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पी. सी. कुट्टिकृष्णन उरूब
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पी॰ सी॰ कुट्टिकृष्णन Uroob.jpg 200px परुथोलि चलप्पुरथु कुट्टिकृष्ण मेनन उरूब उपन्यासकार, लघुकथा लेखक, पत्रकार सामाजिक पहलू यथार्थवाद देवकी अम्मा परुथोलि चलप्पुरथु करुणाकर मेनन (पिता)पारुकुट्टी अम्मा (पार्वती) (माता) yes 1915 6 8 पोन्नानी, मलप्पुरम, केरल, भारत yes 1979 7 10 1915 6 8 मेडिकल कॉलेज, कोट्टायम, केरल, भारत साहित्य अकादमी पुरस्कार उपन्यास के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार मलयालम सुन्दरिकालुम सुन्दरनमारुम, उम्माचू
परुथोलि चलप्पुरथु कुट्टिकृष्णन करुणाकर मेनन (1915 – 1979), जिन्हें उनके उपनाम उरूब के नाम से अधिक जाना जाता है, मलयालम साहित्य के एक भारतीय लेखक थे। बशीर, तकाज़ी, केशवदेव और पोट्टेक्कट्ट के साथ, उरूब को बीसवीं सदी के दौरान मलयालम के प्रगतिशील लेखकों में गिना जाता था।
उन्हें उनके उपन्यासों जैसे और उम्माचू, 'राचियम्मा' जैसी लघुकथाओं और नीलकुयिल सहित कई मलयालम फिल्मों की पटकथाओं के लिए जाना जाता था। नीलकुयिल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली मलयालम फीचर फिल्म थी। उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें केंद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार और उपन्यास के लिए पहला केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार शामिल है।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead
जीवनी
परुथोलि चलप्पुरथु कुट्टिकृष्णन करुणाकर मेनन का जन्म 8 जून 1915 को परुथोलि चलप्पुरथु करुणाकर मेनन और पारुकुट्टी अम्मा (पार्वती) के यहाँ पल्लप्रम में हुआ था, जो दक्षिण भारतीय राज्य केरल के मलप्पुरम जिले में पोन्नानी के पास एक छोटा सा गाँव है।http://www.keralasahityaakademi.org/sp/Writers/PROFILES/PCKuttikrishnan/Html/PCKugraphy.htm Biography on Kerala Sahitya Akademi portal 2019-02-01 Kerala Sahitya Akademi 2019-02-01 उनकी प्रारंभिक शिक्षा ए॰ वी॰ हाई स्कूल, पोन्नानी में हुई और माध्यमिक शिक्षा के बाद उन्होंने छह वर्षों तक यात्रा की तथा भारत में विभिन्न स्थानों पर काम किया।http://103.251.43.202:8080/cgi-bin/koha/opac-ISBDdetail.pl?biblionumber=22376 Mahacharithamala DC Books 2005 8126410663 Rajasekharan P. K. 3 56–57 2 February 2019 2 February 2019 https://web.archive.org/web/20190202154020/http://103.251.43.202:8080/cgi-bin/koha/opac-ISBDdetail.pl?biblionumber=22376 dead इस अवधि के दौरान, उन्होंने नीलगिरि पहाड़ियों में एक चाय बागान, एक कपड़ा कारखाने, कोझिकोड में के॰ आर॰ ब्रदर्स प्रिंटर्स तथा मंगल्योदयम मासिक पत्रिका में काम किया। इसके बाद 1954 में वह आकाशवाणी के कोझिकोड स्टेशन में शामिल हो गए।https://malayalasangeetham.info/displayProfile.php?category=story&artist=Uroob Profile of Malayalam Story Writer Uroob 2019-02-02 malayalasangeetham.info 2019-02-02 2 February 2019 https://web.archive.org/web/20190202153850/https://malayalasangeetham.info/displayProfile.php?category=story&artist=Uroob dead
1975 में आकाशवाणी के एक निर्माता के रूप में सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने कुछ समय के लिए कुमकुमम साप्ताहिक के संपादक के रूप में कार्य किया। 1976 में वे मलयाला मनोरमा में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने मलयाला मनोरमा साप्ताहिक और भाषापोषिणी के मुख्य संपादक के रूप में काम किया। उन्होंने केरल साहित्य अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
कुट्टिकृष्णन ने 1948 में इडास्सेरी गोविंद नायर की भाभी देवकी अम्मा से विवाह किया था। 10 जुलाई 1979 को 64 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, जब उनका सरकारी मेडिकल कॉलेज, कोट्टायम में इलाज चल रहा था।
साहित्यिक और फ़िल्मी करियर
1930 के दशक में कुट्टिकृष्णन पोन्नानी में एक साहित्यिक समूह में शामिल हुए, जिसके सदस्यों में एडास्सेरी गोविंदन नायर, कुट्टिकृष्ण मारार, अक्कीथम, कडावनाड कुट्टिकृष्णन और मूथेदाथ नारायणन वैद्यर शामिल थे। इसी समय के दौरान उन्होंने अपनी पहली लघुकथा, वेलाक्कारियुडे चेककन लिखी थी।https://www.madhyamam.com/literature/literature-articles/uroob/2017/jul/12/290576 Uroob, the Immortal July 12, 2017 Madhyamam 2019-02-02 उन्होंने अपना उपनाम उरूब रखा, जिसका फ़ारसी भाषा में अर्थ 'शाश्वत यौवन' और अरबी में 'गोधूलि' होता है।https://www.veethi.com/india-people/uroob-profile-2241-25.htm Profile on Veethi 2019-02-02 Veethi 2019-02-02 उन्होंने यह नाम मलयालम सिनेमा के एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक के॰ राघवन पर लिखे गए एक लेख के लिए अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से अपनाया था, क्योंकि वे संगीत निर्देशक आकाशवाणी में उनके सहकर्मी थे। इसके बाद उन्होंने इसी उपनाम के साथ लिखना जारी रखा।https://english.manoramaonline.com/entertainment/art-and-culture/a-timely-tribute-to-uroob-malayalam-literature.html A timely tribute to Uroob June 8, 2015 OnManorama 2019-02-02
1945 में उनका पहला लघुकथा संग्रह, नीरचलुकल प्रकाशित हुआ और तीन साल बाद उनका पहला उपन्यास, अमीना प्रकाशित हुआ। उनके संपूर्ण साहित्यिक कार्यों में 8 उपन्यास, 27 लघुकथा संग्रह, तीन नाटक, 3 कविता संग्रह और तीन निबंध संकलन शामिल हैं।http://www.keralasahityaakademi.org/sp/Writers/PROFILES/PCKuttikrishnan/Html/PCKuttikrishnanBooks.htm List of Works 2019-02-01 Kerala Sahitya Akademi 2019-02-01 उनके सबसे उल्लेखनीय कार्यों में 1954 में प्रकाशित उम्माचू, 1956 में प्रकाशित मिंडाप्पेन्नू, और 1958 में प्रकाशित उपन्यास सुन्दरिकालुम सुन्दरनमारुम (सुंदर और रूपवान) शामिल हैं; वहीं लघुकथाओं में गोपालन नायरूडे थाडी, राचियम्मा और थुरन्निट्टा जलकम प्रमुख हैं। जाने-माने मलयालम साहित्यिक आलोचक एम॰ कृष्णन नायर ने राचियम्मा को विश्व साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिना।https://www.manoramaonline.com/literature/literaryworld/2017/10/26/uroobinte-sthreekal.html Uroob who Viewed Woman as an Enigma October 26, 2017 ManoramaOnline 2019-02-02 उम्माचू का अंग्रेजी में द बिलव्ड शीर्षक से अनुवाद किया गया है।https://www.abebooks.com/book-search/title/beloved/author/oroob-uroob/ Beloved by Oroob Uroob - AbeBooks 2019-02-02 www.abebooks.com en 2019-02-02 उनकी कई रचनाओं में महिला पात्रों को बहुत सशक्त दिखाया गया है और उन्हें लैंगिक समानता के समर्थक के रूप में जाना जाता था। उनके तीन संग्रह, अंकवीरन, मल्लनम मारनवम और अप्पुविंते लोकम बाल साहित्य हैं, और कई आलोचक उन्हें मलयालम साहित्य में इस शैली के महानतम लेखकों में से एक मानते हैं।
1954 में, जब रामू कारियात ने उरूब की कहानी नीलकुयिल पर इसी नाम से एक फीचर फिल्म बनाने का निर्णय लिया, तो उरूब ने पी॰ भास्करन के साथ मिलकर इसकी पटकथा लिखी। यह फिल्म मलयालम सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित हुई और मलयालम में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने वाली पहली फीचर फिल्म बन गई।http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/neelakuyil-1954/article1427604.ece Neelakuyil 1954 B. Vijayakumar The Hindu 25 October 2008 https://web.archive.org/web/20161016055336/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/neelakuyil-1954/article1427604.ece 16 October 2016 पी॰ भास्करन के साथ उनका यह जुड़ाव आगे भी जारी रहा, जिसके परिणामस्वरूप चार और फ़िल्में बनीं: रारीचन एन्ना पौरन (1956),http://www.imdb.com/title/tt0156009/ Rarichan Enna Pauran 2019-02-02 IMDb 2019-02-02 नायरू पिडीचा पुलिवालु (1958),http://www.imdb.com/title/tt0155899/ Nair Pidicha Pulival 2019-02-02 IMDb 2019-02-02 कुरुक्षेत्रम (1970)https://malayalasangeetham.info/m.php?4862 Kurukshethram [1970] 2019-02-02 malayalasangeetham.info 2019-02-02 8 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190108145602/https://malayalasangeetham.info/m.php?4862 dead और उम्माचू (1971)।https://malayalasangeetham.info/m.php?4362 Ummaachu [1971] 2019-02-02 malayalasangeetham.info 2019-02-02 18 जून 2021 https://web.archive.org/web/20210618061731/https://malayalasangeetham.info/m.php?4362 dead इस बीच, उन्होंने 1970 में के॰ एस॰ सेतुमाधवन की फिल्म मिंडाप्पेन्नू की पटकथा भी लिखी।https://malayalasangeetham.info/m.php?3976 Mindaapennu [1970] malayalasangeetham.info 2019-02-02 8 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190108145553/https://malayalasangeetham.info/m.php?3976 dead इसके बाद उन्होंने दो अन्य फिल्मों की पटकथाएँ भी लिखीं: 1972 में त्रिसंध्याhttps://malayalasangeetham.info/m.php?4572 Thrisandhya [1972] 2019-02-02 malayalasangeetham.info 2019-02-02 2 फ़रवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190202153754/https://malayalasangeetham.info/m.php?4572 dead और 1978 में अनियरा, जिनमें से बाद वाली भरथन द्वारा निर्देशित फिल्म थी।https://malayalasangeetham.info/m.php?4989 Aniyara [1978] 2019-02-02 malayalasangeetham.info 2019-02-02 23 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190123010841/https://malayalasangeetham.info/m.php?4989 dead
पुरस्कार और सम्मान
उरूब को तमिलनाडु सरकार (तत्कालीन मद्रास सरकार) से तीन पुरस्कार प्राप्त हुए, 1948 में काथिर कट्टा, 1949 में थुरन्निट्टा जलकम और 1951 में कुंबेडुक्कुन्ना मन्नू के लिए। केरल साहित्य अकादमी ने 1958 में उपन्यास के लिए एक वार्षिक पुरस्कार की स्थापना की, और उनके उपन्यास उम्माचू को इस उद्घाटन पुरस्कार के लिए चुना गया था।http://www.keralasahityaakademi.org/sp/Writers/ksa/Awards/novel.htm Kerala Sahitya Akademi Award for Novel 2019-02-01 Kerala Sahitya Akademi 2019-02-01 1960 में, उन्हें उनकी रचना सुन्दरिकालुम सुन्दरनमारुम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला,http://www.sahitya-akademi.gov.in/old_version/awa10311.htm Awards & Fellowships-Akademi Awards https://web.archive.org/web/20090828042835/http://www.sahitya-akademi.gov.in/old_version/awa10311.htm#malayalam 2009-08-28 2009-10-17 dead और उसी वर्ष उन्हें गोपालन नायरूडे थाडी के लिए एम॰ पी॰ पॉल पुरस्कार भी मिला।
1971 में, उन्हें उम्माचू के फ़िल्मी रूपांतरण के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए केरल राज्य फ़िल्म पुरस्कार मिला।http://www.prd.kerala.gov.in/stateawares.htm State Film Awards 2019-02-02 Dept. of Information & Public Relations, Government of Kerala https://web.archive.org/web/20160303232254/http://www.prd.kerala.gov.in/stateawares.htm 2016-03-03 2019-02-02 dead दो साल बाद, सुन्दरिकालुम सुन्दरनमारुम ने उन्हें एक और सम्मान दिलाया, जो कि आशान शताब्दी पुरस्कार था। केरल सरकार ने उनके सम्मान में कोझिकोड के किलियानाड स्कूल के परिसर में एक संग्रहालय, 'उरूब मेमोरियल लिटरेरी म्यूजियम' स्थापित किया।http://www.hindu.com/2008/06/07/stories/2008060751230300.htm Writers visit Uroob museum 2008-06-07 The Hindu 2008-11-15 https://web.archive.org/web/20080610115447/http://www.hindu.com/2008/06/07/stories/2008060751230300.htm 2008-06-10 deadhttp://www.hindu.com/2008/06/13/stories/2008061354950300.htm Facelift likely for Uroob museum 2008-06-13 The Hindu 2008-11-15 https://web.archive.org/web/20080624134818/http://www.hindu.com/2008/06/13/stories/2008061354950300.htm 2008-06-24 dead
प्रमुख कृतियाँ
उपन्यास
50em
आमिना उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1948
कुंजमायुम कुट्टुकरम उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1952
उरूब उम्माचू 1954 साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम
मिंडापेन्नु उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1956
उरूब सुन्दरिकालुम सुन्दरनमारुम 1958 साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम
चुझिकु पिम्बे चुझी उरूब केरल साहित्य अकादमी 1967
उरूब अनियारा https://books.google.com/books?id=7_W5GwAACAAJ 1968 केरल साहित्य अकादमी
उरूब अम्मिनी https://books.google.com/books?id=KrcOAAAAMAAJ 1972 केरल साहित्य अकादमी
लघुकथाएँ
50em
नीराचलुकल उरूब 1945 पूर्णा कोझिकोड
नवोन्मेषम उरूब पूर्णा 1946 कोझिकोड
तूरन्निता जालाकम उरूब 1949 पूर्णा दूसरा संस्करण कालीकट
नीलमाला उरूब 1950 पूर्णा पब्लिकेशन्स कोझिकोड
कूम्पेडुक्कुन्ना मन्नू उरूब एस॰पी॰सी॰एस 1951 कोट्टायम
उल्लावरुम इल्लाथावरुम उरूब करेंट बुक्स 1952 त्रिशूर
नीलावलिचम उरूब 1952 पूर्णा कालीकट
मौलवियुम चंगाथीमारुम उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1954
थामरथोप्पी उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1955
वेलुत्ता कुट्टी उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1958
तेनमुल्लुकल उरूब 1962 मंगलोदयम मंगलोदयम
गोपालन नायरूडे थाडी उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1963
मुखममुडिकल उरूब 1966 पूर्णा दूसरा संस्करण कोझिकोड
3334नते चरित्रम उरूब 1968 पूर्णा पब्लिकेशन्स
राचियम्मा उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1969
वसंथयुदे अम्मा उरूब अमीना बुक स्टॉल 1972
निलाविन्ते रहस्यम उरूब 1974
मंजिन मरायिल सूरन उरूब 1976 नेशनल बुक स्टॉल नेशनल बुक स्टॉल, कोट्टायम
रिजर्व चैयाथा बर्थ उरूब पूर्णा पब्लिकेशन्स 1980
नीलक्कुयिल उरूब करेंट बुक्स 2004 B007E4WJGI
उरूब उरूबिन्ते क्रिथिकल 2006 डीसी बुक्स
उरूब उरूबिन्ते कुट्टीकथकल 2007
मलयालाथिन्ते सुवर्णकथकल उरूब ग्रीन बुक्स 2008
उरूबिन्ते थेरन्जेदुथा कथकल उरूब पूर्णा पब्लिकेशन्स 2011 1
उरूबिन्ते थेरन्जेदुथा कथकल उरूब पूर्णा पब्लिकेशन्स 2011 2
उरूब स्त्रीकथकल उरूब एच एंड सी पब्लिशिंग 2012
अवल उरूब एच एंड सी पब्लिशिंग 2012
नवरसकथकल उरूब 2013 कैरली बुक्स कण्णूर
कथिर-कट्टा
लाथियुम पूकलुम
नाटक
मन्नुम पेन्नुम उरूब साहित्य प्रवर्तक सहकारणा संघम 1954
मिस चिन्नुवम लेडी जानुवुम उरूब 1961 करेंट बुक्स करेंट बुक्स
थीकोंडु कलीकारुथु उरूब 1970 एन॰बी॰एस॰ कोट्टायम
निबंध संकलन
कवि सम्मेलनम उरूब केरल साहित्य अकादमी 1969
उरूबिन्दे शनियझ्चकल उरूब 1980 डी॰सी॰ बुक्स, कोट्टायम डी॰सी॰ बुक्स, कोट्टायम
उरूबिन्दे लेखनंगल
बच्चों की कहानियाँ
अप्पुविन्ते लोकम उरूब 1979 नेशनल बुक स्टॉल कोट्टायम
मल्लनम मरनावुम उरूब पूर्णा पब्लिकेशन्स 1966 9788171805181
अंकवीरन उरूब साहित्य अकादमी 1967 978-8171809325
अन्य भाषाओं में अनुवाद
"वन डेथ टर्न्ड बैक", मलयालम से नारायण मेनन द्वारा अनुवादित, द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया, बॉम्बे, 29 सितंबर 1963, पृष्ठ 44-46 पर प्रकाशित।
द बिलव्ड उरूब हिंद पॉकेट बुक्स 1974 9780882536965 राघव आर॰ मेनन (उम्माचू का अंग्रेजी अनुवाद)
द ब्यूटीफुल एंड द हैंडसम उरूब केरल साहित्य अकादमी 1982 त्रिशूर सुशीला मिश्रा B0006EEXJO
कविताएँ
पिरन्नल उरूब 1947
निझालाट्टम
मामूलिन्ते मट्टोली
पटकथा (Screenplays)
50em
नीलकुयिल
रारीचन इन्ना पौरन
नायरू पिदिचा पुलिवालु
कुरुक्षेत्रम
उम्माचू
त्रिसंध्या
अनियारा
लघु फिल्म
राचियम्मा
सन्दर्भ
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत मलयालम भाषा के साहित्यकार
श्रेणी:1915 में जन्मे लोग
श्रेणी:1979 में निधन
श्रेणी:भारतीय उपन्यासकार