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411 समाचार
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पीताम्बरा पीठ

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इसमें जो भी जानकारी है वह गलत है। पीठ पर पंडित नेहरु कभी नहीं आए। राजा शत्रुजीत सिंह बुन्देला का नाम भी गलत है। उस वक्त राजा गोविन्द सिंह थे। लेकिन उन्होंने कोई सहयोग नहीं किया था। एनुउद्दीन नाम के अंग्रेजी शासन के प्रशासक ने जरुर यहां कुछ निर्माण कार्य कराए थे। Shri Peetambra Peetha, Datia entrance gate.jpg पीताम्बरा पीठ पीताम्बरा पीठ 1935 पीताम्बरा देवी, धूमावती दतिया, मध्य प्रदेश, भारत 25 29 50.1 N 78 27 43.2 E inline [www.shripitambarapeeth.in] श्री पीताम्बरा पीठ मध्य प्रदेश राज्य के दतिया शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर परिसर ( एक आश्रम सहित) है। यह कई पौराणिक कथाओं के साथ-साथ वास्तविक जीवन में लोगों की 'तपस्थली' (ध्यान का स्थान) है। यहाँ स्थित श्री वनखंडेश्वर शिव के शिवलिंग को महाभारत के समकालीन के रूप में अनुमोदित किया जाता है।शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी हैं मां पीतांबरा https://www.patrika.com/gwalior-news/maa-pitambara-always-do-help-to-destroy-enemies-1416065/ पत्रिका यह मुख्य रूप से शक्ति (देवी माँ को समर्पित) का आराधना स्थल है। स्थापना पीताम्बरा पीठ की स्थापना एक सिद्ध संत, जिन्हें लोग 'स्वामीजी महाराज' कहकर पुकारते थे, ने 1935 में दतिया के राजा शत्रुजीत सिंह बुन्देला सहयोग से की थी। कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था। श्री स्वामी महाराज ने बचपन से ही सन्यास ग्रहण कर लिया था। कोई नहीं जानता कि वह कहाँ से आये थे, या उनका नाम क्या था; न ही उन्होंने इस बात का खुलासा किसी से किया। हालाँकि, वे परिव्राजकाचार्य दंडी स्वामी थे, और एक स्वतंत्र अखण्ड ब्रह्मचारी संत के रूप में दतिया में अधिक समय तक रहे। वह कई लोगों के लिए एक आध्यात्मिक प्रतीक थे और अभी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसके साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने मानवता और देश दोनों के संरक्षण और कल्याण के लिए कई अनुष्ठानों और साधनाओं का नेतृत्व किया। गढ़ी मालेहड़ा के पं. श्री गया प्रसाद नायक जी (बाबूजी) स्वामीजी के ज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं। पूज्य स्वामीजी महाराज और बाबूजी के गुरुजी गुरुभाई थे। स्वामीजी प्रकांड विद्वान् व प्रसिद्ध लेखक थे। उन्हेंने संस्कृत, हिन्दी में कई किताबें भी लिखी थीं। मंदिर परिसर thumb|250px|मन्दिर परिसर का द्वार श्री पीताम्बरा पीठ, बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो 1920 के दशक में श्रीस्वामी जी द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने आश्रम के भीतर धूमावती देवी के मंदिर की भी स्थापना की थी, जोकि देश भर में एकमात्र है। धूमावती और बगलामुखी दस महाविद्याओं में से दो हैं। इसके अलावा, आश्रम के बड़े क्षेत्र में परशुराम, हनुमान, कालभैरव और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर फैले हुए हैं। वर्तमान में एक ट्रस्ट द्वारा पीठ का रखरखाव किया जाता है। एक संस्कृत पुस्तकालय है जो श्रीस्वामी जी द्वारा स्थापित किया गया था, और आश्रम द्वारा अनुरक्षित किया जाता है। आश्रम के इतिहास और विभिन्न प्रकार के साधनाओं और तंत्रों के गुप्त मंत्रों की व्याख्या करने वाली पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं। आश्रम की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह संस्कृत भाषा का प्रकाश छोटे बच्चों तक फैलाने का प्रयास करती है, जो निशुल्क है। आश्रम में वर्षों से संस्कृत वाद-विवाद कराया जाता रहा है। ऐतिहासिक महत्व माँ पीताम्बरा, बगलामुखी का स्वरूप रक्षात्मक है। पीताम्बरा पीठ मन्दिर के साथ एक ऐतिहासिक सत्य भी जुड़ा हुआ है। सन् 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। भारत के मित्र देशों रूस तथा मिस्र ने भी सहयोग देने से मना कर दिया था। तभी किसी योगी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू से स्वामी महाराज से मिलने को कहा। उस समय नेहरू दतिया आए और स्वामीजी से मिले। स्वामी महाराज ने राष्ट्रहित में एक 51 कुंडीय महायज्ञ करने की बात कही। यज्ञ में सिद्ध पंडितों, तांत्रिकों व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को यज्ञ का यजमान बनाकर यज्ञ प्रारंभ किया गया। यज्ञ के नौंवे दिन जब यज्ञ का समापन होने वाला था, उसी समय 'संयुक्त राष्ट्र संघ' का नेहरू जी को संदेश मिला कि चीन ने आक्रमण रोक दिया है, और 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं। मन्दिर प्रांगण में वह यज्ञशाला आज भी बनी हुई है। इसी प्रकार सन् 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी यहाँ गुप्त रूप से पुनः साधनाएं एवं यज्ञ करायें गये थे।चीन से युद्ध रोकने इस मंदिर में आए थे नेहरू, किया था 11 दिन तक यज्ञ https://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-pitambara-peeth-datia-madhya-pradesh-4790922-PHO.html दैनिक भास्कर 31 अक्टूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141101032953/http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-pitambara-peeth-datia-madhya-pradesh-4790922-PHO.html 1 नवंबर 2014 live नेहरू ने करवाया था भारत-चीन युद्ध के दौरान तंत्र-मंत्र, फिर हुआ चमत्कार https://www.patrika.com/bhopal-news/religion-use-of-tantra-mantra-in-indo-china-war-1962-1404211/ पत्रिका २१ सितम्बर २०१६ https://web.archive.org/web/20190213005521/https://www.patrika.com/bhopal-news/religion-use-of-tantra-mantra-in-indo-china-war-1962-1404211/ 13 फ़रवरी 2019 live पहुँच पीठ, मध्य प्रदेश के दतिया शहर में स्थित है, सबसे निकटमत हवाई अड्डे में ग्वालियर लगभग 75 किमी और झांसी 29 किमी दूर स्थित है। इसके अलावा यह ट्रेन मार्ग से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और आश्रम दतिया रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किमी दूर है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ www.shripitambarapeeth.in आधिकारिक वेबसाइट श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया : मध्य प्रदेश टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट श्रेणी:मध्य प्रदेश के हिन्दू मंदिर श्रेणी:दतिया