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411 समाचार
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आज़मगढ़

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आज़मगढ़ Azamgarh Azamgarh Railway Station.jpg आज़मगढ़ रेलवे स्टेशन आज़मगढ़ India Uttar Pradesh 26.068 83.184 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति देश राज्य उत्तर प्रदेश ज़िला आज़मगढ़ ज़िला तहसील 64 110983 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी, अवधी भामस +5:30 पिनकोड 276001 दूरभाष कोड 05462 UP-50 CPGRAMS Grievance Status for registration number : *PMOPG/E/2019/0225312* Grievance Concerns To Name Of Complainant *Pancham Rajbhar* Date of Receipt *11/05/2019* Received By Ministry/Department *Prime Minister's Office* Grievance Description सेवामें , मा मानव संसाधन विकास मंत्री जी भारत सरकार नई दिल्ली *उत्तरदायी संस्था सन्दर्भ* :-राष्ट्रीय शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद/भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद भारत सरकार/राज्य सरकार विषय :- भारत सरकार द्वारा अनुमोदित/संचालित *पाठ्य पुस्तकों* में 11 वी सदी के राष्ट्रनायक भारशिव नागबंशीय *भर कुलभूषण** श्रावस्ती सम्राट सुहेलदेव राजभर जी के जीवन वृतान्तों को *विनिर्दिष्ट* करने के संबंध में :- महोदय, .        आप अवगत ही हैं कि भारत सरकार एवं विभिन्न प्रान्तीय सरकारों द्वारा समय समय पर *देश व मातृभूमि* की एकता,अखंडता,सम्प्रभुता,एवं उसकी संस्कृति ,सभ्यता की रक्षा करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले उन तमाम राष्ट्रभक्त,महापुरुषों, शासकों आदि *अमर वीर सपूतों* के साहसिक जीवन वृतान्तों को *ऐतिहासिक* दृष्टिकोण से राष्ट्रीय/प्रान्तीय /क्षेत्रीय स्तर पर सरकार द्वारा *मान्य पाठ्य पुस्तकों* में अध्ययन/अध्यापन हेतु विषय वस्तु समाविष्ट कर समाज के *प्रसंज्ञान में अध्ययन* हेतु लाया जाता है जो कि भविष्य के लिए एक प्रेरणास्रोत है उक्त के क्रम में सादर आपके संज्ञान में अवगत कराना है कि इसी *राष्ट्रीय स्तर* की कड़ी में 11 वी सदी में जब विदेशी दुर्दान्त आक्रांता सैयद सलार मोहम्मद ग़ाज़ीमिया का प्रादुर्भाव भारत भूमि पर हुआ तो पूरे देश मे धार्मिक कट्टरता इस्लाम के नाम पर शस्त्र के बल पर भारत की सुख सम्पदा लूटते,मानवीय धर्म को खंडित कर जेहाद के नाम से क्रूरता पूर्वक धर्म परिवर्तन कराते नृशंस तबाही मचाते हुए तत्कालीन देश के शासकों को परास्त कर तत्कालीन श्रावस्ती राज्य के सम्राट भारशिव नागवंश के *धर्मरक्षक राजभर कुलशिरोमणि* जो कि तमाम प्रामाणिक साहित्यों/इतिहासों/अभिलेखों/साक्ष्यों के आधार पर *भर/राजभर कौम में जन्मे* राष्ट्रवीर परम देशभक्त महाराजा सुहेलदेव जी के राज्य में पहुंचा तो सम्राट सुहेलदेव जी ने अपनी अनोखी युद्धनीति से क्षेत्रीय राजाओं को एकजुट कर गठित सेना का नेतृत्व करके तुर्कों की लाखों सेना सहित धर्मान्धता व आतंक का प्रतीक विदेशी लुटेरा सैयद सलार मसउद ग़ाज़ी मियां का *वध* कर राष्ट्रधर्म व मानवधर्म की रक्षा की जिसके परिणाम स्वरूप कोई भी विदेशी आक्रांता भारत देश की तरफ लगभग 159 वर्षों तक आंख उठाकर देखने की जुर्रत नहीं किया ऐसे परम प्रतापी राष्ट्रवीर को उनके राष्ट्रीय कद और पराक्रमी क्षमता के अनुसार ऐतिहासिक दृष्टि से सन्दर्भित पाठ्य पुस्तकों में *नवीन प्रविष्टि* कर समुचित स्थान दिया जाना उनकी वीरता,शौर्य ,पराक्रम एवं देशभक्ति का समादर करना है जिससे भारतीय समाज देश प्रेम के प्रति प्रेरणा ले सके !    अतः आपसे प्रबल अनुरोध है कि जनभावनाओं का समादर करते हुए सरकार द्वारा *संपादित/अनुमोदित/संचालित/प्रकाशित/मुद्रित* समस्त पाठ्य पुस्तकों में श्रावस्ती सम्राट राष्ट्रवीर सुहेलदेव राजभर जी के जीवन वृतान्तों को पाठ्य पुस्तकों की विषय सामग्री को *अध्ययन/अध्यापन हेतु 11 वी सदी में तत्कालीन श्रावस्ती के सम्राट राष्ट्रवीर सुहेलदेव जी को तमाम ऐतिहासिक प्रामाणिक साक्ष्यों जैसे (1)-,सेंसस ऑफ इंडिया xvi पार्ट 1 पेज 217,D C Baillie,(2)गजट ऑफ प्रविन्सेज ऑफ अवध,वॉल्यूम 2 H to M 1877 पेज 83,87 ,(3)-अमृतलाल नागर- ,गदर के फूल, पेज 89,(4)-प्रो कन्हैयालाल श्रीवास्तव- बहराइच जनपद का खोजपूर्ण इतिहास, पेज 60,-(5 )हाजी सैयद खुर्शीद अनवर रिजवी (ओ एस डी/मैनेजर दरगाह शरीफ -तारीखे मसूदी पेज 14,20 -(6)-मंसूर अली खादिम ,जीवन परिचय हजरत सैयद सलार मसऊद गाज़ी , पृष्ठ 6 -बहराइच गेटियर वैल्युम चैप्टर वी पेज 116 -( 7) ख्वाजा खलील अहमद शाह ,अलमइनी पृष्ठ 13,22,23 -(8)पवन बक्शी अवध के तालुकेदार बहराइच पृष्ठ 284,318 -(9)सीताराम सिंह क्षत्रिय वंश का इतिहास भाग 2 पृष्ठ 283 ,आदि लगभग 20 प्रसिद्ध प्रामाणिक गजेटियर/ऐतिहासिक पुस्तकों में सुहेलदेव जी को साक्ष्यों के आधार पर पूर्णत *भर* जाति synonyms *राजभर* जाति का बताया गया है ! कृपया परीक्षण/शोध/अध्ययन कर राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर का नाम को प्रविष्टि करने का कष्ट करें ! सम्मान सहित भवदीय डॉ पंचम राजभर Ex संपादक सुहेलदेव स्मृति (मासिक पत्रिका) आवास -कुरथुवा ,सोनहरा आज़मगढ़ उ प्र 276301 मोबाइल 9889506050 9452292260 drprajbhar1962@gmail, com- Current Status- Date of Action *05/07/2021* Remarks *आपके सुझाव के लिए धन्यवाद ! शीघ्र ही हम पाठ्यचर्या की पुनरीक्षा करने जा रहा हैं हम आपको आश्वासन देते हैं कि नया पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक तैयार करते समय हम आपके द्वारा दिये सुझाव को विशेषज्ञ समिति के समक्ष रखेंगे* ! Officer Concerns To Officer Name *Aman Sharma (Secretary)* Organisation name *NCERT* Contact Address Aurobindo Marg, Hauz Khas, Sri Aurobindo Marg, Blo 2, Bhim Nagri, Hauz Khas, *New Delhi* Email Address secretaryncert@gmail.com Contact Number *01126519153* (Azamgarh) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आज़मगढ़ ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है और तमसा नदी (टोंस नदी) के तट पर बसा हुआ है।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975 जिले में प्राचीन शिव मंदिर है जो भंवरनाथ मंदिर के नाम से प्रख्यात है, आजमगढ में एक महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय है आजमगढ़ मुख्यालय के उत्तर दिशा में रौनापार थाना है रौनापार थाना क्षेत्र का सबसे बड़ा मार्केट चांदपट्टी है विवरण आज़मगढ़ तमसा नदी (टोंस) के तट पर स्थित है। यह राज्य की राजधानी लखनऊ से २६८ किमी पूर्व में स्थित है। आजमगढ़ के उत्तर में स्थित घाघरा नदी आजमगढ़ और गोरखपुर के सीमा का निर्धारण करती है आजमगढ़ से गोरखपुर जाने का एक वाहन मार्ग दोहरीघाट से होकर जाता है जो कि मऊ जिले का हिस्सा है और एक वाहन मार्ग अंबेडकरनगर के (कम्हरिया घाट) से हो कर जाता है अन्य मार्ग और भी है परन्तु नाव द्वारा ही जा सकते हैं जिनमे बारानगर घाट और गोला घाट प्रमुख है आजमगढ़ का सबसे उत्तरी पुलिस स्टेशन रौनापार थाना है जो घाघरा नदी से लगभग ९km दूर स्थित है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय में भी इस जगह का विशेष महत्त्व रहा है। यहां एक गांव सेठारी रास्ता बंद करने के मामले में विश्व में प्रथम पे रहा है। इतिहास उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में से एक, आजमगढ़, अपने उत्तर-पूर्वी हिस्से को छोड़कर कभी प्राचीन कोसल राज्य का हिस्सा था। आजमगढ़ को ऋषि दुर्वासा की भूमि के रूप में भी जाना जाता है, जिसका आश्रम फूलपुर तहसील में स्थित था, जो फूलपुर तहसील मुख्यालय से 6 किलोमीटर (3.7 मील) उत्तर में तमसा और मझुए नदियों के संगम के पास स्थित था। आज़मगढ़ 1665 ई. में फुलवारिया नामक प्राचीन ग्राम के स्थान पर आजम ख़ाँ जो कि राजा विक्रमजीत सिंह के पुत्र थे उन्होंने ही इस नगर की स्थापना की थी । यहाँ गौरीशंकर का मंदिर 1760 ई. में स्थानीय राजा के पुरोहित ने बनवाया था। आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसकी स्थापना शाहजहां के शासनकाल के दौरान 1665 में विक्रमजीत के बेटे आजम ने की थी। विक्रमाजीत परगना निज़ामाबाद में मेहनगर के गौतम राजपूतों के वंशज थे जिन्होंने अपने कुछ पूर्ववर्तियों की तरह इस्लाम अपनाया था। उसकी एक मुस्लिम पत्नी थी, जिससे उसके दो बेटे आज़म और अज़मत हुए। आज़म ने अपने नाम से शहर का नाम आज़मगढ़ शहर, और किला को अपना नाम दिया, जबकी अज़मत ने परगना सगरी में किले और अज़मतगढ़ बाजार का निर्माण करवाया था।Origin of Name of Azamgarh : http://www.azamgarh.nic.in/history.htm 28 August 2014 https://web.archive.org/web/20140627133805/http://www.azamgarh.nic.in/history.htm 27 June 2014 dead चैबील राम के हमले के बाद, अज़मत खान अपने सैनिकों के साथ उत्तर की ओर भाग गया। उन्होंने गोरखपुर में घाघरा पार करने का प्रयास किया, लेकिन दूसरी तरफ के लोगों ने उसके आने का विरोध किया, और उन्हें या तो मध्य धारा में गोली मार दी गई या बचने के प्रयास में डूब गया। आजमगढ़ स्वतंत्रा आंदोलन के लिए भी पहचाना जाता है, गांधीजी के आव्हान पर सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अतरौलिया खंड के रामचरित्र सिंह व उनके नाबालिक बेटे सत्यचरण सिंह ने एक साथ अंग्रेजो का डटकर मुकाबला किया और गोली खायी। पिता पुत्र का एकसाथ स्वतंत्रा के आंदोलन में कूदने का विरला ही उदाहरण देखने को मिलता है। भूगोल आज़मगढ़ तमसा नदी के तट पर स्थित है। भौगोलिक दृष्टि से, आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 26.068 N 83.184 E inline पर स्थित है। आज़मगढ़ की औसत ऊँचाई 64 मीटर (209 फीट) है।http://www.fallingrain.com/world/IN/36/Azamgarh.html Falling Rain Genomics, Inc – Azamgarh Fallingrain.com 30 May 2012 https://www.webcitation.org/6FLqj1JXA?url=http://www.fallingrain.com/world/IN/36/Azamgarh.html 24 मार्च 2013 live शहर लखनऊ- बलिया राज्य राजमार्ग पर राजधानी लखनऊ से, 269 किमी दूर है। यह आजमगढ़ गढ़ मण्डल का मुख्यालय भी है, जिसमें तीन जिलों आज़मगढ़, मऊ और बलिया शामिल हैं। सर्दियों और गर्म मौसमों को छोड़कर शहर की जलवायु नम और आरामदायक है। वर्ष को चार मौसमों में विभाजित किया जा सकता है। मार्च से जून के मध्य तक की अवधि गर्म मौसम है, इस दौरान तापमान 22 से 46°C (72 और 115°F) के बीच रहता है। दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम सितंबर के अंत तक जारी रहता है, जिसमें औसत वार्षिक वर्षा 1021.3 मिमी रहती है। नवंबर के अंत तक चलने वाली अवधि मानसून या संक्रमण का मौसम होता है। दिसंबर से फरवरी तक की अवधि में ठंड का मौसम रहता है। आजमगढ़ में सर्दियाँ में बहुत भिन्न्ताएं रहती हैं, जिनमें गर्म दिन और एकदम ठंडी रातें दिखाई देती हैं। हिमालयी क्षेत्र की शीत लहरें दिसंबर से फरवरी तक सर्दियों में शहर में तापमान कम करने का कारण बनती हैं और 5 डिग्री सेल्सियस (41 डिग्री फ़ारेनहाइट) से नीचे के तापमान असामान्य नहीं दिखता हैं। जनसांख्यिकी 2011 की जनगणना के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, आजमगढ़ शहरी समूह की जनसंख्या 116,165 थी, जिनमें से पुरुष 60,678 और महिलाएं 55,487 थीं। साक्षरता दर 86 प्रतिशत थी। आजमगढ़ में 18वीं शताब्दी की शुरुआत में हिंदू कुश की तलहटी से पलायन कर आने वाले बड़ी संख्या में पठानों की मौजूदगी है। http://www.censusindia.gov.in/2011-prov-results/paper2/data_files/India2/Table_3_PR_UA_Citiees_1Lakh_and_Above.pdf Urban Agglomerations/Cities having population 1 lakh and above Provisional Population Totals, Census of India 2011 7 July 2012 https://web.archive.org/web/20130402233834/http://www.censusindia.gov.in/2011-prov-results/paper2/data_files/India2/Table_3_PR_UA_Citiees_1Lakh_and_Above.pdf 2 अप्रैल 2013 live 2024 में आज़मगढ़ जिले की अनुमानित जनसंख्या 5,450,000 है |https://www.census2011.co.in/census/district/562-azamgarh.html Azamgarh District Population Census 2011 - 2021 - 2024, Uttar Pradesh literacy sex ratio and density www.census2011.co.in 2024-10-25 कृषि और उद्योग यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है, और बहुत अधिक खेती की जाती है, जिससे चावल, गन्ना, और गेहूं और आम और अमरूद की अच्छी फसल होती है। चना, सरसों अन्य प्रमुख फसलें है। चीनी की मिलें एवं वस्त्र बुनाई यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं। परिवहन वायु मार्ग यहां पर अब एक नया हवाई अड्डा बन रहा है है जो मन्दूरी में है। रेल मार्ग आज़मगढ़ स्टेशन, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण है। यह रेल मार्ग द्वारा सभी प्रमुख शहरों व स्‍थानों से जुड़ा हुआ है। यहाँ की मुख्य ट्रेनों में मुम्बई से गोदान एक्सप्रेस, दिल्ली वाया लखनऊ से कैफ़ियत एक्सप्रेस, साप्ताहिक ट्रेन लोकमान्य तिलक जो मुंबई के लिए शामिल हैं। सड़क मार्ग आजमगढ़ में पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बस डिपो और उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिला मुख्यालयों और दिल्ली के लिए नियमित बस सेवाएं हैं। यह सड़कमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। अब इसमें 'पूर्वांचल एक्सप्रेस वे' प्रस्तावित है जो लखनऊ को बलिया से जोड़ेगा। शिक्षा आजमगढ़ में कई शैक्षणिक संस्थान हैं जिनमें बुनियादी शैक्षणिक संस्थानों से लेकर उच्च संस्थान तक शामिल हैं। कई आईटीआई, पॉलिटेक्निक और मेडिकल कॉलेज भी हैं। कुछ प्रसिद्ध संस्थान हैं: गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और सुपर फैसिलिटी अस्पताल, आज़मगढ़ - यह एक राजकीय मेडिकल कॉलेज है, जो आज़मगढ़ के चक्रपानपुर में स्थित है। यह किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ से संबद्ध है। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, आज़मगढ़ - यह एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और डॉ। ए.पी.जे का एक घटक कॉलेज है। अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (पूर्व में उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय)। शिब्ली नेशनल कॉलेज - यह आज़मगढ़ में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रदान करता है। ब्रिटिश राज के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के एक इस्लामी विद्वान शिबली नोमानी द्वारा 1883 में इस प्रसिद्ध संस्था की स्थापना की गई थी। ऐतिहासिक स्थल महराजगंज छोटी सरयू नदी के तट पर बसा महराजगंज जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आज़मगढ़ में राजाओं की नामावली अधिक लम्बी है यही वजह है कि इस जगह को महराजगंज के नाम से जाना जाता है। यहां एक काफी पुराना मंदिर भी है। यह मंदिर भैरों बाबा को समर्पित है। भैरों बाबा को देओतरि के नाम से भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यह वहीं स्थान है जहां भगवान शिव की पत्‍नी पार्वती दक्ष यजन वेदी में सती हुई थी। प्रत्येक माह पूर्णिमा के दिन यहां मेले का आयोजन किया जाता है। मुबारकपुर मुबारकपुर जिला मुख्यालय के उत्तर-पूर्व से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहले इस जगह को कासिमाबाद के नाम से जाना जाता था। कुछ समय बाद इस जगह का पुर्ननिर्माण करवाया गया। इस जगह को दुबारा राजा मुबारक ने बनवाया था। यह जगह बनारसी साड़ियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। इन बनारसी साड़ियों का निर्यात पूरे विश्व में होता है। इसके अलावा यहां ठाकुरजी का एक पुराना मंदिर और राजा साहिब की मस्जिद भी स्थित है। मुबारकपुर से क़रीब2 km दूर रसूलपुर ब्यौहरा गांव है जो काफ़ी मायने रखता है। मेंहनगर यह जगह जिला मुख्यालय के पूर्व-दक्षिण में 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां एक प्रसिद्ध किला है जिसका निर्माण राजा हरिबन ने करवाया था। इस किले में एक स्मारक और सरोवर है जो कि काफी प्रसिद्ध है। इस सरोवर को मदिलाह सरोवर के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष सरोवर से तीन किलोमीटर की दूरी पर धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है। दुर्वासा यह स्थान फूलपुर तहसील मुख्यालय के उत्तर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह यहां स्थित दुर्वासा ऋषि के आश्रम के लिए काफी प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। हजारों की संख्या में विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने यहां आया करते थे।इसके पूर्व में 1 किमी की दूरी पर दुबैठा गांव है जहां का संबंध ऋषि दुर्वासा से जोड़ा जाता है। भँवरनाथ मंदिर यह मंदिर आज़मगढ़ जिले के प्रमुख मंदिरों में से एक हैं। भँवरनाथ मंदिर शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर लगभग सौ वर्ष पुराना है। माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से इस मंदिर में आता है उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। हजारों की संख्या में भक्त इस मेले में एकत्र होते हैं। अवन्तिकापुरी मुहम्मदपुर स्थित अविन्कापुरी काफी प्रसिद्ध स्थान है। ऐसा माना जाता है कि राजा जन्मेजय ने एक बार पृथ्वी पर जितने भी सांप है उन्हें मारने के लिए यहां एक यज्ञ का आयोजन किया था। यहां स्थित मंदिर व सरोवर भी काफी प्रसिद्ध है। काफी संख्या में लोग इस सरोवर में डुबकी लगाते हैं। निज़ामाबाद यह आज़मगढ़ मुख्यालय से 10 किमी पश्चिम में स्थित है। मिट्टी के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध यह स्थान हरिऔध, जैसे साहित्यकारों की जन्म स्थली भी है। यहाँ से मुबारकपुर से मंदुरी वाया तहबरपुर सड़क मार्ग से जुड़ा है। तहबरपुर निज़ामाबाद के उत्तर में स्थित बाज़ार है। तहबरपुर सीधे मुख्यालय ( आजमगढ़) से भी सीधा जुड़ा हुआ है। यहाँ से विभिन्न गांवों से संपर्क मार्ग जुड़े हुए हैं जिनमें पूरा अचानक, कोेठिहार, मुस्तफ़ाबाद, चिरावल, रैसिंहपुर, बैरमपुर, ओरा, कोइनहाँ, आदि प्रमुख हैं। चंद्रमा ऋषि आश्रम जनपद मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर पश्चिम तमसा एवं सिलानी नदी के संगम पर चंद्रमा ऋषि का आश्रम है। यह स्थान भँवरनाथ से तहबरपुर जाने वाले रास्ते पर पड़ता है,रामनवमी तथा कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल घूमने का स्थान है यह स्थान सती अनसूया के कहानी से संबंधित है। दत्तात्रेय आश्रम यह निज़ामाबाद से 4 किलोमीटर दूर पश्चिम तमसा और कुंवर नदी के संगम पर स्थित दत्तात्रेय का आश्रम है यहां पर पहले लोग ज्ञान प्राप्ति के लिए आया करते थे यहां शिवरात्रि के दिन मेले का आयोजन किया जाता है। चंद्रमा ऋषि,दत्तात्रेय और दुर्वासा ऋषि यह तीनों लोग सती अनुसूर्या के पुत्र माने जाते हैं जो क्रमागत ब्रह्मा,विष्णु और महेश के अवतार माने जाते हैं पल्हमेश्वरी मन्दिर यह लालगंज से पूर्व लगभग 13 किलोमीटर दूर पल्हना ब्लॉक में है यह मंदिर आज़मगढ़ के प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है यह मा पल्हमेश्वरी का धाम है जहां नवरात्र के दिनों में हजारों के संख्या में भक्त जाते हैं। यहां वर्ष में एक बार पूर्णिमा के दिन भारी मेला लगता है। यहां एक मंदिर तथा एक बड़ा सा पोखरा भी है। इन्हें भी देखें आज़मगढ़ ज़िला तमसा नदी सन्दर्भ श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर श्रेणी:आज़मगढ़ ज़िला श्रेणी:आज़मगढ़ ज़िले के नगर *