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सोहनी माहीवाल
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सोहणी-माहीवाल की कथा सिंध तथा पंजाब की अत्यन्त प्रसिद्ध लोककथा है। यह दुखान्त प्रेमकथा है।
कथा
thumb|Sohni Swims to Meet Her Lover Mahinwal LACMA M.72.2.1
thumb|Sohni Swims to Meet Her Lover Mahinwal LACMA AC1999.127.3
सोहनी सिंधु नदी के तट पर रहने वाले कुम्हार तुला की बेटी थी। वह कुम्हार द्वारा बनाए गए बर्तनों पर सुंदर चित्रकारी करती थी। उजबेकिस्तान स्थित बुखारा का धनी व्यापारी इज्जत बेग व्यापार के सिलसिले में भारत आया। सोहनी से मिलने पर वह उसके सौंदर्य पर आसक्त हो उठा। सोहनी को देखने के लिए वह रोज सोने की मुहरें जेब में भरकर कुम्हार के पास आता और बर्तन खरीदता। सोहनी भी उसकी तरफ आकर्षित हो गई। वह सोहनी के पिता के घर में नौकरी करने लगा, उसका नाम महिवाल पड गया, क्योंकि वह भैंसें चराने लगा। जब उनके प्रेम के किस्से आसपास फैले तो तुला ने सोहनी को बिना बताए उसकी शादी किसी कुम्हार से कर दी। महिवाल अपना घर, देश भूलकर फकीर हो गया। मगर दोनों प्रेमियों ने मिलना न छोडा। रोज जब रात में सारी दुनिया सोती, सोहनी नदी के उस पार महिवाल का इंतजार करती, जो तैरकर उसके पास आता। महिवाल बीमार हुआ तो सोहनी एक पक्के घडे की मदद से तैरकर उससे मिलने पहुंचने लगी। उसकी ननद ने एक बार उन्हें देख लिया तो उसनेपक्के घडे की जगह कच्चा घडा रख दिया। सोहनी घडे द्वारा नदी पार करने लगी तो डूब गई। महिवाल उसे बचाने के लिए नदी में कूदा, वह भी डूब गया। इस तरह यह दुख भरी प्रेम कहानी खत्म हो गई।
इन्हें भी देखें
शाह जो रिसालो
हीर राँझा
प्रेमकथा
बाहरी कड़ियाँ
Sohni & Mehar - The Poetry of Shah (Translated by Elsa Kazi)
श्रेणी:प्रेम-कथाएँ
श्रेणी:भारतीय साहित्य