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411 समाचार
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भारत में किसान आत्महत्या

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भारत में किसान आत्महत्या १९९० के बाद पैदा हुई स्थिति है जिसमें प्रतिवर्ष दस हज़ार से अधिक किसानों के द्वारा आत्महत्या की रपटें दर्ज की गई है। १९९७ से २००६ के बीच १,६६,३०४ किसानों ने आत्महत्या की।http://www.im4change.org/hindi/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-70.html खेतिहर संकट 11 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131007153403/http://www.im4change.org/hindi/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-70.html 7 अक्तूबर 2013 dead भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानसून की असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियाँ, समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फँसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसानों ने आत्महत्याएँ की है।Shiva Vandana Why Are Indian Farmers Committing Suicide and How Can We Stop This Tragedy? http://www.voltairenet.org/article159305.html Voltaire Network 14 अप्रैल 2013 https://web.archive.org/web/20131026112837/http://www.voltairenet.org/article159305.html 26 अक्तूबर 2013 live इतिहास १९९० ई. में प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार द हिंदू के ग्रामीण मामलों के संवाददाता पी. साईंनाथ ने किसानों द्वारा नियमित आत्महत्याओं की सूचना दी। आरंभ में ये रपटें महाराष्ट्र से आईं। जल्दी ही आंध्रप्रदेश से भी आत्महत्याओं की खबरें आने लगी। शुरुआत में लगा कि अधिकांश आत्महत्याएँ महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों ने की हैं। लेकिन महाराष्ट्र के राज्य अपराध लेखा कार्यालय से प्राप्त आँकड़ों को देखने से स्पष्ट हो गया कि पूरे महाराष्ट्र में कपास सहित अन्य नकदी फसलों के किसानों की आत्महत्याओं की दर बहुत अधिक रही है। आत्महत्या करने वाले केवल छोटी जोत वाले किसान नहीं थे बल्कि मध्यम और बड़े जोतों वाले किसानों भी थे। राज्य सरकार ने इस समस्या पर विचार करने के लिए कई जाँच समितियाँ बनाईं। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सरकार द्वारा विदर्भ के किसानों पर व्यय करने के लिए ११० अरब रूपए के अनुदान की घोषणा की। बाद के वर्षों में कृषि संकट के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने आत्महत्याएँ की। इस दृष्टि से २००९ अब तक का सबसे खराब वर्ष था जब भारत के राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय ने सर्वाधिक १७,३६८ किसानों के आत्महत्या की रपटें दर्ज कीं। सबसे ज़्यादा आत्महत्याएँ महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई थी। इन ५ राज्यों में १०७६५ यानी ६२% आत्महत्याएँ दर्ज हुई।One farmer's suicide every 30 minutes https://web.archive.org/web/20081119063120/http://www.indiatogether.org/2007/nov/psa-mids4.htm 19 नवंबर 2008 द्वारा पी॰ साईनाथ, सौजन्य से : indiatogether.org ; अभिगमन तिथि : १२ अक्टूबर २०१३ आंकड़े राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय के आँकड़ों के अनुसार भारत भर में २००८ ई. में १६,१९६ किसानों ने आत्महत्याएँ की थी। २००९ ई. में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या में १,१७२ की वृद्धि हुई। 2009 के दौरान 17368 किसानों द्वारा आत्महत्या की आधिकारिक रपट दर्ज हुई।http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/12/101228_farm_sucide_pn.shtml भारत - अब भी हज़ारों किसान कर रहे हैं आत्महत्या:बीबीसी हिंदी 12 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20110126005158/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/12/101228_farm_sucide_pn.shtml 26 जनवरी 2011 live "राष्ट्रीय अपराध लेखा कार्यालय" द्वारा प्रस्तुत किये गए आँकड़ों के अनुसार १९९५ से २०११ के बीच १७ वर्ष में ७ लाख, ५० हजार, ८६० किसानों ने आत्महत्या की है। भारत में धनी और विकसित कहे जाने वाले महाराष्ट्र में अब तक आत्महत्याओं का आँकड़ा ५० हजार ८६० तक पहुँच चुका है। २०११ में मराठवाड़ा में ४३५, विदर्भ में २२६ और खानदेश (जलगाँव क्षेत्र) में १३३ किसानों ने आत्महत्याएँ की है। आंकड़े बताते हैं कि २००४ के पश्चात् स्थिति बद से बदतर होती चली गई। १९९१ और २००१ की जनगणना के आँकड़ों को तुलनात्मक देखा जाए तो स्पष्ट हो जाता है कि किसानों की संख्या कम होती चली जा रही है। २००१ की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस वर्षों में ७० लाख किसानों ने खेती करना बंद कर दिया। २०११ के आंकड़े बताते हैं कि पाँच राज्यों क्रमश: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुल १५३४ किसान अपने प्राणों का अंत कर चुके हैं।http://hindi.ibtl.in/news/national/1993/article.ibtl/ आई बी टी एल: केवल सत्रह वर्ष में 7 लाख, 50 हजार, 860 किसानों ने की आत्महत्या 12 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131013171053/http://hindi.ibtl.in/news/national/1993/article.ibtl/ 13 अक्तूबर 2013 dead सन् २०१८ में देश भर में १०,००० से अधिक किसानों ने आत्महत्या की।https://www.bhaskar.com/national/news/more-than-ten-thousand-farmers-committed-suicide-in-2018-ncrb-data-reveled-126475882.html 2018 में 10349 किसानों ने आत्महत्या की.. 6 फ़रवरी 2020 https://web.archive.org/web/20200113182924/https://www.bhaskar.com/amp/national/news/more-than-ten-thousand-farmers-committed-suicide-in-2018-ncrb-data-reveled-126475882.html 13 जनवरी 2020 live आबादी के अनुपात में उत्तर प्रदेश में किसानों की आत्महत्या का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम जरूर रहा है फिर भी वहाँ भी काफी तादाद में किसान आत्महत्या कर चुके हैं। एक खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सन् २०१३ में किसानों की आत्महत्या के ७५० मामले सामने आये थे।https://khabar.ndtv.com/news/india/up-govt-hiding-actual-suicide-cases-of-farmers-751687 फसल बर्बाद होने से यूपी में जान देते किसान. 6 फ़रवरी 2020 https://web.archive.org/web/20151223014923/http://khabar.ndtv.com/news/india/up-govt-hiding-actual-suicide-cases-of-farmers-751687 23 दिसंबर 2015 dead गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष २०१४ में यह आंकड़ा महज १४५ का था, लेकिन २०१५ में ३२४ पर पहुँच गया था।https://m.patrika.com/amp-news/varanasi-news/suicide-rate-of-farmers-in-up-much-higher-then-madhya-pradesh-1597202/ यूपी में किसानों की आत्महत्या की वृद्धि... 6 फ़रवरी 2020 6 फ़रवरी 2020 https://web.archive.org/web/20200206160716/https://m.patrika.com/amp-news/varanasi-news/suicide-rate-of-farmers-in-up-much-higher-then-madhya-pradesh-1597202/ dead सरकार की तमाम कोशिशों और दावों के बावजूद कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला नहीं रूक रहा। देश में हर महीने ७० से अधिक किसान आत्महत्या कर रहे हैं।http://zeenews.india.com/hindi/news/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87-70-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/145132 ज़ी न्यूज़, १९ अगस्त २०१२, शीर्षक: हर महीने 70 किसान कर रहे हैं आत्महत्या 12 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131013121527/http://zeenews.india.com/hindi/news/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87-70-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/145132 13 अक्तूबर 2013 live कारण किसानों को आत्महत्या की दशा तक पहुँचा देने के मुख्य कारणों में खेती का आर्थिक दृष्टि से नुकसानदायक होना तथा किसानों के भरण-पोषण में असमर्थ होना है। कृषि की अनुपयोगिता के मुख्य कारण हैं- कृषि जोतों का छोटा होते जाना - १९६०-६१ ई. में भूस्वामित्व की इकाई का औसत आकार २.३ हेक्टेयर था जो २००२-०३ ई. में घटकर १। ०६ हेक्टेयर रह गया।http://www.im4change.org/hindi/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-70.html खेतिहर संकट 11 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131007153403/http://www.im4change.org/hindi/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-70.html 7 अक्तूबर 2013 dead भारत में उदारीकरण की नीतियों के बाद खेती (खासकर नकदी खेती) करने का तरीका बदल चुका है। सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण “पिछड़ी जाति” के किसानों के पास नकदी फसल उगाने लायक तकनीकी जानकारी का अक्सर अभाव होता है और बहुत संभव है कि ऐसे किसानों पर बीटी-कॉटन आधारित कपास या फिर अन्य पूंजी-प्रधान नकदी फसलों की खेती से जुड़ी कर्जदारी का असर बाकियों की तुलना में कहीं ज्यादा होता हो।http://hindi.indiawaterportal.org/node/34289 इंडिया वाटर पोर्टल हिन्दी: मानवाधिकार संगठन की नई रिपोर्ट - किसान-आत्महत्या के कुछ अनदेखे पहलू 12 अक्तूबर 2013 https://web.archive.org/web/20131013203537/http://hindi.indiawaterportal.org/node/34289 13 अक्तूबर 2013 dead इन्हें भी देखें सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ डॉ॰ विजय शिंदे का आलेख - आधारहीन किसानों का खेती से पलायन 'मूठमाती' Farmers' suicide in India ईपीडब्ल्यू पर, अभिगमन तिथि : १२ अक्टूबर २०१३ Farmers Suicides in India द्वारा : Dr. Vandana Shiva, Kunwar Jalees, सौजन्य से : Research Foundation for Science, Technology and Ecology; A-60, Hauz Khas, नई दिल्ली - 110 016, भारत भारत में किसानों की आत्महत्या के कारण Farmers’ suicide rates soar above the rest द्वारा : पी॰ साईनाथ, द हिन्दू, अभिगमन तिथि : २१ अक्टूबर २०१३ श्रेणी:भारत में किसान आत्महत्या श्रेणी:भारत में आत्महत्या श्रेणी:भारत में सामाजिक-आर्थिक मुद्दे