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411 समाचार
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जम्मू (विभाग)

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जम्मू جۆم Jammu en प्रशासनिक विभाग Shivaliks Snow Himalayas Aerial Jammu ed Jul24 A7CR 01943.jpg हिमालय yes 4 32.73 N 74.87 E inline देश केन्द्र-शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर ज़िले *जम्मू डोडा कठुआ रामबन रियासी किश्तवाड़ पुंछ राजौरी उधमपुर साम्बा क्षेत्र डुग्गर चनाब घाटी पीर पंजाल स्थापना राजधानी जम्मू Metric 26,293 53,50,811 auto भाषाएँ राजभाषाएँ डोगरी, कश्मीरी, उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ीhttp://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/222037.pdf The Jammu and Kashmir Official Languages Act, 2020 The Gazette of India 27 September 2020 27 September 2020Parliament passes JK Official Languages Bill, 2020 Rising Kashmir 23 September 2020 http://risingkashmir.com/news/parliament-passes-jk-official-languages-bill-2020 23 September 2020 24 September 2020 https://web.archive.org/web/20200924141909/http://risingkashmir.com/news/parliament-passes-jk-official-languages-bill-2020 dead उक्त डोगरी, पहाड़ी, गोजरी, कश्मीरी, हिन्दी, पंजाबी, उर्दू IST +5:30 https://divcomjammu.gov.in/ जम्मू (ks جۆم, en Jammu no) भारत के उत्तरतम केंद्रशासित राज्य जम्मू एवं कश्मीर में दो में से एक प्रशासनिक खण्ड है। यह क्षेत्र अपने आप में एक राज्य नहीं वरन जम्मू एवं कश्मीर राज्य का एक भाग है। क्षेत्र के प्रमुख जिलों में डोडा, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, रामबन, रियासी, सांबा, किश्तवार जम्मू , पुंछ आते हैं। क्षेत्र की अधिकांश भूमि पहाड़ी या पथरीली है। इसमें ही पीर पंजाल रेंज भी आता है जो कश्मीर घाटी को वृहत हिमालय से पूर्वी जिलों डोडा और किश्तवार में पृथक करता है। यहां की प्रधान नदी चेनाब (चंद्रभागा) है। जम्मू शहर, जिसे आधिकारिक रूप से जम्मू-तवी भी कहते हैं, इस प्रभाग का सबसे बड़ा नगर है और जम्मू एवं कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी भी है। नगर के बीच से तवी नदी निकलती है, जिसके कारण इस नगर को यह आधिकारिक नाम मिला है। जम्मू नगर को "मन्दिरों का शहर" भी कहा जाता है, क्योंकि यहां ढेरों मन्दिर एवं तीर्थ हैं जिनके चमकते शिखर एवं दमकते कलश नगर की क्षितिजरेखा पर सुवर्ण बिन्दुओं जैसे दिखाई देते हैं और एक पवित्र एवं शांतिपूर्ण हिन्दू नगर का वातावरण प्रस्तुत करते हैं। यहां कुछ प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ भी हैं, जैसे वैष्णो देवी, आदि जिनके कारण जम्मू हिन्दू तीर्थ नगरों में गिना जाता है। यहाम की अधिकांश जनसंख्या हिन्दू ही है। http://news.bbc.co.uk/1/shared/spl/hi/south_asia/03/kashmir_future/html/default.stm बीबीसी न्यूज़ 26 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20170723101910/http://news.bbc.co.uk/1/shared/spl/hi/south_asia/03/kashmir_future/html/default.stm 23 जुलाई 2017 live हालांकि दूसरे स्थान पर यहां सिख धर्म ही आता है। वृहत अवसंरचना के कारण जम्मू इस राज्य का प्रमुख आर्थिक केन्द्र बनकर उभरा है।https://www.vedamsbooks.com/no38810.htm जम्मू एवं कश्मीर की अर्थव्यवस्था/जस्बीर सिंह 26 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20061018172756/https://www.vedamsbooks.com/no38810.htm 18 अक्तूबर 2006 dead इतिहास कश्मीर का इतिहास जम्मू एवं कश्मीर का इतिहास जम्मू एवं कश्मीर thumb|भारतीय राज्य जम्मू एवं कश्मीर में जम्मू क्षेत्र कश्मीर घाटी के पड़ोस में एवं दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। इस क्षेत्र में डोडा, कठुआ, जम्मू, उथमपुर, राजौरी एवं पुंछ जिले आते हैं। thumb|जम्मू में लामा नृत्य कई इतिहासकारों एवं स्थानीय लोगों के विश्वास के अनुसार जम्मू की स्थापना राजा जम्बुलोचन ने १४वीं शताब्दी ई.पू. में की थी और नाम रखा जम्बुपुरा जो कालांतर में बिगड़ कर जम्मू हो गया। राय जम्बुलोचन राजा बाहुलोचन का छोटा भाई था। (१८४६–१९५२) में बाहुलोचन ने तवी नदी के तट पर बाहु किला बनवाया था और जम्बुलोचन ने जम्बुपुरा नगर बसवाया था। राजा एक बार आखेट करते हुए तवी नदी के तट पर एक स्थान पर पहुंचा जहां उसने देखा कि एक शेर व बकरी एक साथ एक ही घाट पर पानी पी रहे हैं। पानी पीकर दोनों जानवर अपने अपने रास्ते चले गये। राजा आश्चर्यचकित रह गया और आखेट का विचार छोड़कर अपने साथियों के पास पहुंचा व सारी कथा विस्तार से बतायी। सबने कहा कि यह स्थान शंति व सद्भाव भरा होगा जहां शेर व बकरी एक साथ पानी पी रहे हों। तब उसने आदेश दिया कि इस स्थान पर एक किले का निर्माण किया जाये व उसके निकट ही शहर बसाया जाये। इस शहर का नाम ही जम्बुपुरा या जम्बुनगर पड़ा और कालांतर में जम्मू हो गया। जेराथ अशोक फ़ोर्ट्स एण्ड पैलेसेज़ ऑफ़ वैस्टर्न हिमालयाज़ ५९-६५ http://books.google.co.in/books?id=l2oZiyOqReoC&pg=PA59&dq=Bahu+fort&hl=en&ei=5Gy9S9GtJY24rAeMusjJBw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDkQ6AEwAA#v=onepage&q=Bahu%20fort&f=false इंडस पब्लिशिंग २००० 81-7387-104-3 अंग्रेज़ी 27 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20131005003831/http://books.google.co.in/books?id=l2oZiyOqReoC&pg=PA59&dq=Bahu+fort&hl=en&ei=5Gy9S9GtJY24rAeMusjJBw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CDkQ6AEwAA#v=onepage&q=Bahu%20fort&f=false 5 अक्तूबर 2013 live सिलास संदीप डिस्कवर इण्डिया बाय रेल ४७ ७ अप्रैल २०१० http://books.google.co.in/books?id=gL7pGaL3vooC&pg=PT157&dq=Bahu+Fort&hl=en&ei=4XK3S-H7CYS0rAe_yv3DCg&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=3&ved=0CEMQ6AEwAjgK#v=onepage&q=Bahu%20Fort&f=false स्टर्लिंग पब्लिशर्स प्रा.लि. २००५ 81-207-2939-0 https://web.archive.org/web/20121025124538/http://books.google.co.in/books?id=gL7pGaL3vooC&pg=PT157&dq=Bahu+Fort&hl=en&ei=4XK3S-H7CYS0rAe_yv3DCg&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=3&ved=0CEMQ6AEwAjgK#v=onepage&q=Bahu%20Fort&f=false 25 अक्तूबर 2012 live आज भी यहां बाहु का किला एक ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थल है। नगर के नाम का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। जम्मू शहर से 32 km mi दूरस्थ अखनूर में पुरातात्त्विक खुदाई के बाद इस जम्मू नगर के हड़प्पा सभ्यता के एक भाग होने के साक्ष्य भी मिले हैं। जम्मू में मौर्य, कुशाण, कुशानशाह और गुप्त वंश काल के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। ४८० ई. के बाद इस क्षेत्र पर एफ्थलाइटिस का अधिकार हो गया था और यहां कपीस और काबुल से भी शासन हुआ था। इनके उत्तराधिकारी कुशानो-हेफ्थालाइट वंश हुए जिनका अधिकार ५६५ से ६७० ई. तक रहा। तदोपरांत ६७० ई. से लेकर ११वीं शताब्दी केआरंभ तक शाही राजवंश का राज रहा जिसे ग़ज़्नवी के अधीनस्थों ने छीन लिया। जम्मू का उल्लेख तैमूर के विजय अभियानों के अभिलेखों में भी मिलता है। इस क्षेत्र ने सिखों एवं मुगलों के आक्रमणों के साथ एक बार फिर से शक्ति-परिवर्तन देखा और अन्ततः ब्रिटिश राज का नियंत्रण हो गया। यहां ८४० ई. से १८६० ई. तक देव वंश का शासन भिरहा था। तब नगर अन्य भारतीय नगरों से अलग-थलग पड़ गया और उनसे पिछड़ गया था। उसके उपरांत डोगरा शासक आये और जम्मू शहर को अपनी खोई हुई आभा व शान वापस मिली। उन्होंने यहां बड़े बड़े मन्दिरों व तीर्थों का निर्माण किया व पुराने स्थानों का जीर्णोद्धार करवाया, साथ ही कई शैक्षिक संस्थाण भी बनवाये। उस काल में नगर ने काफ़ी उन्नति की। डोगरा शसकों से जम्मू का शासन १९वीं शताब्दी में महाराजा रंजीत सिंह जी के नियंत्रण में आया और इस प्रकार जम्मू सिख साम्राज्य का भाग बना। महाराजा रंजीत सिंह ने गुलाब सिंह को जम्मू का शासक नियुक्त किया। किन्तु ये शासन अधिक समय नहीं चल पाया और महाराजा रंजीत सिंह के देहान्त के बाद ही सिख साम्राज्य कमजोर पड़ गया और महाराजा दलीप सिंह के शासन के बाद ही ब्रिटिश सेना के अधिकार में आ गया और दलीप सिंह को कंपनी के आदेशानुसार इंग्लैंड ले जाया गया। किन्तु ब्रिटिश राज के पास पंजाब के कई भागों पर अधिकार करने के कारण उस समय पहाड़ों में युद्ध करने लायक पर्याप्त साधन नहीं थे। अतः उन्होंने महाराजा गुलाब सिंह को सतलुज नदी के उत्तरी क्षेत्र का सबसे शक्तिमान शासक मानते हुए जम्मू और कश्मीर का शासक मान लिया। किन्तु इसके एवज में उन्होंने महाराज से ७५ लाख नकद लिये। यह नगद भुगतान महाराजा के सिख साम्राज्य के पूर्व जागीरदार रहे होने के कारण वैध माना गया और इस संधि के दायित्त्वों में भी आता था। इस प्रकार महाराजा गुलाब सिंह जम्मू एवं कश्मीर के संस्थापक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्हीं के वंशज महाराजा हरिसिंह भारत के विभाजन के समय यहां के शासक थे और भारत के अधिकांश अन्य रजवाड़ों की भांति ही उन्हें भी भारत के विभाजन अधिनियम १९४७ के अन्तर्गत्त ये विकल्प मिले कि वे चाहें तो अपने निर्णय अनुसार भारत या पाकिस्तान से मिल जायें या फ़िर स्वतंत्र राज्य ले लें; हालांकि रजवाड़ों को ये सलाह भी दी गई थी कि भौगोलिक एवं संजातीय परिस्थितियों को देखते हुए किसी एक अधिराज्य (डोमीनियन) में विलय हो जायें। अन्ततः जम्मू प्रान्त भारतीय अधिराज्य(तत्कालीन) में ही विलय हो गया। जनसांख्यिकी जातीयता के स्तर पर देखें तो, जम्मू मुख्यतः डोगरा बहुल है और यहां की ६७% से अधिक आबादी डोगरी है। इनके अलावा पंजाबियों की अपेक्षाकृत काफ़ी कम किन्तु उल्लेखनीय गिनती है, जिनमें अधिकांश हिन्दू या सिख हैं। जम्मू राज्य का अकेला हिन्दू बहुल इलाका है, जहां इनके अलावा २७% मुसलमान और शेष सिख बसते हैं। जनवरी 2009जम्मू के अधिकांश हिन्दू डोगरा, कश्मीरी पंडित तथा कोटली एवं मीरपुर के प्रवासी हैं। जनवरी 2009 हिन्दू जनसंख्या प्रायः जम्मू शहर और उधमपुर में और निकट ही मिलती है। बहुत से सिख परिवार पाक अधिकृत कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद और पुंछ सेक्टर के पाकिस्तान द्व्रा १९४७ में अधिकृत किये गए क्षेत्रों से आये हुए हैं। जनवरी 2009 जम्मू के लोग मुख्यतः डोगरी, पुंछी, गोजरी, कोटली, मीरपुरी पोतवारी, हिन्दी, पंजाबी तथा कुछ उर्दु भाषा भी बोलते हैं। जनवरी 2009 जम्मू क्षेत्र के हिन्दू कई जातियों से हैं, जिनमें ब्राह्मण एवं राजपूत जाति का बाहुल्य है। १९४१ की जनगणना के अनुसार तब ३०% ब्राह्मण, २७% राजपूत, १५% ठक्कर, ४% जाट एवं ८% खत्री थे।http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/pager.html?objectid=DS405.1.I34_V15_105.gif&volume=15 Imperial Gazetteer2 of India, Volume 15, page 99 – Imperial Gazetteer of India – Digital South Asia Library 27 अगस्त 2013 https://web.archive.org/web/20131022014408/http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/pager.html?objectid=DS405.1.I34_V15_105.gif&volume=15 22 अक्तूबर 2013 dead इस क्षेत्र में राजौरी, पुंछ, डोडा, किश्तवार में ही मुस्लिम आबादी अधिक है, अन्यथा शेष सभि जिलों में हिन्दू बाहुल्य है। मुसलमानों में प्रमुख जातियां हैं डोगरा, गूजर, बकरवाल और ये कश्मीरी मुसलमानों से भिन्न जातियां एवं भाषाएं बोलने वाले हैं। जम्मू क्षेत्र के अधिकांश मुस्लिमों के भारत से अलग होने के विचार नहीं रखते हैं। जम्मू क्षेत्र कश्मीर से मुस्लिम आतंकवादियों द्वारा १९९० में भगाये गए लगभग १ लाख से अधिक शरणार्थी भी हैं। इनके कैम्प जम्मू शहर के निकट ही बने हैं। जम्मू एवं कश्मीर के शहरों की सूची भूगोल एवं जलवायु जम्मू के उत्तरी ओर कश्मीर है, पूर्व में लद्दाख एवं दक्षिण में पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्य हैं। पश्चिम दिशा में नियंत्रण रेखा इसे पाक अधिकृत कश्मीर से विभक्त करती है। उत्तर में कश्मीर घाटी और दक्षिण में दमन कोह के मैदानों के बीच स्थित जम्मू क्षेत्र का अधिकांश भाग हिमालय के शिवालिक रेंज में आता है। पीर पंजाल रेंज, त्रिकुटा पर्वत एवं कम ऊंचाई के तवी नदी बेसिन के द्वारा जम्मू इलाके की सुंदरता और विविधता में और निखार आ जाता है। पीर पंजाल रेंज जम्मू को कश्मीर घाटी से अलग करता है। जम्मूकी अधिकांश जनसंख्या डोगरी है और ये डोगरी भाषा ही बोलते हैं, जो उत्तर भारत एवं पाकिस्तान में बोली जाने वाली हिन्दी-हिन्दुस्तानी –उर्दु भाषाओं का मिला-जुला रूप ही है। क्षेत्र का मौसम यहां की ऊंचाई के संग ही बदलता है। जम्मू नगर में एवं पास के इलाकों कामौसम निकटवर्ती पंजाब के क्षेत्र जैसा ही है जिसमें उष्ण ग्रीष्मकाल, बारिशों वाला वर्षाकाल और ठंडे शीतकाल होते हैं। हालांकि जम्मू नगर विशेष में हिमपात नहीं होता है, किन्तु इस क्षेत्र के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में कम से कम सर्दियों में हिमाच्छादित शिखर मिल जाते हैं। देश भर एवं विदेशि सैलानी यहां के प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थल (हिल-स्टेशन) पटनीटॉप घूमने आते हैं जहां जाड़ों की बर्फ़ सुलभ होती है। प्रसिद्ध तीर्थ वैष्णो देवी गुफा क्षेत्र शीतकाल में हिमाच्छादित रहता है और यहां हिमपात भी होता है। जम्मू क्षेत्र को कश्मीर क्षेत्र से जोड़ने वाला बनिहाल दर्रा प्रायः भारी हिमपात के कारण शीतकाल में बंद होता रहता है। जिले 200px|thumbnail|जम्मू मंडल, सभी जिलों (राल रंग में) एवं उप-जिलों (सहित), नवंबर २०१२। केवल भारत-अधिकृत क्षेत्र ही दिखाये गए हैं।|कड़ी=Special:FilePath/Jammu_division_with_districts_as_on_Nov_2012.pdf वर्ष २०१२ के अनुसार जम्मू मंडल में कुल १० जिले हैं: जिले का नाम मुख्यालय क्षेत्रफ़ल (कि.मी²) जनसंख्या २००१ जनगणना जनसंख्या २०११ जनगणना कठुआ जिला कठुआ जम्मू जिला जम्मू सांबा जिला सांबा उधमपुर जिला उधमपुर रियासी जिला रियासी राजौरी जिला राजौरी पुंछ जिला पुंछ डोडा जिला डोडा रामबन जिला रामबन किश्तवार जिला किश्तवार भारत (और जम्मू एवं कश्मीर) के विभाजन एवं स्वतंत्रता से पूर्व महाराजा के शासन के समय निम्न जिले भी जम्मू क्षेत्र के ही भाग थे: भीमबर, कोटली, मीरपुर, पुंछ (पश्चिमी भाग), हवेली, भाग और सुधनति। वर्तमान स्थिति में ये पाक अधिकृत कश्मीर के भाग हैं और भारत द्वारा दावा किये जाते हैं। राजनीति क्षेत्रकी महत्त्वपूर्ण राजनैतिक पार्टियों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, जम्मू कश्मीर नेशनल कान्फ़्रेंस, जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और जम्मू एंड कश्मीर नेशनल पैन्थर्स पार्टी हैं। जम्मू के कुछ हिन्दू और स्थानीय भाजपा शाखा जम्मू को वर्तमान कश्मीर राज्य से विलग कर एक अलग राज्य बनाकर भारतीय संघ में विलय कर देने की मांग करते रहे हैं। इसका कारण है कि सभी नीतियां कश्मीर-केन्द्रित होने के कारण जम्मू क्षेत्र की अनदेखी होती जा रही है। दर्शनीय स्थल जम्मू अपनी प्राकृतिक सुंदरता वाले स्थानों सहित प्राचीन मन्दिरों, हिन्दू तीर्थों, मुबारक मंडी महल, अमर महल जो अब संग्रहालय बन गया है, बाग-बगीचों और किलों के लिये प्रसिद्ध है। यहां दो बड़े एवं प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ हैं: अमरनाथ गुफा (ये असल में कश्मीर घाटी में स्थित है) और वैष्णो देवी गुफा, जहां प्रतिवर्ष लाखों यात्री आते हैं। दोनों के लिये ही मुख्य पड़ाव जम्मू बन जाता है। वैष्णो देवी के बहुत से यात्री साथ में जम्मू घूमने की योजना बना कर आते हैं। इनके अलावा जम्मू की नैसर्गिक सुंदरता के कारण ये उत्तर भारत में एड्वेन्चर टूरिज़्म के लिये भी चहेता स्थान रहा है।http://www.bhaderwah.com/ Bhaderwah: Welcome to the Heaven of Earth!!! 14 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190403061226/http://www.bhaderwah.com/ 3 अप्रैल 2019 live जम्मू के ऐतिहासिक स्मारकों में प्राचीन हिन्दू वास्तुकला दिखती है। पुरमंडल पुरमंडल, जिसे छोटा काशी भी कह दिया जाता है, जम्मू शहर से लगभग 35 कि.मी दूर स्थित है। यह एक प्राचीन तीर्थ स्थान है जहां शिव और अन्य देवी देवताओं के ढेरों मन्दिर हैं। शिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिनों का मेला लगता है और शहर की रौनक एवं भीड़ देखते ही बनती है। वैष्णो देवी गुफा मुख्य लेख : वैष्णो देवी right|thumb|250px|प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ वैष्णो देवी प्रतिवर्ष दसियों लाख यात्रियों को आकर्षित करता है। जम्मू के निकट ही कटरा है, जहां से वैष्णो देवी की पैदल चढ़ाई आरंभ होती है। यह गुफा त्रिकुटा पर्वत पर १७०० मी. की ऊंचाई पर स्थित है, जहां मां वैष्णो देवी की पवित्र गुफा स्थित है। जम्मू शहर से कटरा की दूरी मात्र ३० कि.मी है और वहां से गुफा की चढ़ाइ दूरी १३ कि.मी है। ये गुफा 30 मी. लम्बी और मात्र 1.5 मीटर ऊंची है। बंद गुफा के अंत में माता के स्वरूप की प्रतीक तीन पिण्डियाँ रखी हैं जो क्रमशः महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवी की प्रतीक हैं। ये तीनों देवियां ही मिल कर वैष्णो देवी के रूप में भैरों नामक पापी के दमन हेतु अवतरित हुई थीं। तीर्थ यात्री नीचे कटरा से ही पैदल ही टोलियों में १३ कि.मी लम्बी यात्रा करते हैं और साथ साथ माता के जयकारे घोष लगाते हैं। बीच रास्ते में अर्धकुवांरी (गुफा), हाथी मत्था और सांझी छत मध्यांतर पड़ते हैं और अंत में जाकर मुख्य गुफा आती है जहां प्रवेश से पूर्व यात्री शीतल जल में स्नान करते हैं और संकरे मुंह वाली गुफा में प्रवेश करते हैं। गुफा में नीचे शीतल जल धारा बहती है जिसे चरणगंगा कहा जाता है। कहते हैं कि माता भैरों से छिपने हेतु इस गुफा में आयीं थीं और भैरों के आने पर उसका संहार कर दिया था। भैरों ने मरते हुए मांता से क्षमा मांगी और उनकी शरण में आ गया, तो मां ने उसे क्षमा कर दिया किंतु त्रिशूल से कटा उसका सिर एक अन्य ऊंची पहाड़ी के ऊपर जा गिरा और धड़ यहीं गुफा के मुख पर गिर गया जो अब पत्थर बन गया है। उसी पर चढ़ कर गुफा में प्रवेश करते हैं। http://www.maavaishnodevi.net.in/attractions-around-vaishno-devi/bhairon-mandir.htm भैरों मन्दिर, जम्मू ३० अगस्त २०१३ http://www.maavaishnodevi.net.in/ https://web.archive.org/web/20130806143319/http://www.maavaishnodevi.net.in/attractions-around-vaishno-devi/bhairon-mandir.htm 6 अगस्त 2013 dead भैरों मंदिर वैष्णों देवी गुफा से कुछ और ऊपर एक अन्य पहाड़ी के ऊपर भैरों का सिर जाकर गिरा था। माता की शरण में आ जाने से सरल-हृदया माता ने उसे क्षमा कर दिया और कहा कि मेरी गुफा की यात्रा तभी पूरी होगी जब यात्री उसके बाद भैरों मंदिर भी जायेंगे। अधिकांश यात्री माता की गुफा के दर्शन के बाद ही वहीं से सीधे ऊपर भैरों मंदिर में दर्शन कर सीधे नीचे उतरते हैं और यात्रा पूर्ण करते हैं। नंदिनी वन्य जीवन अभयारण्य नंदिनी वन्य जीवन अभयारण्य तीतर एवं अन्य पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिये जाना जाता है, जहां घने जंगलों को घेरकर वन्य जीवन प्रजातियों को संरक्षण दिया गया है। यह अपनी तीतरों व अन्य समान पक्षी प्रजातियों के लिये प्रसिद्ध है जिनमें से कुछ विशेष हैं: मैना, भारतीय मोर, ब्लू रॉक कबूतर, रेड जंगलफ़ो, चीयर ईज़ेंट और चकोर। अभयारण्य लगभग ३४ कि.मी2 में फैला है और यहाम पशुओं की भी ढेरों प्रजातियां हैं। इन प्रजातियों में से जंगलि जानवरों में तेंदुआ, जंगली सूअर, र्हेसस बंदर, भराल और काला लंगूर भी आते हैं। मानसर सरोवर मुख्य लेख : मानसर सरोवर जम्मू से ६२ कि.मी दूर स्थित मानसर झील एक सुंदर सरोवर है जिसको जंगलों से ढंके पहाड़ घेरे हुए हैं। यह झील लगभग १ मील लम्बी और आधा मील चौड़ी है। 32 41 46 N 75 08 49 E जम्मू से निकटस्थ स्थित शहर से बाहर के भ्रमण के लिये एक लोकप्रिय स्थान है। इस स्थान की हिन्दू धर्म में मान्यता भी है और इसकी पवित्रता और कथाएं मानसरोवर झील से जुड़ी हुई हैं। मानसर झील के पूर्वी तट पर एक शेषनाग को समर्पित मन्दिर है, यह वो नाग है जो भगवान विष्णु के लिये शेष शय्या बनाता है और इसके कई सिर कहलाते हैं। इस स्थान पर एक बड़ा शिलाखण्ड है जिसके ऊपर कई लोहे की जंजीरें बंधी हुई हैं। ये संभवतः शेषनाग के स्वागत में प्रतीक्षारत छोटे सांपों के प्रतीक हैं। नवविवाहित युगल को इस झील की तीन परिक्रमा करना शुभ और लाभदायक माना जाता है। इसी परिसर में दो अन्य प्राचीन मन्दिर भी हैं जो उमापति महादेव और नृसिंह भगवान को समर्पित हैं और कुछ दूरी पर एक देवी दुर्गा का मन्दिर भी है जहां बहुत से दर्शनार्थी शृद्धालु आते हैं। त्योहारों के अवसर पर लोग झील में डुबकी भी लगाते हैं। कई हिन्दू परिवार यहां अपने लड़कों का मुंडन संस्कार भी करवाने आते हैं। मानसर झील में र्ज्य पर्यटन विभाग द्वारा नौकायन की सुविधा भी उपलब्ध है। मानसर झील एक अन्य सड़क से भि जुड़ती है, जो पठानकोट को सीधे उधमपुर से जोड़ती है। उधमपुर राष्ट्रीय राजमार्क १अ पर बसा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण शहर है। मानसर या सांबा से उधमपुर का एक छोटा मार्ग भी है जो जम्मू शहर के बाहर से निकल जाता है और मानसर झील से निकलता है। एक अन्य छोटा सरोवर भी मानसर झील से जुड़ा है, सुरिन्सर सरोवर। यह जम्मू शहर से २४4 कि.मी दूर उसी बायपास मार्ग पर स्थित है। बाहू का किला मुख्य लेख : बाहू का किला जम्मू के त्योहार लोहड़ी thumb|100px|right|लोहड़ी जलाते हुए यह त्योहार शीत ऋतु की परिणति को दर्शाता हैhttps://books.google.co.in/books?id=Z4huAAAAMAAJ&dq=Lohri+Jammu&focus=searchwithinvolume&q=Lohri+ Jammu and Kashmir Dhar Somnath 1999 National Book Trust, India 978-81-237-2533-8 en और मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में, नवविवाहित दंपतियों और नवजात शिशुओं के माता-पिता से उपहार मांगने के लिए युवा लड़कों को घूमने जाने की प्रथा है। यह अग्नि पूजा और पितृ पूजा का प्रतीक है।https://books.google.co.in/books?id=MQTgAAAAMAAJ&q=%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80+%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF+%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE&dq=%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80+%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF+%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjpu9i3oqfuAhXs6nMBHclgCi0Q6AEwAXoECAAQAg Uttara Bhārata ke loka parva: eka vaijñānika viśleshaṇa Kapūra Navaratna 1999 Uttara Kshetra Sāṃskr̥tika Kendra hi दक्षिण भारत में भी इसी दिन भोगी पोंगल उत्सव पर अग्नि प्रजवलित कर इन्द्र पूजा की जाती है।https://books.google.co.in/books?id=dpReDwAAQBAJ&pg=PT104&dq=%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80+%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2+%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwiMpKnYpKfuAhXMWisKHTtZB4YQ6AEwAHoECAIQAg#v=onepage&q=%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%20%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF&f=false Aadidev Aarya Devata Jain Sandhya 2018-01-01 Prabhat Prakashan 978-93-5266-873-1 hi जम्मू के डोगरा परिवारों में लोहड़ी विभिन्न एवं विशेष परंपराओं से जुड़ी हुई है, जैसे कि छज्जा बनाना, हिरण नृत्य, डंडारास नृत्य और लोहड़ी के हार तैयार करना।https://books.google.co.in/books?id=ToONShWeEB0C&q=Lohri+Dogras&pg=PA53&redir_esc=y#v=snippet&q=Lohri&f=false Dogra Legends of Art & Culture Jeratha Aśoka 1998 Indus Publishing 978-81-7387-082-8 en छोटे बच्चे मोर की प्रतिकृति तैयार करते हैं जिसे 'छज्जा' कहा जाता है।https://books.google.co.in/books?id=ToONShWeEB0C&q=Lohri+Dogras&pg=PA53&redir_esc=y#v=snippet&q=Chhaja&f=false Dogra Legends of Art & Culture Jeratha Aśoka 1998 Indus Publishing 978-81-7387-082-8 en वे इस छज्जे को ले जाते हैं और फिर एक घर से दूसरे घर में लोहड़ी मनाते हुए जाते हैं। लोहड़ी के अवसर पर इस छज्जे का उपयोग करके एक विशेष नृत्य किया जाता है। जुलूस में सड़क पर रंगीन कागज और फूलों के नृत्य के साथ विस्तृत रूप से सजाए गए अपने छज्जों के साथ लड़कों को देखने के लिए यह एक आकर्षक चित्र बनाता है। जम्मू का पूरा वातावरण मादकता के साथ जीवंत हो जाता है। इसके अतिरिक्त, नाचने वाले लड़कों रासलीला की तरह एक ढोल की ताल पर डंडों के साथ नृत्य करते है । इसे 'डंडारास ' के नाम से जाना जाता है।https://books.google.co.in/books?id=mZc9AAAAMAAJ&dq=Lohri+dogras&focus=searchwithinvolume&q=Lohri Cultural Heritage of the Dogras Pathik Jyoteeshwar Sharma Diwan Chand 1980 Light & Life Publishers enhttps://books.google.co.in/books?id=A7QBAAAAMAAJ&dq=baisakhi+dogras&focus=searchwithinvolume&q=Dandaras Jammu and Kashmir: A Tourist Guide Drieberg Trevor 1978 Vikas Publishing House 978-0-7069-0575-5 en जम्मू में और उसके आसपास, विशेष 'हिरण नृत्य ' किया जाता है। नर्तक खुद को हिरण के रूप में प्रच्छन्न करते हैं और हिरणा गीतों की धुन पर नृत्य करते हैं। वे उन चुनिंदा घरों में जाते हैं जिनमें शुभ समारोह होते हैं और खाने के लिए तैयार होते हैं। लोहड़ी के दिन बच्चे मूंगफली, सूखे मेवे और नारियल से बने विशेष हार पहनते हैं। तिल, चावल और मूंगफली का उपयोग करके विशेष खाने योग्य तैयार किया जाता है जिसे तिलचौली के रूप में जाना जाता है। त्यौहार के दौरान ऊंटों पर सिंधी लोक परंपरा के दो प्रेमियों, सस्सी-पुन्नू का स्थान लिया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=mZc9AAAAMAAJ&dq=Lohri+dogras&focus=searchwithinvolume&q=Punnu Cultural Heritage of the Dogras Pathik Jyoteeshwar Sharma Diwan Chand 1980 Light & Life Publishers en अगले दिन, पूरा क्षेत्र मकर संक्रांति पर एक उत्सव का रूप धारण करता है। जम्मू में लगभग हर घर और मंदिर में हवन यज्ञ किए जाते हैं और नदियों पर विशेष स्नान किया जाता है। उत्तरैन (उत्तरायण) या माघी संगरांद (मकर संक्रान्ति) जम्मू में यह पर्व 'उत्तरैन' (उत्तरायण)और 'माघी संगरांद' के नाम से विख्यात है।https://books.google.co.in/books?id=k7RjAAAAMAAJ&q=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A8&dq=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A8&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwi-n5nDpqDuAhUPxzgGHQNcCVQQ6AEwAHoECAMQAg Ḍogarī-Hindī-śabdakośa 2000 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara eṇḍa Laiṅgvejiza hi https://books.google.co.in/books?id=SAASAQAAIAAJ&q=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A8&dq=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A8&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwi-n5nDpqDuAhUPxzgGHQNcCVQQ6AEwAnoECAAQAg (Rajata jayantī abhinandana grantha). Śāstrī Rāmanātha Mohana Madana Langeh Baldev Singh 1970 Ḍogarī Saṃsthā hiकुछ लोग इसे 'उत्रैण', 'अत्रैण' अथवा 'अत्रणी'https://books.google.co.in/books?id=ps61AAAAIAAJ&dq=%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BE+%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%80 Ḍuggara dā sāṃskr̥taka itihāsa 1985 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara, eṇḍa Laiṅgvejiza hi के नाम से भी जानते है। इससे एक दिन पूर्व लोहड़ी का पर्व भी मनाया जाता है, जो कि पौष मास के अन्त का प्रतीक है।https://books.google.co.in/books?id=kbNjAAAAMAAJ&q=%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A3&dq=%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%A3&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjb1ZamqaDuAhWkW3wKHbjhCycQ6AEwAHoECAAQAg Ḍogarī 2003 Bhāratīya Bhāshā Saṃsthāna, Mānava Saṃsādhana Vikāsa Mantrālaya, Mādhyamika aura Uccatara Śikshā Vibhāga, Bhārata Sarakāra evaṃ Ḍogarī Saṃsthā hi मकर संक्रान्ति के दिन माघ मास का आरंभ माना जाता है, इसलिए इसको 'माघी संगरांद' भी कहा जाता है। डोगरा घरानों में इस दिन माँह की दाल की खिचड़ी का मन्सना (दान) किया जाता है। इसके उपरांत माँह की दाल की खिचड़ी को खाया जाता है। इसलिए इसको 'खिचड़ी वाला पर्व ' भी कहा जाता है।https://books.google.co.in/books?id=ps61AAAAIAAJ&dq=%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%BE+%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80 Ḍuggara dā sāṃskr̥taka itihāsa 1985 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara, eṇḍa Laiṅgvejiza hi जम्मू में इस दिन 'बावा अम्बो' जी का भी जन्मदिवस मनाया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=XLv-ch3DeNQC&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwj7q5zSt6DuAhXCbX0KHaXfCd4Q6AEwAnoECAIQAg University Review: Journal of the University of Jammu 1996 The University hi उधमपुर की देविका नदी के तट पर, हीरानगर के धगवाल में और जम्मू के अन्य पवित्र स्थलों पर जैसे कि पुरमण्डल और उत्तरबैह्नी पर इस दिन मेले लगते है।https://books.google.co.in/books?id=L14JAQAAIAAJ&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+ Duggara ca Devika Nadi da samskrtaka mahatava : On the importance and significance of the Devika River, Jammu region, on the sociocultural life of the people Śāstrī Bī Ke 1980 Ajaya Prakasana hi https://books.google.co.in/books?id=vgo9AAAAMAAJ&q=%E0%A4%A7%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0&dq=%E0%A4%A7%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjB3ZjJvaDuAhWJYisKHaFeBOEQ6AEwAHoECAAQAg Ḍuggara kī saṃskr̥ti Nirmohī Śiva 1988 Narendra Pabliśiṅga Hāusa hiभद्रवाह के वासुकी मन्दिर की प्रतिमा को आज के दिन घृत से ढका जाता है।https://books.google.co.in/books?id=vgo9AAAAMAAJ&q=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwi9pfq2raDuAhXE4HMBHZNcCJEQ6AEwAHoECAUQAg Ḍuggara kī saṃskr̥ti Nirmohī Śiva 1988 Narendra Pabliśiṅga Hāusa hihttps://books.google.co.in/books?id=9mY4AAAAMAAJ&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%98+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+ Bhārata meṃ Nāgapūjā aura paramparā Jasta Hariram 1982 Sanmārga Prakāśana hi भुग्गा (संकष्टी चतुर्थी) यह त्योहार हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=ps61AAAAIAAJ&dq=%E1%B8%8Cuggara&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE+ Ḍuggara dā sāṃskr̥taka itihāsa 1985 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara, eṇḍa Laiṅgvejiza hi यह पर्व भगवान गणेश की पूजा के लिए मनाया जाता है । इसे संकष्टी चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है। डोगरा महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत करके रात्रि में चन्द्रमा को अर्घ्य देती हैं। नैवेद्य में लड्डू और भुग्गा (तिल-गुड़ का मिश्रण) बनाया जाता है। भुग्गा, इक्षु (गन्ने) और मूली का दान किया जाता है ।https://books.google.co.in/books?id=vgo9AAAAMAAJ&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE+ Ḍuggara kī saṃskr̥ti Nirmohī Śiva 1988 Narendra Pabliśiṅga Hāusa hi इन्हें रात्रि में खाकर व्रत पूरा किया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=ps61AAAAIAAJ&dq=%E1%B8%8Cuggara&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE+ Ḍuggara dā sāṃskr̥taka itihāsa 1985 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara, eṇḍa Laiṅgvejiza hi पुरमंडल मेला (फ़रवरी-मार्च) पुरमंडल जम्मू शहर से ३९ कि.मी दूर है। शिवरात्रि के अवसार पर इस कस्बे में शोभा देखते ही बनती है।पुरमंडल में दो दिवसीय चैत्र-चौदश मेला आरंभ|जागरण। १० अप्रैल २०१३। अभिगमन तिथि: २८ अगस्त २०१३ लोग इस अवसर पर यहां भगवान शिव का मां पार्वती से विवाह समारोह मनाते हैंhttp://hindi.yahoo.com/%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%B5-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B5-%E0%A4%B9-%E0%A4%A8-%E0%A4%AE-183334432.html पुरमंडल व उतरवाहिनी में उमड़े श्रद्धालु १२ अप्रैल २०१३ जागरण २८ अगस्त २०१३जून 2020 InternetArchiveBot। जम्मू के लोग भी इस अवसर पर शहर से निकल कर आते हैं और पीर-खोह गुफा मंदिर, रणबीरेश्वर मंदिर और पंजभक्तर मन्दिर जाते हैं। असल में यदि कोई शिवरात्रि के अवसर पर जम्मू आये तो उसे हर जगह त्योहार का माहौल ही दिखाई देगा। नवरात्रि (मार्च-अप्रैल एवं सितंबर-अक्टूबर) हालांकि प्रसिद्ध तीर्थ माता वैष्णों देवी के दरबार की यात्रा वर्ष भर चलती रहती है, किन्तु इस यात्रा का नवरात्रि में विशेष महत्त्व होता है। क्षेत्र की संस्कृति, विरासत और परंपराओं को उजागर करने एवं पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों को वार्षिक आयोजन के रूप में घोषित किया हुआ है। इस समय वर्ष भर की यात्रियों का सबसे बडआ प्रतिशत वैष्णो देवी यात्रा के लिये आता है। इसके अलावा मार्च-अप्रैल में आने वाले चैत्रीय नवरात्रों में भि भक्तों की बड़ी मात्रा आती है। बाहु मेला (मार्च-अप्रैल एवं सितंबर-अक्टूबर) वर्ष में दो बार बाहु के किले में स्थित काली माता मंदिर में बड़े मेले का आयोजन होता है। चैत्रे चौदस (मार्च-अप्रैल) चैत्रे चौदश उत्तर बहनी और पुरमंडल में मनाया जाता है जो जम्मू शहर से क्रमशः २५ कि.मी और २८ कि.मी दूर स्थित हैं। उत्तर बहनी का नाम वहां बहने वाली देविका नदी से पड़ा हैपुरमंडल व उतरवाहिनी में उमड़े श्रद्धालु|जागरण। १२ अप्रैल २०१३। अभिगमन तिथि: २८ अगस्त २०१३, क्योंकि वह यहां उत्तर-वाहिनी (उत्तर दिशा की ओर बहने वाली) होती है। उत्तर-वाहिनी से बिगड़ कर अपभ्रंश शब्द उत्तर-बहनी हो गया है। बसोआ (विषुव) या बैसाखी (वैशाख संक्रान्ति) बैसाखी नाम हिन्दू पञ्चाङ्ग के माह वैशाख से लिया हुआ है। यह वैशाख मास की संक्रान्ति को मनाया जाता है और इसे मेष संक्रान्ति भी कहा जाता है।https://books.google.co.in/books?id=U8yaDwAAQBAJ&pg=PT34&dq=Baisakhi+Mesha+Sankranti&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjUge-1j6XuAhV78HMBHSr_BxYQ6AEwAHoECAEQAg#v=onepage&q=Baisakhi%20Mesha%20Sankranti&f=false Kumbha: Puratan Aur Nutan Ka Mela Misra Nityananda 2019-06-18 Bloomsbury Publishing 978-93-88630-68-9 en इस पर्व को 'बसोआ'https://books.google.co.in/books?id=k7RjAAAAMAAJ&q=%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%86+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&dq=%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%86+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwj3l8qOj6XuAhXj63MBHVdoANcQ6AEwAHoECAAQAg Ḍogarī-Hindī-śabdakośa 2000 Je. eṇḍa Ke. Akaiḍamī ôpha Ārṭa, Kalcara eṇḍa Laiṅgvejiza hi (विषुव) के रूप में भी मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष मेष संक्रान्ति के अवसर पर देश भर में यह त्योहार अलग अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे बोहाग-बिहू , विशु आदि। बैसाखी यहां के एक प्रमुख त्योहार में आता है। इस दिन डोगरा लोग सुबह जल्दी उठते हैं और नदियों, नहरों और तालाबों पर पवित्र स्नान करते है। डोगरा घरों में इस दिन पूजा करके फसल का कुछ भाग देवताओं को चढ़ाया जाता है। इसी दिन नए फलों का आनंद लिया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=ToONShWeEB0C&pg=PA52&dq=Baisakhi+Jammu&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjT8bbzgKXuAhXRfH0KHWJEBZIQ6AEwB3oECAcQAg#v=onepage&q=Baisakhi%20&f=false Dogra Legends of Art & Culture Jeratha Aśoka 1998 Indus Publishing 978-81-7387-082-8 en बैसाखी के दिवस तवी नदी में एक पवित्र स्नान जम्मू में आमतौर पर किया जाता है। बैसाखी उधमपुर में देविका नदी के तट पर मनाई जाती है और यहाँ तीन दिनों तक लोक गीतों का आनंद लिया जाता है। शुद्ध-महादेेव मन्दिर में यह त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है, जहाँ लोक गायक आते हैं और लोकगीतों की एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। यहाँ विक्रेता आम तौर पर अपनी दुकानों और खाने की दुकानों को स्थापित करते हैं।https://books.google.co.in/books?id=ToONShWeEB0C&pg=PA52&dq=Baisakhi+Jammu&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjT8bbzgKXuAhXRfH0KHWJEBZIQ6AEwB3oECAcQAg#v=onepage&q=Baisakhi%20&f=false Dogra Legends of Art & Culture Jeratha Aśoka 1998 Indus Publishing 978-81-7387-082-8 en बहुत से लोग नव-वर्ष आगमन उत्सव को देखने प्रसिद्ध नागबनी मंदिर भी जाते हैं।https://books.google.co.in/books?id=uEtuAAAAMAAJ&dq=Baisakhi+Jammu&focus=searchwithinvolume&q=Nagbani Antiquities, History, Culture, and Shrines of Jammu Sharma Shiv Chander 1997 Vinod Publishers & Distributors 978-81-85599-46-5 en यह त्योहार शस्योत्सव यानि फ़सल काटने के त्योहार के रूप में मनाया जाता है और विवाह आदि के लिये इसका विशेष महत्त्व माना जाता है। बैसाखी के समारोहों में डोगरी भांगड़ाhttps://books.google.co.in/books?id=c4E6AAAAIAAJ&q=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&dq=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwikkIz8oKXuAhXkxzgGHfvBAEIQ6AEwB3oECAkQAg Śīrāzā Hindī 1988 hi भी किया जाता है, जो कि क्रिया, वेशभूषा और गीतों के मामले में पंजाबी भांगड़े से भिन्न होता है।https://books.google.co.in/books?id=SPLZAAAAMAAJ&q=dogri+bhangra&dq=dogri+bhangra&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwiZ-qekoaXuAhUIzzgGHUGvCLgQ6AEwAHoECAMQAg Folk Music of the Himalayas Ghosh Mandira 2004 Shubhi Publications 978-81-8290-016-5 en इस अवसर पर कई स्थानों पर मेले भी लगते हैं जैसे कठुआ में इरवन को बैसाखी मेले के लिए जाना जाता है, जिसमें 1961 की जनगणना के अनुसार 10,000 लोग शामिल थे।https://books.google.co.in/books?id=E7vUAAAAMAAJ&q=Baisakhi+Jammu&dq=Baisakhi+Jammu&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjT8bbzgKXuAhXRfH0KHWJEBZIQ6AEwAXoECAIQAg District Census Handbook, Jammu & Kashmir: Kathua Kashmir India Superintendent of Census Operations, Jammu and 1966 en सिंघ संक्रांत (सिंह संक्रान्ति) सिंघ संक्रांत (सिंह संक्रान्ति) हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार भाद्रपद मास की संक्रान्ति को मनाया जाता है। यह त्योहार जम्मू संभाग के रामबन जिले में विशेष महत्व रखता है।https://books.google.co.in/books?id=ZZh3Zkoqtc4C&q=Singh+Sankranti+Ramban&pg=PA9&redir_esc=y#v=snippet&q=Singh%20Sankranti%20Ramban&f=false Systematic Geography of Jammu and Kashmir Qazi S. A. 2005 APH Publishing 978-81-7648-786-3 en श्रद्धालु इस दिन चंद्रभागा नदी पर जाते हैं और पुष्प चढ़ाते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार इस त्योहार की उत्पत्ति पाण्डवों से मानी जाती है।https://books.google.co.in/books?id=-0ogAAAAMAAJ&redir_esc=y Jammu, Shrines and Pilgrimages Ganhar J. N. 1975 Ganhar Publications en झिड़ी मेला (अक्टूबर-नवंबर) यह त्योहार एक स्थानीय कृषक बाबा जीतु के सम्मान में मनाया जाता है, जिसने स्थानीय ज़मींदार के सामने अपनी मेहनत की उपजी फ़सल को बांटने की गलत मांग के सामने झुकने से मर जाना बेहतर समझा। उसने अपने आप को झीरी गांव में मारा था, जो जम्मू शहर से लगभग १४ कि.मी दूर है। यहां बाबा और उनके भक्तों की मान्यता की कई किंवदंतियां प्रचलित हैं, जिनको मानकर उत्तर भारत से बहुत से लोग यहां एकत्रित होते हैं। जम्मू राजाओं की सूची राय सूरज देव ८५०-९२० राय भोज देव ९२०-९८७ राय अवतार देव ९८७-१०३० राय जसदेव १०३०-१०६१ राय संग्राम देव १०६१-१०९५ राय जसास्कर १०९५-११६५ राय ब्रज देव ११६५-१२१६ राय नरसिंह देव १२१६-१२५८ राय अर्जुन देव १२५८-१३१३ राय जोध देव १३१३-१३६१ राय मल देव १३६१-१४०० राय हमीर देव (भीम देव) १४००-१४२३ राय अजायब देव राय बैरम देव राय खोखर देव (देहान्त १५२८) राय कपूर देव १५३०-१५७० राय समील देव १५७०-१५९४ राय संग्राम, जम्मू राजा १५९४-१६२४ राजा भूप देव १६२४-१६५० राजा हरि देव १६५०-१६८६ राजा गुजै देव १६८६-१७०३ राजा ध्रुव देव १७०३-१७२५ राजा रंजीत देव १७२५-१७८२ राजा ब्रजराज देव १७८२-१७८७ राजा सम्पूर्ण सिंह १७८७-१७९७ राजा जीत सिंह १७९७-१८१६ जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा महाराजा गुलाब सिंह १८२२-१८५६ महाराजा रणबीर सिंह १८५६-१८८५ महाराजा प्रताप सिंह १८८५-१९२५ महाराजा हरि सिंह १९२५-१९४८ कर्ण सिंह (जन्म १९३१) भारत के राजनयिक आवागमन thumb|150px|right|राष्ट्रीय राजमार्ग १अ सड़क मार्ग जम्मू से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग १अ जम्मू शहर और क्षेत्र को कश्मीर घाटी से जोड़ता है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग १ब इसे पुंछ शहर से जोड़ता है। जम्मू कठुआ से सड़क मार्ग द्वारा मात्र 80 km mi की दूरी पर है और उधमपुर से 68 km mi की दूरी पर है। यहां से हिन्दू तीर्थ वैष्णो देवी का निकटवर्ती पड़ाव कटरा 49 km mi की सड़क दूरी पर है। स्थानीय परिवहन शहर में मिनी बस द्वारा नगर बस सेवा उपलब्ध है जिसके निश्चित मार्ग शहर भर में परिवहन सुलभ कराते हैं। इनके अलावा मैटाडोर भी उपलब्ध हैं। बसों के सिवाय ऑटोरिक्शा और स्थानीय टैक्सी सेवा भी मिलती है। छोटी दूरी तय करने हेतु साइकिल रिक्शा भी सदा उपलब्ध रहती हैं। वायु मार्ग जम्मू विमानक्षेत्र जम्मू शहर से मात्र 7 km mi 0 की दूरी पर सतबाड़ी नामक क्षेत्र में बना है। यहां से श्रीनगर, लेह, दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, बंगलुरु आदि कई बड़े शहरों की सीधी वायु सेवा उपलब्ध है। रेल मार्ग जम्मूक्षेत्र में कुल ११ रेलवे स्टेशन हैं, जिनमें प्रमुख स्टेशन जम्मू तवी (स्टेशनकूट JAT) है। यह स्टेशन भारत के प्रमुख नगरों से भली-भांति जुड़ा हुआ है। सियालकोट को जाने वाली पुरानी रेलवे लाइन अब भारत के विभाजन के समय से बंद हो चुकी है और तभी से १९७१ तक जम्मू में कोई रेल-सेवा नहीं रही थी। १९७५ में भारतीय रेल ने जम्मू-पठानकोट रेलवे लाइन का कार्य पूर्ण किया और जम्मू एक बार फिर से देश से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा। जम्मू-बारामूला रेलमार्ग केआरंभ हो जाने से जम्मू तवी रेलवे स्टेशन का महत्त्व दोहरा हो गया है। कश्मीर घाटी को जाने वाली सभी रेलगाड़ियां इस स्टेशन से होकर ही जाती हैं। कश्मीर घाटी रेलवे परियोजन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका ट्रैक उधमपुर तक पहुंच चुका है। जम्मू तवी की कई गाड़ियां उधमपुर तक विस्तृत की जा चुकी है और आगे कटरा तक विस्तार की जायेगी। २०१३ में उधमपुर-कटरा रेलवे लाइन के कार्य पूरे हो जाने से जम्मू लाइन कटरा तक विस्तृत हो जायेगी। जालंधर- पठानकोट रेल लाइन का दोहरीकरण हो चुका है और का विद्युतिकरण कार्य २०१३ तक पूरा होना नियोजित है। एक नई पीर-पंजाल रेल सुरंग (जिसे बनिहाल काज़ीगुंड  सुरंग भी कहते हैं) तैयार हो चुकी है और प्रचालन में भी दी जा चुकी है। इसके द्वारा बनिहाल की बिचलेरी घाटी को कश्मीर घाटी के काज़ीगुंड क्षेत्र से जोड़ गया है। सुरंग की खुदाई का कार्य २०११ तक पूरा हो चुका था और इसमें रेल लाइन स्थापन अगले वर्ष पूरा हो गया। उसी वर्ष अर्थात २०१२ के अंत तक परीक्षण रेल भी आरंभ हो गयी थी एवं जून २०१३ के अंत तक यहाँ यात्री गाड़ियाँ भी चलने लगीं। http://www.mapsofindia.com/maps/jammuandkashmir/jammuandkashmirrails.htm २९ अगस्त २०१३ बनिहाल - काज़ीगुंड रेल लिंक मैप्स ऑफ़ इण्डिया https://web.archive.org/web/20130828111849/http://www.mapsofindia.com/maps/jammuandkashmir/jammuandkashmirrails.htm 28 अगस्त 2013 live इस रेल कड़ी के साथ पीर-पंजाल रेल सुरंग का उद्घाटन २३ जून २०१३ को हुआ था। इस कड़ी के द्वारा बनिहाल और काज़ीगुंड के बीच की दूरी १७ कि.मी कम हो गई है। यह सुरंग भारत में सबसे लंबी और एशिया की तीसरी लंबी रेलवे सुरंग है। इस सुरंग का निर्माण समुद्र सतह से ५७७० फ़ीट (१७६० मी.) की औसत ऊंचाई पर और वर्तमान सड़क मार्ग की सुरंग से १४४० फ़ीट (४४० मी.) नीचे हुआ है। इसका निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इरकॉन के उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के एक भाग के लिये किया है। इस रेल कड़ी के तैयार हो जाने से यातायात में काफ़ी सुविधा हो गयी है, विशेषकर सर्दियों के मौसम में जब भीषण ठंड और हिमपात के कारण जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग की सुरंग कई बार बंद करनी पड़ जाती है। २०१८ तक इस परियोजना की उधमपुर-बनिहाल कड़ी भी पूरी हो जायेगी और पूरा जम्मू-श्रीनगर मार्ग रेल-मार्ग द्वारा सुलभ हो जायेगा। तब तक लोगों को बनिहाल तक सड़क द्वारा जाना पड़ता है और वहां से श्रीनगर की रेल मिलती है।  जम्मू-बारामूला रेलमार्ग जम्मू से जाने वाली रेलगाड़ियां ट्रेन संख्या ट्रेन नामभारतीय रेल के आधिकारिक जालस्थल https://web.archive.org/web/20130922103117/http://www.indianrail.gov.in/7days_avlpress_jat.html 22 सितंबर 2013 पर जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से जाने वाली रेलगाड़ियों की सूची। अभिगमन तिथि: २९ अगस्त २०१३। भारतीय रेल गंतव्य ०४०३४ कुशीनगर एक्स्प्रेस प्रयाग ११०७८ झेलम एक्स्प्रेस पुणे जंक्शन ११४५० जम्मू तवी जबलपुर एक्स्प्रेस जबलपुर १२२०८ काठगोदाम गरीब रथ काठगोदाम १२२३८ बेगमपुरा एक्स्प्रेस वाराणसी जंक्शन १२२६६ दूरंतो एक्स्प्रेस दिल्ली सराय रोहिल्ला १२३३२ हिमगिरी एक्स्प्रेस हावड़ा जंक्शन १२३५६ अर्चना एक्स्प्रेस राजेंद्र नगर बिहार १२४१४ जम्मू अजमेर एक्स्प्रेस अजमेर जंक्शन १२४२६ जम्मू राजधानी एक्स्प्रेस नई दिल्ली १२४४५ उत्तर संपर्क क्रांति उधमपुर सन्दर्भ 2 श्रेणी:जम्मू और कश्मीर के शहर श्रेणी:जम्मू ज़िला श्रेणी:जम्मू ज़िले के नगर *