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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कितने पाकिस्तान

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Kitne pakistan.jpg 100px कितने पाकिस्तान कमलेश्वर हिन्दी भारत साहित्य उपन्यास 360 8170283205 साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2003 कितने पाकिस्तान हिन्दी के विख्यात साहित्यकार कमलेश्वर द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead कितने पाकिस्तान, कमलेश्वर, प्रकाशकः राजपाल एंड संस, पृष्ठः 360, ISBN-10: 8170283205 यह उपन्यास भारत-पाकिस्तान के बँटवारे और हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर आधारित है।।http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2003/12/031229_kitnepakistan_review.shtml अदीबों की अदालत है 'कितने पाकिस्तान' 3 दिसंबर 2013 https://web.archive.org/web/20110821011835/http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2003/12/031229_kitnepakistan_review.shtml 21 अगस्त 2011 live यह उनके मन के भीतर चलने वाले अंतर्द्वंद्व का परिणाम माना जाता हे।http://www.orientpaperbacks.com/bookmore.asp?id=580 संग्रहीत प्रति 19 मार्च 2007 https://web.archive.org/web/20070829063115/http://www.orientpaperbacks.com/bookmore.asp?id=580 29 अगस्त 2007 dead भूमिका जब हम अपने आस पास देखते हैं तो हमें अनेक प्रकार के विभाजन दिखाई देते हैं। ये विभाजन सामाजिक, आर्थिक, भाषिक एवं धार्मिक आदि भी हो सकते हैं। कितने पाकिस्तान उपन्यास में कोई नायक नहीं है। स्वयं कमलेश्वर इस उपन्यास की भूमिका में लिखते हैं- “…कोई नायक या महानायक सामने नहीं था, इसलिए मुझे समय को ही नायक-महानायक और खलनायक बनाना पड़ा।”https://hindinama.com/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5 भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी, उसके बाद हुए सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन और विभाजनकारी राजनीति व धर्म की निरर्थकता पर प्रकाश डाला गया है। यह उपन्यास मानवता के इतिहास और समय के एक ऐसे दौर का दस्तावेज़ है, जो एक के बाद एक देशों के निर्माण में रक्तपात और हिंसा को उजागर करता है, जिससे दुनिया में शांति और भाईचारा बने रहने की उम्मीद की जाती है। पाकिस्तान हमारे बीच बार-बार आ जाता है यह हमारे यह तुम्हारे लिए कोई मुल्क नहीं है,यह एक दुखद सच्चाई हैhttps://www.hindisamay.com/content/1008/1/%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8.cspx इसी बीच भारतीय कृषि के इतिहास पर एक लम्बा श्रृंखलाबद्ध धारावाहिक लिखने का मौका मिला। कई सभ्यताओं के इतिहास और विकास की कथाओं को पढ़ते-पढ़ते चश्मे का नंबर बदला। कमलेश्वर राजपाल, कश्मीरी गेट,दिल्ली ISBN= 978-81-7028-476-5|page-1 सन्दर्भ श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा की पुस्तकें श्रेणी:२१वीं सदी का साहित्य श्रेणी:भारत के विभाजन पर आधारित साहित्य