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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शेख हिसामुद्दीन

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शेख हिसामुद्दीन شیخ حسام الدین ur चतुर्थ मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम के अध्यक्ष 1939 1940 हबीबुर रहमान लुधियानवी मास्टर ताज-उद-दीन अंसारी yes इस्लाम सुन्नी हनाफी मातुरीदी शेख हिसामुद्दीन एक इस्लामी विद्वान थे, जिन्होंने तीन कार्यकालों में मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम के चौथे अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, पहली बार 1939 से 1940 तक, फिर 1942 से 1946 तक, और अंत में 1962 से 1966 तक। वे भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की एक प्रमुख हस्ती और ऑल इंडिया मजलिस-ए-अहरार-उल-इस्लाम के नेता थे।https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.461770 Towards Freedom: Documents on the Movement for Independence in India, 1939 मुशीरुल हसन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 2008 978-0-19-569651-6 1253 भारत के विभाजन के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी और मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम पाकिस्तान के प्रमुख सैयद अता उल्लाह शाह बुखारी के साथ खत्म-ए-नबुव्वत आंदोलन के लिए संघर्ष किया। 1953 में, उन्होंने तहरीक-ए-खत्मे नबुव्वत के आंदोलन में भूमिका निभाई थी। 1958 में, अहरार फिर से संगठित हुआ। उस समय, शेख हिसामुद्दीन को मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम पाकिस्तान के महासचिव के पद के लिए चुना गया था। पुस्तकें शेख हिसामुद्दीन ने इस्लामी धर्मशास्त्र, राजनीतिक सक्रियता और ब्रिटिश भारत में स्वतंत्रता आंदोलन पर कई पुस्तकें और पुस्तिकाएं लिखीं और उनमें योगदान दिया। उनके नाम से जुड़ी उल्लेखनीय पुस्तकों में शामिल हैं: ur اسلام اور آزادی, इस्लाम और आज़ादी — इस्लामी शिक्षाओं और स्वतंत्रता के संघर्ष के बीच संबंधों की खोज। ur تحریک احرار کی تاریخ, तहरीक-ए-अहरार की तारीख — मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम का ऐतिहासिक वृत्तांत और भारतीय राजनीति में इसकी भूमिका। ur مسلمانانِ ہند کے مسائل, मुसलमान-ए-हिंद के मसाइल — ब्रिटिश भारत में मुसलमानों के सामने आने वाली सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों को संबोधित करने वाले निबंध। ur علماء اور سیاست, उलेमा और सियासत — राजनीतिक आंदोलनों में धार्मिक विद्वानों की भूमिका पर चर्चा। उनके लेखन, उनके भाषणों और समकालीन समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों ने इस्लाम, राष्ट्रवाद और उपनिवेशवाद पर बौद्धिक विमर्श में योगदान दिया। [attachment_1](attachment) संदर्भ