Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

परवीन शाकिर

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

सैयदा परवीन शाकिर yes 1952 11 24 कराची, सिंध, पाकिस्तान yes 1994 12 26 1952 11 24 इस्लामाबाद, पाकिस्तान सेंट्रल सुपीरयर सर्विस की अधिकारी पाकिस्तानी कविता, गज़ल, मुक्त छंद उर्दू साहित्य उर्दू शायरी में एक युग का प्रतिनिधित्व खुली आँखों में सपना, ख़ुशबू, सदबर्ग, इन्कार, रहमतों की बारिश, ख़ुद-कलामी, इंकार(१९९०), माह-ए-तमाम (१९९४) सैयद नसीर अली सैयद मुराद अली उर्दू कविता सैयदा परवीन शाकिर (उर्दू: پروین شاکر नवंबर 1952 – 26 दिसंबर 1994), एक उर्दू कवयित्री, शिक्षक और पाकिस्तान की सरकार की सिविल सेवा में एक अधिकारी थीं।http://deccanquest.com/Articles.aspx?ArticleID=1 परवीन शाकिर वह शायरा जो ‘खुशबू’ बनकर उर्दू अदब पर बिखर गई अशऱफ फिरोज २६ दिसंबर २०१९ डेक्कन क्वेस्ट 24 जून 2021 24 जून 2021 https://web.archive.org/web/20210624033824/http://deccanquest.com/Articles.aspx?ArticleID=1 dead इनकी प्रमुख कृतियाँ खुली आँखों में सपना, ख़ुशबू, सदबर्ग, इन्कार, रहमतों की बारिश, ख़ुद-कलामी, इंकार(१९९०), माह-ए-तमाम (१९९४) आदि हैं।http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A5%80 कविताकोश में परवीन शाकिर का परिचय और रचनाएँ 2 अगस्त 2015 https://web.archive.org/web/20180916093203/http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A5%80 16 सितंबर 2018 live वे उर्दू शायरी में एक युग का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी शायरी का केन्द्रबिंदु स्त्री रहा है। फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार ये पाकिस्तान की उन कवयित्रियों में से एक हैं जिनके शेरों में लोकगीत की सादगी और लय भी है और क्लासिकी संगीत की नफ़ासत भी और नज़ाकत भी। उनकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टीकेशन का दिलआवेज़ संगम है। पाकिस्तान की इस मशहूर शायरा के बारे में कहा जाता है, कि जब उन्होंने 1982 में सेंट्रल सुपीरयर सर्विस की लिखित परीक्षा दी तो उस परीक्षा में उन्हीं पर एक सवाल पूछा गया था जिसे देखकर वह आत्मविभोर हूँ गयी थी।कोमल एहसासों की शायरा परवीन शाकिर https://web.archive.org/web/20150923223342/http://www.bbc.com/hindi/news/2011/11/111124_parveen_shakir_rf.shtml 23 सितंबर 2015 (बीबीसी हिंदी, लेखक: रेहान फ़ज़ल) सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 1421773 कैफे आईना – उनकी कविताओं की ऑन लाइन पुस्तक 166923625 n79062265 143305697 088888851 श्रेणी:उर्दू शायर श्रेणी:पाकिस्तान के लोग