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वर्साय पर महिलाओं का मार्च
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वर्साय पर महिलाओं का मार्च 5–6 अक्टूबर 1789 पेरिस और वर्साय, फ़्रांस पेरिस के बाज़ारों की महिलाएँ, आम नागरिक, और नेशनल गार्ड
वर्साय पर महिलाओं का मार्च (English: Women's March on Versailles), जिसे अक्टूबर मार्च या वर्साय की ओर प्रस्थान भी कहा जाता है, फ़्रांसीसी क्रांति के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है। यह ऐतिहासिक घटना 5 अक्टूबर 1789 को शुरू हुई थी, जब पेरिस के बाज़ारों में काम करने वाली महिलाएँ ब्रेड (पावरोटी) की अत्यधिक कीमतों और उसकी भारी कमी को लेकर सड़कों पर उतर आई थीं। यह आरंभिक विरोध प्रदर्शन जल्द ही एक विशाल राजनीतिक जनसमूह में बदल गया और इसने फ़्रांस के इतिहास की धारा को हमेशा के लिए मोड़ दिया।Schama Simon Citizens: A Chronicle of the French Revolution https://archive.org/details/citizenschronicl00scha Vintage Books 1989 0-679-72610-1 459
पृष्ठभूमि
1789 के अंत तक, फ़्रांसीसी क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन पेरिस की आम जनता अभी भी भूख और भयंकर ग़रीबी से जूझ रही थी। दूसरी ओर, राजा लुई सोलहवें और उनका शाही परिवार पेरिस की भुखमरी से दूर, वर्साय के आलीशान महल में सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहा था। देश में अकाल और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण पेरिस के निवासियों के लिए अपना मुख्य भोजन 'ब्रेड' प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया था। इसी दौरान पेरिस में यह अफवाह फैल गई कि शाही रक्षकों के लिए वर्साय में एक शानदार दावत का आयोजन किया गया है, जिसमें क्रांति के प्रतीक 'तिरंगे' का अपमान किया गया है। इन अफवाहों ने भूखी और हताश जनता के क्रोध को भड़काने का काम किया।Doyle William The Oxford History of the French Revolution https://archive.org/details/oxfordhistoryoff00doyl_0 Oxford University Press 1989 0-19-822781-7 121
मार्च का घटनाक्रम
5 अक्टूबर की सुबह, पेरिस के बाज़ारों की महिलाओं ने एक साथ संगठित होना शुरू किया। उन्होंने शहर के शस्त्रागार को लूट लिया और हथियारों, भालों तथा तोपों से लैस होकर वर्साय की ओर मार्च करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे वे आगे बढ़ीं, उनके साथ हज़ारों अन्य लोग-जिनमें हथियारबंद पुरुष और 'नेशनल गार्ड' के असंतुष्ट सदस्य भी शामिल थे-जुड़ गए। पेरिस से वर्साय की लगभग 21 किलोमीटर (13 मील) की यह लंबी दूरी भारी बारिश के बीच तय की गई। यह उग्र भीड़ सिर्फ रोटी की माँग नहीं कर रही थी, बल्कि उनकी एक प्रमुख राजनीतिक माँग यह भी थी कि राजा को पेरिस लौटकर अपनी जनता के बीच रहना चाहिए ताकि वे उनकी वास्तविक स्थिति और पीड़ा को समझ सकें।Hibbert Christopher The Days of the French Revolution William Morrow and Company 1980 0-688-03704-6 96-98
वर्साय में टकराव और परिणाम
जब यह विशाल भीड़ वर्साय पहुँची, तो उन्होंने पूरे महल को घेर लिया। महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजा लुई सोलहवें से मुलाकात की और राजा ने पेरिस के गोदामों से ब्रेड बँटवाने का वादा किया। लेकिन भीड़ का एक बड़ा हिस्सा इससे संतुष्ट नहीं था। 6 अक्टूबर की सुबह हालात बेकाबू हो गए और प्रदर्शनकारियों का एक उग्र समूह महल के भीतर घुस गया। इसमें शाही रक्षकोंके साथ हिंसक झड़प हुई जिसमें कुछ रक्षक मारे गए। अंततः, आगे के रक्तपात को रोकने के लिए राजा लुई सोलहवें को भीड़ की माँगों के सामने झुकना पड़ा। उसी दिन, राजा, रानी मैरी एंटोनेट और उनके परिवार को भीड़ के साथ पेरिस के ट्यूलरीज़ महल वापस लौटना पड़ा।Lefebvre Georges The French Revolution: From its Origins to 1793 1962 https://archive.org/details/frenchrevolution0002lefe
ऐतिहासिक महत्व
यह घटना फ़्रांसीसी राजशाही के लिए एक घातक झटका थी और इसका प्रतीकात्मक प्रभाव अत्यंत गहरा था। महिलाओं के इस मार्च ने स्पष्ट कर दिया कि शक्ति अब वर्साय के महल में बैठे राजा के पास नहीं, बल्कि पेरिस की सड़कों पर मौजूद आम जनता के हाथों में है। राजा का पेरिस वापस आना क्रांति की एक बहुत बड़ी जीत थी, जिसने राजा की निरंकुश सत्ता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। इस घटना के बाद शाही परिवार एक प्रकार से पेरिस में बंदी बनकर रह गया और फ़्रांस में एक नए लोकतांत्रिक दौर की नींव पड़ी।Schama Simon Citizens: A Chronicle of the French Revolution https://archive.org/details/citizenschronicl00scharich Vintage Books 1989 0-679-72610-1 468-470
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Alpha History: The October March on Versailles
Britannica: Women's March on Versailles
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श्रेणी:विरोध प्रदर्शन