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अनुच्छेद 142 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 5 अनुच्छेद 143 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित
भारत के संविधान का अनुच्छेद 142 न्यायपालिका को प्रदत्त उस विलक्षण और व्यापक शक्ति का प्रतीक है, जिसके माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय न केवल विधिक विवादों का निपटारा करता है, बल्कि न्याय के वास्तविक और पूर्ण स्वरूप को सुनिश्चित करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। यह प्रावधान न्याय को केवल विधि की संकीर्ण व्याख्या तक सीमित नहीं रहने देता, बल्कि उसे परिस्थितियों के अनुरूप सार्थक, प्रभावी और न्यायोचित बनाने की संवैधानिक क्षमता प्रदान करता है।जर्नल आईजेएलएलआर 24 जुलाई 2025 The Double-Edged Sword Of Article 142: Justice Beyond Law Or Judicial Overreach https://www.ijllr.com/post/the-double-edged-sword-of-article-142-justice-beyond-law-or-judicial-overreach 17 दिसंबर 2025 आईजेएलएलआर जर्नल en19 मई 2025 The Supreme Court of India’s Use of Inherent Powerunder Article 142 of the Constitution: An Empirical Study https://www.iima.ac.in/sites/default/files/2024-05/W.P.No_.2024-05-02.pdf 17 दिसंबर 2025Article 142: The Supreme Power or Judicial Overreach? https://ddnews.gov.in/en/article-142-the-supreme-power-or-judicial-overreach/ 17 दिसंबर 2025 ddnews.gov.in
पृष्ठभूमि
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण था कि न्यायपालिका को केवल विधियों की व्याख्या तक सीमित रखा जाए या उसे ऐसे अधिकार भी दिए जाएँ, जिनसे वह न्याय के व्यापक उद्देश्य की पूर्ति कर सके। अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जहाँ प्रचलित विधियाँ अपर्याप्त सिद्ध हों या न्याय की पूर्ण प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करें। इसी विचार से प्रेरित होकर अनुच्छेद 142 का निर्माण किया गया, ताकि सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी स्थिति में हस्तक्षेप कर “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने की शक्ति प्राप्त हो।उप राष्ट्रपति धनखड़ ने न्यायपालिका के बारे में ऐसा क्या कहा, जिस पर छिड़ी बहस https://www.bbc.com/hindi/articles/cg5q11ndm9qo 18 अप्रैल 2025 बीबीसी.कॉम
यह प्रावधान भारतीय न्यायपालिका की सक्रिय और सृजनात्मक भूमिका को रेखांकित करता है, जो केवल विधिक सीमाओं के भीतर बँधी न रहकर न्याय के व्यापक आदर्शों को साकार करने का प्रयास करती है।
अनुच्छेद 142 को संविधान के अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ) और अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका) के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय को न केवल न्यायिक समीक्षा का अधिकार प्राप्त है, बल्कि वह न्याय को पूर्ण और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम भी उठा सकता है।
समय-समय पर इस अनुच्छेद का प्रयोग अनेक ऐतिहासिक मामलों में किया गया है, जहाँ न्यायालय ने विधिक सीमाओं से परे जाकर न्याय के व्यापक हित में निर्णय दिए।
मूल पाठ
(1) सर्वोच्च न्यायालय अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए ऐसे निर्णय पारित कर सकता है या ऐसा आदेश दे सकता है, जैसा वह आवश्यक समझे, और ऐसा कोई भी निर्णय या आदेश भारत के समस्त राज्य-क्षेत्र में प्रवर्तनीय होगा।
(2) संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन रहते हुए, सर्वोच्च न्यायालय को यह अधिकार होगा कि वह अपने आदेशों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, किसी व्यक्ति को अपने समक्ष उपस्थित कराने, या किसी दस्तावेज़ के उत्पादन के लिए ऐसे आदेश दे सके, जैसा वह आवश्यक समझे।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 53 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७
(1) The Supreme Court in the exercise of its jurisdiction may pass such decree or make such order as is necessary for doing complete justice in any cause or matter pending before it, and any decree so passed or order so made shall be enforceable throughout the territory of India in such manner as may be prescribed by or under any law made by Parliament and, until provision in that behalf is so made, in such manner as the President may by order prescribe.
(2) Subject to the provisions of any law made in this behalf by Parliament, the Supreme Court shall, as respects the whole of the territory of India, have all and every power to make any order for the purpose of securing the attendance of any person, the discovery or production of any documents, or the investigation or punishment of any contempt of itself.http://constitutionofindia.etal.in/article_142/ Enforcement of decrees and orders of Supreme Court and orders as to discovery, etc. 2013-10-10 भारत का संविधान 2024-04-18Enforcement of decrees and orders of Supreme Court and orders as to discovery, etc. https://www.constitutionofindia.net/articles/article-142-enforcement-of-decrees-and-orders-of-supreme-court-and-orders-as-to-discovery-etc/ संविधान सरलीकृत 2023-10-10
उपयोग
हाल के वर्षों में इस असाधारण शक्ति का प्रयोग कई महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में किया गया है, जो न्यायपालिका की सक्रिय और मानवीय भूमिका को उजागर करते हैं।
अनुच्छेद 142 के अंतर्गत “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति का एक अत्यंत चर्चित और संवेदनशील उदाहरण ए. जी. पेरारिवलन के प्रकरण में देखने को मिला। पेरारिवलन, जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में से एक थे, लंबे समय तक कारावास में रहने के पश्चात न्यायालय के समक्ष राहत की याचना लेकर पहुँचे। परिणामस्वरूप, सर्वोच्च न्यायालय ने पेरारिवलन की रिहाई का आदेश देते हुए यह स्पष्ट किया कि जब प्रशासनिक प्रक्रियाएँ अनावश्यक रूप से विलंबित हों और व्यक्ति ने लंबा समय कारावास में व्यतीत कर लिया हो, तब न्यायालय का कर्तव्य है कि वह हस्तक्षेप कर “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करे।पाण्डेय नवीन कुमार राजीव गांधी के कातिल की रिहाई, क्या है अनुच्छेद 142 जिसका सुप्रीम कोर्ट ने किया इस्तेमाल https://navbharattimes.indiatimes.com/india/article-142-of-indian-constitution-that-gave-power-to-supreme-court-and-rajiv-gandhis-killer-ag-perarivalan-released-from-jail/articleshow/91641803.cms नवभारत टाइम्स 2 मई 2023 एक महत्त्वपूर्ण और मानवीय उदाहरण शिल्पा शैलेश एवं वरुण श्रीनिवासन के प्रकरण में देखने को मिला। वर्ष 2014 में इन दोनों ने सर्वोच्च न्यायालय का द्वार खटखटाते हुए यह प्रार्थना की थी कि उनके वैवाहिक संबंध को, जो वस्तुतः पूर्णतः टूट चुका था, न्यायालय अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए समाप्त कर दे।इक़बाल अहमद सुचित्र मोहंती किन हिदायतों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इंतज़ार बिना तलाक़ की दी अनुमति https://www.bbc.com/hindi/india-65451386 बीबीसी.कॉम 2 मई 2023 इसी प्रकार तथाकथित “बुलडोजर कार्रवाई” के विरुद्ध दिशा-निर्देश जारी करते हुए न्यायालय ने विधि के शासन और नागरिक अधिकारों की रक्षा को सुदृढ़ किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी इस अनुच्छेद का प्रभाव देखा गया, जब समय पर शुल्क जमा न कर पाने के कारण वंचित एक दलित छात्र के प्रवेश को बहाल कर न्यायालय ने समान अवसर के सिद्धांत को साकार किया। वहीं, चंडीगढ़ के महापौर चुनाव परिणामों को पलटने का निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक साहसिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आया।सहगल मनजीत सुप्रीम कोर्ट ने बना दिया AAP का मेयर, मगर बदले नंबर गेम में कब तक कुर्सी सेफ रखेंगे कुलदीप कुमार! https://www.aajtak.in/india/politics/story/supreme-court-verdict-on-chandigarh-mayor-election-will-aap-kuldeep-kumar-keep-his-chair-safe-in-changed-numbers-game-by-bjp-ntc-1883603-2024-02-20 आजतक 20 फरवरी 2024न्यायालय ने मणिपुर के एक कैबिनेट मंत्री को पद से हटाने का निर्देश दिया। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और उत्तरदायित्व की स्थापना का सशक्त संदेश था।क्या है अनुच्छेद 142, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के कैबिनेट मंत्री को किया बर्खास्त https://navbharattimes.indiatimes.com/india/supreme-court-used-article-142-to-remove-manipur-bjp-minister-shyamkumar/articleshow/74709238.cms नवभारतटाइम्स.कॉम 19 मार्च 2020
ताज़ा उदाहरण में मध्य प्रदेश के एक छात्र अथर्व चतुर्वेदी का प्रकरण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब सर्वोच्च न्यायालय की पीठ अपनी कार्यवाही समाप्त करने ही वाली थी, उसी समय छात्र ने स्वयं उपस्थित होकर अपनी व्यथा प्रस्तुत की। उसकी परिस्थिति और तर्कों को देखते हुए न्यायाधीशों ने तत्काल रुककर उसकी बात सुनी और संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित सुनवाई के उपरांत उसके पक्ष में निर्णय दिया।कुमार सत्यम गरीब छात्र को मिलेगा MBBS में दाखिला... क्या है आर्टिकल 142? जिसके सहारे सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये फैसला https://www.india.com/hindi-news/india-hindi/what-is-article-142-through-which-supreme-court-granted-mbbs-admission-to-ews-student-8306781/ india.com 14 फरवरी 2026 न्यायालय ने उसे चिकित्सकीय शिक्षा में प्रवेश प्रदान करने का निर्देश देकर यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय केवल प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और त्वरित निष्पादन का भी पर्याय है।बौड़ाई मुकेश क्या है संविधान का अनुच्छेद 142, जिसका इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट ने गरीब छात्र को दिला दी मेडिकल सीट https://ndtv.in/knowledge/what-is-article-142-of-constitution-which-supreme-court-used-to-secure-medical-seat-for-ews-student-10997966 ndtv.in 13 फ़रवरी 2026 15 अप्रैल 2026 14 फ़रवरी 2026 https://web.archive.org/web/20260214190627/https://ndtv.in/knowledge/what-is-article-142-of-constitution-which-supreme-court-used-to-secure-medical-seat-for-ews-student-10997966 dead
संदर्भ
टिप्पणी
अनुच्छेद 142 भारतीय न्यायपालिका की उस सृजनात्मक शक्ति का द्योतक है, जो उसे न्याय के अंतिम संरक्षक के रूप में स्थापित करती है। “पूर्ण न्याय” की अवधारणा इस अनुच्छेद का केंद्रबिंदु है, जो यह सुनिश्चित करती है कि न्याय केवल तकनीकी या औपचारिक न होकर वास्तविक और प्रभावी भी हो।
हालाँकि इस शक्ति का प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ किया जाता है, क्योंकि यह न्यायालय को असाधारण अधिकार प्रदान करती है। इसके बावजूद, यह प्रावधान अनेक अवसरों पर उन परिस्थितियों में न्याय का मार्ग प्रशस्त करता रहा है, जहाँ सामान्य विधिक उपाय अपर्याप्त सिद्ध हुए हैं। इस प्रकार अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान की उस जीवंत आत्मा को अभिव्यक्त करता है, जो न्याय को सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित करती है।भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान) https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग 2014
बाहरी कड़ियाँ
भारत का संविधान
श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद