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411 समाचार
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म्यूचुअल फंड

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म्यूचुअल फंड(अंग्रेज़ी:Mutual fund) जिसे हिन्दी में पारस्परिक निधि कहते हैं, किन्तु इसका अंग्रेज़ी नाम अधिक प्रचलित है, म्यूचुअल फंड एक प्रकार का एक सामूहिक निवेश होता है। निवेशकों के समूह मिल कर स्टॉक, अल्प अविधि के निवेश या अन्य प्रतिभूतियों (सेक्यूरीटीज) मे निवेश करते है।। यूटीआई एएमसी भारत की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी है। म्यूचुअल फंड कंपनियां कौड़ी के भाव बेच रही हैं हिस्सा https://web.archive.org/web/20091012185556/http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5110648.cms 12 अक्तूबर 2009 ।नवभारत टाइम्स-हिन्दी।९ अक्टूबर, २००९ म्यूचुअल फंड मे एक फंड प्रबंधक होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है और लाभ और हानि का हिसाब रखता है। इस प्रकार हुए फायदे-नुकसान को निवेशको मे बाँट दिया जाता है। स्टॉक बाजार की पर्याप्त जानकारी न होने पर भी निवेश की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुलभ मार्ग म्यूचुअल फंड होता है।म्यूचुअल फंड में निवेश की बारीकियां जानें https://web.archive.org/web/20090724141605/http://hindi.economictimes.indiatimes.com/articleshow/4795868.cms 24 जुलाई 2009 ।इकोनॉमिक टाइम्स।२० जुलाई, २००९म्यूचुअल फंड जोखिम https://web.archive.org/web/20180927165151/https://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/mantra/67-76-76573.html 27 सितंबर 2018 ।हिन्दुस्तान लाइव।१५ अक्टूबर, २००९ म्यूचुअल फंड संचालक (कंपनी) सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है और उनसे कुछ सुविधा शुल्क भी लेती है। फिर इस राशि को उनके लिए बाजार में निवेश करती है। इनमें में निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह चिंता फंड मैनेजर की होती है। वही निवेशक के निवेश का रखरखाव करने वाला होता है। एक दूसरा लाभ ये भी होता है, कि छोटे निवेशक बहुत कम राशि जैसे १०० रु.प्रतिमाह तक निवेश कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लेना होता है, जिसमें बैंक से ये राशि मासिक सीधे फंड में स्थानांतरित होती रहती है। म्यूचुअल फंड के शेयर की कीमत नेट ऐसेट वैल्यु या एनएवी (NAV) कहलाती है। इसकी गणना के लिए फंड के कुल मूल्य को निवेशको द्वारा खरीदे गए कुल शेयरो की संख्या से भाग दिया जाता है।म्यूचुअल फंड https://web.archive.org/web/20091113194613/http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/gyan/67-75-79815.html 13 नवंबर 2009 ।हिन्दुस्तान लाइव।६ नवंबर, २००९ प्रकार म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजना में इंडेक्स फंड, डायवर्सिफाइड फंड, लार्ज-कैप फंड, मिड-कैप स्कीम और कर-बचाव योजना (टैक्स सेविंग स्कीम) जैसे बहुत से विकल्प उपलब्ध होते हैं। निवेशक निवेश के उद्देश्यों और लक्ष्य पर सही बैठने वाली योजना चुन सकते हैं। सूचकांक योजना जो निवेशक किसी विशेष शेयर के लिए कॉल नहीं चाहते वे सूचकांक आधारित योजना यानि इंडेक्स स्कीम में निवेश कर सकते हैं क्योंकि इंडेक्स स्कीम उन विशेष शेयरों में ही निवेश करती है जो किसी विशेष इंडेक्स का हिस्सा होते हैं। यदि इंडेक्स ऊपर जाता है तो निवेशक फायदे में रहते हैं। विविध योजना इसे डायवर्सिफाइड स्कीम भी कहते हैं। यदि किसी विशेष सेक्टर या इकनॉमी के किसी एक सेगमेंट में निवेश को लेकर नहीं रहना चाहते तो डायवर्सिफाइड स्कीम का विकल्प उपलब्ध होता है। ओपेन एंडेड और क्लोज एंडेड फंड युनिट जारी करने के अनुसार दो प्रकार के होते हैं- ओपेन एंडेड फंड योजना के जीवनकाल में किसी भी समय यूनिट जारी किए जा सकते हैं या उनका भुगतान कर सकते हैं। क्लोज एंडेड फंड बोनस या राइट निर्गम को छोड़कर योजना के अंतर्गत कोई भी नया यूनिट जारी नहीं कर सकते हैं। इस ही कारण से ओपेन एंडेड योजना की इकाई पूंजी में शेयर की ही तरह उतार चढ़ाव हो सकते हैं, जबकि क्लोज एंडेड के मामले में ऐसा नहीं होता। ओपन एंडेड योजना में कभी भी प्रवेश लिया जा सकता है या उससे बाहर निकला जा सकता है और कई बार इनमें एक लॉक-इन पीरियड होता है, जिसके अंदर रीडेंपशन नहीं हो सकता, इसलिये इनमें प्रवेश के समय ही निश्चिंत हो जाना चाहिये। क्लोज एंडेड योजना में सब्सक्रिप्शन एक ही बार लिया जा सकता है और रीडेंपशन भी न्यूनतम तय समय सीमा के अंतराल पर ही हो सकता है। इस तरह क्लोज एंडेड स्कीम की तरलता (लिक्विडिटी) कम हो जाती है। लार्ज कैप और मिड कैप अधिक जोखिम लेने की क्षमता वाले लोग स्मॉल या मिड कैप स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। यह स्कीम अच्छी संभावनाओं वाली छोटी और मझोली कंपनियों में निवेश करती हैं। इनमें जोखिम अधिक होता है लेकिन इनमें अधिक रिटर्न देने की क्षमता होती है। शेयर बाजार में लंबी अवधि का निवेश लाभादायक होता है और अल्पावधि निवेश करने वालों के लिए जोखिम अधिक होता है। लार्ज कैप म्यूचुअल फंड में निवेश किसी ब्लूचिप कंपनी के स्टॉक में किया जाता है। इनमें निवेश सुरक्षित माना जाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इनके बारे में जानकारी हर जगह उपलब्ध होती है। मिड कैप म्यूचुअल फंड में निवेश मध्यम और छोटे आकार की कंपनियों में किया जाता है। बैलेंस्ड फंड बैलेंस्ड फंड को हाइब्रिड फंड कहते हैं। यह कॉमन स्टॉक, प्रैफर्ड स्टॉक, बांड और अल्पावधि बांड होता है। यह फंड लाभादायक होते हैं, क्योंकि इनमें जोखिम कारक भी कम हो जाता है और बहुत हद तक पूंजी की सुरक्षा निश्चित होती है। ग्रोथ फंड ग्रोथ फंड की सहायता से अधिकतम फायदा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इनमें निवेश उन कंपनियों में किया जाता है जो बाजार में तेज प्रगति करती हैं। इन फंड्स में निवेश अधिक लाभ के लिए करते हैं और इस कारण से जोखिम अधिक होता है। डिविडेंड फंड यदि कोई निवेशक डिविडेंड फंड में निवेश करता है| तो कंपनियों द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाला डिविडेंड भी निवेशक को मिलता रहता है| यह नकद धनराशी निवेशक के खाते में जमा कर दी जाती है| वैल्यू फंड यह ऐसे फंड हैं जो सुरक्षा को वरीयता देते हैं। इनमें अपेक्षाकृत कम लाभ होता है, किन्तु हानि की संभावना बहुत कम होती है। मनी मार्केट फंड सामान्यत: मनी मार्केट सबसे सुरक्षित फंड माने जाते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य निवेशित पूंजी सुरक्षित रखना होता है। म्युच्युअल फंड का गठन कैसे किया जाता है? म्युच्युअल फंड का गठन एक ट्रस्ट के रूप में किया जाता है जो स्पांसर (प्रायोजक), ट्रस्टी, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) और कस्टोडियन के अधीन होता है। ट्रस्ट की स्थापना एक या उससे अधिक स्पांसर द्वारा की जाती है। कंपनी में जिस तरह प्रमोटर होते हैं उसी तरह म्युच्युअल फंड में प्रायोजक होते हैं। म्युच्युअल फंड के ट्रस्टी लोग निवेशकों के लाभार्थ फंड की प्रापर्टी धारण कर रखते हैं। सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) विभिन सिक्युरिटीज में पूंजी निवेश द्वारा धन का प्रशासन करती है। सेबी द्वारा मान्य कस्टोडियन विविध स्कीमों की सिक्युरिटीज अपने कब्जे में रखता है। एएमसी पर सर्वसामान्य देखरेख और नियंत्रण की सत्ता ट्रस्टियों की होती है। वे फंड के कार्य का संचालन करते हैं और सेबी के नियमों का पालन हो, यह देखते हैं। सेबी के नियमानुसार ट्रस्टी कंपनी के डाइरेक्टर अथवा ट्रस्टी मंडल के दो तिहाई सदस्य स्वतंत्र होने चाहिए ताकि वे स्पांसर के साथ जुडे न हों। इसके अलावा एएमसी के 50 प्रतिशत डाइरेक्टर स्वतंत्र होने चाहिए। सभी म्युच्युअल फंडो को कोई भी स्कीम खोलने से पहले सेबी का रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना पडता है। भारत में म्यूचुअल फंड वैसे तो भारत में काफी सारे म्युचअल फण्ड स्कीम है और बाजार में कोई भी फंड हाउस जब कोई नई योजना निकालता है, तब इससे जुड़े सभी नियमों, शर्त और दूसरी बातों की जानकारी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराता है। यह जानकारी जिस दस्तावेज के द्वारा सेबी को दी जाती है, उसे 'स्कीम का ऑफर डॉक्युमेंट' कहते हैं। इसमें इनवेस्टमेंट का उद्देश्य, जोखिम कारक, लोड व अन्य व्यय आदि से जुड़ी पर्याप्त जानकारियां दी गई होती हैं। म्यूचुअल फंड संचालन करने में अडवाइजरी, कस्टोडियल, ऑडिट ट्रांसफर एजेंट व ट्रस्टी फीस और एजेंट कमिशन आदि कई मदों में व्यय होता है, ऑफर डॉक्युमेंट में इन मदों में किए जाने वाले व्यय के बारे में पूरी दी गई होती है। इसके अलावा, यह भी बताया गया होता है कि स्कीम में निवेश करने पर निवेशक को कौन-कौन से शुल्क देने होंगे, जैसे एंट्री लोड, एग्जिट लोड, स्विचिंग चाजेर्ज, रेकरिंग एक्सपेंस आदि। जिस योजना में खर्चे कम आते हों, फंड हाउस के पास निवेशक के लिए रकम अधिक होगी और इससे रिटर्न भी अधिक मिलने की उम्मीद बनेगी। ऐसी योजना निवेशकों के लिए अधिक लाभदायक होती हैं। किसी भी योजना के तहत ६५ प्रतिशत से अधिक रकम यदि इक्विटी में लगाई जाने वाली है तो ऐसी योजना को इक्विटी योजना कहा जाता है। यदि कंपनी इक्विटी व ऋण (डेट) में बराबर-बराबर रकम निवेश करने जा रही है, तो ऐसी योजना बैलेंस्ड स्कीम के अंतर्गत आती है। बैलेंस्ड स्कीम की तुलना में इक्विटी स्कीम अधिक जोखिमकारी होती हैं। भारत मे २०१० तक म्यूचुअल फंड में निवेश हेतु बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जायेगी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई और एनएसडीएल मिलकर एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं, जिसके जरिए म्यूचुअल फंड के यूनिट सीधे खरीदे या बेचे जा सकेंगे। एकाधिकार से बचने के लिए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने बीएसई की अंग सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज और रजिस्ट्रार सीएएमएस-कार्वी को इसी तरह का प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए कहा है। सन्दर्भ यह भी देखे भारतीय म्यूचुअल फंड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) बाहरी कडियाँ एशोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इण्डिया (AMFI) का जालघर (अंग्रेजी में) म्यूचुअल फंडों में अब आएंगी उद्देश्य-आधारित योजनाएं- दैनिक भास्कर पर श्रेणी:स्टॉक श्रेणी:वित्त श्रेणी:निवेश श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना