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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

तियानताई

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thumb|सातवीं से चौदहवीं शताब्दी में युलिन गुफाओं से ली गई कमल सूत्र का एक दृश्य, जिसमें बुद्ध प्रभुतरत्न और शाक्यमुनि रत्नजड़ित स्तूप में बैठे हुए, तियानताई या तिएन-ताई (चीनी :天台; पिनयिन : मानक मंदारिन: तियानताई ) महायान बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण पूर्वी एशियाई विद्यालय है, जो छठी शताब्दी में चीन में विकसित हुआ। इसकी परंपरा नागार्जुन द्वारा स्थापित मध्यमक दर्शन से गहराई से प्रभावित थी, जिन्हें तियानताई का प्रथम संरक्षक माना जाता है। तियानताई परंपरा का केंद्रीय सिद्धांत एकायन" है, जो प्रभावशाली कमल सूत्र'' के संदेश पर आधारित है और सभी प्राणियों के अंतिम उद्धार की एकता को रेखांकित करता है। इसके चौथे संरक्षक ' झीई ' ने 538–597 ई॰ में "तियानताई दर्शन" को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया और ध्यान, तर्क तथा आचार को समन्वित कर इसे एक संपूर्ण मार्ग बना दिया। झीई के योगदान ने तियानताई को केवल एक दार्शनिक मत नहीं, बल्कि एक समृद्ध साधना परंपरा बना दिया। धर्म और दर्शन के विद्वान ब्रुक ज़िपोरीन के अनुसार, यह भारतीय बौद्ध परंपरा की सबसे प्रारंभिक चीनीकृत पुनर्रचना का प्रयास था। बौद्ध अध्ययन के विशेषज्ञ 'पॉल स्वानसन' का मानना है कि तियानताई परंपरा चीन और जापान दोनों देशों में अत्यंत प्रभावशाली और दीर्घकालीन प्रभाव रखने वाली बौद्ध परंपराओं में से एक बन गई।ज़िपोरिन ब्रोक दिसम्बर 2022 तियानताई बौद्ध धर्म। https://plato.stanford.edu/entries/buddhism-tiantai/ जालता एर्डवर्ड एन॰ एर्डवर्ड एन॰ जालता "स्टैनफोर्ड दार्शनिक विश्वकोश" "मेटाफिज़िक्स अनुसंधान प्रयोगशाला, भाषा और सूचना अध्ययन केंद्र, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय" 1095-5054 643092515 live https://web.archive.org/web/20221113204938/https://plato.stanford.edu/entries/buddhism-tiantai/ 13 नवम्बर 2022 1 दिसम्बर 2022 कमल सूत्र पर आधारित होने के कारण तियानताई को कभी-कभी "धर्म पुष्प विद्यालय" (天台法華宗) भी कहा जाता है,शि शेरी (2023). ''https://www.academia.edu/107396526/A_Study_on_the_General_History_of_Tiantai_School_in_China_Translated_by_Shi_Sherry "चीन में तियानताई विद्यालय के सामान्य इतिहास पर एक अध्ययन" : पेराडेनिया विश्वविद्यालय जिसका चीनी शीर्षक सूक्ष्म धर्म कमल पुष्प सूत्र है। सुई राजवंश (581–618) के दौरान यह विद्यालय चीनी बौद्ध धर्म दर्शन के प्रमुख केंद्रों में एक हुआ करता था। और कई सम्राटों तथा धनी संरक्षकों के समर्थन से इसकी कई भव्य मंदिर स्थापित कर गई। समय बितने के साथ इसका आकर्षण कम होता गया। लेकिन "तांग काल" में ज़ानरान जैसी महान हस्तियों ने इसे पुनर्जीवित किया। सोंग राजवंश के दौरान तियानताई विद्यालय का बार फिर पुनरुद्धार हुआ। आज भी हांगकांग एवं झेजियांग प्रांतों में इसकी उपस्थिति देखी जाती है। इसमें बौद्ध साधना, ध्यान और दर्शन का समन्वित रूप आज भी संरक्षित है। इन्हें भी देखें चीनी लोक धर्म चीनी बौद्ध धर्म संदर्भ श्रेणी: बौद्ध मठ श्रेणी: चीन