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पारम्परिक ज्ञान का आंकिक संग्रहालय
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पारम्परिक ज्ञान का आंकिक संग्रहालय या 'ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी' भारत के परम्परागत ज्ञान का आंकिक संग्रहालय है। इसमें मुख्यतः औषधीय पौधों एवं औषधियों के निर्माण की विधि का संग्रह है। सम्प्रति यह अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी, स्पेनी आदि भाषाओं में उपलब्ध है।
परिचय
परम्परागत ज्ञान अंकीय पुस्तकालय (टीकेडीएल) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय तथा आयुष विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का एक सहयोगपूर्ण उद्यम तथा अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों में भारत से सम्बद्ध परम्परागत ज्ञान का गलत प्रयोग रोकने का पहला भारतीय प्रयास है। टीकेडीएल ने आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और योग के संस्कृत, हिंदी, अरबी, फारसी, उर्दू और तमिल में तीन करोड़ 40 लाख ए-4 आकार वाले पृष्ठों में संजोए परम्परागत चिकित्सकीय ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से परिवर्तित और योजनाबद्ध करके भाषा और प्रारूप की रुकावटें मिटा दी हैं। उसने सूचना प्रौद्योगिकी के उपकरणों तथा नवीन वर्गीकरण प्रणाली-परम्परागत ज्ञान संसाधन वर्गीकरण (टीकेआरसी) की मदद से इस सामग्री का अनुवाद अंग्रेजी, जापानी, फ्रांसीसी, जर्मन और स्पेनिश जैसी पांच अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में किया गया है। आज, भारत टीकेडीएल के माध्यम से नीम और हल्दी जैसे करीब 2.45 लाख चिकित्सकीय संरूपों को संरक्षित करने में सक्षम है। अधिगम (गोपनीयता) समझौते के तहत आठ अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों को टीकेडीएल तक पहुंचा दी गई है जिनमें यूरोपीय पेटेंट कार्यालय (ईपीओ), भारतीय पेटेंट कार्यालय, जर्मन पेटेंट कार्यालय (जीपीओ), यूनाइटेड किंगडम इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (यूकेपीटीओ), यूनाइटेड स्टेट्स पेटेंट एंड ट्रेडमार्क ऑफिस (यूएसपीटीओ), कनाडियन इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (सीआईपीओ), आईपी ऑस्ट्रेलिया और जापान पेटेंट कार्यालय (जेपीओ) शामिल हैं। टीकेडीएल टीम द्वारा दाखिल तीसरे पक्ष के पर्यवेक्षण के आधार पर अब तक अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, इटली, चीन आदि की औषधि निर्माता कम्पनियों के 53 आवेदन या तो खारिज किए जा चुके है या वापस ले लिए जा चुके हैं/रद्द कर दिए गए हैं या टीकेडीएल डाटाबेस में मौजूद सूचना के आधार पर बिना किसी खर्च के और तीसरे पक्ष के पर्यवेक्षण दर्ज किए जाने के कुछ ही हफ्तों के भीतर उन्हें निष्क्रिय पेटेंट आवेदन घोषित कर दिया गया है, जबकि पेटेंट को रद्द कराने में चार से 13 साल तक कानूनी जंग लड़नी पड़ती है। गलत पेटेंट दिए जाने के मामले को टीकेडीएल द्वारा नवीन, उपयोगी और कारगर ढंग से रोके जाने पर गौर करते हुए कई देशों और संगठनों ने अपने यहां मौजूद मॉडल की जगह टीकेडीएल लागू करने की इच्छा व्यक्त की है। वैश्विक समुदाय सहित विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन ने बौद्धिक सम्पदा अधिकार और परम्परागत ज्ञान के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका स्वीकार की है।
टीकेडीएल पहल का प्रारम्भ
टीकेडीएल पहल की शुरूआत हल्दी के घाव भरने के गुणों का यूएसपीटीओ में तथा नीम के फफूंदी रोधी गुणों का ईपीओ में पेटेंट रद्द कराने के भारतीय प्रयासों जितनी पुरानी है। इसके अलावा, 2005 में, टीकेडीएल विशेषज्ञ समूह ने अनुमान व्यक्त किया कि हर साल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दवाओं की भारतीय चिकित्सा प्रणालियों से सम्बद्ध करीब 2000 गलत पेटेंट प्रदान किए जाते हैं। इसकी मुख्य वजह यह है भारत का परम्परागत चिकित्सकीय ज्ञान संस्कृत, हिंदी, अरबी, फारसी, उर्दू, तमिल आदि भाषाओं में था, जो अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों के पेटेंट जांचकर्ताओं के लिए न तो सुलभ था और न ही बोधगम्य।
अमेरिका और यूरोप में ये पेटेंट्स प्रदान किया जाना राष्ट्रीय स्तर पर बहुत दुख का कारण बना। तभी से हर भारतीय को महसूस होने लगा कि भारत का ज्ञान गलत तरीके से उससे छीन लिया गया है। इसके अलावा पेटेंट प्रदान करने वाले देश में, पेटेंट के आवेदक को प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के अलग से अधिकार प्राप्त हो जाते थे।
भारतीय ज्ञान परम्परा
भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग भारत के शिक्षा मंत्रालय का एक विभाग है जिसे अक्टूबर 2020 में स्थापित किया गया था। यह एआईसीटीई मुख्यालय में स्थित है। इस विभाग की उत्पत्ति 18 मार्च, 2020 को "भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में अनुसंधान (भारतीय ज्ञान परंपरा)" विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में हुई। प्रभाग के लिए प्रशासनिक सहायता एआईसीटीई मुख्यालय द्वारा प्रदान की जाती है। भारतीय शिक्षा मंत्रालय ने एक विशेष योजना निर्मित की है जिससे अब स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित इन नए पाठ्यक्रमों में फाउंडेशन और कुछ ऐच्छिक पाठ्यक्रम हैं। ऐच्छिक कोर्स में भारतीय भाषा विज्ञान, भारतीय वास्तु शास्त्र, भारतीय तर्कशास्त्र, धातु शास्त्र, आदि हैं। इसके अलावा इनमें भारतीय ज्योतिषीय उपकरण, मूर्ति विज्ञान, बीज गणित, भारतीय वाद्य यंत्र, ब्रिटिशकाल के पूर्व का जल प्रबंधन आदि विषय हैं।अब ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर पढ़ाए जाएंगे भारतीय ज्ञान परंपरा के पाठभारतीय ज्ञान परम्परा विभाग
इन्हें भी देखें
भारत का आंकिक पुस्तकालय
बाहरी कड़ियाँ
पारम्परिक ज्ञान का आंकिक संग्रहालय (TKDL) का जालघर
परम्परागत ज्ञान अंकीय पुस्तकालय (टीकेडीएल) - जैविक चोरी के खिलाफ परम्परागत भारतीय ज्ञान के संरक्षण का कारगर और नवीन माध्यम
पेटेंट की लड़ाई में भारत को मिला 'ब्रह्मास्त्र'
Why Indian Knowledge System should be a part of mainstream education
सन्दर्भ
श्रेणी:आंकिक संग्रहालय