय नीस-सदृश से लेकर सघन और विशाल रूप तक भिन्न-भिन्न हो सकती है।D.R. Bowes (1989), The Encyclopedia of Igneous and Metamorphic Petrology; Van Nostrand Reinhold 0-442-20623-2 भूविज्ञान में ग्रैनुलाइटों का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हें प्रायः महाद्वीपीय भूपर्पटी के गहरे भागों के प्रतिनिधि नमूनों के रूप में देखा जाता है। इनके अध्ययन से पृथ्वी के आंतरिक भागों में विद्यमान तापीय तथा संरचनात्मक परिस्थितियों को समझने में सहायता मिलती है। अनेक ग्रेनूलाइट ऐसी चट्टानों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो पृथ्वी की गहराइयों में उच्च तापमान पर निर्मित हुईं और बाद में दाब में कमी आने के साथ अपेक्षाकृत उथले भूपर्पटीय स्तरों तक पहुँच गईं। दूसरी ओर, कुछ ग्रेनूलाइट पृथ्वी के गहरे भागों में ही स्थित रहीं और वहीं धीरे-धीरे शीतलित होकर अपने वर्तमान स्वरूप में विकसित हुईं। इस प्रकार ग्रेनूलाइट पृथ्वी की गहन भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं तथा महाद्वीपीय भूपर्पटी के विकासक्रम को समझने के लिए अत्यंत मूल्यवान साक्ष्य प्रदान करती हैं। ग्रेनूलाइट में पाए जाने वाले खनिजों की संरचना उसकी मूल चट्टान की प्रकृति तथा रूपांतरण के दौरान विद्यमान तापमान और दाब की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसी कारण विभिन्न ग्रैनुलाइटों में खनिजीय संघटन में उल्लेखनीय विविधता देखने को मिलती है। महाद्वीपीय क्षेत्रों की उच्च-श्रेणी की रूपांतरित चट्टानों में मिलने वाले सामान्य ग्रेनूलाइट प्रायः पाइरॉक्सीन, प्लाजियोक्लेज़ फेल्डस्पार तथा सहायक खनिजों के रूप में गार्नेट, ऑक्साइड और कभी-कभी ऐंफ़िबोल से निर्मित होते हैं। इनमें क्लिनोपाइरोक्सीन और ऑर्थोपाइरोक्सीन दोनों प्रकार के पाइरोक्सीन उपस्थित हो सकते हैं। विशेष रूप से कायांतरित बेसाल्ट से निर्मित चट्टानों में इन दोनों खनिजों का सह-अस्तित्व ग्रेनूलाइट श्रेणी की पहचान का एक महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है। दृश्य रूप से ग्रेनूलाइट प्रायः अपनी विशिष्ट दानेदार, पूर्णतः स्फटिकीय संरचना के कारण आसानी से पहचानी जा सकती है। इसमें छोटे-छोटे गुलाबी अथवा लाल रंग के गार्नेट स्फटिक प्रचुर मात्रा में बिखरे हुए दिखाई देते हैं, जो चट्टान को एक विशिष्ट आकर्षक स्वरूप प्रदान करते हैं। अनेक बार गार्नेट, अभ्रक या एम्फिबोल जैसे खनिज एक दिशा में व्यवस्थित होकर रेखीय अथवा पट्टिकामय विन्यास निर्मित करते हैं। यह विन्यास नीस अथवा माइग्माटाइट जैसी चट्टानों में दिखाई देने वाली पट्टियों के समान प्रतीत हो सकता है और चट्टान के रूपांतरण तथा विकृति के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करता है। सन्दर्भ श्रेणी:संरचनात्मक भूविज्ञान