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411 समाचार
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शिव कुमार बटालवी

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Shiv Kumar Batalvi, 1970.jpg 200px शिव कुमार 'बटालवी' बिरहा दा सुलतान शिव कुमार 1936 7 23 y बड़ापिंड, शकरगढ़ तहसील, पंजाब, अविभाजित भारत 1973 5 7 1936 7 23 y कीर मंग्याल, पठानकोट, भारत कवि, लेखक, नाटककार भारतीय 1960-1973 कविता, ग़ज़ल, नज़्म, किस्सा, गद्य, नाटक दर्द, प्रेम, विरह लूना (1965) 250px right true #c6dbf7 right मैंनू तेरा शबाब लै बैठा मैंनू तेरा शबाब लै बैठा, रंग गोरा गुलाब लै बैठा। किन्नी पीती ते किन्नी बाकी ए मैंनू एहो हिसाब लै बैठा चंगा हुंदा सवाल ना करदा, मैंनू तेरा जवाब लै बैठा दिल दा डर सी किते न लै बैठे लै ही बैठा जनाब लै बैठा शिव कुमार 'बटालवी' (ਸ਼ਿਵ ਕੁਮਾਰ ਬਟਾਲਵੀ) (1936 -1973) पंजाबी भाषा के एक विख्यात कवि थे, जो उन रोमांटिक कविताओं के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं, जिनमें भावनाओं का उभार, करुणा, जुदाई और प्रेमी के दर्द का बखूबी चित्रण है।नलिनी नटराजन द्वारा हैंडबुक ऑफ़ ट्वेंटीएथ-सेंचरी लिट्रेचर्स ऑफ़ इंडिया, इममैन्युल सैमपाथ नेल्सन. ग्रीनवुड प्रेस, 1996. ISBN 0-313-28778-3. पृष्ठ 258 . वे 1967 में वे साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये। साहित्य अकादमी (भारत की साहित्य अकादमी) ने यह सम्मान पूरण भगत की प्राचीन कथा पर आधारित उनके महाकाव्य नाटिका लूणा (1965)पंजाबी भाषा की सूची के पुरस्कार https://web.archive.org/web/20090331234058/http://www.sahitya-akademi.gov.in/old_version/awa10316.htm#punjabi 31 मार्च 2009 साहित्य अकादमी पुरस्कार आधिकारिक लिस्टिंग. के लिए दिया, जिसे आधुनिक पंजाबी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है विश्व कला प्रदर्शन समारोह: कला के छात्रों से विदेशी कलाकार विस्मित हो गए डेली टाइम्स (पाकिस्तान), 16 नवम्बर 2006. और जिसने आधुनिक पंजाबी किस्सागोई की एक नई शैली की स्थापना की।शिव कुमार द ट्रिब्यून, 4 मई 2003. आज उनकी कविता आधुनिक पंजाबी कविता के अमृता प्रीतम और मोहन सिंह जैसे दिग्गजों के बीच बराबरी के स्तर पर खड़ी है,आधुनिक पंजाबी प्यार के कविता के पायनियर्स द ट्रिब्यून, 11 जनवरी 2004.जिनमें से सभी भारत- पाकिस्तान सीमा के दोनों पक्षों में लोकप्रिय हैं। बटाला घटना डेली टाइम्स (पाकिस्तान), 19 मई 2004.. जीवनी शिव कुमार का जन्म 23 जुलाई 1936 को गांव बड़ा पिंड लोहटिया, शकरगढ़ तहसील (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में)शिव कुमार बटालवी का गांव बड़ापिंड, जहां वे पैदा हुए थे - बड़ापिंड की वेब साइटजनवरी 2021 InternetArchiveBot राजस्व विभाग के ग्राम तहसीलदार पंडित कृष्ण गोपाल और गृहिणी शांति देवी के घर में हुआ। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार गुरदासपुर जिले के बटाला चला आया, जहां उनके पिता ने पटवारी के रूप में अपना काम जारी रखा और बाल शिव ने प्राथमिक शिक्षा पाई। शिव कुमार बटालवी द ट्रिब्यून, 30 अप्रैल 2000. 1953 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक किया और बटाला के बैरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज में एफ एससी कार्यक्रम में नामांकित हुए। अपनी डिग्री पूरी करने से पहले उन्होंने कादियाँ के एस एन कॉलेज के कला विभाग में दाखिला लिया, जो उनके व्यक्तित्व से ज्यादा मेल खाता था, हालांकि दूसरे साल में उन्होंने उसे भी छोड़ दिया। उसके बाद वह हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ के एक स्कूल में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लेने के लिए दाखिल हुए, पर फिर उन्होंने इसे भी बीच में ही छोड़ दिया। शिव कुमार बटालवी https://web.archive.org/web/20030410071639/http://www.sikh-heritage.co.uk/arts/shiv%20batalvi/Shiv%20batalvi.htm 10 अप्रैल 2003 sikh-heritage.co.uk. इसके बाद उन्होंने नाभा के सरकारी रिपुदमन कालेज में अध्ययन किया। उन्हें विख्यात पंजाबी लेखक गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी की बेटी से प्यार हो गया, जिन्होंने दोनों के बीच जाति भेद होने के कारण एक ब्रिटिश नागरिक से शादी कर ली। वह प्यार में दुर्भाग्यशाली रहे और प्यार की यह पीड़ा उनकी कविता में तीव्रता से परिलक्षित होती है। बाद की जिंदगी में उनके पिता को कादियां में पटवारी की नौकरी मिली और इसी अवधि के दौरान उन्होंने अपना सबसे अच्छा साहित्यिक अवदान दिया। 1960 में उनकी कविताओं का पहला संकलन पीड़ां दा परागा (दु:खों का दुपट्टा) प्रकाशित हुआ, जो काफी सफल रहा। 1965 में अपनी महत्वपूर्ण कृति महाकाव्य नाटिका लूणा (1965) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले वे सबसे कम उम्र के साहित्यकार बन गये।साहित्य अकादमी अवॉर्ड - पंजाबी 1957-2007 https://web.archive.org/web/20090331234058/http://www.sahitya-akademi.gov.in/old_version/awa10316.htm#punjabi 31 मार्च 2009 साहित्य अकादमी अवॉर्ड आधिकारिक लिस्टिंग काव्य पाठ और अपनी कविता को गाने की वजह से लोगों में वे और उनका काम काफी प्रसिद्ध हुआ। 5 फ़रवरी 1967 को उनका विवाह गुरदासपुर जिले के किरी मांग्याल की ब्राह्मण कन्या अरुणा से हुआ बटालवी बेतर हाफ कंस कॉलिंग द ट्रिब्यून, 8 मई 2003. और बाद में दंपती को दो बच्चे मेहरबां (1968) और पूजा (1969) हुए। 1968 में चंडीगढ़ चले गये, जहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जन संपर्क अधिकरी बने। बाद के वर्षों में वे खराब स्वास्थ्य से त्रस्त रहे, हालांकि उन्होंने बेहतर लेखन जारी रखा। निधन उनके लेखन में उनकी चर्चित मौत की इच्छा हमेशा से स्पष्ट रही है।मौत बरसी में बटालवी जिंदा लाया गया इंडियन एक्सप्रेस, 6 मई 2003. और 7 मई 1973 में 36 साल की उम्र में शराब की दुसाध्य लत के कारण हुए लीवर सिरोसिस के परिणामस्वरूप पठानकोट के किरी मांग्याल में अपने ससुर के घर पर उनका निधन हो गया। कार्य 250px right true #c6dbf7 right मैंनू विदा करो (मुझे विदा करो) असां ते जोबन रुत्ते मरना, मर जाणां असां भरे भराए, हिजर तेरे दी कर परिकरमा.. (हमें तो यौवन की ऋतु में मरना है, मर जाएंगे हम भरे पूरे तुम से जुदाई की परिक्रमा पूरी करके) 250px right true #c6dbf7 right जित्थे मोए बाद वी , कफ़न नहीं होया नसीब। कौन पागल हुण करे , ऐतबार तेरे शहर दा।। ऐथे मेरी लाश तक , नीलाम कर दित्ती गयी। लत्थेया कर्जा ना, फेर वी यार तेरे शहर दा।। शैली प्रेम में नाकामी की वजह से शिव की रचनाओं में विरह व दर्द का भाव अति प्रबल है। अमृता प्रीतम ने इन्हें "बिरहा का सुल्तान" कहा। इसी नाम से ही प्रख्यात ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने भी एक एलबम निकाला। शिव की रचनाओं में निराशा व मृत्यु की इच्छा प्रबल रूप से दिखाई पड़ती है। प्रकाशित रचनाओं की सूची पीड़ां दा परागा (दु:खों का दुपट्टा) (1960) मैनूं विदा करो (मुझे विदा करो)(1963) गजलां ते गीत (गज़लें व गीत) आरती (1971) लाजवंती (1961) आटे दियां चिड़ियां (आटे की गौरैयां) (1962). लूना (1965) मैं ते मैं (मैं और मैं) (1970) दर्दमंदां दिया आहिन सोग (शोक) अलविदा (विदाई) (1974) शिव कुमार : संपूर्ण काव्य संग्रह (संपूर्ण कार्य); लाहौर बुक शॉप, लुधियाना. बिरहा दा सुल्तान "बिरहा दा सुल्तान". द ट्रिब्यून, 7 मई 2005. अमृता प्रीतम द्वारा दिया गया एक नाम., (शिव कुमार बटालवी की कविताओं का चयन) अमृता प्रीतम द्वारा चयनित, साहित्य अकादमी, 1993. आईएसबीएन 81-7201-417-1. लूना (अंग्रेजी, बी.एम.भट्टा द्वारा अनुदित, साहित्य अकादमी, 2005, आईएसबीएन 81-260-1873-9. विरासत उनके एक संकलन अलविदा (विदाई) का प्रकाशन 1974 में मरणोपरांत अमृतसर के गुरु नानक देव विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। हर साल सर्वश्रेष्ठ लेखक को 'शिव कुमार बटालवी पुरस्कार' दिया जाता हैसात पंजाबी लेखक, लोक गायकों को सम्मानित द ट्रिब्यून, 21 अक्टूबर 2003.शिव कुमार बटालवी पुरस्कार द ट्रिब्यून, 16 अप्रैल 2002. . मीडिया में उनकी कई कविताओं को दीदार सिंह परदेसी ने गाया है। जगजीत सिंह-चित्रा सिंह और सुरिंदर कौर ने भी उनकी अनेक कविताओं का गायन किया है।शिव कुमार बटालवी नुसरत फतेह अली खान ने उनकी कविता "माई नी माई" को गीत में ढाला है, जो अपनी रूहानी पुकार और चित्रात्मकता के लिए जाना जाता है। रब्बी शेरगिल के हाल ही के एक एल्बम रब्बी (2004) में उनकी कविता इश्तिहार भी शामिल है। पंजाबी लोक गायक हंस राज हंस भी शिव कुमार की कविता पर 'गम' नामक एक लोकप्रिय एलबम बनाया। 2005 में इक कुड़ी जिदा ना मोहब्बत ...'शिव कुमार बटालवी' शीर्षक से एक संकलन एल्बम जारी किया गया, जिसके गीत महेंद्र कपूर, जगजीत सिंह और आसा सिंह मस्ताना ने गाये। एक कुड़ी जिदा नाँ मोहब्बत... Amazon.com. 2004 में चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में शिव कुमार के जीवन पर आधारित दर्दा दां दरिया शीर्षक से पंजाबी नाटक का मंचन किया गया।इन द दीप सी ऑफ़ पॉवर, एंड पोएट्री ऑफ़ पेन, पैथोस इंडियन एक्सप्रेस, 1 जून 2004. शिव कुमार बटालवी की कई कविताओं का प्रयोग हिंदी फिल्मो में होता रहा है। वर्ष २००९ में आयी फिल्म लव आज कल के लिए संगीतकार प्रीतम ने बटालवी की कविता "आज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा" पर गीत बनाया था। २०१६ में, संगीतकार अमित त्रिवेदी ने फिल्म उड़ता पंजाब के लिए उनकी कविता "एक कुड़ी" पर आधारित एक गीत बनाया था। इस गीत के तीन संस्करण थे, जिन्हें दिलजीत दोसांझ,Watch: Diljit Dosanjh croons Ikk Kudi for Alia Bhatt http://www.hindustantimes.com/bollywood/watch-diljit-dosanjh-croons-ikk-kudi-for-alia-bhatt/story-YnWMSxWPYPVL9DWvRJ0d9H.html 19 अक्तूबर 2017 ११ मई २०१६ हिंदुस्तान टाइम्स en शाहिद माल्याShahid Mallya: Amit Trivedi hugged me after I had recorded 'Ikk kudi' https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/music/news/Shahid-Mallya-Amit-Trivedi-hugged-me-after-I-had-recorded-Ikk-kudi/articleshow/52671951.cms 19 अक्तूबर 2017 १७ जनवरी २०१७ द टाइम्स ऑफ़ इंडिया और आलिया भट्टHave you heard this peppy version of Udta Punjab’s ‘Ikk Kudi’ sung by Aliya Bhatt, Diljit Dosanjh? http://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/udta-punjabs-ikk-kudi-sung-by-aliya-bhatt-diljit-dosanjh-club-mix-2859602/ 19 अक्तूबर 2017 १८ जून २०१६ द इंडियन एक्सप्रेस ने गाया था। आगे पढ़ें प्रोफेसर एस. सोज़ द्वारा मेकर्स ऑफ इंडियन लिटरेचर: शिव कुमार बटालवी , साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित, 2001. ISBN 81-260-0923-3. शिव कुमार बटालवी: जीवन आटे रचना ओम प्रकाश शर्मा द्वारा शिव बटालवी: अ सॉलिटरी एंड पैशोनेट सिंगर, 1979, स्टर्लिंग पब्लिशर्स, नई दिल्ली LCCN: 79-905007. जित सिंह सिटोला द्वारा शिव कुमार बटालवी, जीवन ते रचना . LCCN: 83-900413 धर्मपाल सिंगोला द्वारा शिव कुमार दा कवि जगत . LCCN: 79-900386 अमरीक सिंह पुन्नी द्वारा शिव कुमार, रचना संसार LCCN: 90-902390 सुरजीत सिंह कंवल द्वारा शिव कुमार, कवि विच विरह . LCCN: 88-901976 सन्दर्भ 30em बाहरी कड़ियाँ शिव कुमार बटालवी की कविताएँ शिव कुमार बटालवी पर एक जीवनी शिव कुमार बटालवी - जीवन और काव्य - पंजाब अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल शिव - एकांत के राजा https://web.archive.org/web/20100901185438/http://www.batalvi.org/ 1 सितंबर 2010 शिव कुमार बटालवी का गांव बारापिंड, जहां वह पैदा हुआ था - बारापिंड की वेबसाइटजनवरी 2021 InternetArchiveBot जीवनी https://web.archive.org/web/20100209000353/http://www.sadapunjab.com/cv/Literature_On_Punjab/PUNJAB/Shiv_Kumar_Batalvi/index0.html 9 फ़रवरी 2010 शिव कुमार बटालवी की ग़ज़लें /कविताएं https://web.archive.org/web/20201027072550/https://sites.google.com/site/kavitahindikavita/siva-kumara-batalavi 27 अक्तूबर 2020 वीडियो लिंक शिव कुमार बटालवी अपने काम को पढ़ते हुएजनवरी 2021 InternetArchiveBot शिव कुमार बटालवी का लाइव साक्षात्कार श्रेणी:1936 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७३ में निधन श्रेणी:पंजाबी कवि श्रेणी:गीतकार श्रेणी:पंजाबी गायक श्रेणी:पंजाबी भाषा के कवि श्रेणी:पंजाबी साहित्यकार श्रेणी:भारतीय नाटककार श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत पंजाबी भाषा के साहित्यकार श्रेणी:भारतीय हिन्दू श्रेणी:पंजाबी लोग श्रेणी:अमृतसर के लोग श्रेणी:चंडीगढ़ के लोग श्रेणी:भारत के विभाजन में विस्थापित लोग श्रेणी:शिव कुमार बटालवी