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एड्स
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उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (एड्स) Red_Ribbon.svg लाल फीता: उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण का अंतर्राष्ट्रीय चिह्न 120 5938 B 24 b 20 042 000594 emerg 253 D000163
उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण संबंधित लघुनाम
AIDS: उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण
HIV: मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाण
CD4+: CD4+ टी सहायक कोशिकाएं
CCR5: चेमोकिन (C-C मोटिफ़) रिसेप्टर ५
CDC: रोग रोकथाम एवं निवारण केंद्र
WHO: विश्व स्वास्थ्य संगठन
PCP: न्यूमोसिस्टिस निमोनिया
TB: तपेदिक
MTCT: मां-से-संतान प्रसार
HAART: उच्च सक्रिय एंटीरिट्रोवियल चिकित्सा
STI/STD: यौन प्रसारित संक्रमण/रोग
उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (एड्स) (अंग्रेज़ी:acquired immunodeficiency syndrome (aids)) मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (मा॰प्र॰अ॰स॰) (एच॰आई॰वी) संक्रमण के बाद की स्थिति है, जिसमें मानव अपने प्राकृतिक प्रतिरक्षण क्षमता खो देता है। एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है, पर एड्स से पीड़ित मानव शरीर संक्रामक बीमारियों, जो कि जीवाणु और विषाणु आदि से होती हैं, के प्रति अपनी प्राकृतिक प्रतिरोधी शक्ति खो बैठता है क्योंकि एच.आई.वी (वह वायरस जिससे कि एड्स होता है) रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर आक्रमण करता है। एड्स पीड़ित के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर क्षय रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं। एच.आई.वी. संक्रमण को एड्स की स्थिति तक पहुंचने में ८ से १० वर्ष या इससे भी अधिक समय लग सकता है। एच.आई.वी से ग्रस्त व्यक्ति अनेक वर्षों तक बिना किसी विशेष लक्षणों के बिना रह सकते हैं।
एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है यानी कि यह एक महामारी है। एड्स के संक्रमण के तीन मुख्य कारण हैं - असुरक्षित यौन संबंधो, रक्त के आदान-प्रदान तथा माँ से शिशु में संक्रमण द्वारा। राष्ट्रीय उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण नियंत्रण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्रसंघ उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण] दोनों ही यह मानते हैं कि भारत में ८० से ८५ प्रतिशत संक्रमण असुरक्षित विषमलिंगी/विषमलैंगिक यौन संबंधों से फैल रहा है भारत में एड्सः शतुरमुर्ग सा रवैया निरंतर 2006-08-01 http://www.nirantar.org/0806-cover-bharat-mein-aids 25 दिसंबर 2009 https://web.archive.org/web/20101009132816/http://www.nirantar.org/0806-cover-bharat-mein-aids 9 अक्तूबर 2010 dead। माना जाता है कि सबसे पहले इस रोग का विषाणु: एच.आई.वी, अफ्रीका के खास प्राजाति की बंदर में पाया गया और वहीं से ये पूरी दुनिया में फैला। अभी तक इसे लाइलाज माना जाता है लेकिन दुनिया भर में इसका इलाज पर शोधकार्य चल रहे हैं। १९८१ में एड्स की खोज से अब तक इससे लगभग ३० करोड़ लोग जान गंवा बैठे हैं।
एड्स और एच॰आई॰वी॰ में अंतर
एच॰आई॰वी॰ एक अतिसूक्षम रोग विषाणु हैं जिसकी वजह से एड्स हो सकता है। एड्स स्वयं में कोई रोग नहीं है बल्कि एक संलक्षण है। यह मनुष्य की अन्य रोगों से लड़ने की नैसर्गिक प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता हैं। प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर फुफ्फुस प्रदाह, टीबी, क्षय रोग, कर्क रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं और मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है। यही कारण है की एड्स परीक्षण महत्वपूर्ण है। सिर्फ एड्स परीक्षण से ही निश्चित रूप से संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। एड्स एक तरह का संक्रामक यानी की एक से दुसरे को और दुसरे से तीसरे को होने वाली एक गंभीर बीमारी है। एड्स का पूरा नाम ‘एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम/उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण’ (acquired immune deficiency syndrome) है और यह एक तरह के विषाणु जिसका नाम HIV (Human immunodeficiency virus) है, से फैलती है। अगर किसीको HIV है तो ये जरुरी नहीं की उसको एड्स भी है। HIV वायरस की वजह से एड्स होता है अगर समय रहते वायरस का इलाज़ कर दिया गया तो एड्स होने का खतरा कम हो जाता है।
भारत में एड्स
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में हाल के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 14-16 लाख लोग एचआईवी / एड्स से प्रभावित हैhttp://www.bmj.com/content/340/bmj.c621 संग्रहीत प्रति 20 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121020122033/http://www.bmj.com/content/340/bmj.c621 20 अक्तूबर 2012 live . हालांकि २००५ में मूल रूप से यह अनुमान लगाया गया था कि भारत में लगभग 55 लाख एचआईवी / एड्स से संक्रमित हो सकते थे। २००७ में और अधिक सटीक अनुमान भारत में एचआईवी / एड्स से प्रभावित लोगों कि संख्या को 25 लाख के आस-पास दर्शाती है। ये नए आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन और यू.एन.एड्स द्वारा समर्थित हैंhttp://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6276398.stm संग्रहीत प्रति 20 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121111130326/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6276398.stm 11 नवंबर 2012 live . संयुक्त राष्ट्र कि 2011 के एड्स रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों भारत में नए एचआईवी संक्रमणों की संख्या में 50% तक की गिरावट आई हैwww.hindustantimes.com/India-sees-50-decline-in-new-hiv-infections-un-report/Article1-680333.aspx.
भारत में एड्स से प्रभावित लोगों की बढ़ती संख्या के संभावित कारण
आम जनता को एड्स के विषय में सही जानकारी न होना
एड्स तथा यौन रोगों के विषयों को कलंकित समझा जाना
शिक्षा में यौन शिक्षण व जागरूकता बढ़ाने वाले पाठ्यक्रम का अभाव
कई धार्मिक संगठनों का गर्भ निरोधक के प्रयोग को अनुचित ठहराना आदि।
एड्स के लक्षण
ई.वी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण नहीं दिखते। दीर्घ समय तक (3, 6 महीने या अधिक)
एच.आई.वी भी औषधिक परीक्षा में नहीं उभरते। अक्सर एच.आधिकांशतः एड्स के मरीज़ों को ज़ुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने की पहचान नहीं होती। एड्स के कुछ प्रारम्भिक लक्षण हैं:http://www.paliganjtimes.com/2017/01/aids-kaise-pata-chalta-hai_20.html पुरुषों में एचआईवी के लक्षण in Hindi 18 अप्रैल 2017 https://web.archive.org/web/20180418141306/http://www.paliganjtimes.com/2017/01/aids-kaise-pata-chalta-hai_20.html 18 अप्रैल 2018 dead
हैजाथकानबुखार
सिरदर्द
मतली व भोजन से अरुचि
लसीकाओं में सूजन
ध्यान रहे कि ये समस्त लक्षण साधारण बुखार या अन्य सामान्य रोगों के भी हो सकते हैं। अतः एड्स की निश्चित रूप से पहचान केवल और केवल, औषधीय परीक्षण से ही की जा सकती है व की जानी चाहिये।
एचआईवी संक्रमण के तीन मुख्य चरण हैं: तीव्र संक्रमण, नैदानिक विलंबता एवं एड्स.
तीव्र संक्रमण
एचआईवी की प्रारंभिक अवधि जो कि उसके संक्रमण के बाद प्रारंभ होती है उसे तीव्र एच.आई.वी या प्राथमिक एच.आई.वी या तीव्र रेट्रोवायरल सिंड्रोम कहते हैंOrganization World Health http://www.who.int/hiv/pub/guidelines/HIVstaging150307.pdf WHO case definitions of HIV for surveillance and revised clinical staging and immunological classification of HIV-related disease in adults and children 2007-12-31 World Health Organization 978-92-4-159562-9 English 10665/43699 3 फ़रवरी 2026 31 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081031053144/http://www.who.int/hiv/pub/guidelines/HIVstaging150307.pdf bot: unknown .कई व्यक्तियों में २ से ४ सप्ताह में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी या मोनोंयुक्लिओसिस जैसी बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं और कुछ व्यक्तियों में ऐसे कोई विशेष लक्षण नहीं दिखते. ४०% से ९०% मामलों में इस बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं जिसमे सबसे प्रमुख लक्षण बुखार, बड़ी निविदा लिम्फ नोड्स, गले की सूजन, चक्कते, सिर दर्द या मुँह और जननांगों के घाव आदि हैंhttp://books.google.ca/books?id=-HRJOElZch8C&pg=PA25#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 26 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130927080955/http://books.google.ca/books?id=-HRJOElZch8C&pg=PA25#v=onepage&q&f=false 27 सितंबर 2013 live . चक्कते २०%-५०% मामलों में दिखते हैंVogel Martin Schwarze-Zander Carolynne Wasmuth Jan-Christian Spengler Ulrich Sauerbruch Tilman Rockstroh Jürgen Kurt 2010-07-19 The Treatment of Patients With HIV https://www.aerzteblatt.de/10.3238/arztebl.2010.0507 Deutsches Ärzteblatt international 10.3238/arztebl.2010.0507 1866-0452 2915483 20703338. कुछ लोगों में इस स्तर पर अवसरवादी संक्रमण भी विकसित हो जाता है। कुछ लोगों में जठरांत्र कि बीमारियाँ जैसे उल्टी, मिचली या दस्त और कुछ में परिधीय न्यूरोपैथी के स्नायविक लक्षण और जुल्लैन बर्रे सिंड्रोम जैसी बीमारियों के लक्षण दिखते हैं। लक्षण कि अवधि आम तौर पर एक या दो सप्ताह होती है। अपने विशिष्ट लक्षण न दिखने के कारण लोग इन्हें अक्सर एचआईवी का संक्रमण नहीं मानते. कई सामान्य संक्रामक रोगों के लक्षण इस बीमारी में दिखने के कारण अक्सर डॉक्टर और हॉस्पिटल में भी इस बीमारी का गलत निदान कर देते हैं। इसलिए यदि किसी रोगी को बिना किसी वजह के बार बार बुखार आता हो तो उसका एचआईवी परीक्षण करा लिया जाना चाहिए क्योकि या एच.आई.वी. संक्रमण का एक लक्षण हो सकता हैMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118..
नैदानिक विलंबता
इस रोग के प्रारंभिक लक्षण के अगले चरण को नैदानिक विलंबता, स्पर्शोन्मुख एचआईवी या पुरानी एचआईवी कहते हैंhttp://aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121014004849/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ 14 अक्तूबर 2012 dead . उपचार के बिना एचआईवी संक्रमण का दूसरा चरण ३ साल से २० साल तक रह सकता है (औसतन ८ साल)http://books.google.ca/books?id=WauaC7M0yGcC&pg=PA29#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130927080957/http://books.google.ca/books?id=WauaC7M0yGcC&pg=PA29#v=onepage&q&f=false 27 सितंबर 2013 live http://books.google.ca/books?id=xmFBtyPGOQIC&pg=PA19#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130927080949/http://books.google.ca/books?id=xmFBtyPGOQIC&pg=PA19#v=onepage&q&f=false 27 सितंबर 2013 live http://books.google.ca/books?id=M4q3AyDQIUYC&pg=PA273#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130927080953/http://books.google.ca/books?id=M4q3AyDQIUYC&pg=PA273#v=onepage&q&f=false 27 सितंबर 2013 live . आम तौर पर इस चरान में कुछ या कोई लक्षण नहीं दिखते है जबकि इस चरण के अंत के कई लोगों को बुखार, वजन घटना, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं और मांसपेशियों में दर्द अनुभव होता हैhttp://aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121014004849/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ 14 अक्तूबर 2012 dead . लगभग ५०-७०% लोगों में ३-६ महीने के भीतर लासीका ग्रंथियों (जांघ कि बगल वाली लसीका ग्रंथियों के आलावा) में सूजन या विस्तार भी देखा जाता है Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 121. हालाँकि HIV-1 से संक्रमित अधिकतर व्यक्तियों में पता लगाने योग्य एक वायरल लोड होता है लेकिन इलाज के आभाव में वह अंततः बढ़ कर एड्स में बदल जाता है जबकि कुछ मामलो (लगभग ५%) में बिना एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एड्स कि चिकित्सा पद्यति) के CD4+ T-कोशिकाएं ५ साल से अधिक शरीर में बनी रहती हैंMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20120718062920/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 18 जुलाई 2012 live . जिन व्यक्तियों में इस प्रकार के मामले सामने आते है उन्हें एचआईवी नियंत्रक या लंबी अवधि वृधिविहीन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और जिन व्यक्तियों में बिना रेट्रोवायरल विरोधी चिकित्सा के वायरल लोड कम या नहीं पता लगाने योग्य स्तर तक बना रहता है उन्हें अभिजात वर्ग का नियंत्रक या अभिजात वर्ग का दमन करने वाला कहते हैंhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20120718062920/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 18 जुलाई 2012 live .
एड्स
एड्स को दो प्रकार से परिभाषित किया गया है या तो जब CD4+ टी कोशिकाओं कि संख्या जब २०० कोशिकाएं प्रति μL से कम होती हैं या तो तब जबकि एचआईवी संक्रमण के कारण कोई रोग व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न हो जाता हैMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.. विशिष्ट उपचार के अभाव में एचआईवी से संक्रमित आधे लोगों के अन्दर दस साल में एड्स विकसित हो जाता हैMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.. सबसे आम प्रारंभिक स्थिति जो कि एड्स की उपस्थिति को इंगित करती है वो है न्युमोसाईतिस निमोनिया (40%), कमजोरी जैसे कि वजन घटना, मांसपेशियों में खिचाव, थकान, भूख में कमी इत्यादि (२०%) और सोफागेल कैंडिडिआसिस (ग्रास नली का संक्रमण) होती है। इसके आलावा आम लक्षण में श्वास नलिका में कई बार संक्रमण होना भी हैMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118..
अवसरवादी संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी के कारण हो सकते हैं जो कि आम तौर पर हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नियंत्रित हो जाते हैंhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12594648 संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20120515112209/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12594648 15 मई 2012 live . भिन्न भिन्न व्यक्तियों में भिन्न भिन्न प्रकार के संक्रमण होते है जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति के आस पास वातावरण में कौन से जीव या संक्रमण आम रूप से पाए जाते हैMandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.. ये संक्रमण शरीर के हर अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैंhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21322514 संग्रहीत प्रति 27 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430184041/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21322514 30 अप्रैल 2013 live .
एच.आई.वी. का प्रसार
दुनिया भर में इस समय लगभग चार करोड़ 20 लाख लोग एच.आई.वी का शिकार हैं। इनमें से दो तिहाई सहारा से लगे अफ़्रीकी देशों में रहते हैं और उस क्षेत्र में भी जिन देशों में इसका संक्रमण सबसे ज़्यादा है वहाँ हर तीन में से एक वयस्क इसका शिकार है। दुनिया भर में लगभग 14,000 लोगों के प्रतिदिन इसका शिकार होने के साथ ही यह डर बन गया है कि ये बहुत जल्दी ही एशिया को भी पूरी तरह चपेट में ले लेगा। जब तक कारगर इलाज खोजा नहीं जाता, एड्स से बचना ही एड्स का सर्वोत्तम उपचार है।
एच.आई.वी. तीन मुख्य मार्गों से फैलता है
मैथुन या सम्भोग द्वारा (गुदा, योनिक या मौखिक)
शरीर के संक्रमित तरल पदार्थ या ऊतकों द्वारा (रक्त संक्रमण या संक्रमित सुइयों के आदान-प्रदान)
माता से शीशु मे (गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान द्वारा)
मल, नाक स्रावों, लार, थूक, पसीना, आँसू, मूत्र, या उल्टी से एच. आई. वी. संक्रमित होने का खतरा तबतक नहीं होता जबतक कि ये एच. आई. वी संक्रमित रक्त के साथ दूषित न होvan der Kuyl Antoinette C Cornelissen Marion 2007 Identifying HIV-1 dual infections http://retrovirology.biomedcentral.com/articles/10.1186/1742-4690-4-67 Retrovirology 4 1 67 10.1186/1742-4690-4-67 2045676 17892568.
मैथुन या सम्भोग द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण
एचआईवी संक्रमण की सबसे ज्यादा विधा संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क के माध्यम से है। दुनिया भर में एच. आई. वी. प्रसार के मामलों के सबसे अधिक मामले विषमलैंगिक संपर्क (यानी विपरीत लिंग के लोगों के बीच यौन संपर्क जैसे कि पुरुष एवं स्त्री के बीच) के माध्यम से होते हैं। हालांकि, एच. आई. वी. प्रसार भिन्न भिन्न देशों में भिन्न भिन्न तरीकों से हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2009 तकhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live , सबसे अधिक एच. आई. वी. प्रसार उन समलैंगिक पुरुषों में हुआ जो कि सभी नए मामलों की 64% आबादी के बराबर थीhttp://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130501102910/http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm 1 मई 2013 live .
असुरक्षित विषमलिंगी यौन संबंधो के मालमे में अनुमानतः प्रत्येक यौन सम्बन्ध में एचआईवी संक्रमण का जोखिम कम आय वाले देशों में उच्च आय वाले देशों कि तुलना से चार से दस गुना ज्यादा होता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121106143649/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 6 नवंबर 2012 live . कम आय वाले देशों में संक्रमित महिला से पुरुष में संक्रमण का जोखिम ०.३८% है जबकि पुरुषों से महिला में संक्रमण का जोखिम ०.३०% है। उच्चा आय वाले देशो में यही जोखिम महिला से पुरुष में ०.०४% तथा पुरुष से महिला में ०.०८% है। गुदा सम्भोग द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का जोखिम विशेष रूप से ज्यादा होता है जो कि विषमलिंगी तथा समलिंगी दोनों प्रकार के यौन संबंधों में १.४-१.७% तक होता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121106143649/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 6 नवंबर 2012 live http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22819660 संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430180139/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22819660 30 अप्रैल 2013 live . मुख मैथुन के द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का खतरा थोडा कम होता है लेकिन खत्म नहीं होताYu Mingke Vajdy Michael 2010-08 Mucosal HIV transmission and vaccination strategies through oral compared with vaginal and rectal routes http://www.tandfonline.com/doi/full/10.1517/14712598.2010.496776 Expert Opinion on Biological Therapy en 10 8 1181–1195 10.1517/14712598.2010.496776 1471-2598 2904634 20624114.
शरीर के संक्रमित तरल पदार्थ या ऊतकों द्वारा (रक्त संक्रमण या संक्रमित सुइयों के आदान-प्रदान)
एचआईवी के संक्रमण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत रक्त और रक्त उत्पाद के द्वारा हैंhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live . रक्त के द्वारा संक्रमण नशीली दवाओ के सेवन के दौरान सुइयों के साझा प्रयोग के द्वारा, संक्रमित सुई से चोट लगने पर, दूषित रक्त या रक्त उत्पाद के माध्यम से या उन मेडिकल सुइयों के माध्यम से जो एच. आई. वी. संक्रमित उपकरणों के साथ होते हैं। दवा के इंजेक्शन आपस में बाँट कर लगाने से इसके फ़ैलाने का जोखिम ०.६३-२.४% होता है, जोकि औसतन ०.८% होता हैBaggaley Rebecca F Boily Marie-Claude White Richard G Alary Michel 2006-04-04 Risk of HIV-1 transmission for parenteral exposure and blood transfusion: a systematic review and meta-analysis https://journals.lww.com/00002030-200604040-00003 AIDS en 20 6 805–812 10.1097/01.aids.0000218543.46963.6d 0269-9370. एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की हुई सुई के माध्यम से एचआईवी होने का जोखिम 0.3% प्रतिशत होता है (३३३ में १) और श्लेष्मा झिल्ली के खून से संक्रमित होने का जोखिम ०.०९% होता है (१००० में १). संयुक्त राज्य अमेरिका में २००९ में १२% मामले ऐसे लोगों के आए हैं जो कि नसों में नशीली दवाओं का उपयोग करते थेhttp://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130501102910/http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm 1 मई 2013 live और कुछ क्षेत्रों में नशीली दवाओं का सेवन करने वालों में से ८०% से ज्यादा लोग एचआईवी पोजिटिव मिलेhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live .
एच. आई. वी. संक्रमित रक्त का प्रयोग करने से संक्रमण का जोखिम ९३% तक होता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/16549963 संग्रहीत प्रति 30 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430194006/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/16549963 30 अप्रैल 2013 live . विकसित देशों में संक्रिमित रक्त से एचआईवी प्रसार का जोखिम बहुत ही कम है (५,००,००० बार में से १ बार से भी कम) क्योकि वह रक्त देने वाले व्यक्ति कि एच. आई. वी. जांच उसका रक्त लेने के पहले कि जाती हैhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live . ब्रिटेन में जोखिम औसतन पचास लाख में से १ से भी कम की हैhospital.blood.co.uk/library/pdf/2011_Will_I_Need_English_v3.pdf. हालांकि, कम आय वाले देशों में रक्त का इस्तेमाल करने के पहले केवल आधे रक्त कि उचित रूप से जाँच होती है (२००८ के रिपोर्ट के अनुसार)UNAIDS 2011 pg. 60–70. यह अनुमान है कि इन क्षेत्रों में १५% एचआईवी संक्रमण का आधार रक्त या रक्त उत्पादों से होता है, जो कि वैश्विक संक्रमण का ५-१०% हैhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live http://www.who.int/inf-pr-2000/en/pr2000-25.html संग्रहीत प्रति 30 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20050117092135/http://www.who.int/inf-pr-2000/en/pr2000-25.html 17 जनवरी 2005 live . उप सहारा अफ्रीका में एचआईवी के प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका असुरक्षित चिकित्सा सुइयां निभाते हैं। २००७ में इस क्षेत्र में संक्रमण (१२-१७%) का कारण असुरक्षित चिकित्सा सुइयां ही थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार चिकित्सा सुइयों के द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का जोखिम अफ्रीका में १.२% मामलों में होता हैReid Savanna R 2009 Injection drug use, unsafe medical injections, and HIV in Africa: a systematic review http://harmreductionjournal.biomedcentral.com/articles/10.1186/1477-7517-6-24 Harm Reduction Journal en 6 1 24 10.1186/1477-7517-6-24 1477-7517 2741434 19715601. टैटू बनाने या बनवाने, खुरचने से भी सैद्धांतिक रूप संक्रमण का जोखिम बना रहता है लेकिन अभी तक किसी भी ऐसे मामले के पुष्टि नहीं हुई है। मच्छर या अन्य कीड़े कभी एचआईवी संचारित नहीं कर सकते हैंhttp://www.rci.rutgers.edu/~insects/aids.htm संग्रहीत प्रति 30 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20131206190442/http://www.rci.rutgers.edu/~insects/aids.htm 6 दिसंबर 2013 dead .
माँ से बच्चे में एच. आई. वी. संक्रमण
एचआईवी माँ से बच्चे को गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के दौरान और स्तनपान के दौरान प्रेषित हो सकता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 30 अप्रैल 2013 live http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/prevention/reduce-your-risk/fluids-of-transmission/ संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20140625071311/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/prevention/reduce-your-risk/fluids-of-transmission/ 25 जून 2014 dead . एचआईवी दुनिया भर में फैलने का यह तीसरा सबसे आम कारण हैhttp://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false 30 जुलाई 2013 live . इलाज के आभाव में जन्म के पहले या जन्म के समय इसके संक्रमण का जोखिम २०% तक होता है और स्तनपान के द्वारा यही जोखिम ३५% तक होता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 30 अप्रैल 2013 live . वर्ष २००८ तक बच्चो में एचआईवी का संक्रमण ९०% मामलों में माँ के द्वारा हुआ। उचित उपचार होने पर माँ से बच्च्चे को होने वाले संक्रमण को कम कर के यह जोखिम ९०% से १% तक लाया जा सकता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 30 अप्रैल 2013 live . माँ को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवाइरल दवा दे कर, वैकल्पिक शल्यक्रिया (आपरेशन) द्वारा प्रसव करके, नवजात शिशु को स्तनपान से न करा के तथा नवजात शिशु को भी एंटीरिट्रोवाइरल औषधियों कि खुराक देकर माँ से बच्चे में एच. आई. वी. का संक्रमण रोका जाता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12810858 संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20120515112751/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12810858 15 मई 2012 live . हलांकि इनमें से कई उपाय अभी भी विकासशील देशों में नहीं हैं। यदि भोजन चबाने के दौरान संक्रमित रक्त भोजन को दूषित कर देता है तो यह भी एच. आई. वी. संचरण का जोखिम पैदा कर सकता हैhttp://www.cdc.gov/hiv/topics/basic/ संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121013080351/http://www.cdc.gov/hiv/topics/basic/ 13 अक्तूबर 2012 live .
एड्स से बचने के उपाए
अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें। एक से अधिक व्यक्ति से यौनसंबंध ना रखें।
यौन संबंध (मैथुन) के समय कंडोम का सदैव प्रयोग करें।
यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो अपने जीवनसाथी से इस बात का खुलासा अवश्य करें। बात छुपाये रखनें तथा इसी स्थिती में यौन संबंध जारी रखनें से आपका साथी भी संक्रमित हो सकता है और आपकी संतान पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता हैhttps://www.mtatva.com/hi/disease-facts/aids-prevention-and-complications-in-hindi/ संग्रहीत प्रति 22 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171222111233/https://www.mtatva.com/hi/disease-facts/aids-prevention-and-complications-in-hindi/ 22 दिसंबर 2017 dead ।
यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो रक्तदान कभी ना करें।
रक्त ग्रहण करने से पहले रक्त का एच.आई.वी परीक्षण कराने पर ज़ोर दें।
यदि आप को एच.आई.वी संक्रमण होने का संदेह हो तो तुरंत अपना एच.आई.वी परीक्षण करा लें। उल्लेखनीय है कि अक्सर एच.आई.वी के कीटाणु, संक्रमण होने के 3 से 6 महीनों बाद भी, एच.आई.वी परीक्षण द्वारा पता नहीं लगाये जा पाते। अतः तीसरे और छठे महीने के बाद एच.आई.वी परीक्षण अवश्य दोहरायें।
यौन संपर्क
यौन संपर्क के दौरान कंडोम का लगातार इस्तेमाल एचआईवी संक्रमण के जोखिम को लगभग ८०% तक कम कर देता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348628 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430194244/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348628 30 अप्रैल 2013 live . जब जोड़ी में से एक साथी एचआईवी से संक्रमित है तब कंडोम का लगातार इस्तेमाल करने से असंक्रमित व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण होने कि संभावना प्रति वर्ष १% से कम हो जाती हैhttp://www.wpro.who.int/mediacentre/factsheets/fs_200308_Condoms/en/index.html संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20121018145513/http://www.wpro.who.int/mediacentre/factsheets/fs_200308_Condoms/en/index.html 18 अक्तूबर 2012 live . इन बातों के भी प्रमाण मिले है कि महिलाओं का कंडोम इस्तेमाल करना भी पुरूषों के कंडोम इस्तेमाल करने के सामान सुरक्षा प्रदान करता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348629 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430183736/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348629 30 अप्रैल 2013 live . एक अध्ययन के अनुसार अफ्रीकी महिलाओं में सेक्स के तुरंत पहले तेनोफोविर नामक जेल का योनि पर इस्तेमाल करने से एच. आई. वी संक्रमण का जोखिम ४०% तक कम हुआCelum Connie Baeten Jared M. 2012-02 Tenofovir-based pre-exposure prophylaxis for HIV prevention: evolving evidence http://journals.lww.com/00001432-201202000-00009 Current Opinion in Infectious Diseases en 25 1 51–57 10.1097/QCO.0b013e32834ef5ef 0951-7375 3266126 22156901. जबकि इसके विपरीत स्पेर्मिसईद नोंओक्स्य्नोल ९ (spermicide nonoxynol 9) सक्रमण के जोखिम को बढ़ा देते हैं क्योंकि योनि और गुदा में जलन बढ़ाना इसकी अपनी प्रवृत्ति हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20205637 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430185412/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20205637 30 अप्रैल 2013 live . उप सहारा अफ्रीका में सुन्नत विषमलैंगिक पुरुषों में एच.आई.वी संक्रमण के दर को ३८%-६६% मामलों में २४ महीनों तक कम कर देता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19370585 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20121114195720/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19370585 14 नवंबर 2012 live . इन अध्यनों के आधार पर वर्ष २००७ में विश्व स्वास्थ्य संगठन और यू.एन.एड्स ने महिला से पुरुष में एचआईवी संक्रमण से बचने का उपाय पुरुष खतना बताया थाhttp://www.who.int/mediacentre/news/releases/2007/pr10/en/index.html संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20110126183014/http://www.who.int/mediacentre/news/releases/2007/pr10/en/index.html 26 जनवरी 2011 live . यधपि इससे पुरुष से महिला में संक्रमण को रोका जा सकता है यह विवादस्पद हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20622758 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20120715181145/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20622758 15 जुलाई 2012 live http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19849961 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130206185235/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19849961 6 फ़रवरी 2013 live और पुरुष खतना विकसित देशों में कारगर होगा या नहीं एवं समलैंगिक पुरुषों में इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं ये बात अभी अनिर्धारित हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20844437 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20120715190109/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20844437 15 जुलाई 2012 live http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19935420 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20120715190127/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19935420 15 जुलाई 2012 live http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21678366 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20120929061759/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21678366 29 सितंबर 2012 live . कुछ विशेषज्ञों को डर है कि खतना पुरुषों के बीच असुरक्षा कि कम धारणा यौन जोखिम को बढ़ावा दे सकती है जो कि अपने निवारक प्रभाव को कम कर देती हैEaton Lisa A. Kalichman Seth C. 2007-11 Risk compensation in HIV prevention: Implications for vaccines, microbicides, and other biomedical HIV prevention technologies http://link.springer.com/10.1007/s11904-007-0024-7 Current HIV/AIDS Reports en 4 4 165–172 10.1007/s11904-007-0024-7 1548-3568 2937204 18366947. जिन महिलाओं का मादा जननांग कट चुका होता है उनमें एचआईवी कि वृद्धि का जोखिम बढ़ जाता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19065392 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20121116194756/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19065392 16 नवंबर 2012 live . यौन संयम को बताने वाले कार्यक्रम भी एचआईवी के बढते जोखिम प्रभावित करते नहीं दिखाई देतेhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17943855 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130114051258/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17943855 14 जनवरी 2013 live . स्कूल में व्यापक रूप से यौन शिक्षा देने पर इसके व्यापकता में कमी आ सकती हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21251451 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430161754/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21251451 30 अप्रैल 2013 live . युवा लोगों का एक बड़ा समूह एचआईवी / एड्स के बारे में जानकारी होने के बावजूद भी इस प्रथा में संलग्न है कि वह खुद अपने को एचआईवी से संक्रमित होने के जोखिम को ये कम आँकता हैhttp://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/18724961 संग्रहीत प्रति 10 नवंबर 2012 https://web.archive.org/web/20130430160013/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/18724961 30 अप्रैल 2013 live .
एड्स इन कारणों से नहीं फैलता
एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाने से
एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति के साथ रहने से या उनके साथ खाना खाने से।
एक ही बर्तन या रसोई में स्वस्थ और एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति के खाना बनाने से।
प्रारंभिक अवस्था में एड्स के लक्षण
तेज़ी से अत्यधिक वजन घटना
सूखी खांसी
लगातार ज्वर या रात के समय अत्यधिक/असाधारण मात्रा में पसीने छूटना
जंघाना, कक्षे और गर्दन में लम्बे समय तक सूजी हुई लसिकायें
एक हफ्ते से अधिक समय तक दस्त होना। लम्बे समय तक गंभीर हैजा।
फुफ्फुस प्रदाह
चमड़ी के नीचे, मुँह, पलकों के नीचे या नाक में लाल, भूरे, गुलाबी या बैंगनी रंग के धब्बे।
निरंतर भुलक्कड़पन,
एड्स रोग का उपचार
औषधी विज्ञान में एड्स के इलाज पर निरंतर संशोधन जारी हैं। भारत, जापान, अमेरिका, यूरोपीय देश और अन्य देशों में इस के इलाज व इससे बचने के टीकों की खोज जारी है। हालांकी एड्स के मरीज़ों को इससे लड़ने और एड्स होने के बावजूद कुछ समय तक साधारण जीवन जीने में सक्षम हैं परंतु आगे चल कर ये खतरा पैदा कर सकता हैं। एड्स का इलाज के लिए शोध जारी है। हैं। आज यह भारत में एक महामारी का रूप हासिल कर चुका है। भारत में एड्स रोग की चिकित्सा महंगी है, एड्स की दवाईयों की कीमत आम आदमी की आर्थिक पहुँच के परे है। कुछ विरल मरीजों में सही चिकित्सा से 10-12 वर्ष तक एड्स के साथ जीना संभव पाया गया है, किंतु यह आम बात नही है।
ऐसी दवाईयाँ अब उपलब्ध हैं जिन्हें प्रति उत्त्क्रम-प्रतिलिपि-किण्वक विषाणु चिकित्सा [anti reverse transcript enzyme viral therapy or anti-retroviral therapy] दवाईयों के नाम से जाना जाता है। सिपला की ट्रायोम्यून जैसी यह दवाईयाँ महँगी हैं, प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 150000 रुपये होता है और ये हर जगह आसानी से भी नहीं मिलती। इनके सेवन से बीमारी थम जाती है पर समाप्त नहीं होती। अगर इन दवाओं को लेना रोक दिया जाये तो बीमारी फ़िर से बढ़ जाती है, इसलिए एक बार बीमारी होने के बाद इन्हें जीवन भर लेना पड़ता है। अगर दवा न ली जायें तो बीमारी के लक्षण बढ़ते जाते हैं और एड्स से ग्रस्त व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है।
एक अच्छी खबर यह है कि सिपला और हेटेरो जैसे प्रमुख भारतीय दवा निर्माता एच.आई.वी पीड़ितों के लिये शीघ्र ही पहली एक में तीन मिश्रित निधिक अंशगोलियाँ बनाने जा रहे हैं जो इलाज आसान बना सकेगा (सिपला इसे वाईराडे के नाम से पुकारेगा)। इन्हें आहार व औषध मंत्रि-मण्डल [FDA] से भी मंजूरी मिल गई है। इन दवाईयों पर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 1 लाख रुपये होगा, संबल यही है कि वैश्विक कीमत से यह 80-85 प्रतिशत सस्ती होंगी।
एड्स ग्रस्त लोगों के प्रति व्यवहार
एड्स का एक बड़ा दुष्प्रभाव है कि समाज को भी संदेह और भय का रोग लग जाता है। यौन विषयों पर बात करना हमारे समाज में वर्जना का विषय रहा है। निःसंदेह शतुरमुर्ग की नाई इस संवेदनशील मसले पर रेत में सर गाड़े रख अनजान बने रहना कोई हल नहीं है। इस भयावह स्थिति से निपटने का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक बदलाव लाना भी है। एड्स पर प्रस्तावित विधेयक Draft Law on HIV Lawyers Collective http://www.lawyerscollective.org/^hiv/Draft_Law_On_HIV.asp asp 16 जून 2020 https://web.archive.org/web/20070927235211/http://www.lawyerscollective.org/%5Ehiv/Draft_Law_On_HIV.asp 27 सितंबर 2007 dead को अगर भारतीय संसद कानून की शक्ल दे सके तो यह भारत ही नहीं विश्व के लिये भी एड्स के खिलाफ छिड़ी जंग में महती सामरिक कदम सिद्ध होगा।
इन्हें भी देखें
व्यभिचार
कंडोम
हाइपरहाइड्रोसिस
मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु
कैंसर
सन्दर्भ
30em
बाहरी कड़ियाँ
How a Sick Chimp Led to a Global Pandemic: The Rise of HIV
श्रेणी:यौन रोग
श्रेणी:ऍचआइवी-सम्बंधित जानकारी
श्रेणी:स्वास्थ्य आपदाएँ