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411 समाचार
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अम्र इब्न जाबिर

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अम्र इब्न जाबिर عمرو بن جابر الجني ar अम्र इब्न जाबिर अल-जिन्नी अज्ञात पहली इस्लामी सदी (उमय्यद काल के आसपास) अरब प्रायद्वीप सहाबी (पैगंबर मुहम्मद के साथी) इस्लाम स्वीकार करने वाले प्रमुख 'जिन' (Jinn) सहाबी इस्लाम अम्र इब्न जाबिर (عمرو بن جابر الجني) इस्लामी इतिहास और परंपरा में एक अत्यंत विशिष्ट और अनूठे 'सहाबी' (पैगंबर मुहम्मद के साथी) के रूप में जाने जाते हैं। आम तौर पर सहाबी शब्द का उपयोग उन मनुष्यों के लिए किया जाता है जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद को देखा, उन पर विश्वास किया और इस्लाम की अवस्था में मृत्यु प्राप्त की। हालाँकि, इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद का संदेश केवल मनुष्यों के लिए नहीं बल्कि 'जिनों' (Jinn) के लिए भी था। अम्र इब्न जाबिर उन्हीं चुनिंदा जिनों में से एक थे जिन्होंने सीधे पैगंबर मुहम्मद से कुरान सुना और इस्लाम स्वीकार किया।Ibn Hajar al-Asqalani Al-Isabah fi Tamyiz al-Sahabah 4 1995 Dar Al-Kotob Al-Ilmiyah Beirut 503–504 ar Ali Muhammad Muawwad, Adel Ahmed Abdul-Mawgoud ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इस्लाम ग्रहण करना इस्लामी इतिहास की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक 'वादी-ए-नखला' (Nakhlah Valley) की घटना है। इस्लामी ग्रंथों के अनुसार, जब पैगंबर मुहम्मद ताइफ की कठिन यात्रा से लौट रहे थे, तब उन्होंने रात के समय कुरान की तिलावत (पाठ) की। उस समय जिनों के एक समूह ने उनका कुरान पाठ सुना और वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत इस्लाम स्वीकार कर लिया। इस घटना का उल्लेख कुरान की 'सूरह अल-अहक़ाफ' (Surah Al-Ahqaf) और 'सूरह अल-जिन' (Surah Al-Jinn) में भी मिलता है। प्रख्यात मुस्लिम इतिहासकारों और जीवनी लेखकों के अनुसार, अम्र इब्न जाबिर नसीबिन (Nasibin) शहर के उन प्रमुख जिनों के समूह में शामिल थे जिन्होंने उस रात पैगंबर का संदेश सुना था। इस्लाम स्वीकार करने के बाद, वे अपनी कौम (अन्य जिनों) के पास लौट गए और उन्हें भी इस्लाम का संदेश दिया।Ibn al-Athir Usd al-Ghabah fi Ma'rifat al-Sahabah 4 1994 Dar Al-Kotob Al-Ilmiyah Beirut 196 ar मृत्यु और प्रसिद्ध घटना अम्र इब्न जाबिर की मृत्यु की घटना इस्लामी साहित्य में बहुत प्रसिद्ध है। यह घटना मानवीय सहाबियों और जिनों के बीच के आध्यात्मिक संबंध को दर्शाती है। हदीस और इतिहास के ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि पैगंबर मुहम्मद के निधन के कई वर्षों बाद, कुछ मुस्लिम यात्री (जिनमें कुछ प्रसिद्ध मानवीय सहाबी शामिल थे) मरुस्थल से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्होंने एक बहुत बड़े सफेद साँप को मृत अवस्था में देखा। इस्लामी परंपरा में यह माना जाता है कि जिन अक्सर साँपों का रूप धारण कर सकते हैं। उन यात्रियों ने उस प्राणी का सम्मान करते हुए उसे एक कपड़े में लपेटा और उसे दफना दिया। जब वे उसे दफना कर मुड़े, तो उन्हें एक अदृश्य आवाज़ (जिसे हातिफ़ कहा जाता है) सुनाई दी। उस आवाज़ ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा, "अल्लाह तुम्हें बेहतरीन प्रतिफल दे! यह अम्र इब्न जाबिर थे। वे उन नौ जिनों में से अंतिम थे जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद से सीधे कुरान सुना था।" इस घटना ने मानवीय मुसलमानों के बीच अम्र इब्न जाबिर की स्थिति को और भी सम्मानित बना दिया।Takhrij Ahadith Hayat al-Hayawan lil-Damiri https://archive.org/details/Bukhari_201707/page/n9/mode/2up Al-Maktaba al-Shamela 8 मार्च 2026 ar 1003 विद्वानों का दृष्टिकोण शास्त्रीय इस्लामी विद्वानों ने अम्र इब्न जाबिर के अस्तित्व और उनकी सहाबियत (Companionship) को पूरी गंभीरता के साथ दर्ज किया है। इब्न हजर अल-अस्कलानी ने अपनी महान कृति "अल-इसाबा फी तमीज़ अल-सहाबा" (सहाबियों की पहचान) में अम्र इब्न जाबिर को सहाबियों की सूची में शामिल किया है। इसी तरह, इब्न अल-असीर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "उस्द अल-गाबा" (जंगल के शेर) में उनकी जीवनी को विशेष स्थान दिया है। इन ऐतिहासिक ग्रंथों में किसी गैर-मानवीय प्राणी को सहाबी का दर्जा देना यह स्पष्ट करता है कि प्रारंभिक इस्लामी समाज में विश्वास और आस्था की कोई भौतिक सीमा नहीं थी।Al-Isabah fi Tamyiz al-Sahabah - Omar bin Jabala/Amr bin Jabir https://shamela.ws Al-Maktaba al-Shamela 8 मार्च 2026 ar सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ विकीडेटा: अम्र इब्न जाबिर (Q108440224) श्रेणी:सहाबा श्रेणी:पहली इस्लामी सदी के लोग श्रेणी:इस्लामी पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ श्रेणी:2026 विकि लव्ज़ रमजान प्रतियोगिता के लेख