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मुहम्मद याक़ूब नानौतवी
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मुहम्मद याक़ूब नानौतवी दारुल उलूम देवबंद के पहले प्रधानाचार्य और शेख़ुल हदीस 1866 1883 पद की स्थापना सैयद अहमद देहलवी 1 जुलाई 1833 या 2 जुलाई 1833 नानौता, ब्रिटिश भारत 1884 (आयु ५०–५१) नानौता, ब्रिटिश राज इस्लामी विद्वान ममलूक अली नानौतवी खलील अहमद सहारनपुरी (भतीजा) 1857 १८५७ का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
शामली का युद्ध yes इस्लाम सुन्नी हनफ़ी मातुरीदी
मुहम्मद याक़ूब नानौतवी (1833–1884) एक भारतीय इस्लामी विद्वान थे। वे दारुल उलूम देवबंद के पहले प्रधानाचार्य थे।Tayyab Muhammad 1990 The Role of Shaikh-Ul-Hind Maulana Mahmud-Ul-Hasan in the Indian Freedom Movement Aligarh Muslim University एम.फिल. 20चंदे पर चलने वाला विश्व का पहला मदरसा है दारुल उलूम https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/saharanpur/darul-uloom-is-the-worlds-first-madrasa-to-run-on-donations-saharanpur-news-c-30-1-sha1002-13595-2023-11-26 अमर उजाला 26 नवम्बर 2023 13 अगस्त 2026
जीवन परिचय
मुहम्मद याक़ूब का जन्म सन् 1833 में ब्रिटिश भारत के सहारनपुर ज़िले के नानौता क़स्बे में हुआ।आसिर अदरवी. तज़्किरा मशाहीर-ए-हिन्द: कारवान-ए-रफ़्ता (उर्दू में) (2 अप्रैल 2016 संस्करण). देवबंद: दारुल मुअल्लिफ़ीन. पृ. 269.प्रोफ़ेसर नूरुल हसन शेरकोटी. "हज़रत मौलाना मुहम्मद याक़ूब नानौतवी". इन: देवबंदी, नवाज़ (सं.). सवानेह उलमा-ए-देवबंद (उर्दू में) (जनवरी 2000 संस्करण). देवबंद: नवाज़ पब्लिकेशन्स. पृ. 90–214. उनके पिता ममलूक अली नानौतवी उस समय के बड़े इस्लामी विद्वानों में से एक थे और मदरसा ग़ाज़ीउद्दीन ख़ान में प्राच्य अध्ययन (ओरिएंटल स्टडीज़) के प्रमुख थे। मुहम्मद याक़ूब ने अधिकतर इस्लामी विद्याएँ अपने पिता से और शाह अब्दुल ग़नी मुजद्दिदी से पढ़ीं। उनके अन्य उस्तादों में अहमद अली सहारनपुरी भी शामिल हैं। उन्होंने हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की से तसव्वुफ़ (आध्यात्मिकता) की शिक्षा ली और उनसे चिश्ती, नक़्शबंदी, क़ादरी और सुहरवर्दी सिलसिलों में ख़िलाफ़त (आध्यात्मिक अनुमति) प्राप्त की।
सन् 1852 में मुहम्मद याक़ूब को गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर में अध्यापक नियुक्त किया गया। कॉलेज के प्रधानाचार्य की सिफ़ारिश पर उन्हें डिप्टी कलेक्टर का पद पेश किया गया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। बाद में उनका तबादला बनारस कर दिया गया और फिर उन्हें सहारनपुर में डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया गया।
सन् 1866 में मुहम्मद याक़ूब को दारुल उलूम देवबंद का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया। मुहम्मद मियाँ देवबंदी लिखते हैं कि दिन-प्रतिदिन विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर अच्छे शिक्षकों की आवश्यकता महसूस हुई और इसी कारण मौलाना मुहम्मद याक़ूब को प्रधानाचार्य बनाकर बुलाया गया।मुहम्मद मियाँ देवबंदी. "उलमा-ए-हक़ और उनके मजाहिद". पृ. 75. उनके शिष्यों में दूसरी पीढ़ी के अधिकांश इस्लामी विद्वान शामिल हैं, जिनमें महमूद हसन देवबंदी, अज़ीज़ुर्रहमान उस्मानी, सैय्यद मुमताज़ अली, हाफ़िज़ मुहम्मद अहमद, खलील अहमद सहारनपुरी और अशरफ़ अली थानवी प्रमुख हैं। उन्होंने क़ासिम नानौतवी की जीवनी "सवानेह उम्री हज़रत मौलाना क़ासिम नानौतवी" लिखी, जिसका अरबी अनुवाद "अल-इमाम मुहम्मद क़ासिम अन-नानौतवी कमा रआइतुहू" के नाम से हुआ।आरिफ़ जमील मुबारकपुरी (अनुवादक). "अल-इमाम मुहम्मद क़ासिम अन-नानौतवी कमा रआइतुहू".
सन् 1884 में हैज़ा (कोलेरा) से 51 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया और उन्हें उनके पैतृक क़स्बे नानौता में दफ़नाया गया।
सन्दर्भ