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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बिहार में हिन्दी

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हिन्दी भारत के बिहार राज्य की राजभाषाओं में से एक है। यद्यपि इस प्रदेश में हिन्दुस्तानी व्यापक रूप से व्यवहार भाषा के रूप में प्रयुक्त होती है, तथापि अधिकांश जनसमुदाय की मातृभाषा किसी न किसी बिहारी भाषासमूह की भाषा है। हिन्दी पत्रकारिता ‘बिहारबन्धु’ बिहार से प्रकाशित होने वाला प्रथम हिन्दी समाचारपत्र था। इसका प्रकाशन १८७२ ईस्वी में केशवराम भट्ट द्वारा आरम्भ किया गया था, जो महाराष्ट्रीय ब्राह्मण थे और बिहारशरीफ़ में स्थायीकृत हो गये थे।Ahmad Qeyamuddin, Patna Through the ages: Glimpses of History, Society and Economy, Commonwealth Publishers, New Delhi, 1988 बिहार, विशेषतः पटना में, हिन्दी पत्रकारिता का प्रारम्भिक विकास अत्यन्त धीमा रहा। इसका प्रमुख कारण यह था कि सामान्य जनमानस में हिन्दी के प्रति पर्याप्त सम्मानभाव नहीं था। अनेक हिन्दी पत्र-पत्रिकाएँ प्रारम्भ हुईं और कालान्तर में लुप्त हो गयीं। अनेक पत्र तो अपने आरम्भिक अवस्था में ही स्थगित कर दिये गये। परन्तु जब हिन्दी को शासन-समर्थन प्राप्त हुआ, तब यह बिहार के दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुँचने लगी।Rajendra Abhinandan Granth, "Nagri Pracharini Sabha", Arrah, 3 March 1950, p. 353. हिन्दी पत्रकारिता में परिपक्वता और प्रौढ़ता का विकास हुआ तथा इसकी स्थायित्व-शक्ति भी बढ़ी। बिहार के न्यायालयों में हिन्दी का प्रचलन १८८० ईस्वी में प्रारम्भ किया गया।Kumar N., Journalism in Bihar, A Supplement to Bihar State Gazette, p. 28.Ahmad Qeyamuddin, Patna Through the ages: Glimpses of History, Society and Economy, Commonwealth Publishers, New Delhi, 1988 बीसवीं शताब्दी के प्रकाशन बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में अनेक महत्त्वपूर्ण नये प्रकाशनों का उद्भव हुआ। पटना से १९०१ ईस्वी में ‘भारतरत्न’ नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ हुआ। इसके पश्चात् ‘क्षत्रिय हितैषी’, ‘आर्यावर्त’ (दीनापुर, पटना), ‘उद्योग’ तथा ‘चैतन्य चन्द्रिका’ का प्रकाशन हुआ।Bihar ki Sahityik Pragati, Bihar Hindi Sahitya Sammelan, Patna 1956, p. 73. ‘उद्योग’ का सम्पादन उस समय के विख्यात कवि विज्ञानानन्द त्रिपाठी द्वारा किया जाता था तथा ‘चैतन्य चन्द्रिका’ का सम्पादन कृष्ण चैतन्य गोस्वामी द्वारा। यह साहित्यिक गतिविधि केवल पटना तक सीमित नहीं रही, अपितु बिहार के अनेक जनपदों में विस्तृत हुई।Jayanti Smarak Granth, pp. 583–585.Ahmad Qeyamuddin, Patna Through the ages: Glimpses of History, Society and Economy, Commonwealth Publishers, New Delhi, 1988 संवैधानिक विषय यद्यपि बिहारी भाषाओं के वक्ताओं की संख्या अत्यधिक है, तथापि मैथिली को छोड़कर (जो भारत के संविधान की अष्टम अनुसूची में मान्यता प्राप्त है) अन्य बिहारी भाषाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है। बिहार में शैक्षिक तथा शासकीय कार्यों में हिन्दी का प्रयोग किया जाता है, तथा कभी-कभी अंग्रेज़ी का भी उपयोग होता है।History of Indian languages https://web.archive.org/web/20120226234832/http://www.diehardindian.com/demogrph/moredemo/histlang.htm 2012-02-26,"Bihari is actually the name of a group of two related languages—Bhojpuri, and Magahi—spoken mainly in northeastern India in Bihar. Despite its large number of speakers, Bihari is not a constitutionally recognised language of India. Even in Bihar, Hindi is the language used for educational and official matters." १९६१ ईस्वी की जनगणना में इन भाषाओं को विधिक रूप से हिन्दी की उपश्रेणी के अन्तर्गत सम्मिलित कर दिया गया। ऐसी राज्य एवं राष्ट्रीय नीतियाँ भाषाई संकट की परिस्थितियाँ उत्पन्न कर रही हैं।Verma Mahandra K. Language Endangerment and Indian languages : An exploration and a critique 2001 9788120817654 Linguistic Structure and Language Dynamics in South Asia https://books.google.com/books?id=tcfJY7kANo8C&dq=awadhi+and+magahi+languages&pg=PA5 भाषाओं के मध्य संघर्ष आधुनिक मानक हिन्दी के प्रसार की प्रथम महत्त्वपूर्ण सफलता बिहार में १८८१ ईस्वी में प्राप्त हुई, जब हिन्दी ने उर्दू को प्रान्त की एकमात्र शासकीय मानक भाषा के रूप में प्रतिस्थापित किया। हिन्दुस्तानी भाषा के दो प्रतिस्पर्धी मानकों, हिन्दी और उर्दू, के मध्य इस संघर्ष में इस प्रदेश की तीन प्रमुख मातृभाषाओं, मगही, भोजपुरी और मैथिली, के दावों की उपेक्षा की गयी। स्वतन्त्रता के पश्चात् ‘बिहार राजभाषा अधिनियम, १९५०’ द्वारा पुनः हिन्दी को एकमात्र राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया।Brass Paul R., The Politics of India Since Independence, Cambridge University Press, p. 183. उर्दू को अविभाजित बिहार राज्य में १६ अगस्त १९८९ ईस्वी को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ। मैथिली को भारत शासन द्वारा २००३ ईस्वी में आधिकारिक मान्यता प्रदान की गयी, जो मैथिली भाषियों के नेतृत्व में चले सक्रिय आन्दोलन का परिणाम था। भोजपुरी, मगही, अंगिका तथा बज्जिका को भी समान दर्जा प्रदान किये जाने की माँग की जाती रही है।https://www.mha.gov.in/sites/default/files/EighthSchedule_19052017.pdf Constitutional provisions relating to Eighth Schedule Ministry of Home Affairs 4 April 2022 सांख्यिकी बिहारी भाषाओं के वक्ताओं की संख्या का सटीक निर्धारण कठिन है, क्योंकि उपलब्ध स्रोत विश्वसनीय नहीं हैं। नगरी क्षेत्रों में शिक्षित जन सामान्यतः अपनी भाषा के रूप में हिन्दी का उल्लेख करते हैं, क्योंकि वे गृह परिसर में तथा औपचारिक परिस्थितियों में हिन्दी का ही प्रयोग करते हैं। अशिक्षित तथा ग्रामीण जनसंख्या भी प्रायः अपनी भाषा के रूप में हिन्दी का ही उल्लेख करती है।Jain Dhanesh, Cardona George, The Indo-Aryan Languages, pp500, "..the number of speakers of Bihari languages are difficult to indicate because of unreliable sources. In the urban region most educated speakers of the language name Hindi as their language because this is what they use in formal contexts and believe it to be the appropriate response because of unawareness. The uneducated and the rural population of the region return Hindi as the generic name for their language." सम्बन्धित विषय बिहारी हिन्दी सन्दर्भ 2 श्रेणी:बिहार की भाषाएँ श्रेणी:हिन्दी श्रेणी:बिहार की संस्कृति