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बब्बर अकाली आन्दोलन
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जनवरी 2017
जनवरी 2017
बब्बर अकाली, सन १९२१ में अकालियों से अलग होकर बना एक उग्र सिख समूह था। गुरुद्वारा सुधार के प्रश्न पर अकालियों का अहिंसक मार्ग इन्हें पसन्द नहीं था।https://www.bhaskar.com/local/punjab/jalandhar/news/this-time-the-centenary-of-babbar-akali-movement-and-the-farmers-movement-will-be-dedicated-30th-gadri-babayan-da-mela-128998871.html 100 साल पूरे:इस बार बब्बर अकाली मूवमेंट की शताब्दी व किसान आंदोलन को समर्पित होगा, 30वां गदरी बाबेआं दा मेला
अंगूठाकार|27 फरवरी 1926 को बब्बर अकाली जत्थे के छह शहीदों की तस्वीर
सितम्बर १९२० में लड़ाकू दल का गठन हुआ था जिए 'शहीदी दल' नाम दिया गया था। बाद में यही दल 'बब्बर अकाली आन्दोलन' में परिवर्तित हो गया। १९२२ आते-आते बब्बर अकालियों ने भेदियों, सरकारी अधिकारियों और सेवा निवृत सरकारी अधिकारियों की हत्या करना शुरू कर दिया था। इन्होने एक अवैधानिक समाचार पत्र भी निकाला जिसमें अंग्रेजों द्वारा किये जा रहे शोषण का वर्णन होता था।
अप्रैल १९२३ में इस संगठन को अंग्रेजों ने अवैध घोषित कर दिया। इसके बहुत से सदस्य पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गये, ६७ को जीवित पकड़ लिया गया और ५ को मृत्युदण्ड दिया गया, ११ को काले पानी की सजा दी गयी, ३८ को अलग-अलग अवधि के लिये विभिन्न जेलों में डाल दिया गया।
शहीद भगत सिंह बब्बर अकालियों के बारे में लिखते हैं, "जब हम अपने आनंद में डूबे हुए थे, उसी समय इस महान प्रांत के एक कोने में एक भयानक घटना घट रही थी। जब आप इसके बारे में सुनेंगे, तो सिहर उठेंगे! कांप जाएंगे! उस दिन लाहौर सेंट्रल जेल में छह बहादुर बब्बर अकालियों को फांसी दे दी गई। श्री किशन सिंह जी गड़गज्जा, श्री संता सिंह जी, श्री दिलीप सिंह जी, श्री नंद सिंह जी, श्री करम सिंह जी और श्री धर्म सिंह जी पिछले दो वर्षों से मुकदमे के प्रति बड़ी उदासीनता दिखा रहे थे, जो इस दिन के लिए उनकी आतुर प्रतीक्षा को दर्शाता है। कई महीनों बाद जज ने अपना फैसला सुनाया। पांच को फांसी, कई को आजीवन कारावास या निर्वासन, और कुछ को बहुत लंबी कैद की सजाएं दी गईं। आरोपित वीर गर्ज उठे। उनके विजय के नारे आसमान तक गूंज उठे। फिर अपील की गई। पांच की जगह अब छह को फांसी पर चढ़ाने का फैसला हुआ। उसी दिन यह खबर आई कि दया याचिका भेजी गई है। पंजाब के सचिव ने घोषणा की कि फांसी को टाल दिया जाएगा। हम इंतजार कर रहे थे, लेकिन अचानक होली के उसी दिन हमने शोक मनाने वालों का एक छोटा सा जत्था देखा, जो उन वीरों के शवों को श्मशान की ओर ले जा रहा था। फिर अंतिम संस्कार चुपचाप कर दिया गया।"https://www.marxists.org/archive/bhagat-singh/1925/03/15.htm Blood Sprinkled on the Day of Holi Babbar Akalis on the Crucifix सिंह भगत www.marxists.org 2026-04-26
बाहरी कड़ियाँ
इस आंदोलन में प्रजापति गुर दतसिंह कुम्हार भी समिल थे http://www.sangatsansar.com/index3.asp?sslid=986&subsublinkid=1588&langid=2 https://web.archive.org/web/20140907170836/http://www.sangatsansar.com/index3.asp?sslid=986&subsublinkid=1588&langid=2 7 सितंबर 2014 बब्बर अकाली लहर 1920] (संगत संसार)
श्रेणी:भारत का क्रांतिकारी आन्दोलन