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गगन मै थाल
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गगन मै थाल, रव चंद दीपक बने... यह आरती सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी द्वारा उच्चारित है।R. P. Malhotra Kuldeep Arora Encyclopaedic Dictionary of Punjabi Literature: A-L https://books.google.com/books?id=WLAwnSA2uwQC&pg=PA151 2003 Global Vision Publishing House 978-81-87746-52-2 151– 9 मई 2019 https://web.archive.org/web/20140704191957/http://books.google.com/books?id=WLAwnSA2uwQC 4 जुलाई 2014 livehttp://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-199585.html गुरु नानक देव और उनके द्वारा प्रवर्तित मार्ग 3 मई 2014 https://web.archive.org/web/20140503184921/http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-199585.html 3 मई 2014 dead उन्होंने यह आरती 1506http://www.orissa.gov.in/e-magazine/orissareview/2012/Feb-March/engpdf/1-6.pdf ओडिशा सरकार की वेबसाइट पर विवरण 22 अगस्त 2015 https://web.archive.org/web/20160304092613/http://www.orissa.gov.in/e-magazine/orissareview/2012/Feb-March/engpdf/1-6.pdf 4 मार्च 2016 live या 1508 की आरती https://web.archive.org/web/20160304023317/http://www.barusahib.org/Assets/Publications/Natures_Own_Arti.pdf 4 मार्च 2016 http://www.sikh-heritage.co.uk/Scriptures/Guru%20Granth/Guru%20Granth.htm https://web.archive.org/web/20150924101745/http://www.sikh-heritage.co.uk/Scriptures/Guru%20Granth/Guru%20Granth.htm 24 सितंबर 2015 में पूर्वी भारत की यात्रा के दौरान पुरी के श्री जगन्नाथ जी मंदिर में उच्चारण की थी। अमृतसर स्थित सिखों के तीर्थ स्थल श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में प्रतिदिन संध्या समय रहरास साहिब के पाठ व अरदास के साथ यह आरती की जाती है।यह आरती मूल रूप मे गुरमुखी मे लिखी हुई है और सिखों के पवित्र आदि ग्रन्थ में शामिल है।
परंपरागत आरती से हट कर, इसमें सम्पूर्ण सृष्टि को ही परमात्मा की आरती में लीन कल्पित-प्रदर्शित किया गया है।Jagjit Singh Saral Guru Granth Sahib Evam Sikh Dharam https://books.google.com/books?id=6QWnDQAAQBAJ&pg=PT95 1 January 2009 Vidhya Vihar 978-81-85828-99-2 95– आरती धनासरी राग में गायी जाती है जो संध्याकालीन राग है और गुरुग्रंथ साहिब की लगभग 115 रचनायें इस राग में निबद्ध हैं।Gursharan Singh Kainth The Granth be Thy Guru: Guru Maneyo Granth https://books.google.com/books?id=j5q-57WsVTkC&pg=PA93 1999 Regency Publications 978-81-86030-97-4 93–
रवींद्रनाथ टैगोर के विचार
कई महान कविताओं व भारत के राष्ट्रगान के रचयिता आचार्य रवींद्रनाथ टैगोर से एक बार प्रख्यात फिल्म कलाकार बलराज साहनी, जो तब शांति निकेतन में अध्यापक थे, ने प्रश्न किया कि जिस प्रकार भारत का राष्ट्रगान उन्होंने लिखा है तो क्यों न सम्पूर्ण विश्व के लिए भी एक विश्वगान भी लिखें? इस पर उन्होंने कहा कि वह तो पहले ही लिखा जा चुका है, १६वीं शताब्दी में गुरु नानक के द्वारा। और यह मात्र इस विश्व ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए गान है। गुरुदेव टैगोर इस आरती से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने स्वयं बांग्ला में इसका अनुवाद भी किया।
पाठ व अनुवाद
गुरु नानक ने अपनी आरती में परमात्मा के विराट स्वरुप का चित्रण किया है और कल्पना की है कि समस्त ब्रह्माँड ही उसकी पूजा में लीन है। आरती के प्रारंभिक बोल इस प्रकार हैं:
गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने,
तारका मंडल, जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,
सगल बनराइ फुलन्त जोति॥
कैसी आरती होइ॥
भवखंडना तेरी आरती॥
अनहत सबद बाजंत भेरी॥
मूल गुरमुखी पाठ
ਗਗਨ ਮੈ ਥਾਲੁ ਰਵਿ ਚੰਦੁ ਦੀਪਕ ਬਨੇ ਤਰਿਕਾ ਮੰਡਲ ਜਨਕ ਮੋਤੀ ||
ਧੂਪੁ ਮਲਆਨਲੋ ਪਾਵਣੁ ਚਵਰੋ ਕਰੈ ਸਗਲ ਬਨਰਾਇ ਫੂਲੰਤ ਜੋਤੀ ||੧||
ਕੈਸੀ ਆਰਤੀ ਹੋਇ ਭਵਖੰਡਨਾ ਤੇਰੀ ਆਰਤੀ ||ਅਨਹਤਾ ਸਬਦ ਵਾਜੰਤ ਭੇਰੀ ||ਰਹਾਊ||
ਸਹਸ ਤਵ ਨੈਨ ਨਨ ਨੈਨ ਹੈ ਤੋਹਿ ਕਉ ਸਹਸ ਮੂਰਤਿ ਨਨਾ ਏਕ ਤੋਹੀ ||
ਸਹਸ ਪਦ ਬਿਮਲ ਨਨ ਏਕ ਪਦ ਗੰਧ ਬਿਨੂ ਸਹਸ ਤਵ ਗੰਧ ਆਇਵਿ ਚਲਤ ਮੋਹੀ||੨||
ਸਭ ਮਹਿ ਜੋਤਿ ਜੋਤਿ ਹੈ ਸੋਈ ||ਤਿਸ ਕੈ ਚਾਨਣੁ ਹੋਇ ||
ਗੁਰ ਸਾਖੀ ਜੋਤਿ ਪਰਗਟੁ ਹੋਇ ||ਜੋ ਤਿਸੁ ਭਾਵੈ ਸੁ ਆਰਤੀ ਹੋਇ ||੩||
ਹਰਿ ਚਰਣ ਕਮਲ ਮਕਰੰਦ ਲੋਭਿਤ ਮਨੋ ਆਨਦਿਨੋ ਮੋਹਿ ਆਹਿ ਪਿਆਸਾ ||
ਕ੍ਰਿਪਾ ਜਲੁ ਦੇਹਿ ਨਾਨਕ ਸਾਰਿੰਗ ਕਉ ਹੋਇ ਜਾ ਤੇ ਤੈਰੇ ਨਾਮਿ ਵਾਸਾ ||
ਹਰਿ ਚਰਣ ਕਮਲ ਮਕਰੰਦ ਲੋਭਿਤ ਮਨੋ ਅਨਦਿਨੋ ਮੋਹਿ ਆਹੀ ਪਿਆਸਾ॥੪||ਧਨਾਸਰੀ ਮ:੧
अर्थ
आकाश रूपी आरती के थाल में सूर्य और चंद्र दीपक के समान प्रज्ज्वलित हैं, तारा मंडल मोतियों की तरह शोभायमान हैं। मलय पर्वत से आती चंदन की सुगंध ही धूप है, वायु चंवर कर रही है, समस्त वनों की सम्पूर्ण वनस्पतियाँ तुम्हारी आरती के निमित्त फूल की तरह अर्पित हैं। अनहद शब्द भेरी की तरह बज रहा है। हे भवखंडन! तुम्हारी आरती की भव्यता का किस तरह वर्णन किया जा सकता है!Sumeet Aurora Nanak: The Correspondent Of The Ultimate https://books.google.com/books?id=5mstDwAAQBAJ&pg=PT88 25 August 2017 Bloomsbury Publishing 978-93-86349-87-3 88–
सन्दर्भ
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बाहरी कड़ियाँ
नोकिया म्यूज़िक स्टोर पर आरती "गगन में थाल"
अमेज़न.कॉम पर आरती "गगन में थाल"
youtube पर नानक शाह फकीर फिलम मे गाई गयी आरती "गगन में थाल"
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