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411 समाचार
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गीदड़ (नृत्य)

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मई 2015 राजस्थान लोक नृत्य सियार गीदड़ नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह नृत्य राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यह केवल पुरुषों द्वारा होली के अवसर पर किया जाता है और शेखावाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध है।https://www.rajgk.in/2019/07/rajasthan-ke-lok-nritya-part-9.html शेखावाटी के नृत्य 19 जुलाई 2019 15 अक्टूबर 2021 राज rajgk.in राजस्थान का यह नृत्य समाज की एकता का सूत्रधार है। गीदड़ नृत्य का प्रमुख क्षेत्र शेखावाटी है, जिसमें राजलदेसर, सीकर, लक्ष्मणगढ़, चुरू, झुंझुनू, रामगढ़ व सुजानगढ़ आदि क्षेत्रों की गिनती की जाती हैं। होली के उत्सवी माहोल में यह नृत्य किया जाता हैं। प्रकिया यह शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है। यह नृत्य होली के अवसर पर किया जाता है तथा होली के दिनों में एक सप्ताह तक चलता है। नृत्य की प्रमुख विशेषताएँ- इसमें ताल, सुर और नृत्य का समन्वय देखने को मिलता है। यह नृत्य समाज की एकता का सूत्रधार है। इसमें होली से संबंधित गीत गाये जाते हैं। यह विशुद्ध रूप से पुरुषों का नृत्य है। इस नृत्य में नगाड़े की चोट पर पुरुष अपने दोनों हाथों में डण्डों को परस्पर टकराकर नृत्य करते हैं। प्रमुख वाद्ययंत्र-इस नृत्य में ढोल, डफ, चंग, नगाड़ा आदि वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। कुछ पुरुष महिलाओं के वस्त्र पहनकर इसमें भाग लेते हैं, जिन्हें गणगौर कहा जाता है। इस नृत्य में विभिन्न प्रकार के स्वांग रचाये जाते हैं जिनमें साधु, शिकारी, सेठ-सेठानी, दूल्हा-दुल्हन, सरदार, पठान, पादरी, बाजीगर आदि प्रमुख हैं। प्रकार यह एक प्रकार का स्वांग नृत्य है, अत: नाचने वाले शिव-पार्वती, सीता-राम, श्रीकृष्ण, सेठ-सेठानी, पठान, पादरी, बाजीगर, साधु, शिकारी योद्धा आदि विविध रूप धारण करके नृत्य करते हैं। इन्हें भी देखें शेखावाटी उत्सव सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ [का एक वीडियो] rs श्रेणी:राजस्थान के लोक नृत्य