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411 समाचार
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शंकर-एहसान-लॉय

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शंकर-एहसान-लॉय Shankar Ehsaan Loy.jpg (बाएँ से दाएँ), लोय मेंडोंसा, शंकर महादेवन, एहसान नूरानी 200 group_or_band फिल्मी संगीत, थियेटर, विश्व संगीत गीतकार, रिकार्ड निर्माता, संगीतकार, गायक, इंस्ट्रूमेंटलिस्ट, संगीत प्रबंधकर्ता, प्रोग्रामर 1997 से अब तक शक्ति ShankarEhsaanLoy.com शंकर महादेवन एहसान नूरानी लोय मेंडोंसा शंकर-एहसान-लॉय(अंग्रेजी: Shankar–Ehsaan–Loy) भारतीय संगीतकार तिकड़ी है, यह तिकड़ी शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा से मिल कर बनी है और कई भारतीय फिल्मों के लिए संगीत प्रदान करती है। ये बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और समीक्षकों के द्वारा बहुप्रशंसित संगीत निर्देशकों में एक हैं।उन्होंने पाँच भाषाओं: हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु, मराठी और अंग्रेज़ी: में 50 से ज़्यादा साउंडट्रैक के लिए संगीत तैयार किया है। समीक्षकों द्वारा प्रशंसित भारतीय संगीतकारों में से एक,2010-12 India Economic Update, December 2010 https://doi.org/10.1596/27706 10.1596/27706 इस तिकड़ी ने राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और आईफ़ा पुरस्कार सहित कई पुरस्कार जीते हैं। उन्हें अक्सर हिंदी फिल्म संगीत उद्योग के "अमर अकबर एंथनी" (एएए) के रूप में जाना जाता है|Colson, Lionel Hewitt, (24 May 1887–15 June 1943), Indian Police, retired 2007-12-01 https://doi.org/10.1093/ww/9780199540884.013.u224012 Who Was Who Oxford University Press 2025-09-13 उन्होंने कई फिल्मों के लिए प्रसिद्द कार्य किये जैसे मिशन कश्मीर(2000), दिल चाहता है (2001),कल हो ना हो (2003), बंटी और बबली (2005), कभी अलविदा ना कहना (2006), डॉन- द चेस बिगिन्स अगेन (2006), तारे ज़मीं पर (2007), रोक ऑन !! (2008), वेक अप सिड (2009), माय नेम इस खान (2010), कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (2010) , हाउसफुल(2010) और सूरमा (2018)। सदस्यों शंकर महादेवन इस तिकड़ी के मुख्य गायक शंकर महादेवन का जन्म और पालन-पोषण मुंबई के उपनगर चेंबूर में हुआ था।Walters, Ian, (born 20 March 1943), Chief Executive, Action Mental Health, 2002–10 2007-12-01 https://doi.org/10.1093/ww/9780199540884.013.u38786 Who's Who Oxford University Press 2025-09-13 केरल के एक तमिल परिवार में।https://doi.org/10.59350/rc4zv-2r115 WHEN TELEVISION GREW UP: DAVID SIMON, MODERN AMERICA AND THE MATURING OF THE TV LANDSCAPE Halskov Andreas 2019-11-01 doi.org 2025-09-13उन्होंने बचपन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और कर्नाटक संगीत सीखा और पाँच साल की उम्र में वीणा बजाना शुरू कर दिया। उन्होंने लोकप्रिय मराठी संगीतकार श्रीनिवास खले से शिक्षा प्राप्त की। 1988 में मुंबई विश्वविद्यालय के तत्वावधान में नवी मुंबई स्थित रामराव आदिक प्रौद्योगिकी संस्थान से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में स्नातक होने के बाद, उन्होंने ओरेकल वर्जन सिक्स में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया। लीडिंग एज सिस्टम्स के लिए कुछ समय तक काम करने के बाद, शंकर ने संगीत के क्षेत्र में कदम रखा।Pettis Heather M. 2009-04 North Atlantic Right Whale Consortium Annual Report Card (01 November 2007 - 30 April 2009) https://doi.org/10.1575/1912/29597 उन्होंने ए.आर. रहमान के साथ एक तमिल फिल्म में पार्श्व गायक के रूप में अपना पहला पुरस्कार जीता और "कंदुकोंडेन कंदुकोंडेन" में अपने गीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। तमिल सिनेमा के एक प्रमुख सितारे के रूप में, उन्हें 1998 में अपने पहले संगीत एल्बम, "ब्रेथलेस" के रिलीज़ होने के बाद और अधिक पहचान मिली। 2019 में उन्हें फिल्म संगीत में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।https://doi.org/10.3998/mpub.11713921.comp.8 “Kajra Re,” Bunty Aur Babli (Shaad Ali, 2005) doi.org 2025-09-13 उनके दो बेटे हैं, सिद्धार्थ और शिवम महादेवन, दोनों ही गायक हैं |2019 All My Sons https://doi.org/10.5040/9781350932920 All My Sons 10.5040/9781350932920 प्रारंभिक जीवन शंकर महादेवन एक अर्हताप्राप्त सॉफ्टवेयर इंजिनियर हैं जिन्होंने ओरेकल के छठे संस्करण पर काम किया और पश्चिमी, हिन्दुस्तानी और कर्नाटकी शास्त्रीय का अध्ययन किया। वे पुकार, सपने और बीवी नंबर 1 के प्रमुख प्लेबैक सिंगर (गायक) हैं, उन्होंने ब्रेथलेस की भी रचना की। एहसान नूरानी ने लॉस एंजिल्स में म्युज़िशियंस इंस्टीट्युट में संगीत का अध्ययन किया और रोनी देसाई और लूइस बैंक्स के साथ काम किया। उन्होंने एलीन डिज़ायर की रचना की, कई जिंगल्स किये और लॉय की तरह, वे ब्लूस-एंड-एसिड जेज़ बैंड का हिस्सा थे। लॉय मेंडोंसा पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित हैं और उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत का आरंभिक ज्ञान भी प्राप्त किया। उन्होंने कई बैंड समूहों के साथ काम किया, कई नाटक किये (गोडस्पेल, वेस्ट साइड स्टोरी, जीसस क्राइस्ट सुपरस्टार) और जिंगल्स की रचना की और कई धुनें बनायीं (फौजी, द वर्ल्ड दिस वीक।)http://www.rediff.com/movies/2001/jun/23shan.htm संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110607051246/http://www.rediff.com/movies/2001/jun/23shan.htm 7 जून 2011 live एक साथ काम करने से पहले एहसान जिंगल्स कर रहे थे और लॉय दिल्ली में थे। उस समय लॉय टेलिविज़न के लिए लिखते थे। शो 'क्विज टाइम' उनका पहला काम था और सिद्धार्थ बसु ने उन्हें पहला ब्रेक दिया। उसके बाद उन्होंने प्रणय राय की की 'द वर्ल्ड दिस वीक' की। साथ ही कई और शो भी आये और उन्होंने थियेटर और शाहरुख खान की फौजी भी की। लॉय ने ए॰ आर॰ रहमान के साथ कीबोर्ड वादक के रूप में भी किया और शंकर ने उनके लिए कई प्रसिद्द ट्रैक गाये हैं। उसके बाद वे बोम्बे आ गाये और जिंगल्स करना शुरू कर दिया। वे एहसान के साथ जुड़ गाये और उन्होंने संगीत पर काम करना शुरू किय। एहसान ने हिट सिटकोम शांति के लिए भी संगीत दिया था। फिर शंकर आये और भारतीय बिट पर कुछ काम किया। तब से आज तक वे एक तिकड़ी के रूप में काम कर रहें हैं।साक्षात्कार: वाट वर यू गाय्स डूइंगबिफोर दिस? तिकड़ी के रूप में कैरियर शंकर-एहसान-लॉय ने कम्पोज़र के रूप में पहली बार मुकुल आनंद की फिल्म दस में काम किया। आनंद की मृत्यु के बाद फिल्म अधूरी रह गयी, हालांकि, एल्बम जो बाद में रिलीज़ हुई थी, बड़े पैमाने पर लोकप्रिय हुई। इसके बाद उन्होंने दो फिल्मों के लिए संगीत की रचना की, रोकफोर्ड और भोपाल एक्सप्रेस, लेकिन इस काम पर ध्यान नहीं दिया गया। विधु विनोद चोपड़ा की मिशन कश्मीर के साथ उन्होंने सिनेमा की मुख्यधारा में प्रवेश किया, इसका संगीत हिट रहा और इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड फिल्म उद्योग में एक तिकड़ी का स्थान मिल गया। उन्हें इसके लिए आइफा (IIFA) में भी नोमिनेट किया गया।http://www.rediff.com/movies/2001/jun/23shan.htm संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110607051246/http://www.rediff.com/movies/2001/jun/23shan.htm 7 जून 2011 live संगीत निर्देशक के रूप में दिल चाहता है के साथ उनके कैरियर में एक मोड़ आया, जो निर्देशक के रूप में फरहान अख्तर की पहली फिल्म थी। समीक्षकों के द्वारा इस फिल्म की बहुत अधिक प्रशंसा की गयी और दर्शकों ने भी इसे सराहा.http://www.indiaglitz.com/channels/hindi/interview/6679.html संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20111124181452/http://www.indiaglitz.com/channels/hindi/interview/6679.html 24 नवंबर 2011 live इसने एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ इस तिकड़ी के दीर्घकालिक सम्बन्ध की शुरुआत की। दिल चाहता है के बाद, उनकी अगली बड़ी फिल्म थी धर्मा प्रोडक्शन की कल हो ना हो, जिसके निर्देशक निखिल अडवाणी थे।इस एलबम ने सबसे ज्यादा बिकने वाली एलबम के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।इसके संगीत की समीक्षों ने बहुत प्रशंसा की, व्यावसायिक रूप से इसकी सराहना की गयी और सर्वोत्तम संगीत निर्देशन के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड सहित इसने कई अवार्ड जीते।http://www.imdb.com/Sections/Awards/National_Film_Awards_India/2004 संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20050910132259/http://www.imdb.com/Sections/Awards/National_Film_Awards_India/2004 10 सितंबर 2005 live तब से, उन्होंने धर्मा प्रोडक्शन और इसके मालिक और निर्देशक करन जोहर के साथ कई बार काम किया है,http://www3.dharma-production.com/wakeupsid.html संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100721215827/http://www3.dharma-production.com/wakeupsid.html 21 जुलाई 2010 dead http://www3.dharma-production.com/kank_syn.html संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20081221052302/http://www3.dharma-production.com/kank_syn.html 21 दिसंबर 2008 dead http://www3.dharma-production.com/forthcoming.html संग्रहीत प्रति 1 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20081221023630/http://www3.dharma-production.com/forthcoming.html 21 दिसंबर 2008 dead इसमें उनकी कभी अलविदा ना कहना भी शामिल है। इसके साउंडट्रैक ने कल हो ना हो का रिकॉर्ड तोड़ दिया और एक बार फिर से वे बॉलीवुड संगीत के सर्वश्रेष्ठ विक्रेता बन गये। शैली इस समूह में तिकड़ी के प्रत्येक सदस्य की प्रतिभा और अनुभव का संयोजन देखने को मिलता है, यह तिकड़ी कर्नाटकी और हिन्दुस्तानी गायन परम्परा (शंकर), पश्चिमी रॉक (एहसान) और इलेक्ट्रॉनिक सिंथेसाइज़र में महारत सहित संलयन की गहरी सूझ बुझ (लॉय) का संयोजन प्रस्तुत करती है। वे बॉलीवुड के संगीत की एक आम परंपरा को जारी रखे हुए हैं, कि संगीतकारों के बीच की यह साझेदारी उनकी व्यक्तिगत क्षमता को सशक्त बनाती है और उसमें योगदान देती है, कभी कभी हिन्दुस्तानी का गहरे ज्ञान (उत्तर भारतीय) या कर्नाटकी (दक्षिण भारतीय) शास्त्रीय संगीत और तकनीकी विशेषज्ञता का संयोजन इन संगीतकारों और आर्केस्ट्रा वादकों में दिखाई देता है। शंकर-एहसान-लॉय, संगीतकारों की संभवतया पहली तिकड़ी है जो अपने चार्ट-टॉपिंग संगीत से बॉलीवुड के दर्शकों का मनोरंजन करती है।http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 संग्रहीत प्रति 7 जुलाई 2012 https://archive.today/20120707063435/boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 7 जुलाई 2012 dead वे धीरे धीरे बॉलीवुड संगीत के 'अमर-अकबर-एंथोनी' के रूप में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। बॉलीवुड के संगीतकारों का लक्ष्य उन युवा दर्शकों में रूचि पैदा करना है जो पश्चिमी संगीत और प्रभावों से अधिक प्रेरित होते हैं। चूंकि एक फिल्म का संगीत (साउंडट्रैक) बहुत प्रभावी होता है और व्यवसायिक और आलोचनात्मक सफलता प्राप्त करने में जटिल महत्वपूर्ण अवयव की भूमिका निभाता है, कभी कभी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर जाता है। 'एक फिल्म की डिलीवरी' को लेकर इस तथ्य ने हमेशा से संगीतकारों को ऐसी धुनें बनाने के लिए प्रेरित किया है जो सर्वोत्तम पारंपरिक भारतीय संगीत और लोकप्रिय पश्चिमी या अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव का संयोजन हो, बॉलीवुड की अधिकांश लोकप्रिय संगीत रचना शास्त्रीय भारतीय राग के आधार पर की गयी है (संस्कृत में "राग" का शाब्दिक अर्थ है "रंग" या "मूड")। शंकर-एहसान-लॉय ने सफलतापूर्वक इस रिक्त स्थान को भरा है। उन्होंने समीक्षात्मक और व्यवसायिक सफलता के साथ साथ बॉलीवुड प्रेस और मेग्जीन्स, टीवी चैनलों से कई अवार्ड्स जीते हैं और लगातार जीत रहे हैं। उन्होंने एक नेशनल फिल्म अवार्ड (कल हो ना हो, 2003) भी जीता हैAugust 2008। उनकी सफलता में कई कारकों ने योगदान दिया है, जिसमें उनके आर्केस्ट्रा पैलेट के रूप में रुचिकर संगीत उपकरणों और ध्वनि को अपनाया जाना, लोकप्रिय टीवी संगीत प्रतिभा शो में नयी आवाजों को शामिल करना और गाने से पहले आने वाले फिल्म के दृश्य में संगीत के सही 'अहसास' को डालना शामिल है। अक्सर साथ काम करने वाले शंकर एहसान लॉय ने फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के द्वारा स्थापित, एक्सेल एंटरटेनमेंट के द्वारा बनायी गयी अधिकांश फिल्मों के लिए संगीत रचना की है। उन्होंने करन जोहर के धर्मा प्रोडक्शन के लिए भी काफी काम किया है। इसके आलावा उन्होंने कई उल्लेखनीय निर्देशकों जैसे निखिल अडवाणी, शाद अली, श्रीराम राघवन और साजिद खान के साथ भी काम किया है। गीतकार जावेद अख्तर के साथ उनके काम को, भारतीय सिनेमा के सबसे सफल कार्यों में से एक माना जाता है। हालांकि इस तिकड़ी के द्वारा रचित अधिकांश गाने जावेद अख्तर के द्वारा लिखे गये हैं, वे कई अन्य गीतकारों से भी जुड़े रहें हैं जैसे गुलज़ार, समीर और प्रसून जोशी। सम्मान और पुरस्कार इस तिकड़ी ने कई अवार्ड जीते जिसमें फिल्मफेयर अवार्ड्स (बंटी और बबली, कल हो ना हो), आर डी बर्मन अवार्ड (दिल चाहता है) और स्टार स्क्रीन अवार्ड्स (मिशन कश्मीर, बंटी और बबली, दिल चाहता है) शामिल हैं। वे 2004 में, हो के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीता। पुरस्कार और सम्मान की संक्षिप्त सूची आरडी सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए बर्मन पुरस्कार (२००१) - दिल चाहता है राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए के लिए फ़िल्म पुरस्कार (२००४) - कल हो ना हो सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार - कल हो ना हो (२००४) और (बंटी और बबली (२००६) IIFA सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक - कल हो ना हो (२००४) और (बंटी और बबली (२००६) २०११ में जैक दानिएल येअर्स ऑफ़ एक्स्सल्लेंस पुरस्कार - पिछले दो दशकों में उनके संगीत में योगदान के लिए सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ शंकर-एहसान-लॉय (आधिकारिक साइट) उन्माद में शंकर एहसान लॉय कॉन्सर्ट 0536708 Shankar Mahadevan 0251416 Ehsaan Noorani * 0523415 Loy Mendonsa श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:हिन्दी फ़िल्म संगीतकार श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार विजेता