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दोल जात्रा
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दोल जात्रा Radhamadhava.JPG दोल जात्रा में राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है दोल जात्रा दोल उत्सव हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी, धार्मिक निष्ठा, उत्सव, मनोरंजन अत्यंत प्राचीन फाल्गुन पूर्णिमा धार्मिक, सामाजिक ७ मार्च रंग खेलना रंग खेलना, गाना-बजाना, हुड़दंग होली
दोल जात्रा या दोल उत्सव बंगाल में होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। डोलजात्रा बांग्ला मास के पन्द्रहवें दिन - फाल्गुन को मनाया जाता है। डोलजात्रा पूर्णिमा का त्योहार है। इस दिन महिलाएँ लाल किनारी वाली पारंपरिक सफ़ेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती हैं और प्रभात-फेरी (सुबह निकलने वाला जुलूस) का आयोजन करती हैं। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं। दोल शब्द का मतलब झूला होता है। झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्ति रख कर महिलाएँ भक्ति गीत गाती हैं और उनकी पूजा करती है। इस दिन अबीर और रंगों से होली खेली जाती है। इस दोल यात्रा में चैतन्य महाप्रभु द्वारा रचित कृष्ण-भक्ति संगीत की प्रचुरता रहती है। प्राचीन काल में इस अवसर पर ज़मीदारों की हवेलियों के सिंहद्वार आम लोगों के लिए खोल दिये जाते थे। उन हवेलियों में राधा-कृष्ण के मंदिर में पूजा-अर्चना और भोज चलता रहता था। किंतु समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आया है।http://www.holifestival.org/dol-purnima.html दोल पूर्णिमा 15 मार्च 2008 होलीफ़ेस्टिवल.ऑर्ग अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20080329020439/http://www.holifestival.org/dol-purnima.html 29 मार्च 2008 dead
शांतिनिकेतन की होली का ज़िक्र किये बिना दोल उत्सव अधूरा है। काव्यगुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर ने वर्षों पहले वहाँ बसंत उत्सव की जो परंपरा शुरू की थी, वो आज भी जैसी की तैसी है। विश्वभारती विश्वविद्यालय परिसर में छात्र और छात्राएँ आज भी पारंपरिक तरीक़े से होली मनाती हैं। लड़कियाँ लाल किनारी वाली पीली साड़ी में होती हैं। और लड़के धोती और कुर्ता पहनते हैं। वहाँ इस आयोजन को देखने के लिए बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों तक से भी भारी भीड़ उमड़ती है। इस मौक़े पर एक जुलूस निकाल कर अबीर और रंग खेलते हुए विश्वविद्यालय परिसर की परिक्रमा की जाती है। इसमें अध्यापक भी शामिल होते हैं। रवीन्द्रनाथ की प्रतिमा के पास इस उत्सव का समापन होता है। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। शांतिनिकेतन और कोलकाता-स्थित रवीन्द्रनाथ के पैतृक आवास, जादासांको में आयोजित होने वाला बसंत उत्सव बंगाल की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_bengal.shtml बंगाल की होली 4 मार्च 2008 बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061103/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040305_holi_bengal.shtml 8 मार्च 2006 live
सन्दर्भ
श्रेणी:होली