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तुमड़ी के शब्द
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जुलाई 2026 तुमड़ी के शब्द बद्रीनारायण राजकमल हिंदी भारत हिंदी साहित्य (काव्य) काव्य मुद्रित
तुमड़ी के शब्द एक हिन्दी कविता-संग्रह है, जिसको बद्रीनारायण के द्वारा लिखा गया है।
इनको 2022 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ..:: Welcome to Sahitya Akademi ::.. https://sahitya-akademi.gov.in/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp sahitya-akademi.gov.in 13 जून 2026
इसमें इन्होंने लोकजीवन, ग्रामीण संस्कृति, मानवीय संवेदना, प्रकृति, स्मृति और सामाजिक चेतना से संबंधित विषयों को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। इस संग्रह में कवि ने सामान्य जन के अनुभवों, संघर्षों और आशाओं को सरल तथा प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। संग्रह की कविताएँ लोकधर्मी भावबोध के साथ-साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं को भी रेखांकित करती हैं।
विषयवस्तु
इनकी कविताओं का मुख्य आधार लोकसाहित्य और जनजीवन है। संग्रह में किसान, मजदूर, स्त्री, गाँव और प्रकृति से जुड़े अनेक बिंब दिखाई देते हैं। कविताएँ सामाजिक असमानताओं, सांस्कृतिक परिवर्तनों और मानवीय संबंधों की संवेदनशील पड़ताल करती हैं। संग्रह में प्रयुक्त प्रतीक और बिंब पाठकों को ग्रामीण परिवेश की जीवंत अनुभूति कराते हैं।
कवि ने लोकभाषा और साहित्यिक भाषा के संतुलित प्रयोग द्वारा अपनी अभिव्यक्ति को प्रभावशाली बनाया है।
साहित्यिक महत्व
तुमडी के शब्द को लोकचेतना और मानवीय मूल्यों पर आधारित काव्य-संग्रह के रूप में देखा जा सकता है। यह संग्रह भारतीय संस्कृति, सामाजिक परिवर्तन और मानववाद के प्रश्नों को उठाते हुए पाठकों को चिंतन के लिए प्रेरित करता है।
हिन्दी कविता की परंपरा में यह संग्रह लोक और आधुनिकता के मध्य संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है।
बद्री नारायण वर्तमान समय के महत्वपूर्ण कवियों में से एक हैं। 2019 में राजकमल प्रकाशन से उनकी यह कविता संग्रह प्रकाशित हुई, ‘तुमड़ी के शब्द’। यह उनका चौथा काव्य संग्रह है।तुमड़ी के शब्द : बद्री नारायण - हिन्दीनामा https://hindinama.com/%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF#google_vignette हिन्दीनामा 13 जून 2026 20 सितम्बर 2021
इन्हें भी देखें
अकाल में सारस
कोई दूसरा नहीं
पत्थर फेक रहा हुँ
हवा के हस्ताक्षर
दो पंक्तियों के बीच
हम जो देखते हैं
नए इलाके मे
सन्दर्भ
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