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किण्वन
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thumb|right|किण्वन की क्रिया
right|thumb|एथेनॉल का किण्वन
किण्वन (Fermentation) एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक यौगिक सूक्ष्मजीवों (मुख्यतः खमीर और जीवाणु) की सहायता से सरल कार्बनिक यौगिकों में विघटित होते हैं। यह एक अवायवीय (Anaerobic) प्रक्रिया है, अर्थात् इसमें ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
जैव रसायन (Biochemistry) के अनुसार, इसे ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा (ATP) निकालने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है। किण्वन का अध्ययन करने वाले विज्ञान को ज़ाइमोलॉजी (Zymology) कहा जाता है और फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर को पहला ज़ाइमोलॉजिस्ट माना जाता है।Sheikh Haseena Fermentation: A Potential Strategy for Microbial Metabolite Production 2024-06-13 https://www.intechopen.com/chapters/89539 The Science of Fermentation IntechOpen en 978-0-85014-499-4 2026-04-07 Anand Gowthami G. Shivanna Gunashree B.
इतिहास और प्रक्रिया
किण्वन की प्रक्रिया का वैज्ञानिक अध्ययन कई वर्षों में विकसित हुआ है। सूक्ष्मजीवों में किण्वन (अवायवीय श्वसन) के संबंध में 1897 में विलियम क्रूइकशेंक (William Cruickshank) ने जानकारी दी थी। 1875 में जर्मन शरीर विज्ञानी एडवर्ड प्लूगर (Eduard Pflüger) ने इसे 'अंतराअण्विक श्वसन' (Intramolecular respiration) कहा और रूसी वैज्ञानिक कोस्त्यचेव (Kostychev) ने इसे 'अवायवीय श्वसन' (Anaerobic respiration) का नाम दिया।https://www.studyadda.com/notes/neet/biology/respiration-in-plants/anaerobic-respiration/9925 JEE Main, JEE Advanced, CBSE, NEET, IIT, free study packages, test papers, counselling, ask experts - Studyadda.com 2026-04-07 en-GB
इस प्रक्रिया में आण्विक ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट दो या अधिक सरल अणुओं में टूट जाते हैं। अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज के कार्बन अणु पूरी तरह से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के रूप में मुक्त नहीं होते हैं। यह क्रिया पूर्ण रूप से कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) में संपन्न होती है और इसमें माइटोकॉन्ड्रिया की आवश्यकता नहीं होती है। अर्थात्, अवायवीय श्वसन के सभी आवश्यक एंजाइम (विकर) कोशिकाद्रव्य में ही उपस्थित होते हैं।
सूक्ष्मजीवों में एटीपी (ATP) उत्पादन का यह एक प्राथमिक साधन है। इसके अतिरिक्त, मनुष्यों सहित सभी जानवरों के जठरांत्र संबंधी मार्ग (Gastrointestinal tract) के भीतर भी किण्वन की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है।
उपयोग
नवपाषाण युग से ही मनुष्य ने खाद्य और पेय पदार्थों के उत्पादन तथा संरक्षण के लिए किण्वन का उपयोग किया है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:
शराब (एल्कोहल) और बीयर जैसे मादक पेय पदार्थों के निर्माण में।
बेकरी उद्योग में ब्रेड (पावरोटी) और बिस्कुट बनाने में।
दही, सिरका, अचार और किमची जैसे खट्टे खाद्य पदार्थों के उत्पादन और संरक्षण में।
सन्दर्भ
श्रेणी:जैवरसायनिकी
श्रेणी:श्वसन