Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

विशुनपुरा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

विशुनपुरा Bishunpura गाँव Bishunpura Village Deoria Uttar Pradesh 2026.jpg बिशुनपुरा ग्राम का दृश्य India Uttar Pradesh विशुनपुरा उत्तर प्रदेश में बिशुनपुरा की स्थिति 26.1847159 83.9166628 inline,title देश राज्य उत्तर प्रदेश ज़िला देवरिया तहसील सलेमपुर विकास खंड भागलपुर भाषाएँ प्रचलित हिन्दी, भोजपुरी 34.74 623 2011 विलेज कोड (Village Code) 191446 92 274505 7054203861 https://deoria.nic.in भारतीय मानक समय +5:30 स्थापना स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार प्राचीन बसावट बिशुनपुरा, कुंडावल तारा ग्राम सभा के अंतर्गत स्थित एक राजस्व ग्राम है। thumb|300px|बिशुनपुरा ग्राम का दृश्य विशुनपुरा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अन्तर्गत गोरखपुर मण्डल के देवरिया जिले कुंडावल तारा ग्रामपंचायत का एक गाँव है | विशुनपुरा (आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में बिशुनपुरा) की सलेमपुर तहसील और भागलपुर विकास खंड (ब्लॉक) के अंतर्गत आने वाला एक राजस्व गाँव है। यह गाँव प्रशासनिक रूप से कुंडावल तारा ग्राम पंचायत (ग्राम सभा) के क्षेत्राधिकार में आता है।http://brandbharat.com Villages in KURAWAL TARA Panchayat, Bhagalpur Block BrandBharat Govt Records 16 जून 2026 स्थानीय कानून व सुरक्षा व्यवस्था के लिए यहाँ का थाना लार पड़ता है तथा डाक व पत्राचार के लिए मुख्य डाकघर लार रोड पिन कोड 274505 है। निम्नलिखित कड़ियों (Links) के माध्यम से सीधे पढ़े जा सकते हैं: कुंडावल तारा ग्राम सभा के सभी गाँव: ग्राम पंचायत के गाँवों की सूची]] पर जा सकते हैं। लार रोड रेलवे स्टेशन ट्रेनों की सूची: समय सारणी की पूरी लिस्ट देखने के लिए सीधे लार रोड रेलवे स्टेशन समय सारणी पर जाकर तुरंत पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।https://etrain.info Lar Road Station Live Train List eTrain Info 16 जून 2026 इस गाँव में प्रसिद्ध स्थान प्रणामी मन्दिर तथा हनुमान मन्दिर है,यदुवंशी डीहस्थान, काली जी मन्दिर, sp yadav cricket ground स्थित है, इस गाँ व में ground ना होने यहाँ के लड़के जो गाँव का तालाब को साफ कर मैच खेलते है, जो 7महीने पानी भरा होता है, और 5महीने खेलने योग्य होता है, इस गाँव में 4 जातिनिवास करता है, जो यादव, पंडित, कुम्हार, गौड़ है, जो 100% में 48%यादव, 45%पंडित, 5%कुम्हार, 2%गौड़ निवास करता है,भारतीय संस्कृति इस गाँव के लोग हिन्दू धर्म के सभी त्यौहार को ख़ुशी एवं लगन से मानते है, इस गाँव के बच्चों को विद्या ग्रहण करने के लिए पांच तक प्राथमिक विद्यालय है, तथा 8वी° तक CBSC BORD विद्यालय है,तथा क़ृषि कार्य हेतु सभी उपकरण गाँव में मौजूद है, मै सतीश यादव सुपुत्र-रामदयाल यादव इस गाँव का निवासी होने के कारण पुरे दुनिया को अपने गाँव के रहन-सहन विवरण देना चाहता हूँ तथा मैं सभी दुनिया को अपने गाँव के तरफ से हार्दिक स्वागत करता हूँ| रेलवे स्टेशन की दूरी लार रोड सबसे निकट रेलवे स्टेशन लार रोड है, जो यहाँ से 2.8km है, सभी ग्रामवासियो को बजार करने के लिये लार रोड या सलेमपुर जाते है, वाराणसी-मऊ की तरफ जाने वाली ट्रेनें (Down Trains)काशी एक्सप्रेस (15018 - गोरखपुर से एलटीटी): सुबह 07:39 बजे आगमन और 07:41 बजे प्रस्थान। यह ट्रेन काशी और वाराणसी जंक्शन दोनों स्टेशनों पर रुकती है।लिच्छवी एक्सप्रेस (14005 - सीतामढ़ी से आनंद विहार): दोपहर 11:51 बजे आगमन और 11:53 बजे प्रस्थान।कृषक एक्सप्रेस (15008 - लखनऊ से वाराणसी सिटी): सुबह 08:33 बजे आगमन और 08:35 बजे प्रस्थान। गोरखपुर की तरफ जाने वाली ट्रेनें (Up Trains)एलटीटी गोरखपुर एक्सप्रेस (15017): शाम 16:16 बजे आगमन और 16:18 बजे प्रस्थान।लिच्छवी एक्सप्रेस (14006 - आनंद विहार से सीतामढ़ी): सुबह 09:18 बजे आगमन और 09:20 बजे प्रस्थान।कृषक एक्सप्रेस (15007 - वाराणसी सिटी से लखनऊ): रात 19:52 बजे आगमन और 19:54 बजे प्रस्थान। पैसेंजर और मेमू ट्रेनें(Local Passenger)भटनी - वाराणसी सिटी मेमू (65107): सुबह 06:23 बजे आगमन और 06:25 बजे प्रस्थान। हवाई अड्डा जबकि निकटतम हवाई अड्डा गोरखपुर हवाई अड्डा है, जो लगभग 63.27 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित है। विशुनपुरा का पड़ोसी गाँव विशुनपुरा के दक्षिण में भेवली, उत्तर में कुरावाल हरि,उत्तर पूरब में कुरावाल तार,पूरब में बुधनपुरा,दक्षिण पूरब में तिलौली, पूरब दक्षिण में रंगौली गाँव स्थिर है| धार्मिक स्थल सोहगरा धाम जो भगवान शंकर का शिवलिंग स्थिर है, सावन मास में भक्तो की काफी भीड़ उमड़ती है, जो भगवान शंकर को जल चढ़ाने के लिये भागलपुर घाघरा नदी से जल लाते है, विशुनपुरा गाँव से सोहगरा धाम की दूरी 14.2km है, धार्मिक स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर हनुमान जी मंदिर (विशुनपुरा) यदुवंशी सदन (डीह स्थान) खेलकूद एसपी यादव क्रिकेट ग्राउंड जनसांख्यिकी भारत की 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बिशुनपुरा गाँव का विलेज कोड (Village Code) 191446 है।https://www.census2011.co.in/data/village/191446-bishunpura-uttar-pradesh.html Bishunpura Population - Deoria, Uttar Pradesh - Census 2011 Census 2011 16 जून 2026 यह गाँव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की सलेमपुर तहसील और कुंडावल तारा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है।https://vill.co.in/uttar-pradesh/deoria/salempur-190009620/bishunpura-009621914460/ Bishunpura Village in Salempur, Deoria, Uttar Pradesh Vill.co.in 16 जून 2026 गाँव की मुख्य सांख्यिकीय जानकारी निम्नलिखित है: कुल क्षेत्रफल: 34.74 हेक्टेयर कुल परिवार: 92 कुल जनसंख्या: 623 पुरुष जनसंख्या: 276 महिला जनसंख्या: 347 लिंगानुपात (Sex Ratio): 1,257 (प्रति 1000 पुरुषों पर 1,257 महिलाएँ हैं, जो उत्तर प्रदेश के राज्य औसत 912 से काफी बेहतर है)। बाल जनसंख्या (0-6 वर्ष): 73 (कुल जनसंख्या का 11.72%) साक्षरता दर: गाँव की कुल साक्षरता दर 66.36% है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता 72.58% तथा महिलाओं की साक्षरता दर 61.26% है। विशुनपुरा ग्राम का पारंपरिक इतिहास एवं लोकवृत्त प्रस्तावना विशुनपुरा उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद की सलेमपुर तहसील के अंतर्गत भागलपुर विकास खंड में स्थित एक प्राचीन ग्राम है। यह कुंडावल तारा ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले तीन प्रमुख गाँवों—कुंडावल तारा, बढ़नपुरा और विशुनपुरा—में से एक है। वर्तमान में यह गाँव अपनी सामाजिक एकता, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक लोकस्मृतियों के लिए जाना जाता है। विशुनपुरा का लिखित इतिहास सीमित है, किंतु गाँव के बुजुर्गों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई गई जनश्रुतियाँ इसके अतीत की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करती हैं। इन्हीं मौखिक परंपराओं के आधार पर यह ऐतिहासिक विवरण तैयार किया गया है। --- प्राचीन पृष्ठभूमि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बिशुनपुरा जिस भूभाग में स्थित है, वह प्राचीन काल में मल्ल क्षेत्र का हिस्सा था। बाद के समय में यह क्षेत्र विभिन्न स्थानीय राजवंशों और सामंतों के अधीन रहा। गाँव के बुजुर्गों का मानना है कि इस पूरे भूभाग का संबंध आगे चलकर मजौली राज से जुड़ गया, जिसका प्रभाव वर्तमान देवरिया, कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों तक माना जाता था। ग्रामीण परंपरा में कहा जाता है कि यह भूमि सदियों से कृषि, पशुपालन और ग्रामीण जीवन का केंद्र रही है तथा अनेक पीढ़ियाँ यहाँ निवास करती रही हैं। --- मझौली राज का उदय मझौली राज ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार मझौली राज इस क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली रियासतों में से एक था। लोकपरंपराओं में इसके संस्थापक के रूप में विश्वसेन नामक राजा का उल्लेख मिलता है, जिनके वंश को आगे चलकर विसेन या बिसेन वंश कहा गया। कहा जाता है कि समय के साथ इस वंश के अनेक राजा हुए जिन्होंने पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना प्रभाव स्थापित किया। मझौली राज की शक्ति बढ़ने के साथ उसके अधीन अनेक छोटे गढ़, चौकियाँ और प्रशासनिक केंद्र स्थापित किए गए। --- धर्मेर गढ़ की स्थापना गाँव के बुजुर्गों के अनुसार मझौली राज के प्रभाव काल में धर्मेर क्षेत्र को विशेष महत्व प्राप्त था। स्थानीय परंपरा बताती है कि धर्मेर में एक गढ़ अथवा किलानुमा प्रशासनिक केंद्र स्थापित किया गया था जो मझौली राज के सहायक केंद्र के रूप में कार्य करता था। जनश्रुतियों के अनुसार धर्मेर के स्थानीय शासक या राजपरिवार का प्रभाव आसपास के क्षेत्रों तक था। ग्रामीण मानते हैं कि धर्मेर केवल एक सामान्य गाँव नहीं था बल्कि किसी समय प्रशासनिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान था। --- धर्मेर के राजा का विवाह और नई बसावट विशुनपुराके इतिहास की सबसे प्रसिद्ध लोककथा धर्मेर के राजा के विवाह से जुड़ी हुई है। गाँव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब धर्मेर के राजा का विवाह हुआ, तब विवाह समारोह में अनेक परिवार, पुरोहित, संबंधी, सहयोगी और विभिन्न समुदायों के लोग दूर-दूर से आए। विवाह सम्पन्न होने के बाद राजा ने अपने साथ आए कुछ परिवारों को आसपास की भूमि प्रदान की ताकि वे स्थायी रूप से बस सकें। कहा जाता है कि इन्हीं बसाए गए परिवारों से आगे चलकर बिशुनपुरा गाँव का निर्माण हुआ। --- विशुनपुरा नाम की उत्पत्ति स्थानीय परंपरा के अनुसार गाँव का नाम भगवान विष्णु के नाम पर रखा गया। पूर्वांचल की लोकभाषा में विष्णु को प्रायः "विशुन" कहा जाता है। ग्रामीण मानते हैं कि प्रारंभिक बसावट के समय वैष्णव परंपरा का प्रभाव होने के कारण इस नए बसे गाँव का नाम "विशुनपुरा" रखा गया, जिसका अर्थ हुआ—"भगवान विशुन (विष्णु) का गाँव"। इसी नाम से यह गाँव पीढ़ियों से जाना जाता रहा और आज तक अपनी पहचान बनाए हुए है। --- यादव समुदाय का आगमन गाँव की मौखिक परंपराओं के अनुसार बिशुनपुरा के यादव परिवारों का मूल संबंध सुमिरन यादव के पूर्वजों से माना जाता है। बुजुर्ग बताते हैं कि सुमिरन यादव के दादा के वंशज इस क्षेत्र में आकर बसे थे। प्रारंभिक काल में उन्होंने कृषि, पशुपालन और ग्राम विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समय के साथ यादव परिवारों की संख्या बढ़ती गई और वे गाँव की प्रमुख आबादी का हिस्सा बन गए। स्थानीय परंपरा में यादव समाज को गाँव की कृषि व्यवस्था और सामाजिक संगठन का मुख्य आधार माना जाता है। --- ब्राह्मण समुदाय का आगमन गाँव की लोकपरंपरा के अनुसार ब्राह्मण समुदाय के पूर्वजों में सुग्रीव मिश्रा तथा घनश्याम मिश्रा के दादा का विशेष उल्लेख किया जाता है। कहा जाता है कि इन्हें धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ, वैदिक संस्कारों और सामाजिक मार्गदर्शन के लिए यहाँ बसाया गया था। ब्राह्मण परिवारों ने ग्राम जीवन में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। --- अन्य समुदायों की बसावट ग्रामीण परंपरा यह भी बताती है कि गाँव को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से अन्य समुदायों को भी बसाया गया। इन समुदायों ने कृषि, शिल्प, पशुपालन, निर्माण, सामाजिक सेवा और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समय के साथ बिशुनपुरा एक पूर्ण विकसित ग्रामीण समाज के रूप में स्थापित हो गया। --- सलेमपुर का ऐतिहासिक संबंध ग्रामीण मान्यताओं में सलेमपुर का संबंध भी मझौली राज से जोड़ा जाता है। स्थानीय कथाओं के अनुसार मझौली राज के एक शासक का नाम परिवर्तन होकर सलीम हुआ था और उसी के नाम पर सलेमपुर नाम प्रचलित हुआ। यद्यपि इस विषय पर विभिन्न मत पाए जाते हैं, फिर भी स्थानीय परंपराओं में यह कथा व्यापक रूप से सुनाई जाती है। विशुनपुरा धर्मेर और आसपास के गाँव सलेमपुर क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिधि का हिस्सा माने जाते हैं। --- धार्मिक विरासत विशुनपुरा सदियों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। गाँव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में— श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर काली मंदिर शिव मंदिर यदुवंशी सदन डीहस्थान Sp Yadav cricket ground विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन स्थलों से गाँव की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। यदुवंशी डीहस्थान गाँव के बुजुर्ग यदुवंशी डीहस्थान को पूर्वजों की स्मृति और ग्राम इतिहास का प्रतीक मानते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान प्रारंभिक यादव बसावट और उनके पूर्वजों की स्मृति से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण आज भी इस स्थल के प्रति श्रद्धा रखते हैं। = श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर जी विशुनपुरा ग्राम का एक प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह मंदिर ग्राम के ब्राह्मण समाज के पूर्वजों की आस्था, धार्मिक परंपरा तथा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। गाँव के बुजुर्गों के अनुसार ब्राह्मण समाज के पूर्वज जब इस क्षेत्र में आकर बसे, तब उन्होंने वैदिक परंपराओं, धार्मिक संस्कारों तथा आध्यात्मिक जीवन को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर जी उसी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि ग्राम की सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की स्मृति का भी केंद्र माना जाता है। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पर्व एवं सामुदायिक कार्यक्रम यहाँ आयोजित किए जाते हैं। सामाजिक जीवन विशुनपुरा की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं बल्कि उसकी सामाजिक एकता से भी है। गाँव में विभिन्न समुदायों के लोग परस्पर सहयोग और सम्मान के साथ रहते आए हैं। विवाह, पर्व, उत्सव, धार्मिक अनुष्ठान तथा सामुदायिक कार्य गाँव की सामूहिक संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रारंभ से ही कृषि गाँव की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है। धान, गेहूँ, गन्ना, दलहन तथा अन्य फसलें यहाँ की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग रही हैं। पशुपालन भी ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग रहा है। आधुनिक विशुनपुरा समय के साथ विशुनपुरा शिक्षा, सड़क संपर्क, संचार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ा है। आज गाँव के लोग देश और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, यूट्यूबर सतीश गोरखपुरी के नाम से काफी प्रसिद्ध हैं जो इस विशुनपुरा के रहने वाले हैं जिन्हें सतीश यादव के नाम से जाना जाता है जो सुमिरन यादव के पोते हैं| फिर भी उनका संबंध अपनी जन्मभूमि से बना हुआ है। ग्राम सभा कुंडावल तारा के अंतर्गत स्थित यह गाँव अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता के कारण क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखता है। निष्कर्ष विशुनपुरा का इतिहास केवल लिखित अभिलेखों में नहीं बल्कि उसके लोगों की स्मृतियों, परंपराओं और लोककथाओं में जीवित है। धर्मेर के राजा के विवाह से जुड़ी बसावट की कथा, सुमिरन यादव के पूर्वजों का आगमन, ब्राह्मण परिवारों की स्थापना, धार्मिक स्थलों की परंपरा तथा मजौली राज से जुड़े लोकविश्वास—ये सभी मिलकर विशुनपुरा की ऐतिहासिक पहचान का निर्माण करते हैं। यद्यपि भविष्य में और शोध की आवश्यकता है, फिर भी गाँव की मौखिक परंपराएँ इसकी सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य भाग हैं और इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। श्रेणी:देवरिया जिले के गाँवश्रेणी:सलेमपुर तहसील के गाँव