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411 समाचार
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नफीसा अल-बयदा

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नफीसा अल-बयदा نفيسة البيضاء अज्ञात काकेशस (संभावित) 1816 ई॰ काहिरा, मिस्र मिस्री कुलीन महिला, वास्तुकला की संरक्षक, कूटनीतिज्ञ अली बे अल-कबीरमुराद बे इस्लाम मिस्र में वास्तुकला का संरक्षण और फ्रांसीसी अभियान के दौरान कूटनीतिक भूमिका नफीसा अल-बयदा (अंग्रेज़ी: Nafisa al-Bayda; अरबी: نفيسة البيضاء; निधन: 1816 ई॰) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में मिस्र (Egypt) की एक धनाढ्य, प्रभावशाली और ऐतिहासिक महिला थीं। मूल रूप से एक विदेशी दासी (Slave) के रूप में मिस्र लाई गईं नफीसा ने अपनी कुशाग्र बुद्धि, कूटनीतिक कौशल और व्यावसायिक सूझबूझ के बल पर मिस्र के सर्वोच्च कुलीन वर्ग (Elite class) में अपना एक प्रतिष्ठित स्थान बनाया। उन्हें मुख्य रूप से काहिरा (Cairo) शहर में उनके वास्तुकला संरक्षण, परोपकारी कार्यों और मिस्र पर फ्रांसीसी आक्रमण के दौरान निभाई गई उनकी महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उन्हें प्रायः 'मामलुक की माता' (Mother of the Mamluks) कह कर भी संबोधित किया गया है।https://books.google.co.in/books?id=4ddqaCdZdZ0C&dq=Nafisa+al-Badya&pg=PA347&redir_esc=y Historical Dictionary of Women in the Middle East and North Africa Talhami Ghada 2013 Bloomsbury Publishing PLC 978-0-8108-6858-8 en प्रारंभिक जीवन और विवाह नफीसा अल-बयदा के प्रारंभिक जीवन और उनके जन्मस्थान के विषय में अधिक प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इतिहासकारों का मानना है कि उनका जन्म काकेशस (Caucasus) क्षेत्र में हुआ था और उन्हें एक श्वेत दासी के रूप में मिस्र लाया गया था। अरबी भाषा में 'अल-बयदा' का अर्थ 'श्वेत महिला' होता है, जो उनकी शारीरिक बनावट और मूल उत्पत्ति को दर्शाता है। काहिरा के शाही हरम (Harem) में प्रवेश करने के पश्चात्, उनका विवाह मिस्र के तत्कालीन शक्तिशाली शासक अली बे अल-कबीर (Ali Bey al-Kabir) के साथ संपन्न हुआ। 1773 ई॰ में अली बे के निधन के पश्चात्, उन्होंने एक अन्य प्रमुख मामलुक अमीर, मुराद बे (Murad Bey) से विवाह कर लिया।https://books.google.co.in/books?id=CoqiAgAAQBAJ&q=18th-century+seclusion+cairo+harem&redir_esc=y#v=snippet&q=18th-century%20seclusion%20cairo%20harem&f=false Unveiling the Harem: Elite Women and the Paradox of Seclusion in Eighteenth-Century Cairo Fay Mary Ann 2012-08-27 Syracuse University Press 978-0-8156-5170-3 en इन दोनों उच्च-स्तरीय वैवाहिक संबंधों ने नफीसा को मिस्र के राजनीतिक और आर्थिक केंद्र में स्थापित कर दिया, जहाँ उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपार संपत्ति और भूमि अर्जित की। संपत्ति और वास्तुकला का संरक्षण नफीसा अल-बयदा केवल एक कुलीन पत्नी ही नहीं थीं, बल्कि वे एक चतुर और स्वतंत्र निवेशक (Investor) भी थीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत धन का उपयोग काहिरा में वाणिज्यिक संपत्तियों, सार्वजनिक स्नानघरों (Hammam) और आवासीय परिसरों के निर्माण तथा रख-रखाव में किया। उनका सबसे बड़ा और ऐतिहासिक योगदान 'नफीसा अल-बयदा का सबिल-कुत्ताब' (Sabil-Kuttab of Nafisa al-Bayda) है, जिसका निर्माण 1796 ई॰ में पूरा हुआ था। यह काहिरा के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित एक भव्य स्मारक है, जिसमें राहगीरों के लिए मुफ्त पेयजल की व्यवस्था (सबिल) और गरीब बच्चों के लिए एक प्राथमिक विद्यालय (कुत्ताब) शामिल था।https://books.google.co.in/books?id=NkSOAgAAQBAJ&dq=Nafisa+al-Badya&pg=PA218&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false Gender, Property, and Law in Jewish, Christian, and Muslim Communities in the Wider Mediterranean 1300–1800: Women, Property, and Law in the Wider Mediterranean (ca. 1300-1800) Sperling Jutta Wray Shona Kelly 2009-10-16 Routledge 978-1-135-23501-7 en यह वास्तुकला महिला परोपकार और इस्लामी समाज में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। फ्रांसीसी आक्रमण और कूटनीतिक भूमिका वर्ष 1798 ई॰ में जब नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना ने मिस्र पर आक्रमण किया, तब नफीसा अल-बयदा के जीवन में एक अत्यंत जटिल दौर प्रारंभ हुआ। युद्ध में उनके पति मुराद बे को राजधानी छोड़कर भागना पड़ा, परंतु नफीसा काहिरा में ही रहीं। उन्होंने इस कठिन समय में अपने कूटनीतिक कौशल का परिचय दिया। उन्होंने फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ सीधे तौर पर बातचीत की और उनके सम्मान में कई दावतों का आयोजन किया।https://books.google.co.in/books?id=ZFRRkvmtSOIC&dq=Nafisa+al-Badya&pg=PA67&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false Cairo: City of Sand Golia Maria 2004-06-04 Reaktion Books 978-1-86189-187-7 en उनकी इस कूटनीतिक मध्यस्थता के कारण वे अपनी अधिकांश संपत्तियों और कई मामलुक महिलाओं के जीवन को फ्रांसीसी सेना के प्रकोप से बचाने में सफल रहीं। फ्रांसीसी अधिकारी उनकी राजनीतिक सूझबूझ से अत्यधिक प्रभावित थे।https://books.google.co.in/books?id=gqk6smeZp6EC&dq=Nafisa+al-Badya&pg=PA237&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false Americans in Egypt, 1770-1915: Explorers, Consuls, Travelers, Soldiers, Missionaries, Writers and Scientists Vivian Cassandra 2012-08-29 McFarland 978-0-7864-6304-6 en अंतिम वर्ष और विरासत फ्रांसीसियों के वापस लौटने और 1805 ई॰ में मुहम्मद अली पाशा (Muhammad Ali Pasha) के मिस्र की सत्ता पर काबिज होने के पश्चात्, मामलुक कुलीन वर्ग का राजनीतिक पतन शुरू हो गया। मुहम्मद अली ने नफीसा की अधिकांश संपत्तियों और आय के स्रोतों को ज़ब्त कर लिया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, नफीसा को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका अधिकांश समय अब एकांत में व्यतीत होता था। अंततः 1816 ई॰ में काहिरा में उनका निधन हो गया। अपना सर्वस्व खोने के बावजूद, मिस्र की वास्तुकला और मध्यकालीन महिला इतिहास में उनका योगदान आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज़ है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ विकिडाटा पर नफीसा अल-बयदा श्रेणी:1816 में निधन श्रेणी:मिस्र का इतिहास श्रेणी:वास्तुकला की संरक्षक श्रेणी:मामलुक श्रेणी:मुस्लिम महिलाएँ