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बहवृचोपनिषद
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Lalita sm.JPG उपनिषद् में कहा गया है कि ब्रह्माण्ड का आरम्भ स्त्री से हुई है। ऋग्वेद से परिचितमोनियर विलियम्स, व्युत्पत्ति के साथ संस्कृत-अंग्रेज़ी शब्दकोश, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय प्रेस, Bahvṛc पर लेख, पृष्ठ 726 12वीं से 15वीं शताब्दी तक CECush 2007 740 ऋग्वेद Tinoco 1996 88 शाक्त Warrier 1967 73–76 1 9 Narayanaswami 1999 शाक्त, वेदान्तMahadevan 1975 238–239
बह्वृगुपनिषद् ऋग्वेद शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यत वेदव्यास जी को कई उपनिषदों का लेखक माना जाता है
रचनाकाल
उपनिषदों के रचनाकाल के सम्बन्ध में विद्वानों का एक मत नहीं है। कुछ उपनिषदों को वेदों की मूल संहिताओं का अंश माना गया है। ये सर्वाधिक प्राचीन हैं। कुछ उपनिषद ‘ब्राह्मण’ और ‘आरण्यक’ ग्रन्थों के अंश माने गये हैं। इनका रचनाकाल संहिताओं के बाद का है। उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है समान्यत उपनिषदो का काल रचनाकाल ३००० ईसा पूर्व से ५०० ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है—
पुरातत्व एवं भौगोलिक परिस्थितियां
पौराणिक अथवा वैदिक ॠषियों के नाम
सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राजाओं के समयकाल
उपनिषदों में वर्णित खगोलीय विवरण
निम्न विद्वानों द्वारा विभिन्न उपनिषदों का रचना काल निम्न क्रम में माना गया हैRanade 1926, pp. 13–14-
+ विभिन्न विद्वानों द्वारा वैदिक या उपनिषद काल के लिये विभिन्न निर्धारित समयावधि लेखक शुरुवात (BC)समापन (BC)विधिलोकमान्य तिलक (Winternitz भी इससे सहमत है)6000200खगोलिय विधिबी. वी. कामेश्वर23002000खगोलिय विधिमैक्स मूलर1000800भाषाई विश्लेषणरनाडे1200600भाषाई विश्लेषण, वैचारिक सिदान्त, etcराधा कृष्णन800600वैचारिक सिदान्त+ मुख्य उपनिषदों का रचनाकाल डयुसेन (1000 or 800 – 500 BC) रनाडे (1200 – 600 BC) राधा कृष्णन (800 – 600 BC) अत्यंत प्राचीन उपनिषद गद्य शैली में: बृहदारण्यक, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, कौषीतकि, केनकविता शैली में: केन, कठ, ईश, श्वेताश्वतर, मुण्डकबाद के उपनिषद गद्य शैली में: प्रश्न, मैत्री, मांडूक्यसमूह I: बृहदारण्यक, छान्दोग्यसमूह II: ईश, केनसमूह III: ऐतरेय, तैत्तिरीय, कौषीतकिसमूह IV: कठ, मुण्डक, श्वेताश्वतरसमूह V: प्रश्न, मांडूक्य, मैत्राणयीबुद्ध काल से पूर्व के: ऐतरेय, कौषीतकि, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक, केनमध्यकालीन: केन (1–3), बृहदारण्यक (IV 8–21), कठ, मांडूक्यसांख्य एवं योग पर अधारित:' मैत्री, श्वेताश्वतर</div>
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
उपनिषदों ने आत्मनिरीक्षण का मार्ग बताया
मूल ग्रन्थ
Upanishads at Sanskrit Documents Site
पीडीईएफ् प्रारूप, देवनागरी में अनेक उपनिषद
GRETIL
TITUS
अनुवाद
Translations of major Upanishads
11 principal Upanishads with translations
Translations of principal Upanishads at sankaracharya.org
Upanishads and other Vedanta texts
डॉ मृदुल कीर्ति द्वारा उपनिषदों का हिन्दी काव्य रूपान्तरण
Complete translation on-line into English of all 108 Upaniṣad-s [not only the 11 (or so) major ones to which the foregoing links are meagerly restricted]-- lacking, however, diacritical marks
श्रेणी:वेद
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