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411 समाचार
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भारत की संस्कृति

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पवित्र मंदिरों के पुनरुद्धार, पुनर्स्थापन और नवीनीकरण के माध्यम से भारतीय संस्कृति का पुनरुद्धार किसी राष्ट्र की ताकत और पहचान को आकार देने में सर्वोपरि महत्त्व रखता है।  किसी समाज की सांस्कृतिक विरासत उसके मूल्यों, परंपराओं और साझा अनुभवों की परिणति है, जो एकता और उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देती है।  भारत की एकता इसकी संस्कृति में गहराई से निहित है, जो 5000 से अधिक वर्षों से विकसित हुई है और भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं से परे एक एकीकृत शक्ति के रूप में कार्य करती है। भारतीय संस्कृति का केंद्र हिंदू धर्म है, जो सिर्फ एक धर्म नहीं बल्कि एक व्यापक जीवन शैली है।  भारतीय संस्कृति का लोकाचार हिंदू धर्म के सिद्धांतों और इसके सह-अस्तित्व और वसुधैव कुटुंबकम् के मूल दर्शन के साथ जुड़ा हुआ है।  हिंदू धर्म ने वह आधार प्रदान किया है जिस पर समय के साथ विभिन्न उप-संस्कृतियाँ उभरीं और विकसित हुईं, जिन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध छवि में योगदान दिया । पूरे इतिहास में, भारत की संस्कृति को विदेशी आक्रमणकारियों और उपनिवेशवादियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिनका उद्देश्य इसके सांस्कृतिक ताने-बाने को खत्म करना है। इस्लामी आक्रमणकारियों ने मंदिरों को निशाना बनाया, जो न केवल पूजा के स्थान थे, बल्कि शिक्षा, कला, नृत्य, संगीत और संस्कृति के केंद्र भी थे। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत का सांस्कृतिक लचीलापन समय की कसौटी पर खरा उतरा है। सांस्कृतिक पुनरुत्थान में साझा सांस्कृतिक पहलुओं की बहाली और पुनरोद्धार पर बल दिया जाता है जो उपनिवेश, उत्पीड़न या सांस्कृतिक प्रभुत्व के कारण नष्ट हो गए होंगे। इस पुनरुत्थान को प्राप्त करने के प्रमुख तरीकों में से एक पवित्र मंदिरों की बहाली और नवीनीकरण के माध्यम से है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकात्मक भंडार रहे हैं। ये मंदिर कला, शिक्षा, आध्यात्मिकता और संस्कृति के केंद्र रहे हैं, जो भारत के समृद्ध इतिहास के सार का प्रतीक हैं। मध्ययुगीन काल के दौरान, भारतीय संस्कृति को उपनिषदों के व्याख्याता आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्जीवित किया गया था, जिन्होंने बद्रीनाथ, रामेश्वरम, द्वारका और पुरी नामक चार धामों का अभिषेक किया था। भारत के चारों कोनों में देश की सांस्कृतिक एकता और अखंडता अंतर्निहित है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक जागृति द्वारा संचालित, इन मंदिरों को पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करने के लिए एक ठोस प्रयास किया गया है। प्रधानमन्त्री मोदी की पहल भारत की सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत करने की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल, केदारनाथ सौंदर्यीकरण और ऐसी कई परियोजनाएं इन प्रयासों का उदाहरण हैं। ये परियोजनाएँ धार्मिक महत्त्व वाले हैं, वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और गौरव के पुनरुत्थान का प्रतीक हैं। मंदिरों का पुनरुद्धार सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए आधारशिला के रूप में कार्य करता है, जो भारत की सांस्कृतिक पहचान के स्तंभ के रूप में कार्य करता है। ये पहले न केवल भौतिक संरचनाओं को पुनर्स्थापित करती हैं बल्कि उन में निहित सांस्कृतिक भावना को भी पुनर्जीवित करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बढ़ावा देने, लोगों को उन की विरासत से दोबारा जोड़ने में सहायक रहा है । इस के अलावा, प्रधानमन्त्री मोदी की पहल मंदिरों के निर्माण और जीर्णोद्धार से भी आगे तक फैली हुई है। इन में सांस्कृतिक पुनरुद्धार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण शामिल है, जिस में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना, विरासत स्थलों की बहाली और चोरी हुई कलाकृतियों का प्रत्यावर्तन शामिल है। वह जहां भी जाते हैं भारत की लूटी और चुराई गई सांस्कृतिक विरासत को वापस लाते हैं। उन के नेतृत्व में सांस्कृतिक कायाकल्प केवल धार्मिकता तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस में एक व्यापक अपील शामिल है जो हिंदुओं के विविध स्पैक्ट्रम के साथ प्रतिध्वनित होती है। योग, जो दुनिया को भारत का उपहार है, २१ जून को योग दिवस घोषित करने के बाद संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा कैसे बन गया, यह इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमन्त्री मोदी भारतीय संस्कृति और इस के मूल को फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग कर रहे हैं। स्वामी विवेकानन्द ने अपने भाषण से जो किया, वही कार्य प्रधानमन्त्री मोदी अपने विभिन्न प्रयासों से कर रहे हैं। संक्षेप में, पवित्र मंदिरों के पुनरुद्धार, पुनर्स्थापन और नवीनीकरण के माध्यम से भारतीय संस्कृति का पुनरुद्धार देश की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने का एक बहुआयामी प्रयास है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व ने इस सांस्कृतिक पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एक नए युग के लिए मंच तैयार किया है और लोगों को अपनी जड़ों से फिर से जोड़ा है ।। thumb| कथककली कलाकार कृष्णा के रूप में नृत्य करते है |thumb|भारत उपमहाद्वीप की क्षेत्रीय सांस्कृतिक सीमाओं और क्षेत्रों की स्थिरता और ऐतिहासिक स्थायित्व को प्रदर्शित करता हुआ मानचित्र भारत की संस्कृति बहुआयामी है जिसमें भारत का महान इतिहास, विलक्षण भूगोल और सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई प्राचीन विरासत शामिल है, बौद्ध धर्म एवं स्वर्ण युग की शुरुआत और उसके अस्तगमन के साथ फली-फूली अपनी खुद की प्राचीन विरासत शामिल हैं। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के रिवाज़, परम्पराओं और विचारों का भी इसमें समावेश है। पिछली पाँच सहस्राब्दियों से अधिक समय से भारत के रीति-रिवाज़, भाषाएँ, प्रथाएँ और परम्पराएँ इसके विभिन्न क्षेत्रों के परस्पर संबंधों में महान विविधताओं का एक अद्वितीय उदाहरण देती हैं। वास्तव में, भारत वैश्विक पटल पर अपनी इसी सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है। भारत कई धार्मिक प्रणालियों, जैसे कि सनातन धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म, सिंधी धर्म धर्मों का जनक है भारत की संस्कृति को करीब से देखे भारतीय सभ्यता में संस्कृति के बारे में भारतीय संस्कृति विश्व के इतिहास में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्व रखती है। यह संसार की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान संस्कृति है। मोहनजोदड़ो की खुदाई के बाद से यह मिस्र, मेसोपोटेमिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं के समकालीन समझी जाने लगी है। प्राचीनता के साथ इसकी दूसरी विशेषता अमरता है। चीनी संस्कृति के अतिरिक्त पुरानी दुनिया की अन्य सभी - मेसोपोटेमिया की सुमेरियन, असीरियन, बेबीलोनियन और खाल्दी प्रभृति तथा मिस्र ईरान, यूनान और रोम की-संस्कृतियाँ काल के कराल गाल में समा चुकी हैं, कुछ ध्वंसावशेष ही उनकी गौरव-गाथा गाने के लिए बचे हैं; किन्तु भारतीय संस्कृति कई हज़ार वर्ष तक काल के क्रूर थपेड़ों को खाती हुई आज तक जीवित है। उसकी तीसरी विशेषता उसका जगद्गुरु होना है। उसे इस बात का श्रेय प्राप्त है कि उसने न केवल महाद्वीप-सरीखे भारतवर्ष को सभ्यता का पाठ पढ़ाया, अपितु भारत के बाहर बड़े हिस्से की जंगली जातियों को सभ्य बनाया, साइबेरिया के सिंहल (श्रीलंका) तक और मैडीगास्कर टापू, ईरान तथा अफगानिस्तान से प्रशान्त महासागर के बोर्नियो, बाली के द्वीपों तक के विशाल भू-खण्डों पर अपनी अमिट प्रभाव छोड़ा। सर्वांगीणता, विशालता, उदारता, प्रेम और सहिष्णुता की दृष्टि से अन्य संस्कृतियों की अपेक्षा अग्रणी स्थान रखती है। भाषा भारत की भाषाएँ भारत की राजभाषा के रूप में हिन्दी भारत में बोली जाने वाली भाषाओं की बड़ी संख्या ने यहाँ की संस्कृति और पारंपरिक विविधता को बढ़ाया है। 1000 (यदि आप प्रादेशिक बोलियों और प्रादेशिक शब्दों को गिनें तो, जबकि यदि आप उन्हें नहीं गिनते हैं तो ये संख्या घट कर 216 रह जाती है) भाषाएँ ऐसी हैं जिन्हें 10,000 से ज्यादा लोगों के समूह द्वारा बोला जाता है, जबकि कई ऐसी भाषाएँ भी हैं जिन्हें 10,000 से कम लोग ही बोलते है। भारत में कुल मिलाकर 415 भाषाएं उपयोग में हैं । भारतीय संविधान ने संघ सरकार के संचार के लिए हिंदी और अंग्रेजी, इन दो भाषाओं के इस्तेमाल को आधिकारिक भाषा घोषित किया है व्यक्तिगत राज्यों के उनके अपने आतंरिक संचार के लिए उनकी अपनी राज्य भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में दो प्रमुख भाषा सम्बन्धी परिवार हैं - भारतीय-आर्य भाषाएं और द्रविण भाषाएँ, इनमें से पहला भाषा के परिवार मुख्यतः भारत के उत्तरी, पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों के फैला हुआ है जबकि दूसरा भाषा परिवार भारत के दक्षिणी भाग में.भारत का अगला सबसे बड़ा भाषा परिवार है एस्ट्रो-एशियाई भाषा समूह, जिसमें शामिल हैं भारत के मध्य और पूर्व में बोली जाने वाली मुंडा भाषाएँ, उत्तरपूर्व में बोई जाने वाली खासी भाषाएँ और निकोबार द्वीप में बोली जाने वाली निकोबारी भाषाएँ। भारत का चौथा सबसे बड़ा भाषा परिवार है तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार का परिवार जो अपने आप में चीनी- तिब्बती भाषा परिवार का एक उपसमूह है। धर्म धर्मजनसंख्याप्रतिशतसभी धर्म 1,028,610,328 100.00%हिंदू 827,578,86880.456%मुसलमान१३८,१८८,२४० १३.४३४% ईसाई२४,०८०,०१६ २.३४१%सिख१९,२१५,७३० १.८६८%बौद्ध७,९५५,२०७ ०.७७३% जैन४,२२५,०५३ ०.४११% अन्य६,६३९,६२६ ०.६४५४% धर्म नहीं कहा ७२७,५८८ ०.०७% भारत में धर्म अब्राहमिक के बाद भारतीय धर्म विश्व के धर्मों में प्रमुख है, जिसमें हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म, आदि जैसे धर्म शामिल हैं। आज, हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म क्रमशः दुनिया में तीसरे और चौथे सबसे बड़े धर्म हैं, जिनमें लगभग १.४ अरब अनुयायी साथ हैं। विश्व भर में भारत में धर्मों में विभिन्नता सबसे ज्यादा है, जिनमें कुछ सबसे कट्टर धार्मिक संस्थायें और संस्कृतियाँ शामिल हैं। आज भी धर्म यहाँ के ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों के बीच मुख्य और निश्चित भूमिका निभाता है। ८०.४% से ज्यादा लोगों का धर्म हिन्दू धर्म है। कुल भारतीय जनसँख्या का १३.४% हिस्सा इस्लाम धर्म को मानता हैhttp://www.censusindia.net/religiondata/Summary%20Muslims.pdf Religions Muslim PDF Registrat General and Census Commissioner, भारत 2006-06-01 https://web.archive.org/web/20060523201648/http://www.censusindia.net/religiondata/Summary+Muslims.pdf 23 मई 2006 dead सिख धर्म, जैन धर्म और खासकर के बौद्ध धर्म का केवल भारत में नहीं बल्कि पुरे विश्व भर में प्रभाव है ईसाई धर्म, पारसी धर्म, यहूदी और बहाई धर्म भी प्रभावशाली हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है। भारतीय जीवन में धर्म की मज़बूत भूमिका के बावजूद नास्तिकता और अज्ञेयवादियों (agnostic) का भी प्रभाव दिखाई देता है। समाज समीक्षा यूजीन एम. मकर के अनुसार, भारतीय पारंपरिक संस्कृति अपेक्षाकृत कठोर सामाजिक पदानुक्रम द्वारा परिभाषित किया गया है उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को छोटी उम्र में ही उनकी भूमिकाओं और समाज में उनके स्थान के बारे में बताते रहा जाता हैAn American's Guide to Doing Business in India https://archive.org/details/americansguideto0000maka Eugene M. Makar 2007 उनको इस बात से और बल मिलता है की और इसका मतलब यह है कि बहुत से लोग इस बात को मानते हैं की उनकी जीवन को निर्धारण करने में देवताओं और आत्माओं की ही पूरी भूमिका होती है धर्म विभाजित संस्कृति जैसे कई मतभेद. जबकि, इनसे कहीं ज्यादा शक्तिशाली विभाजन है हिन्दू परंपरा में मान्य अप्रदूषित और प्रदूषित व्यवसायों का. सख्त सामाजिक अमान्य लोग इन हजारों लोगों के समूह को नियंत्रित करते हैं हाल के वर्षों, खासकर शहरों में, इनमें से कुछ श्रेणी धुंधली पड़ गई हैं और कुछ घायब हो गई हैं चमक कुमार (Nuclear family) भारतीय संस्कृति के लिए केंद्रीय है। महत्वपूर्ण पारिवारिक सम्बन्ध उतनी दूर तक होते हैं जहाँ तक समान गोत्र (gotra) के सदस्य हैं, गोत्र हिन्दू धर्मं के अनुसार पैतृक यानि पिता की ओर से मिले कुटुंब या पंथ के अनुसार निर्धारित होता है जो की जन्म के साथ ही तय हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में, परिवार के तीन या चार पीढ़ियों का एक ही छत के नीचे रहना आम बात हैवंश या धर्म प्रधान (Patriarch) प्रायः परिवार के मुद्दों को हल करता है। आर्यावर्त अथवा भारतवर्ष नामक राष्ट्र कि सांस्कृतिक व्याख्या करनी हो तो ऐसी कर सकते हैं - " जिस राष्ट्र का दर्शन कहता हो मानहानिपूर्ण जीवन से अपनी तेजस्विता और मान मर्यादा के साथ मर जाना ही अच्छा है, वह राष्ट्र भारतवर्ष है।" भारतीय संस्कृति भारत के कवि भारवि के किरातार्जुनीयम् नामक राष्ट्रीय काव्य में उजागर होती है - ज्वलितं न हिरण्यरेतसं चयं आस्कन्दति भस्मनां जनः । अभिभूतिभयादसूनतः सुखं उज्झन्ति न धाम मानिनः ।।https://books.google.co.in/books?id=b95jAAAAMAAJ&dq=%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%8D&hl=en&sa=X&redir_esc=y Bhāraviviracitam Kirātārjunīyam Bhāravi kavi Kr̥ṣṇadāsa Akādamī, 2002 अर्थात् मनुष्य राख की ढेर को तो अपने पैरो आदि से कुचल देते हैं किन्तु जलती हुई आग को नहीं कुचलते । इसी कारण से मनस्वी लोग अपने प्राणो को तो सुख के साथ छोड़ देते हैं किन्तु अपनी तेजस्विता अथवा मान-मर्यादा को नहीं छोड़ते । विकासशील देशों में, भारत अपनी निम्न स्तर की भौगोलिक और व्यावसायिक गतिशीलता की वजह से वृहद रूप से दर्शनीय है यहाँ के लोग कुछ ऐसे व्यवसाय को चुनते हैं जो उनके माता-पिता पहले से करते आ रहे हैं और कभी-कभार भौगोलिक रूप से वो अपने समाज से दूर जाते हैंhttp://www.econ.yale.edu/seminars/labor/lap05-06/Rosenzweig091605.pdf Why is Mobility in India so Low? Social Insurance, Inequality, and Growth Kaivan Munshi and Mark Rosenzweig 2005 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090304064338/http://www.econ.yale.edu/seminars/labor/lap05-06/Rosenzweig091605.pdf 4 मार्च 2009 live जाति व्यवस्था जाति thumb|300px|right|संख्या के अनुसार जातियों के विभाजन को प्रधार्षित करता हुआ विवरणपट एस सी अनुसूचित जातियों (Scheduled castes) के और एस टी अनुसूचित जनजातियों के सन्दर्भ में कहा जाता है|कड़ी=Special:FilePath/PopulationEstimations.jpg भारतीय पारंपरिक संस्कृति अपेक्षाकृत कठोर सामाजिक पदानुक्रम द्वारा परिभाषित किया गया हैभारतीय जाति प्रथा भारतीय उपमहाद्वीप (Indian subcontinent) में सामाजिक वर्गीकरण (social stratification) और सामाजिक प्रतिबंधों का वर्णन करती हैं, इस प्रथा में समाज के विभिन्न वर्ग हजारों सजातीय विवाह और आनुवाशिकीय समूहों के रूप में पारिभाषित किये जाते हैं जिन्हें प्रायः 'जाति' के नाम से जाना जाता है इन जातियों के बीच विजातीय समूह भी मौजूद है, इन समूहों को गोत्र के रूप में जाना जाता है। गोत्र , किसी व्यक्ति को अपने कुटुम्भ द्वारा मिली एक वंशावली की पहचान है, यद्यपि कुछ उपजातियां जैसे की शकाद्विपी ऐसी भी हैं जिनके बीच एक ही गोत्र में विवाह स्वीकार्य है, इन उपजातियों में प्रतिबंधित सजातीय विवाह जानी एक जाति के बीच विवाह को प्रतिबंद्धित करने के लिए कुछ अन्य तरीकों को अपनाया जाता है (उदाहरण के लिए - एक ही उपनाम वाले वंशों के बीच विवाह पर प्रतिबन्ध लगाना) भले ही जाति व्यवस्था को मुख्यतः हिन्दू धर्म के साथ जोड़कर पहचाना जाता है लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में अन्य कई धर्म जैसे की मुसलमान और ईसाई धर्म के कुछ समूहों में भी इस तरह की व्यवस्था देखी गई हैफ्रांसिस बुकानन, भारतीय जनगणना रिकार्ड, १८८३ भारतीय संविधान ने समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता (secular), लोकतंत्र जैसे सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए जाति के ऊपर आधारित भेदभावों को गिअर्कानूनी घोषित कर दिया हैबीबीसी पार्श्वक https://web.archive.org/web/20120202182750/http://www.bbc.co.uk/news/world-south-asia-12557384 2 फ़रवरी 2012 , भारत बड़े शहरों में ज़्यादातर इन जाति बंधनों को तोड़ दिया गया है,http://www.bbc.co.uk/religion/religions/hinduism/living/caste.shtml बीबीसी, धर्म और नैतिकता, हिंदू धर्म 28 अक्तूबर 2006 https://web.archive.org/web/20061028021700/http://www.bbc.co.uk/religion/religions/hinduism/living/caste.shtml 28 अक्तूबर 2006 live हालाँकि ये आज भी देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है फिर भी, आधुनिक भारत में, जाति व्यवस्था, जाति के आधार पर बांटे वाली राजनीति और अलग - अलग तरीके की सामाजिक धारणाओं जैसे कई रूप में जीवित भी है और प्रबल भी होता जा रहा हैBayly Susan Caste, Society and Politics in India from the Eighteenth Century to the Modern Age http://www.cambridge.org/uk/catalogue/catalogue.asp?isbn=0521264340 1999 July Cambridge University Press ISBN 978-0-521-26434-1 10.2277/0521264340 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20071013192735/http://www.cambridge.org/uk/catalogue/catalogue.asp?isbn=0521264340 13 अक्तूबर 2007 livehttp://countrystudies.us/india/116.htm Caste-Based Parties 2007-05-17 https://web.archive.org/web/20111012041624/http://countrystudies.us/india/116.htm 12 अक्तूबर 2011 live सामान्य शब्दों में, जाति के आधार पर पाँच प्रमुख विभाजन हैं: ब्राह्मण - "विद्वान समुदाय," जिनमें याजक, विद्वान, विधि विशेषज्ञ, मंत्री और राजनयिक शामिल हैं। क्षत्रिय - "उच्च और निम्न मान्यवर या सरदार" जिनमें राजा, उच्चपद के लोग, सैनिक और प्रशासक को शामिल है। वैश्य - "व्यापारी और कारीगर समुदाय" जिनमें सौदागर, दुकानदार, व्यापारी और खेत के मालिक शामिल है। शूद्र - "सेवक या सेवा प्रदान करने वाली प्रजाति" में अधिकतर गैर-प्रदूषित कार्यो में लगे शारीरिक और कृषक श्रमिक शामिल हैं। इसके भी नीचे एक दलित समाज है जिसे हिन्दू शास्त्रों और हिन्दू कानून के अनुसार को अछूत (दलित) के रूप में जाना जाता है, हालाँकि इस प्रणाली को भारतीय संविधान के कानून के जरिए अब गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। ब्राह्मण वर्ण स्वयं को हिंदू धर्म के चारों वर्णों में सर्वोच्च स्थान पर काबिज होने का दावा करता है"ब्राह्मण."विश्वकोश ब्रिटानिका.२००८ ब्रिटैनिका विश्वकोश ऑनलाइन. दलित शब्द उन लोगों के समूह के लिए एक पदनाम है जिनको हिन्दू धर्म एवं सवर्ण हिन्दूओं व्दारा अछूत या नीची जाति का माना जाता है। स्वतंत्र भारत में जातिवाद से प्रेरित हिंसा और घृणा अपराध को बहुत ज़्यादा देखा गया। भारत में धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम करना संस्कृति के विलुप्त होने का संकेत है हालांकि प्राचीन संस्कृति के अनुसार जातिवाद इतना कठोर नहीं था लेकिन वर्तमान समय में जातिवाद के इतने दुष्प्रभाव होने वाले हैं जिससे भारत के विकास में बाधक सिद्ध हो सकता हैं परिवार Arranged marriage in India Women in India thumb| कोयम्बतूर में होने वाली एक हिंदू विवाह समारोह भारतीय समाज सदियों से तयशुदा शादियों (Arranged marriages) की परंपरा रही है। आज भी भारतीय लोगों का एक बड़ा हिस्सा अपने माता-पिता या अन्य सम्माननीय पारिवारिक सदस्यों द्वारा तय की गई शादियाँ ही करता है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन की सहमति भी होती हैhttp://www.jamaica-gleaner.com/gleaner/20050215/life/life1.html https://web.archive.org/web/20081204082810/http://www.jamaica-gleaner.com/gleaner/20050215/life/life1.html 4 दिसंबर 2008 कीशा शेक्सपियर की प्रेम बनाम तयशुदा शादी तयशुदा शादियाँ कई चीज़ों का मेल कराने के आधार पर उन्हीं को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाती हैं जैसे कि उम्र, ऊँचाई, व्यक्तिगत मूल्य और पसंद, साथ ही उनके परिवारों की पृष्ठभूमि (धन, समाज में स्थान) और उनकी जाति (caste) के साथ - साथ युगल की कुन्दलिनीय (horoscopes) अनुकूलता भारत में शादियों को जीवन भर के लिए माना जाता हैhttp://www.thepost.co.za/index.php?fSectionId=154&fArticleId=2613258 संग्रहीत प्रति 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20060526133436/http://www.thepost.co.za/index.php?fSectionId=154 26 मई 2006 dead और यहाँ तलाक की दर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की ५०% की तुलना में मात्र १.१% हैhttp://www.divorcerate.org/divorce-rate-in-india.htmlभारतजून 2020 InternetArchiveBot में तलाकदर . तयशुदा शादियों में तलाक की दर और भी कम होती है। हाल के वर्षों में तलाकदर में काफी वृद्धि हो रही है: इस बात पर अलग अलग राय है कि इसका मतलब क्या है: पारंपरिक लोगों के लिए ये बढती हुई संख्या समाज के विघटन को प्रदर्शित करती है, जबकि आधुनिक लोगों के अनुसार इससे ये बात पता चलती है कि समाज में महिलाओं का एक नया और स्वस्थ सशक्तिकरण हो रहा है।http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/india/1499679/Divorce-soars-in-India's-middle-class.htmlभारतीयजुलाई 2021 InternetArchiveBot मध्यवर्ग में तलाक के मामले बढ़ रहे हैं हालाँकि, बाल विवाह (child marriage) को १८६० में ही गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था लेकिन भारत के कुछ हिस्सों में ये प्रथा आज भी जारी हैhttp://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/1617759.stm बीबीसी समाचार दक्षिण एशिया भारत में बाल विवाह 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090505162820/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/1617759.stm 5 मई 2009 live यूनिसेफ द्वारा संसार के बच्चों की दशा के बारे में जारी रिपोर्ट " स्टेट ऑफ़ द वर्ल्ड चिल्ड्रेन -२००९" में ४७% ग्रामीण क्षेत्रों में भारतीय महिलाएं जो कि २०-२४ साल की होंगी उनकी शादी को विवाह के लिए वैध १८ साल की उम्र से पहले ही कर दी जाती हैंhttp://www.unicef.org/sowc09/docs/SOWC09_Table_9.pdf संग्रहीत प्रति 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090619111412/http://www.unicef.org/sowc09/docs/SOWC09_Table_9.pdf 19 जून 2009 live रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि विश्व में ४०% होने वाले बाल विवाह अकेले भारत में ही होते हैंhttp://www.hindu.com/2009/01/18/stories/2009011855981100.htm संग्रहीत प्रति 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090615131509/http://hindu.com/2009/01/18/stories/2009011855981100.htm 15 जून 2009 live भारतीय नाम (Indian name) भिन्न प्रकार की प्रणालियों और नामकरण प्रथा (naming conventions) पर होती हैं, जो की अलग -अलग शेत्रों के अनुसार बदलती रहती हैं नाम भी धर्म और जाति से प्रभावित होती हैं और वो धर्म या महाकाव्यों से लिए जा सकते हैं भारत की आबादी अनेक प्रकार की भाषाएं बोलती हैं समाज में नारी की भूमिका अक्सर घर के काम काज को करने की और समुदायों की नि: स्वार्थ सेवा करने का काम होता है महिलाओं और महिलाओं के मुद्दों समाचारों में केवल ७-१४% ही दिखाई देते हैं अधिकांश भारतीय परिवारों में, महिलाओं को उनके नाम पर संपत्ति नहीं मिलती है और उन्हें पैतृक संपत्ति का एक हिस्सा भी नहीं मिलता है।Women in India: How Free? How Equal? http://www.un.org.in/wii.htm Kalyani Menon-Sen, A. K. Shiva Kumar संयुक्त राष्ट्र 2001 2006-12-24 https://web.archive.org/web/20060911183722/http://www.un.org.in/wii.htm 11 सितंबर 2006 dead अब क़ानून बन गया है परिवार की लड़कियों को बराबर का हिस्सा मिलता है कानून को लागू करने मे कमजोरी के कारण, महिल्लाएं आज भी ज़मीन के छोटे से टुकड़े और बहुत कम धन मे प्राप्त होता हैChronic Hunger and the Status of Women in India http://www.thp.org/reports/indiawom.htm Carol S. Coonrod June 1998 2006-12-24 https://web.archive.org/web/20140910220125/http://www.thp.org/reports/indiawom.htm 10 सितंबर 2014 dead कई परिवारों में, विशेष रूप से ग्रामीण लोगों मे, लड़कियों और महिलाओं को परिवार के भीतर पोषण भेदभाव का सामना करना पड़ता है और इसी वजह से उनमें खून की कमी की शिकायत रहती है साथ- साथ वो कुपोषित भी होती हैं रंगोली (या कोलम) एक परंपरागत कला है जो कि भारतीय महिलाओं में बहुत लोकप्रिय हैलोकप्रिय महिला पत्रिकाएं जिनमें फेमिना (Femina) गृहशोभा (Grihshobha), वनिता (vanita), वूमेनस एरा, आदि शामिल हैं पशु thumb|गाय को चेन्नई में स्थित आलंकृत गोप्पुरम मंदिर]] मे रंगा या चित्रित किया जाता है Animal husbandry in India Sacred cow कई भारतीयों के पास अपने मवेशी होते हैं जैसे कि गाय-बैल या भेड़ आज भी हिन्दू बहुसंख्यक देशों जैसे भारत और नेपाल में गाय के दूध का धार्मिक रस्मों में महत्वपूर्ण स्थान है। समाज में अपने इसी ऊंचे स्थान की वजह से गायें भारत के बड़े बड़े शहरों जैसे कि दिल्ली में भी व्यस्त सड़कों के पर खुले आम घूमती हैं। कुछ जगहों पर सुबह के नाश्ते के पहले इन्हें एक भोग लगाना शुभ या सौभाग्यवर्धक माना जाता है। जिन जगहों पर गोहत्या एक अपराध है वहां किसी नागरिक को गाय को मार डालने या उसे चोट पहुँचाने के लिए जेल भी हो सकती है। गाय को खाने के विरुद्ध आदेश में एक प्रणाली विकसित हुई जिसमें सिर्फ एक जातिच्युत मनुष्य (pariah) को मृत गायों को भोजन के रूप में दिया जाता था और सिर्फ वही उनके चमड़े (leather) को निकाल सकते थे। सिर्फ दो राज्यों :पश्चिम बंगाल और केरल के अतिरिक्त हर प्रान्त में गोहत्या निषिद्ध है। हालाँकि गाय के वध के उद्देश्य से उन्हें इन राज्यों में ले जाना अवैध है, लेकिन गायों को नियमित रूप से जहाज़ में सवार कर इन राज्यों में ले जाया जाता है।Maseeh Rahman Is Nothing Sacred? 2000-05-29 http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/time/magazine/2000/0529/india.cows.html Time Asia 2008-02-25 https://web.archive.org/web/20090928072438/http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/time/magazine/2000/0529/india.cows.html 28 सितंबर 2009 dead "गाय हमारी माता है" ऐसा विभिन्न जगह कहा जाता है, खास कर बुंदेलखण्ड की तरफ़। परम्परा एवं रीति नमस्ते या नमस्कार या नमस्कारम् भारतीय उपमहाद्वीप में अभिनन्दन या अभिवादन करने के सामान्य तरीके हैं। यद्यपि नमस्कार को नमस्ते की तुलना में ज्यादा औपचारिक माना जाता है, दोनों ही गहरे सम्मान के सूचक शब्द हैं। आम तौर पर इसे भारत और नेपाल में हिन्दू, जैन और बौद्ध लोग प्रयोग करते हैं, कई लोग इसे भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर भी प्रयोग करते हैं। भारतीय और नेपाली संस्कृति में ये शब्द लिखित या मौखिक बोलचाल की शुरुआत में प्रयोग किया जाता है। हालाँकि विदा होते समय भी हाथ जोड़े हुए यही मुद्रा बिना कुछ कहे बनायी जाती है। योग में, योग गुरु और योग शिष्यों द्वारा बोले जाने वाली बात के आधार पर नमस्ते का मतलब "मेरे भीतर की रोशनी तुम्हारे अन्दर की रोशनी का सत्कार करती है " होता है शाब्दिक अर्थ में, इसका मतलब है "मैं आपको प्रणाम करता हूँ" यह शब्द संस्कृत शब्द (नमस्): प्रणाम (bow), श्रद्धा (obeisance), आज्ञापालन, वंदन (salutation) और आदर (respect) और (ते): "आपको" से लिया गया है। किसी और व्यक्ति से कहे जाते समय, साधारण रूप से इसके साथ एक ऐसी मुद्रा बनाई जाती है जिसमें सीने या वक्ष के सामने दोनों हाथों की हथेलियाँ एक दूसरे को छूती हुई और उंगलियाँ ऊपर की ओर होती हैं। बिना कुछ कहे भी यही मुद्रा बनकर यही बात कही जा सकती है। [[चित्र:Oil lamp on rangoli.jpg|"|thumb|"दीवाली, प्रकाश पर्व या त्यौहार, पूरे भारत में हिन्दुओं द्वारा दीये (diyas) जलाकर और रंगोलीबनाकर मनाया जाता है। त्यौहार Festivals in India भारत एक बहु सांस्कृतिक और बहु धार्मिक समाज होने के कारण विभिन्न धर्मों के त्योहारों और छुट्टियों को मनाता है भारत में तीन राष्ट्रीय अवकाश (national holidays in India) है, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) और इन तीनो को हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है इसके अलावा, कई राज्यों और क्षेत्रों में वहाँ के मुख्य धर्म और भाषागत जनसांख्यिकी पर आधारित स्थानीय त्यौहार हैं लोकप्रिय धार्मिक त्यौहार में शामिल हैं हिन्दुओं का दिवाली, गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi), होली, नवरात्रि, रक्षाबंधन (Rakshabandhan) और दशहरा (Dussehra). कई खेती त्यौहार (harvest festival) जैसे की संक्रांति (Sankranthi), पोंगल (Pongal) और ओणम (Onam) भी काफी लोकप्रिय त्यौहार है कुम्भ का मेला (Kumb Mela) हर १२ साल के बाद ४ अलग -अलग स्थानों पर मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा सामूहिक तीर्थ यात्रा उत्सव है जिसमें करोंडों हिन्दू हिस्सा लेते हैं भारत में कुछ त्योहारों कई धर्मों द्वारा मनाया जाता है। इसके उल्लेखनीय उदाहरण हैं हिन्दुओं, सिखों और जैन समुदाय के लोगों द्वारा मनाई जाने वाली दिवाली और बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा (Buddh Purnima) . इस्लामी त्यौहार जैसे की ईद-उल-फ़ित्र, ईद -उल-अधा (Eid al-Adha) और रमजान (Ramadan) भी पूरे भारत के मुसलामानों द्वारा मनाये जाते हैं भोजन Cuisine of India thumb| भारत की एक किस्म की [कढ़ी [| करी और सब्ज़ी.]] भातीय व्यंजनों में से ज़्यादातर में मसालों और जड़ी बूटियों का परिष्कृत और तीव्र प्रयोग होता है इन व्यंजनों के हर प्रकार में पकवानों का एक अच्छा-खासा विन्यास और पकाने के कई तरीकों का प्रयोग होता है यद्यपि पारंपरिक भारितीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा शाकाहारी है लेकिन कई परम्परागत भारतीय पकवानों में मुर्गा (chicken), बकरी (goat), भेड़ का बच्चा (lamb), मछली और अन्य तरह के मांस (meat) भी शामिल हैं भोजन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो रोज़मर्रा के साथ -साथ त्योहारों में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है कई परिवारों में, हर रोज़ का मुख्य भोजन दो से तीन दौर में, कई तरह की चटनी और अचार के साथ, रोटी (roti) और चावल के रूप में कार्बोहाइड्रेट के बड़े अंश के साथ मिष्ठान (desserts) सहित लिया जाता है भोजन एक भारतीय परिवार के लिए सिर्फ खाने के तौर पर ही नहीं बल्कि कई परिवारों के एक साथ एकत्रित होने सामाजिक संसर्ग बढाने के लिए भी महत्वपूर्ण है विविधता भारत के भूगोल, संस्कृति और भोजन की एक पारिभाषिक विशेषता है भारतीय व्यंजन अलग-अलग क्षेत्र के साथ बदलते हैं और इस उपमहाद्वीप (subcontinent) की विभिन्न तरह की जनसांख्यिकी (varied demographics) और विशिष्ठ संस्कृति को प्रतिबिंबित करते हैं आम तौर पर, भारतीय व्यंजन चार श्रेणियों में बाते जा सकते हैं : उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम भारतीय व्यंजन इस विविधता के बावजूद उन्हें एकीकृत करने वाले कुछ सूत्र भी मौजूद हैं मसालों का विविध प्रयोग भोजन तैयार करने का एक अभिन्न अंग है, ये मसाले व्यंजन का स्वाद बढाने और उसे एक ख़ास स्वाद और सुगंध देने के लिए प्रयोग किये जाते हैं इतिहास में भारत आने वाले अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों जैसे की पारसी (Persians), मुग़ल और यूरोपीय शक्तियों ने भी भारत के व्यंजन को काफी प्रभावित किया है वस्त्र-धारण thumb| त्रिपुरा की की लडकियां पारंपरिक नृत्य महोत्सव में भाग लेते समय एक बिंदी (bindi) लगाती हैं महिलाओं के लिए पारंपरिक भारतीय कपडों में शामिल हैं, साड़ी, सलवार कमीज़ (salwar kameez) और घाघरा चोली (लहंगा)धोती, लुंगी (Lungi), और कुर्ता पुरुषों (men) के पारंपरिक वस्त्र हैं बॉम्बे, जिसे मुंबई के नाम से भी जाना जाता है भारत की फैशन राजधानी है भारत के कुछ ग्रामीण हिस्सों में ज़्यादातर पारंपरिक कपडे ही पहने जाते हैं दिल्ली, मुंबई,चेन्नई, अहमदाबाद और पुणे ऐसी जगहें हैं जहां खरीदारी करने के शौकीन लोग जा सकते हैं दक्षिण भारत के पुरुष सफ़ेद रंग का लंबा चादर नुमा वस्त्र पहनते हैं जिसे अंग्रेजी में धोती और तमिल में वेष्टी कहा जाता है धोती के ऊपर, पुरुष शर्ट, टी शर्ट या और कुछ भी पहनते हैं जबकि महिलाएं साड़ी पहनती हैं जो की रंग बिरंगे कपडों और नमूनों वाला एक चादरनुमा वस्त्र हैं यह एक साधारण या फैंसी ब्लाउज के ऊपर पहनी जाती है यह युवा लड़कियों और महिलाओं द्वारा पहना जाता है। छोटी लड़कियां पवाडा पहनती हैं पवाडा एक लम्बी स्कर्ट है जिसे ब्लाउज के नीचे पहना जाता है। दोनों में अक्सर खुस्नूमा नमूने बने होते हैं बिंदी (Bindi) महिलाओं के श्रृंगार का हिस्सा है। परंपरागत रूप से, लाल बिंदी (या सिन्दूर) केवल शादीशुदा हिंदु महिलाओं द्वारा ही लगाईं जाती है, लेकिन अब यह महिलाओं के फैशन का हिस्सा बन गई है।कामत की पोत्पौरी : पवित्र बिंदी का महत्व https://web.archive.org/web/20090616184246/http://www.kamat.com/kalranga/women/bindi.htm 16 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090616184246/http://www.kamat.com/kalranga/women/bindi.htm 16 जून 2009 भारतीय और पश्चिमी पहनावा (Indo-western clothing), पश्चिमी (Western) और उपमहाद्वीपीय (Subcontinental) फैशन (fashion) का एक मिला जुला स्वरूप हैं अन्य कपडों में शामिल हैं - चूडीदार (Churidar), दुपट्टा (Dupatta), गमछा (Gamchha), कुरता, मुन्दुम नेरियाथुम (Mundum Neriyathum), शेरवानी . साहित्य इतिहास भारतीय साहित्य thumb|रवीन्द्रनाथ टैगोरएशिया के पहले नोबेल विजेता (Nobel laureate).http://almaz.com/nobel/literature/1913a.html संग्रहीत प्रति 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20090503113612/http://almaz.com/nobel/literature/1913a.html 3 मई 2009 dead भारतीय साहित्य की सबसे पुरानी या प्रारंभिक कृतियाँ मौखिक (orally) रूप से प्रेषित थीं।संस्कृत साहित्य की शुरुआत होती है 5500 से 5200 ईसा पूर्व के बीच संकलित ऋग्वेद से जो की पवित्र भजनों का एक संकलन है। संस्कृत के महाकाव्य रामायण और महाभारत पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व के अंत में आये.पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व की पहली कुछ सदियों के दौरान शास्त्रीय संस्कृत (Classical Sanskrit) खूब फली-फूली, तमिल (Tamil) संगम साहित्य और पाली केनोन (Pāli Canon) ने भी इस समय काफी प्रगति की. मध्ययुगीन काल में, क्रमशः ९ वीं और ११ वीं शताब्दी में कन्नड़ और तेलुगु (Telugu) साहित्य की शुरुआत हुई,"कन्नड़ साहित्य," ब्रिटैनिका विश्वकोश, २००८.उद्धरण:" सबसे पहली साहित्यिक कृति है काविराजमार्ग (शताब्दी.ए डी ८५० यानि ईसा के ८५० वर्ष पश्चात, संस्कृत प्रतिरूप पर आधारित पद्य या कविताओं पर लिखी गयी एक रचना." इसके बाद १२ वीं शताब्दी में मलयालम साहित्य की पहली रचना हुई.बाद में, मराठी, बंगाली, हिंदी की विभिन्न बोलियों, पारसी और उर्दू के साहित्य भी उजागर होने शुरू हो गए । ब्रिटिश राज के दौरान, रवीन्द्रनाथ टैगोर के कार्यों द्वारा आधुनिक साहित्य का प्रतिनिधित्व किया गया है, रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh 'Dinkar'), सुब्रमनिया भारती, राहुल सांकृत्यायन (Rahul Sankrityayan), कुवेम्पु, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, माइकल मधुसूदन दत्त, मुंशी प्रेमचन्द, मुहम्मद इकबाल, देवकी नंदन खत्री प्रसीद्ध हो गए हैं। समकालीन भारत में, जिन लेखकों को आलोचकों के बीच प्रशंसा मिली वो हैं : गिरीश कर्नाड, अज्ञेय, निर्मल वर्मा, कमलेश्वर, वैकोम मुहम्मद बशीर, इंदिरा गोस्वामी , महाश्वेता देवी, अमृता प्रीतम, मास्ति वेंकटेश अयेंगर, कुरतुलियन हैदर और थाकाजी सिवासंकरा पिल्लईऔर कुछ अन्य लेखकों ने आलोचकों की प्रशंसा प्राप्त की समकालीन भारतीय साहित्य में, दो प्रमुख साहित्यिक पुरस्कार हैं, ये हैं साहित्य अकादमी फैलोशिप और ज्ञानपीठ पुरस्कारहिंदी और कन्नड़ में सात, मलयालम और मराठी में चार उर्दू में तीन ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए गए हैं।"नारायण, केलकर और शास्त्री को ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुनाजून 2020 InternetArchiveBot " आकाशवाणी, २२ नवम्बर २००८. काव्य भारतीय काव्य thumb|left|कुरुक्षेत्र के युद्ध (Battle of Kurukshetra) का दृष्टान्त ७४,००० से ज्यादा छंदों, लम्बे गद्य अनुच्छेदों और १.८ करोड़ शब्दों वाला महाभारत दुनिया की सबसे लम्बे महाकाव्यों में से एक है भारत में ऋग्वेद के समय से कविता के साथ-साथ गद्य रचनाओं की मजबूत परंपरा है कविता प्रायः संगीत की परम्पराओं से सम्बद्ध होती है और कविताओं का एक बड़ा भाग धार्मिक आंदोलनों पर आधारित होता है या उनसे जुड़ा होता है लेखक और दार्शनिक अक्सर कुशल कवि भी होते थे आधुनिक समय में, भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्र वाद और अहिंसा को प्रोत्साहित करने के लिए कविता ने एक महत्वपूर्ण हथियार की भूमिका निभाई है इस परंपरा उदाहरण आधुनिक काल में रवीन्द्रनाथ टैगोर और के एस नरसिम्हास्वामी की कविताओं, मध्य काल में बासव वचन , कबीर और पुरंदरदास (पद और देवार्नामस) और प्राचीन काल में महाकाव्यों के रूप में मिलता है टगोर की गीतांजलि कविता से दो उदाहरण भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किये गए हैं। महाकाव्य महाकाव्य रामायण और महाभारत प्राचीनतम संरक्षित और आज भी भारत के जाने माने माहाकाव्य है ; उनके कुछ और संस्करण दक्षिण पूर्व एशियाई देशों जैसे की थाईलैंड मलेशिया और इंडोनेशिया में अपनाए गए हैं इसके अलावा, शास्त्रीय तमिल भाषा में पांच महाकाव्य हैं - सिलाप्पधिकाराम, निमेगालाई, जीवागा चिंतामणि, वलैयापति और कुण्डलकेसि । इनके अन्य क्षेत्रीय रूप और असम्बद्ध महाकाव्यों में शामिल हैं तमिल कंब रामायण, कन्नड़ में आदिकवि पम्पा द्वारा पम्पा भारता, कुमार वाल्मीकि द्वारा तोरवे रामायण, कुमार व्यास द्वारा कर्नाट भारता कथा मंजरी, हिंदी रामचरितमानस, मलयालम अध्यात्मरामायणम् । प्रदर्शनकारी कलाएं संगीत भारतीय संगीत का प्रारंभ वैदिक काल से भी पूर्व का है। पंडित शारंगदेव कृत "संगीत रत्नाकर" ग्रंथ मे भारतीय संगीत की परिभाषा "गीतम,वादयम् तथा नृत्यं त्रयम संगीत मुच्यते" कहा गया है।गायन, वाद्य वादन एवम् नृत्य; तीनों कलाओं का समावेश संगीत शब्द में मानागया है।तीनो स्वतंत्र कला होते हुए भी एक दूसरे की पूरक है।भारतीय संगीत की दो प्रकार प्रचलित है; प्रथम कर्नाटक संगीत, जो दक्षिण भारतीय राज्यों में प्रचलित है और हिन्दुस्तानी संगीत शेष भारत में लोकप्रिय है। भारतवर्ष की सारी सभ्यताओं में संगीत का बड़ा महत्व रहा है। धार्मिक एवं सामाजिक परंपराओं में संगीत का प्रचलन प्राचीन काल से रहा है।इस रूप में, संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। वैदिक काल में अध्यात्मिक संगीत को मार्गी तथा लोक संगीत को देशी कहा जाता था! कालांतर में यही शास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में दिखता है।(संगीतेश) thumb|पंचावाद्यम केरल में एक संगीत मंदिर है। भारतीय संगीत भारतीय संगीत में विभिन्न प्रकार के धार्मिक, लोक संगीत, लोकप्रिय, पॉप और शास्त्रीय संगीत शामिल हैं भारतीय संगीत का सबसे पुराना संरक्षित उदाहरण है सामवेद की कुछ धुनें जो आज भी निश्चित वैदिक श्रोता बलिदान में गाई जाती है भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा हिंदू ग्रंथों से काफी प्रभावित है। इसमें कर्नाटक और हिन्दुस्तानी संगीत और कई राग शामिल हैं। ये कई युगों के दौरान विकसित हुआ और इसका इतिहास एक सहस्राब्दी तक फैला हुआ है। यह हमेशा से धार्मिक प्रेरणा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और शुद्ध मनोरंजन का साधन रहा है विशिष्ठ उपमहाद्वीप रूपों के साथ ही इसमें अन्य प्रकार के ओरिएंटल संगीत से भी कुछ समानताएं हैं'। पुरंदरदास को कर्णाटक संगीत का पिता माना जाता है (कर्नाटक संगीता पितामह ).Purandara Dasa http://www.kamat.com/kalranga/kar/literature/dasa.htm Dr. Jytosna Kamat Kamats Potpourri 2006-12-31 https://web.archive.org/web/20090815053345/http://www.kamat.com/kalranga/kar/literature/dasa.htm 15 अगस्त 2009 deadSri Purandara Dasaru http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/purandara.html Madhusudana Rao CR Dvaita Home Page 2006-12-31 https://web.archive.org/web/20061130141712/http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/purandara.html 30 नवंबर 2006 deadHistory of Music http://carnatica.net/origin.htm S. Sowmya, K. N. Shashikiran Srishti's Carnatica Private Limited 2006-12-31 https://web.archive.org/web/20070202231506/http://carnatica.net/origin.htm 2 फ़रवरी 2007 dead उन्होंने अपने गीतों का समापन भगवान पुरंदर विट्टल के वंदन के साथ किया और माना जात है की उन्होंने कन्नड़ भाषा में ४७५०००http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/p_dasa1.html संग्रहीत प्रति 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20061130141557/http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/p_dasa1.html 30 नवंबर 2006 dead गीत रचे हालाँकि, केवल १००० के बारे में आज जाना जाता है।Sri Purandara Dasaru http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/p_dasa1.html Madhusudana Rao CR Dvaita Home Page (www.dviata.org) 2006-12-31 https://web.archive.org/web/20061130141557/http://www.dvaita.org/haridasa/dasas/purandara/p_dasa1.html 30 नवंबर 2006 dead नृत्य भारतीय नृत्य भारत के लोक नृत्य भारतीय नृत्य में भी लोक और शास्त्रीय रूपों में कई विविधताएं है जाने माने लोक नृत्यों (folk dances) में शामिल हैं पंजाब का भांगड़ा, असम का बिहू, झारखंड का झुमइर और डमकच, झारखंड और उड़ीसा का छाऊ, राजस्थान का घूमर, गुजरात का डांडिया और गरबा , कर्नाटक जा यक्षगान, महाराष्ट्र का लावनी और गोवा का देख्ननी । भारत की संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी द्वारा आठ नृत्य रूपों, कई कथा रूपों और पौराणिक तत्व वाले कई रूपोंको शास्त्रीय नृत्य का दर्जा दिया गया है। ये हैं: तमिलनाडु का भरतनाट्यम, उत्तर प्रदेश का कथक, केरल का कथककली और मोहिनीअट्टम, आंध्र प्रदेश का कुच्चीपुडी , मणिपुर का मणिपुरी, उड़ीसा का ओडिसी और असम का सत्त्रिया.http://www.britannica.com/eb/article-65370 "दक्षिण एशियाई कला: शास्त्रीय नृत्य के प्रकार और तकनीके " 8 जून 2009 https://web.archive.org/web/20080107121022/http://www.britannica.com/eb/article-65370 7 जनवरी 2008 live संक्षिप्त रूप से कहें तो कलारिप्पयाट्टू या कलारी को दुनिया का सबसे पुराना मार्शल आर्ट माना जाता है। यह मल्लपुराण जैसे ग्रंथों के रूप में संरक्षित है। कलारी और उसके साथ साथ उसके बीद आये मार्शल आर्ट के कुछ रूपों के बारे में ये भी माना जाता है की बौद्ध धर्म की तरह ये भी चीन तक पहुँच चूका है और अंततः इसी से कुंग-फु का विकास हुआ। बाद में आने वाली मार्शल आर्ट्स हैं- गतका, पहलवानी और मल्ल-युद्ध भारतीय मार्शल आर्ट्स को कई महान लोगों ने अपनाया था जिनमें शामिल हैं बोधिधर्मा जो भारतीय मार्शल आर्ट्स को चीन तक ले गए। नाटक और रंगमंच भारतीय नाट्य की एकमात्र जीवित परंपरा है (संस्कृत) कुटीयट्टम, जो कि केरल में संरक्षित है। भासा के नाटक अभिषेक में रावन की भूमिका में गुरु नाट्याचार्य मणि माधव चकयार|thumb|right भारतीय रंगमंच भारतीय संगीत और नृत्य के साथ साथ भारतीय नाटक और थियेटर का भी अपने लम्बा इतिहास है।कालिदास के नाटक शकुंतलाऔर मेघदूत कुछ पुराने नाटक हैं, जिनके बाद भासा के नाटक आये.२००० साल पुरानी केरल की कुटियट्टम विश्व की सबसे पुरानी जीवित थियेटर परम्पराओं में से एक है। यह सख्ती से नाट्य शास्त्र का पालन करती है Nātyakalpadrumam Māni Mādhava Chākyār Sangeet Natak Akademi, नई दिल्ली 1996पी . ६ कला के इस रूप में भासा के नाटक बहुत प्रसिद्द हैं।नाट्याचार्य (स्वर्गीय) पद्म श्री मणि माधव चकयार - अविवादित रूप से कला के इस रूप और अभिनय के आचार्य - ने इस पुराणी नाट्य परंपरा को लुप्त होने से बचाया और इसे पुनर्जीवित किया। वो रस अभिनय में अपनी महारत के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कालिदास के नाटक अभिज्ञान शाकुंतल, विक्रमोर्वसिया और मालविकाग्निमित्र ; भास के स्वप्नवासवदत्ता और पंचरात्र ) ; हर्ष के नगनान्दा आदि नाटकों को कुटियट्टम रूप में प्रर्दशित करना शुरू कियाhttp://sites.google.com/site/natyacharya/articlesकेसितंबर 2021 InternetArchiveBot . ए. चन्द्रहासन, इन परस्युट ऑफ़ एक्स्सेलेंस यानि उत्कृष्टता की खोज में(प्रदर्शन कला), "द हिन्दू", रविवार मार्च २६, १९८९मणि माधव चक्क्यर: द मास्टर एट वर्क (फिल्म-अंग्रेजी), कवलम एन. पनिकर, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली, १९९४ लोक थिएटर की परंपरा भारत के अधिकाँश भाषाई क्षेत्रों में लोकप्रिय है इसके अलावा, ग्रामीण भारत में कठपुतली थियेटर की समृद्ध परंपरा है जिसकी शुरुआत कम से कम दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व हुई थी इसका पाणिनि पर पतंजलि के वर्णन) में उल्लेख किया गया है समूह थियेटर भी शहरों में पनप रहा है, जिसकी शुरुआत गब्बी वीरंन्ना, उत्पल दत्त, ख्वाज़ा अहमद अब्बास, के वी सुबन्ना जैसे लोगों द्वारा की गई और जो आज भी नंदिकर, निनासम और पृथ्वी थियेटर जैसे समूहों द्वारा बरकरार राखी गई है दृश्य कला भारतीय कला चित्रकारी भारतीय चित्रकला thumb| अजंता की गुफाओं से जातक कथाएँ भारतीय चित्रकला की सबसे शुरूआती कृतियाँ पूर्व ऐतिहासिक काल में शैलचित्रों (रॉक पेंटिंग) के रूप में थीं। भीमबेटका जैसी जगहों पाये गए पेट्रोग्लिफ जिनमें से कुछ प्रस्तर युग में बने थे - इसका उदाहरण है। प्राचीन ग्रंथों में दर्राघ के सिद्धांत और उपाख्यानों के ज़रिये ये बताया गया है कि दरवाजों और घर के भीतरी कमरों, जहाँ मेहमान ठहराए जाते थे, उन्हें पेंट करना एक आम बात थी। अजंता, बाघ , एलोरा और सित्तनवासलके गुफा चित्र और मंदिरों में बने चित्र प्रकृति से प्रेम को प्रमाणित करते हैं। सबसे पहली और मध्यकालीन कला, हिन्दू, बौद्ध या जैन है। रंगे हुए आटे से बनी एक ताजा डिजाइन (रंगोली) आज भी कई भारतीय घरों (मुख्यातक दक्षिण भारतीय घरों) के दरवाज़े पर आम तौर पर बनी हुई देखी जा सकती है। मधुबनी चित्रकला, मैसूर चित्रकला, राजपूत चित्रकला, तंजौर चित्रकला और मुगल चित्रकला, भारतीय कला की कुछ उल्लेखनीय विधाएं हैं, जबकि राजा रवि वर्मा, नंदलाल बोस, गीता वढेरा, जामिनी रॉय और बी वेंकटप्पाकामथ (२००३), पी२८२ कुछ आधुनिक चित्रकार हैं। वर्तमान समय के कलाकारों में अतुल डोडिया, बोस कृष्णमक्नाहरी, देवज्योति राय और शिबू नटेसन, भारतीय कला के उस नए युग के प्रतिनिधि हैं जिसमें वैश्विक कला का भारतीय शास्त्रीय शैली के साथ मिलाप होता है। हाल के इन कलाकारों ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मान अर्जित किया है। देवज्योति राय के चित्र क्यूबा के राष्ट्रिय कला संग्रहालय में रखे गए है और इसी तरह नई पीढी के कुछ अन्य कलाकारों की कृतियाँ और शोध भी नोटिस किए गए है, इनमें सुमिता अलंग जैसे ख्यात कलाकार भी हैं। मुंबई की जहाँगीर आर्ट गैलरी और मैसूर पैलेस में कई अच्छे भारतीय चित्र प्रदर्शन के लिए रखे गए है। मूर्तिकला भारतीय मूर्तिकला भारत की पहली मूर्तिकला के नमूने सिन्धु घाटी सभ्यता के ज़माने के हैं जहाँ पत्थर और पीतल की आकृतियों की खोज की गयी। बाद में, जब हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म का और विकास हुआ, भारत के मंदिरों में एवं पीतल की कुछ बहद जटिल नक्काशी के नमूने बने.कुछ विशालकाय मंदिर जैसे की एलोरा ऐसे भी थे जिन्हें शिलाखंडों से नहीं बल्कि एक विशालकाय चट्टान को काट कर बनाया गया। उत्तर पश्चिम में संगमरमर के चूने, एक प्रकार की शीस्ट, या मिट्टी से उत्पादित मुर्तिकला में भारतीय और शास्त्रीय हेलेनिस्टिक या संभावित रूप से ग्रीक-रोमन प्रभाव का भारी मिश्रण देखने को मिलता है। लगभग इसी के साथ ही मथुरा की गुलाबी बलुए पत्थरों की मूर्तिकला भी विकसित हुई.इस दौरान गुप्त के शासनकाल में (६ वीं से 4 थी शताब्दी तक) मूर्तिकला, श्रेष्ठ निष्पादन और मॉडलिंग की बारीकी में एक बहुत ही उच्च स्तर पर पहुंच गयी थी। ये और इसके साथ ही भारत के अन्य क्षेत्रों में विकसित हुई शास्त्रीय भारतीय कला ने समूचे दक्षिण पूर्वी केंद्र और पूर्व एशिया में हिन्दू और बौद्ध मूर्तिकला के विकास में अपना योगदान दिया। वास्तु शास्त्र भारतीय वास्तु भारतीय वास्तुकला में शामिल है- समय और स्थान के साथ साथ लगातार नए विचारों को अपनाती हुई अभिव्यक्ति का बाहुल्य.इसके परिणामस्वरूप ऐसे वास्तुशिल्प का उत्पादन हुआ जो इतिहास के दौरान निश्चित रूप से एक निरंतरता रखता है। इसके कुछ बेहद शुरूआती उदहारण मिलते हैं शिन्धु घटी सभ्यता (२६००-१९०० ईसा पूर्व) में जिसमें सुनियोजित शहर और घर पाए जाते थे। इन शहरों का खाका तय करने में धर्म और राजा द्वारा संचालन की कोई महत्वपूर्ण भूमिका रही, ऐसा प्रतीत नहीं होता। मौर्य और गुप्त साम्राज्य और उनके उत्तराधिकारियों के शासनकाल में, कई बौद्ध वास्तुशिल्प परिसर, जैसे की अजंता और एलोरा और स्मारकीय सांचीस्तूप बनाया गया। बाद में, दक्षिण भारत में कई हिन्दू मंदिरों का निर्माण हुआ जैसे कीबेलूर का चेन्नाकेसवा मंदिर , हालेबिदु का होयसेल्सवर मंदिर और सोमानाथपूरा का केसव मंदिर, तंजावूर का बृहदीश्वर मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर, श्रीरंगम का श्री रंगनाथस्वामी मंदिर और भट्टीप्रोलू का बुद्ध स्तूप (चिन्ना लांजा डिब्बा और विक्रमार्का कोटा डिब्बा) में। अंगकोरवट, बोरोबुदुर और अन्य बौद्ध और हिंदु मंदिर जो की परम्परिक भारतीय धार्मिक भवनों की शैली में बने हैं, इस बात का संकेत देते हैं कि दक्षिण पूर्व एशियाई वास्तुकला पर भारतीय प्रभाव काफी ज्यादा है। thumb| श्री स्वामीनारायण मंदिर, वडताल, गुजरात पश्चिम से इस्लामिक प्रभाव के आगमन के साथ ही, भारतीय वास्तुकला में भी नए धर्म कि परम्पराओं को अपनाना शुरू के गया। इस युग में बनी कुछ इमारतें हैं- फतेहपुर सीकरी, ताज महल, गोल गुम्बद, कुतुब मीनार दिल्ली का लाल किला आदि, ये इमारतें अक्सर भारत के अपरिवर्तनीय प्रतीक के रूप में उपयोग की जाती हैं। ब्रिटिश साम्राज्य के औपनिवेशिक शासन के दौरान हिंद-अरबी और भारतीय शैली के साथ कई अन्य यूरोपीय शैलियों जैसे गोथिक के मिश्रण को विकसित होते हुए देखा गया, .विक्टोरिया मेमोरियल या विक्टोरिया टर्मिनस इसके उल्लेखनीय उदाहरण हैं।कमल मंदिर और भारत की कई आधुनिक शहरी इमारतें इनमें उल्लेखनीय हैं। वास्तुशास्त्र की पारंपरिक प्रणाली फेंग शुई के भारतीय प्रतिरूप की तरह है, जो कि शहर की योजना, वास्तुकला और अर्गोनोमिक्स (यानि कार्य की जगह को तनाव कम करने के लिए और प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग होने वाला विज्ञान) को प्रभावित करता है। ये अस्पष्ट है कि इनमें से कौन सी प्रणाली पुरानी है, लेकिन दोनों में कुछ निश्चित समानताएं ज़रूर हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो फेंग शुई का प्रयोग पूरे विश्व में ज्यादा होता है। यद्यपि वास्तु संकल्पना के आधार पर फेंग शुई के समान है, इन दोनों में घर के अन्दर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने की कोशिश कि जाती है, (इसको संस्कृत में प्राण-शक्ति या प्राण कहा जाता है और चीनी भाषा और जापानी भाषा में इसे ची / की कहा जाता है) लेकिन इनके विस्तृत रूप एक दुसरे से काफी अलग हैं, जैसे की वो निश्चित दिशाएं जिनमें विभिन्न वस्तुओं, कमरों, सामानों आदि को रखना चाहिए. बौद्ध धर्म के प्रसार के कारण भारतीय वास्तुकला ने पूर्वी और दक्षिण एशिया को प्रभावित किया है। भारतीय स्थापत्य कला के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण जैसे की मंदिर टीला या स्तूप , मंदिर शीर्ष या शिखर, मंदिर टॉवर या पगोड़ा और मंदिर द्वार या तोरण एशियाई संस्कृति का प्रसिद्ध प्रतीक बन गये हैं और इनका प्रयोग पूर्व एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर किया जाता है। केन्द्रीय शीर्ष को कभी-कभी विमानम् भी कहा जाता है। मंदिर का दक्षिणी द्वार गोपुरम अपनी गूढ़ता और ऐश्वर्य के लिए जाना जाता है। मनोरंजन और खेल भारत में खेल thumb|right|वार्षिक सर्प नाव दौड़ का प्रदर्शन पथानामथिट्टा के नज़दीक अरनमुला पर पम्बा नदी में ओणम उत्सव के दौरान किया जाता है। मनोरंजन और खेल के क्षेत्र में भारत में खेलों की एक बड़ी संख्या विकसित की गयी थी। आधुनिक पूर्वी मार्शल कला भारत में एक प्राचीन खेल के रूप में शुरू हुई और कुछ लोगों द्वारा ऐसा माना जाता है कि यही खेल विदेशों में प्रेषित किये गए और बाद में उन्ही खेलों का अनुकूलन और आधुनिकीकरण किया गया।ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आये कुछ खेल यहाँ काफी लोकप्रिय हो गए जैसे फील्ड हॉकी, फुटबॉल (सॉकर) और खासकर क्रिकेट। हालांकि फील्ड हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, मुख्य रूप से क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है, बल्कि न केवल भारत बल्कि पूरे उपमहाद्वीप में ये खेल मनोरंजन और पेशेवर तौर पर फल फूल रहा है। यहाँ तक कि हाल ही में क्रिकेट को भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक मंच के रूप में उपयोग किया जा चुका है। दोनों देशों ने क्रिकेट टीमों सालाना एक दुसरे के आमने सामने होती हैं और ऐसी प्रतियोगिता दोनों देशो के लिए काफी जोश भरी होती है। पारंपरिक स्वदेशी खेलों में शामिल हैं कबड्डी और गिल्ली-डंडा, जो देश के अधिकांश भागों में खेला जाता है। इंडोर (घर के भीतर खेले जाने वाले) और आउटडोर (घर के बाहर खेले जाने वाले) खेल जैसे कि शतरंज , सांप और सीढ़ी , ताश, पोलो, कैरम, बैडमिंटनभी लोकप्रिय हैं। शतरंज का आविष्कार भारत में किया गया था। भारत में ताकत और गति के खेलों बहुत समृद्ध हैं। प्राचीन भारत में वज़न, कंचे या पास के रूप में पत्थर का प्रोयोग किया जाता था। प्राचीन भारत में रथ दौड़, तीरंदाजी, घुड़सवारी, सैन्य रणनीति, कुश्ती, भारोत्तोलन, शिकार, तैराकी और दौड़ प्रतियोगिताएं होती थीं। लोकप्रिय मीडिया टेलीविजन भारतीय टेलिविज़न की शुरुआत १९५९ में शिक्षा कार्यक्रमों के प्रसारण के परीक्षण के साथ हुई।http://www.indiantelevision.com/indianbrodcast/history/historyoftele.htm A Snapshot of Indian Television History Indian Television Dot Com Pvt Ltd 2006-06-01 https://www.webcitation.org/6BA2gIpU6?url=http://www.indiantelevision.com/indianbrodcast/history/historyoftele.htm 4 अक्तूबर 2012 live भारतीय छोटे परदे के कार्यक्रम १९७० के मध्य शुरू किये गए। उस समय केवल एक राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन था, जो कि सरकार द्वारा अधिकृत था, १९८२ में भारत में नई दिल्ली एशियाई खेलों के साथ टी वी प्रोग्रामिंग में क्रांति आई, उसी वर्ष भारत में पहली बार रंगीन टी वी आये.रामायण और महाभारत कुछ लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखलाओं में से थे। 1980 के दशक के अंतिम हिस्से तक अधिक से अधिक लोगों के पास अपने टीवी सेट हो गए थे। हालांकि चैनल एक ही था, टीवी प्रोग्रामिंग संतृप्ति पर पहुँचा चुकी थी। इसलिए सरकार ने एक अन्य चैनल खोल दिया जिसमें कुछ भाग राष्ट्रीय प्रोग्रामिंग और कुछ भाग क्षेत्रीय प्रोग्रामिंग का था। इस चैनल को डीडी २ और बाद में डीडी मेट्रो के रूप में जाना जाता था। दोनों चैनलों पृथ्वी से प्रसारित थे। १९९१ में, सरकार ने अपने बाजार खोले और केबल टेलीविजन की शुरुआत हुई.तब से उपलब्ध चैनलों की संख्या में एक बड़ा उछाल कर आया है। आज, भारतीय सिल्वर स्क्रीन अपने आप में एक बहुत बड़ा उद्योग है और इसमें भारत के सभी राज्यों के हजारों कार्यक्रम है। छोटे परदे ने कई सिलेब्रिटी यानि मशहूर हस्तियों को जन्म दिया है और उनमें से कुछ आज अपने लिए राष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर चुके हैं। कामकाजी महिलाओं और यहाँ तक की सभी प्रकार के पुरुषों में भी टी वि धारावाहिक बेहद लोकप्रिय हैं। छोटे परदे पर काम करने वाले कुछ अभिनेताओं ने बॉलीवुड में भी अच्छी जगह बनाई है। भारतीय टीवी, पश्चिमी टीवी की तरह ही विकसित हो चुका है और यहाँ भी कार्टून नेटवर्क, निकेलोदियन, एमटीवी इंडिया जैसे स्टेशन आते हैं। सिनेमा भारतीय सिनेमा thumb|एक बॉलीवुड डांस नंबर की शूटिंग बॉलीवुड, मुम्बई स्थित भारत के लोकप्रिय भांडों का फिल्म उद्योग है। बॉलीवुड और अन्य प्रमुख सिनेमाई केन्द्रों (बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु को मिला कर व्यापक भारतीय फिल्म उद्योग का गठन होता है। सबसे ज्यादा संख्या में फिल्मों के निर्माण और बेचे गए टिकटों की सबसे बड़ी संख्या के आधार पर इस का उत्पादन दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है। हालांकि फिल्में देखना समय की बर्बादी है। व्यावसायिक फिल्मों के अलावा, भारत में भी समीक्षकों द्वारा बहुप्रशंसित सिनेमा का निर्माण हुआ है। जैसे कि सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक, गुरु दत्त , के.एच. विश्वनाथ, अदूर गोपालकृष्णन , गिरीश कासरवल्ली , शेखर कपूर , ऋषिकेश मुखर्जी, शंकर नाग , गिरीश कर्नाड, जी वी अय्यर जैसे निर्माताओं द्वारा बनाई गयी फिल्में। दरअसल, हाल के वर्षों में अर्थव्यवस्था के खुलने और विश्व सिनेमा की झलक मिलने से दर्शकों की पसंद बदल गयी है। इस के अलावा, अधिकांश शहरों में मल्टीप्लैक्स तेजी से बढ़े हैं जिस से, राजस्व का स्वरूप भी बदलने लगा है। बॉलीवुड दाऊदवुड के नाम से भी जाना जाता है। रेडियो thumb| मुंबई में फॉक्सहंट पर अप्रवीण रेडियो ऑपरेटर. भारत में रेडियो प्रसारण १९२७ में, निजी स्वामित्व के दो ट्रांसमीटरों द्वारा बॉम्बे और कोलकाता में शुरू हुआ। १९३० में इनका राष्ट्रीयकरण किया गया और १९३६ तक इन्होने "भारतीय प्रसारण सेवा" नाम से काम किया। १९३६ में इनका नाम बदल कर, ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) कर दिया गया। यद्यपि १९५७ में आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदल कर आकाशवाणी कर दिया गया लेकिन आज भी यह ऑल इंडिया रेडियो के नाम से लोकप्रिय है। ऑल इंडिया रेडियो प्रसार भारती (ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) का एक अंग है। जो कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की एक स्वायत्त संस्था है। यह प्रसार भारती के राष्ट्रीय टेलीविजन प्रसारणकर्ता दूरदर्शन की एक सहयोगी संस्था है। २० वीं शताब्दी के अंत के बाद से भारत में रेडियो आवृत्तियों एफ एम् और ए एम् बैंड को निजी क्षेत्र के प्रसारणकर्ताओं के लिए खोला दिया गया है लेकिन ऐसी सेवा ज्यादातर महानगरीय क्षेत्रों तक ही सीमित है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलौर जैसे शहरों में कई अन्य निजी एफ एम् चैनल लोकप्रिय हिंदी और अंग्रेजी संगीत प्रसारित करते हैं, हालाँकि उन आकाशवाणी की तरह समाचार प्रसारित करने का अधिकार नहीं है। हाल ही में वर्ल्ड स्पेस (World Space) ने देश की पहली उपग्रह रेडियो सेवा का शुभारंभ किया। आल इंडिया रेडियो दर्शन शास्त्र भारतीय दर्शन thumb|स्वामी विवेकानंद १९ वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली समाज सुधारकों में से एक थे। विभिन्न युगों के दौरान भारतीय दर्शन का पूरे विश्व विशेषकर पूर्व में काफी प्रभाव पड़ा है।वैदिक काल के बाद, पिछले २५०० सालों में दर्शन के कई विभिन्न अनुयायी वर्ग जैसे कि बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के कई सम्प्रदाय विकसित हुए हैं। हालांकि, भारत ने भी तर्कवाद, बुद्धिवाद (rationalism), विज्ञान, गणित, भौतिकवाद (materialism), नास्तिकता, अज्ञेयवाद (agnosticism) आदि की कुछ सबसे पुराणी और सबसे प्रभावशाली धर्मनिरपेक्ष परम्पराओं को जन्म दिया है जो कई बार इस वजह से अनदेखी कर दी जाती है क्योंकि भारत के बारे में एक लोकप्रिय धारणा ये है की भारत एक रहे हैं और एक 'रहस्यमय' देश है। कई जटिल वैज्ञानिक और गणितीय अवधारणाओं जैसे की शून्य का विचार, अरब (Arab) की मध्यस्थता में यूरोप तक पहुंचा। कर्वाका (Cārvāka), भारत में नास्तिकता का सबसे प्रसिद्द अनुयायी वर्ग है, इसे कुछ लोगों द्वारा विश्व का सबसे पुराना भौतिकवादी अनुयायी वर्ग भी माना जाता है। ये उसी समय बन जब बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारभिक दर्शन का निर्माण हो रहा था। ५०० वर्ष ईसा पूर्व के पास की अवधि में भारतीय और वैश्विक दर्शन में एक तीव्र परिवर्तन आया था। और उसी समय समकालीन यूनानी (Greek) स्कूल भी उभर कर सामने आये थे। कुछ लोगों का मानना है की कुछ भारतीय दर्शन की अवधारणाओं से यूनान को परिचित कराय गया जबकि अन्य पारसी साम्राज्य के माध्यम से भारत में आये; सिकंदर महान के अभियान कजे बाद ऐसे पारस्परिक आदान प्रदान में वृद्धि हुई . प्राचीन काल से ही भारत में दर्शन को दिए जाने वाले महत्त्व के अतिरिक्त, आधुनिक भारत ने भी कुछ प्रभावशाली दार्शनिकों को जन्म दिया है, जिन्होंने राष्ट्रीय भाषा के साथ साथ प्रायः अंग्रेजी में भी लिखा है। भारत के ब्रिटिशों द्वारा उपनिवेश बनाये जाने के दौरान, भारत के कुछ धार्मिक विचारकों ने विश्व भर में उतनी ही ख्याति अर्जित की जितनी की प्राचीन भारतीय ग्रंथों ने. उनमें से कुछ के कार्य को अंग्रेजी, जर्मन और अन्य भाषाओँ में अनुवादित भी किया गया। स्वामी विवेकानंद अमेरिका गए और वहां उन्होंने विश्व धर्म संसद (World Parliament of Religions) में हिस्सा लिया, उन्होंने धरती हिला देने वाले या कहिये अत्यंत प्रभावशाली वक्तव्य से सबको प्रभावित किया, वहन आये ज्यादातर प्रतिनिधियों के लिए ये हिन्दू दर्शन से पहला साक्षात्कार था। कई धार्मिक विचारक जैसे की महात्मा गाँधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य सदस्यों ने राजनीतिक दर्शन के नए रूप को जन्म दिया जिसने आधुनिक भारतीय लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और उदारवाद के आधार को बनाया.आज, एशिया का पहला आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार (Nobel Memorial Prize in Economic Sciences) जीतने वाले अमर्त्य सेन जैसे अर्थशास्त्री भारत को दुनिया के विचारों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एक देश के रूप में प्रतिष्ठित कर रहे है। सन्दर्भ भारत इन्हें भी देखें भारतीय दर्शन भारतीय धर्म भारतीय संस्कृति की शब्दावली बाहरी कड़ियाँ भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ https://web.archive.org/web/20221010132105/https://www.freejankari.com/2022/09/bhartiya-sanskriti-ki-visheshta.html 10 अक्तूबर 2022 भारत की संस्कृति और सर्वोत्कृष्टता https://web.archive.org/web/20221015143154/https://happydiwali74.theuspride.com/culture-of-india%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF/ 15 अक्तूबर 2022 संस्कृति - सांस्कृतिक विचारों और अभिव्यक्तियों की प्रतिनिधि पत्रिका, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित भारतीयता की पहचान (गूगल पुस्तक ; लेखक - विद्यानिवास मिश्र) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार पांडुलिपियों के संरक्षण और उन्हें उपलब्ध बनाने के लिए समर्पित भारत सरकार की साइट अंग्रेजी, फ्रांसीसी, स्पेनी, इतालवी, जर्मन और रोमानी में भारतीय परंपराओं और विश्व संस्कृति पर निबंध, वाद विवाद, मल्टीमीडिया वर्णन आदि संस्कृति सामान्य ज्ञान भारतीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक अध्ययनपीठ भारतीय संस्कृति का संक्षिप्त इतिहास इ-संस्कृति (अंग्रेजी में) लेख विश्वव्यापी भारतीय संस्कृति (रघूत्तम शुक्ल) शाश्वत है भारतीय संस्कृति और इसकी विरासत !! (के० के० यादव) भारतीय संस्कृति और उसके मायनेजून 2020 InternetArchiveBot (द थर्ड आई) "नथिंग टु गो बैक टु- द फेट ऑफ़ द विडो ऑफ़ वृन्दावन, इंडिया" डबल्यू एन एन - विमेन न्यूज़ नेटवर्क नवम्बर ३, २००७ ट्रेज़र हाउस ऑफ़ इंडियाज आर्ट एंड कल्चर या भारतीय कला और संस्कृति का खजाना. इंडियनकल्चरऑनलाइन डॉट कॉम - इंडियन कल्चर फोटोज (भारतीय संस्कृति से जुडी तसवीरें तथा विस्तृत जानकारी) संस्कृति क्षेत्र भारतीय संस्कृति का एक परिचय संस्कृति का विस्तार (अखिल विश्व गायत्री परिवार) पुस्तकें Nilakanta Sastri K.A. A history of South India from prehistoric times to the fall of Vijayanagar 1955 2002 Indian Branch, Oxford University Press नई दिल्ली 0-19-560686-8 Narasimhacharya R History of Kannada Literature https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.489059 1988 1988 Asian Educational Services नई दिल्ली, Madras 81-206-0303-6 Rice B.L. Mysore Gazatteer Compiled for Government-vol 1 https://archive.org/details/mysoregazetteerc0000rice 1897 2001 Asian Educational Services नई दिल्ली, Madras 81-206-0977-8 Kamath Suryanath U. A concise history of Karnataka: from pre-historic times to the present 1980 2001 Jupiter books Bangalore 7796041 809 0 5179 पवन के.वर्माबीइंग इंडियन: इनसाइड द रियल इंडिया.(आई एस बी एन ०-४३४-०१३९१-९) मार्क टल्ली (Tully, Mark) भारत में पूर्ण रोक नहीं है (आई एस बी एन ०-१४-०१०४८०-१) वी एस नाइपौल (Naipaul, V.S) India: A Million Mutinies Now(आई एस बी एन ०-७४९३-९९२०-१) निक्की, ग्रिहौल्ट इंडिया- कल्चर स्मार्ट!: अ क्विक गाइड टु कस्टम्स एंड एटिकेट आई एस बी एन १-८५७३३-३०५-५) मंजरी उईल, भारतीय संस्कृति पर विदेशी प्रभाव (c.६०० ई.पू. ३२० ईस्वी तक), (आईऍसबीऍन ८१-८८६२९-६०-एक्स) भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं परम्पराएँhttps://www.rajmangalpublishers.com/product-page/bhartiya-sanskriti-sahitya-evam-paramparayen Rajmangal Publishers Hindi Book Publishers in Bijnor Bulandshahr Chandauli Rajmangal Publishers en 2023-01-03 / डॉ. कुसुम डोबरियाल (ISBN: 9789394920378) - राजमंगल प्रकाशन - 2022 पत्रिका