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महारथी (2008 फ़िल्म)
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महारथी शिवम नायर उत्तम गाडा ढ़िलीन मेहता परेश रावलनसीरुद्दीन शाहनेहा धूपियाओम पुरीबोमन ईरानीतारा शर्मा वेणु आरती बजाज शिबानी कश्यप y 2008 12 05 भारत हिन्दी महाराथी' सन् 2008 में प्रमोचित हिन्दी भाषा की रोमांचक भारतीय फिल्म है। इस फ़िल्म का निर्माण ढिलिन मेहता ने किया है। फिल्म का निर्देशन शिवम नायर ने किया था। इस फ़िल्म में प्रमुख अभिनय परेश रावल, नेहा धूपिया, नसीरुद्दीन शाह, बोमन ईरानी, ओम पुरी और तारा शर्मा ने किया था। फिल्म का संगीत शिबानी कश्यप ने दिया है। यह फिल्म इसी नाम के गुजराती भाषा के एक नाटक पर आधारित है। वो नाटक ब्रितानी लेखक जेम्स हैडली चेस के उपन्यास देयर इज ऑलवेज ए प्राइस टैग पर आधारित था।https://economictimes.indiatimes.com/industry/media/entertainment/maharathi-movie-review/articleshow/3797841.cms?from=mdr Maharathi: Movie Review मालानी गौरव 5 दिसम्बर 2008 द इकोनोमिक टाइम्स en महारथी: फ़िल्म समीक्षा
कथानक
फिल्म की शुरुआत एक चोर से होती है जो एटीएम मशीन में कुछ चिपकाकर लोगों का पैसा बाहर नहीं निकलने देता है और सम्बंधित व्यक्ति के चले जाने पर पैसा ले आता है। आगे की कहानी में जय सिंह आडेनवाला नामक व्यक्ति नशे में गाड़ी चलाने के कारण एक दुर्घटना का शिकार हो जाता है। इसी समय उपरोक्त चोर सुभाष शर्मा उसे मौत से बचा लेता है। सुभाष शर्मा एक टैक्सी किराये करता है और जय सिंह को इसी स्थिति में उसके घर छोड़ने का निर्णय लेता है। आडेनवाला धन्यवाद देने के लिए सुभाष को अपने घर के अन्दर बुलाता है। घर में जय सिंह अपनी पत्नी मल्लिका और वकील दोस्त एडी मर्चेंट से सुभाष शर्मा को मिलवाता है। जय सिंह की पत्नी ग्लैमर वाली लेकिन संदेहास्पद महिला है। अगले दिन आडेनवाला इस युवक सुभाष को कार चालक के रूप में नौकरी पर रख लेता है जो मल्लिका को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता। एडी मर्चेंट भी सुभाष को पसन्द नहीं करता है। सुभाष को घर से निकालने के लिए मल्लिका हरसम्भव प्रयास करती है जिसमें उसे लूट के मामले में फंसाकर घर से बाहर निकालने की भी पूरी कोशिश करती है लेकिन सुभाष अपनी तेज बुद्धि और बुद्धिमत्ता उसे स्वयं को बचा लेता है।
आडेनवाला ने सुभाष को बताया कि वह कर्ज में डूबा हुआ है और उसके लगातार शराब पीने के कारण खुश नहीं है। आडेनवाला ने सुभाष को ये भी बताया कि उसकी पत्नी मल्लिका उसे 24 करोड़ रुपये के बीमा का धन प्राप्त करने के लिए मारना चाहती है। इसी क्रम में मल्लिका ने अपने इनहेलर को एक खिड़की से बाहर फेंक दिया था जब उसे अस्थमा का दौरा पड़ा था। सुभाष ने ये सबकुछ देखा भी था।
आडेनवाला अपने कार्यालय जाता है और वापस आकर सुभाष और मल्लिका को बुलाता है। वो सुभाष को एक पत्र देता है और कहता है कि वो ये पत्र एडी मर्चेंट को दे आये। सुभाष ज्यों ही इसके लिए चलना चाहता है तो वो उसे वापस रोक लेता है और अपनी बीमा में किये एक छोटे परीवर्तन के बारे में बताता है। बीमा की वर्तमान शर्तों के अनुसार बीमा राशि का दावा केवल उसी स्थिति में किया जा सकता है जब आडेनवाला की हत्या कर दी जाती है। हालांकि यदि आडेनवाला आत्महत्या करता है तो यह बीमा राशि मल्लिका को न मिले। आडेनवाला बताता है कि वह जानता है कि मल्लिका उसकी आत्महत्या को हत्या दिखाने की कोशिश करेगी। वह यह भी बताता है कि उसने सुभाष को रहने के लिए कहा था ताकि उसकी मौत के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सके। यह कहते हुए वह स्वयं को गोली मार लेता है। मल्लिका पुलिस को बुलाने के लिए दौड़ती है, लेकिन सुभाष उसे आश्वस्त करता है कि वे मिलकर उसकी आत्महत्या को हत्या साबित कर सकते हैं।
सुभाष इस शर्त पर उसके साथ सहयोग करने की पेशकश करता है कि वे बीमा राशि को आधे में विभाजित कर देंगे। मल्लिका शुरू में हिचकिचाती है लेकिन अंततः सुभाष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है क्योंकि सुभाष पत्र का खुलासा करता है। इस खुलासे के अनुसार यदि आडेनवाला की मृत्यु को मल्लिका हत्या साबित कर देती है तो भी मर्चेंट उसे कारावास में न जाने दे। इसके बाद मर्चेंट यह पत्र बिमा कंपनी को दे देगा जिससे वो यह धनराशि मल्लिका को नहीं देंगे। इसके बाद वो आडेनवाला का मृत शरीर फ्रीजर में छिपाने का निर्णय करते हैं इससे उसे खराब होने से बचाया जा सके। किसी का ध्यान फ्रीजर पर न जाये इसके लिए वो इसके उपर बहुत सारी शराब की खाली बोतलें रख देते हैं। इसके बाद वो दोनों घर से आडेनवाला की मौत के सभी साक्ष्य मिटा देते हैं। फिर वे यह नाटक करने का फैसला करते हैं कि आडेनवाला अपने शयनकक्ष में है और किसी से मिलने के लिए बहुत बीमार है तथा फिर दोष लगाने के लिए स्वाति नामक एक नर्स को काम पर रखते हैं।
जब स्वाति फ्रीजर को बंद कर देती है तो सुभाष बहाना बनाता है कि इसकी प्रणाली के कारण इसे चालू रहना चाहिए। मल्लिका को स्वाति के घर में रखने से संदेह हो जाता है क्योंकि वह एक रात सोते हुए फ्रीजर खोलती है। इसके बाद मल्लिका स्वाति को मारने का फैसला करती है लेकिन सुभाष उसे ऐसा न करने के लिए मना लेता है। हालाँकि, मल्लिका गुप्त रूप से मर्चेंट के साथ सुभाष को बाहर निकालने और अपने लिए पैसे लेने की योजना बनाती है। सुभाष अपना चेहरा ढ़ककर मल्लिका के साथ नर्सिंग होम जाने का नाटक करता है, जहाँ चेहरा ढ़ककर वो आडेनवाला होने का नाटक कर रहा है। मल्लिका को वो आगे जाकर एक दूध के बूथ पर ले जाता है, उसे वहाँ बांधता है और कार को भी पास में ही छोड़ देता है ताकि ऐसा लगे कि गुंडों ने उसे फंसाया है व आडेनवाला का अपहरण कर लिया है। हालाँकि, मल्लिका की कुर्सी रात में गिर जाती है और उसकी रीढ़ टूटने से उसकी मृत्यु हो जाती है। वो दो दिन बाद पुलिस को मिल जाती है। एसीपी गोखले मर्चेंट को आडेनवाला के घर बुलाते हैं और उनसे लापता होने की रात के बारे में पूछताछ करते हैं। मर्चेंट गोखले को बताता है कि आडेनवाला ने वसीयत नहीं की थी और गोखले एक पुलिस अधिकारी को गार्ड रहने के लिए पीछे छोड़ देते हैं।
मर्चेंट सुभाष को बताता है कि आडेनवाला ने एक वसीयत बनाई थी और सुभाष को उसकी जान बचाने के लिए यह सब सौंपा था। इससे सुभाष मुख्य संदिग्ध बन गया और उसने खुलासा किया कि वह इसे सुबह पुलिस के पास ले जाने का इरादा रखता है। सुभाषा मौका देखकर गार्डिंग ऑफिसर को नशे में घायक कर देता है और फ्रीजर खोलता है। लेकिन इसी समय मर्चेंट अप्रत्याशित रूप से दिखाई देता है और शव को देख लेता है। सुभाष उसे सच बताता है, लेकिन दावा करता है कि मल्लिका ने पूरी योजना बनाई थी। मर्चेंट लाभ उठाने का फैसला करता है और सुभाष से एक पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास करता है। इससे बीमा की पुरी राशी मर्चेंत को मिल जायेगी क्योंकि वसीयत के अनुसार पूरा धन सुभाष को मिलना था। इसी झमेले के बीच स्वाति जाग जाती है और मर्चेंट उसे बंदूक की नोक पर ले लेता है एवं सुभाष पर हस्ताक्षर करने का दवाब बनाता है। इसी समय गोखले और पुलिस पहुंच जाते हैं। सुभाष आडेनवाला और मल्लिका की मौत के लिए मर्चेंट को झूठा दोषी ठहराता है, इसलिए मर्चेंट गुस्से में सुभाष को गोली मारने की कोशिश करता है, लेकिन गोखले पहले उसे गोली मार देता है और मार देता है।
सुभाष बीमा का उपयोग करता है और अपना आलीशान घर बनाने के लिए पैसे खर्च करेगा लेकिन स्वाति सामने आ जाती है। वो कहती है कि उसने आडेनवाला को जब मल्लिका के साथ नर्सिंग होम जाते देखा था तब वो ही जूते पहने थे जो वर्तमान में सुभाष ने पहने हैं। इस बात पर दोनों हंसते हैं और एक दूसरे के साथी बन जाते हैं।
कलाकार
परेश रावल – सुभाष शर्मा
नेहा धूपिया – मल्लिका आडेनवाला
तारा शर्मा – स्वाति
बोमन ईरानी – एडी मर्चेंट
ओम पुरी – एसीपी गोखले
नसीरुद्दीन शाह – जयसिंह आडेनवाला
निर्माण
संगीत
क्र संशीर्षकगायक लंबाई1."महाराथी शीर्षक गीत"शिबानी कश्यप4:00
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
tt1334254 महारथी
श्रेणी:भारतीय थ्रिलर फ़िल्में
श्रेणी:2008 की फ़िल्में