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जीण माता
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जीण माता hi माताजी गाँव Jeen Maa.jpeg सीकर जिले में जीण माता India Rajasthan right राजस्थान, भारत का मानचित्र 27.444154 N 75.194457 E inline,title देश भारत राज्य राजस्थान जिला सीकर जिला Metric auto भाषा आधिकारिक हिन्दी भारतीय मानक समय +५:३० पिन ३३२४०६ दूरभाष कोड ०१५७६ Rj-23- निकटतम नगर सीकर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र सीकर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र दांतारामगढ़ http://shreejeenmata.com/
जीण माता राजस्थान के सीकर जिले में स्थित धार्मिक महत्त्व का एक गाँव है। इस माता के सामने मुगल बादशाह औरंगजेब भी हो गया चारों खाने चित्त https://www.amarujala.com/jaipur/jeen-mata-in-sikar 11 अगस्त 2024 Amar Ujala hi यह सीकर से २९ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहाँ की कुल जनसंख्या ४३५९ है। यहाँ पर श्री जीण माता जी (शक्ति की देवी) का एक प्राचीन मन्दिर स्थित है। जीणमाता का यह पवित्र मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से 108 किलोमीटर है।
मंदिर का इतिहास
लोक मान्यताओं के अनुसार जीवण का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ। उनके भाई का नाम हर्ष था। जो बहुत खुशी से रहते थे। एक बार जीवण का अपनी भाभी के साथ विवाद हो गया और इसी विवाद के चलते जीवण और हर्ष में नाराजगी हो गयी। इसके बाद जीवण आरावली के 'काजल शिखर' पर पहुँच कर तपस्या करने लगीं।सामान्य नारी से देवी रूप में प्रकट हुई माता http://www.amarujala.com/feature/spirituality/tirth-yatra/story-jin-mata-sikar-rajasthan/?page=1 अमर उजाला २४ फ़रवरी २०१५ https://web.archive.org/web/20150224195716/http://www.amarujala.com/feature/spirituality/tirth-yatra/story-jin-mata-sikar-rajasthan/?page=1 24 फ़रवरी 2015 live मान्यताओं के अनुसार इसी प्रभाव से वो बाद में देवी रूप में परिवर्तित हुई। जीवण ने यहाँ जयंती माताजी की तपस्या की और जीण माताजी के नाम से पूजी जाने लगी। यह मंदिर चूना पत्थर और संगमरमर से बना हुआ है। यह मंदिर आठवीं सदी में निर्मित हुआ था। जीणमाता राजस्थान, भारत के सीकर जिले में धार्मिक महत्व का एक गांव है। यह दक्षिण में सीकर शहर से 29 किमी की दूरी पर स्थित है। शहर की आबादी 4359 है जिसमें से 1215 अनुसूचित जाति और 113 एसटी लोग हैं। श्री जीणमाता जी (शक्ति की देवी) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। जीण माता जी का पवित्र मंदिर माना जाता है कि यह एक हजार साल पुराना है। लाखों भक्त यहां नवरात्रि के दौरान चैत्र और अश्विन के महीने में दो बार एक रंगीन त्यौहार के लिए इकट्ठा होते हैं। बड़ी संख्या में आगंतुकों को समायोजित करने के लिए कई धर्मशालाएं हैं। इस मंदिर के करीब ही उसके भाई हर्ष भैरवनाथ मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। जीण माताजी मंदिर के पट कभी बंद नहीं होते हैं। ग्रहण में भी माई की आरती सही समय पर होती हैं।
जीण माताजी मंदिर रेवसा गांव से 10 किमी पहाड़ी के पास स्थित है। यह घने जंगल से घिरा हुआ है। उसका पूर्ण और वास्तविक नाम जयंतलाल था। इसके निर्माण का वर्ष ज्ञात नहीं है, लेकिन सर्वमण्डपा और खंभे निश्चित रूप से बहुत पुरानी हैं।
जीण माताजी का मंदिर शुरुआती समय से तीर्थ यात्रा का स्थान था और इसकी मरम्मत और कई बार पुनर्निर्माण किया गया था। एक लोकप्रिय मान्यता है जो सदियों से लोगों तक आती है कि चुरु के एक गांव घांघू में राजा गंगोसींघजी ने इस शर्त पर ऊर्वशी (अप्सरा) से शादी कर ली, कि वह अपने महल में पूर्व सूचना के बिना नहीं जाएंगे। राजा गंगोसींघजी को एक पुत्र मिला जिसे हर्ष कहा जाता था और एक बेटी जीवण थी। बाद में उसने फिर से कल्पना की लेकिन मौके के तौर पर यह राजा गंगोसींघजी अपने पूर्वजों को बिना बताए महल में गये और इस तरह उन्होंने अप्सरा से किए गए प्रतिज्ञा का उल्लंघन किया। तुरन्त उसने राजा को छोड़ दिया और अपने बेटे हर्ष और बेटी जीवण को भगा लिया, जिसे वह उस जगह पर छोड़ दिया जहां वर्तमान में मंदिर खड़ा है। यहां दो बच्चों ने अत्यधिक तपस्या का अभ्यास किया । बाद में एक चौहान शासक ने उस जगह पर मंदिर बनाया। इस मंदिर में अनगिनत चमत्कार देखें व महसूस किए जाते हैं। रोज सुबह माई को मदिरा का भोग लगाया जाता है और बडे चाव से मैया उसको स्वीकार करती है। मदिरा भोग लगाते ही गायब हो जाता है और आज तक किसी को पता नहीं चला कि मदिरा जाता कहा है। इसके अलावा मीठे चावल का भोग भी माई को लगाया जाता है।
जीण माता के मुख्य अनुयायियों में क्षेत्र के सैनी, यादव (अहिर), ब्राह्मण, राजपूत,गुर्जर समाज के गौत्र लादी, अग्रवाल, जंजीर और मीनास अोनिन्थ बानियां शामिल हैं। जीण माता,सैनी यादव (अहिर), अग्रवाल,स्वर्णकार,मीना, शेखावाती राजपूत (शेखावत और राव राजपूत) और राजसी के योद्धा वर्ग के जंगली, की कुलदेवी हैं। जीण माता के अनुयायियों की एक बड़ी संख्या कोलकाता में रहते हैं, जो माई के मंदिर पर जाते रहते हैं। जो लोग जीण माताजी को अपनी मां के रूप में आदर करते हैं, उनके परिवार में नर बच्चे के जन्म के लिए प्रार्थना करते हैं और पुत्र के जन्म के बाद ही मंदिर की यात्रा करने का प्रतिज्ञा करते हैं। नर बच्चे के जन्म के बाद पूरे परिवार में जीण माता जी का दौरा किया जाता है और मंदिर के परिसर में पहले बाल काट (राजस्थानी में जडूला के रूप में जाना जाता है) की पेशकश की जाती है। अनुयायियों ने मंदिर में 50 किलो मिठाइयां, जो कि सवामणी के नाम से जानी जाती हैं, की पेशकश करती हैं।
मूगल सम्राट औरंगजेब माता के मंदिर के मैदान पर उतरना चाहता था। उसके पुजारियों द्वारा बुलाया जाने वाला, माता ने भैरों की अपनी सेना को छोड़ दिया (एक मक्खी परिवार की प्रजाति) जिसने सम्राट और उसके सैनिकों को अपने घुटनों पर लाया। उसने माफी मांगी और दयालु मातजी ने उसे अपने गुस्से से माफ़ किया। औरंगजेब ने अपने दिल्ली महल से अखण्ड (कभी-चमक) तेल का दीपक दान किया। माता के पवित्र संस्कार में यह दीपक अभी भी चमक रहा है। [उद्धरण वांछित]
सीकर जिले का अन्य प्रसिद्ध मंदिर, खाटूश्यामजी 22 किलोमीटर की दूरी पर हैंTemple Profile: Mandir Shri Jeen Mata Ji http://devasthan.rajasthan.gov.in/images/Sikar/jeenmataji.htm देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार २४ फ़रवरी २०१५ https://web.archive.org/web/20150123135014/http://devasthan.rajasthan.gov.in/images/Sikar/jeenmataji.htm 23 जनवरी 2015 dead
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Jeenmata जीण माता
जीण माता मंदिर की अधिक जानकारी के लिए
परिसीमन आयोग की रिपोर्ट
सीकर जिले की दांतारामगढ़ तहसिल के गाँव
डिवाइन-इंडिया पर जीणमाता का मंदिर
श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर