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411 समाचार
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जीवन का अंश

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जीवन का अंश (अंग्रेज़ी: slice of life) कला और मनोरंजन में साधारण, दैनिक अनुभवों के चित्रण को कहा जाता है।https://archive.org/details/newoxfordamerica0000unse Slice of Life September 2001 The New Oxford American Dictionary Oxford University Press Jewell, Elizabeth J. First 0-19-511227-X Abate, Frank R. registration रंगमंच में यह शब्द प्राकृतिकतावाद के लिए प्रयुक्त होता है, जबकि साहित्यिक संदर्भ में यह एक ऐसी कथन-शैली है जिसमें किसी पात्र के जीवन की प्रतीत होने वाली मनमानी घटनाओं की शृंखला प्रस्तुत की जाती है, जिसमें प्रायः कथानक-विकास, संघर्ष और भूमिका-निर्माण का अभाव होता है, तथा जिसका अंत प्रायः खुला होता है फ़िल्म और रंगमंच रंगमंचीय संदर्भ में “जीवन का अंश” का अर्थ वास्तविक जीवन का प्राकृतिक चित्रण होता है। कभी-कभी इसे विशेषण के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, जैसे — “जीवन का अंश संवादों वाला नाटक”। यह शब्द १८९० और १८९५ के बीच फ़्रांसीसी वाक्यांश त्रांश द व्य (tranche de vie) के अनुवाद के रूप में प्रचलित हुआ, जिसका श्रेय फ़्रांसीसी नाटककार जाँ जुलियाँ (१८५४–१९१९) को दिया जाता है।Slice of life 2006 Random House Unabridged Dictionary जुलियाँ ने यह शब्द अपने नाटक द सेरेनेड के मंचन के कुछ समय बाद प्रस्तुत किया। यह नाटक रोसरी का एक प्रमुख उदाहरण था — ऐसे नाटक जो भ्रष्ट, नैतिक रूप से दिवालिया पात्रों पर आधारित होते हैं, जो बाहर से सम्मानित प्रतीत होते हैं। जुलियाँ ने अपनी पुस्तक द लिविंग थिएटर (१८९२) में प्राकृतिकतावाद को परिभाषित करते हुए कहा — “नाटक जीवन का एक अंश है जिसे कला के साथ मंच पर रखा गया है।” उनका मानना था कि नाटक का उद्देश्य हँसी उत्पन्न करना नहीं, बल्कि विचार उत्पन्न करना है। उनके अनुसार नाटक की कथा पर्दा गिरने पर समाप्त नहीं होती, बल्कि यह केवल क्रिया का एक मनमाना अवरोध है, जिसके बाद दर्शक स्वतंत्र होते हैं यह सोचने के लिए कि आगे क्या घटित हो सकता है।http://www.wayneturney.20m.com/naturalism.htm Notes on Naturalism in the Theatre Turney, Wayne S. wayneturney.20m.com https://web.archive.org/web/20080514174112/http://www.wayneturney.20m.com/naturalism.htm 2008-05-14 dead १९५० के दशक में यह वाक्यांश जीवंत दूरदर्शन नाटकों की समीक्षाओं में प्रचलित हुआ, विशेषकर जे॰पी॰ मिलर, पैडी चेयेफ़्स्की और रेजिनाल्ड रोज़ के टेलीप्ले में। उस समय इसे कभी-कभी ब्रिटिश फ़िल्मों और रंगमंच से आए शब्द किचन सिंक यथार्थवाद के पर्याय के रूप में भी प्रयोग किया जाता था।Gottfried, Martin. All His Jazz, Da Capo, 2003.http://www.wayneturney.20m.com/naturalism.htm Notes on Naturalism in the Theatre Turney, Wayne S. wayneturney.20m.com https://web.archive.org/web/20080514174112/http://www.wayneturney.20m.com/naturalism.htm 2008-05-14 dead २०१७ में पटकथा-लेखक और विद्वान एरिक आर॰ विलियम्स ने “जीवन का अंश” फ़िल्मों को अपनी पटकथा-श्रेणीकरण प्रणाली में ग्यारह “महाशैलियों” में से एक माना। अन्य दस महाशैलियाँ थीं — एक्शन, अपराध, कल्पना, भय, प्रेम, विज्ञान-कथा, खेल, थ्रिलर, युद्ध और पश्चिमी। उनके अनुसार द स्टेशन एजेंट, बॉयहुड, कैप्टन फ़ैन्टास्टिक, फ़ेन्सेस, मूनलाइट और वेट्रेस जैसी फ़िल्में इस महाशैली के उदाहरण हैं।The Screenwriters Taxonomy : A Roadmap to Collaborative Storytelling Williams Eric R. Routledge Studies in Media Theory and Practice 2017 978-1-315-10864-3 New York, NY 21 993983488 साहित्य साहित्यिक संदर्भ में “जीवन का अंश” एक ऐसी कथन-शैली है जिसमें किसी पात्र के जीवन का एक मनमाना अंश प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें प्रायः संगठित कथानक, संघर्ष या समापन का अभाव होता है।https://books.google.com/books?id=PaEvtL-dX3kC&pg=PA83 Bernard Shaw's remarkable religion: a faith that fits the facts Stuart Eddy Baker University Press of Florida 2002 978-0-8130-2432-5 83–84 इसमें कथा की प्रगति न्यूनतम होती है और कोई भूमिका-निर्माण, संघर्ष या समाधान नहीं होता, बल्कि अंत खुला रहता है। ऐसा कार्य जो वास्तविकता के किसी अंश का सूक्ष्म और सटीक पुनरुत्पादन करे, बिना किसी चयन, संगठन या निर्णय के, और जिसमें प्रत्येक सूक्ष्म विवरण वैज्ञानिक निष्ठा के साथ प्रस्तुत हो, “जीवन का अंश” उपन्यास का उदाहरण है।American Literary Naturalism, a Divided Stream Walcutt Charles University of Minnesota Press 1966 978-0-8166-5885-5 St. Paul, Minnesota 21Realism and Naturalism: The Novel in an Age of Transition https://archive.org/details/realismnaturalis0000leha Lehan Richard University of Wisconsin Press 2005 0-299-20870-2 Madison 193 संयुक्त राज्य अमेरिका में १९वीं शताब्दी के अंत में शिकागो स्कूल ने इस शैली पर विशेष बल दिया, जब उपन्यास और सामाजिक विज्ञान अलग-अलग विमर्श प्रणालियाँ बन रहे थे।https://archive.org/details/sagehandbookqual00denz_660 The SAGE Handbook of Qualitative Research Denzin Norman Lincoln Yvonna SAGE 2005 0-7619-2757-3 Thousand Oaks, CA 16 limited इस काल में शोधकर्ता-लेखकों ने ऐसे साहित्यिक पाठ रचे जो विषय की कहानियों और भावनारहित सामाजिक यथार्थवाद को साधारण जनभाषा में प्रस्तुत करते थे।https://archive.org/details/sagehandbookqual00denz_660 The SAGE Handbook of Qualitative Research Denzin Norman Lincoln Yvonna SAGE 2005 0-7619-2757-3 Thousand Oaks, CA 16 limited यह साहित्य में १९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और २०वीं शताब्दी के प्रारम्भिक प्राकृतिकतावाद आंदोलन का हिस्सा था, जो सामाजिक विज्ञानों के सिद्धांतों और विधियों, जैसे डार्विनवादी दृष्टिकोण, से प्रेरित था।American Literature from the 1850s to 1945 Augustyn Adam Britannica Educational Publishing 2010 978-1-61530-234-5 New York 71 यह आंदोलन यथार्थवाद का विस्तार था, जो नैतिक निर्णय के बिना वास्तविकता का सटीक चित्रण करता था। कुछ लेखक, विशेषकर नाटककार, जीवन के “अंधेरे पहलुओं” पर ध्यान केंद्रित करते थे ताकि सामाजिक बुराइयों और दमनकारी सामाजिक नियमों को उजागर कर दर्शकों को सामाजिक सुधार की ओर प्रेरित किया जा सकेAmerican Literature from the 1850s to 1945 Augustyn Adam Britannica Educational Publishing 2010 978-1-61530-234-5 New York 71The Art of Theatre: Then and Now Downs William Wright Lou Anne Ramsey Erik Cengage Learning 2016 978-1-305-95470-0 Boston, MA 372 एनिमे और मांगा जीवन का अंश एनिमे और मांगा वे कथाएँ हैं जो किसी पहचाने जाने योग्य, दैनिक परिवेश — जैसे उपनगरीय उच्च विद्यालय — में घटित होती हैं और जिनका केन्द्र मानवीय सम्बन्ध होते हैं, जो प्रायः रोमानी प्रकृति के होते हैं। यह शैली पात्रों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने को प्राथमिकता देती है। इस शैली की लोकप्रियता १९८० के दशक के मध्य में बढ़ने लगी।https://library.oapen.org/handle/20.500.12657/30562 Manga vision : cultural and communicative perspectives Rivera Rusca Renato Monash University Publishing 2016 978-1-925377-07-1 Pasfield-Neofitou Sarah E. Clayton, Vic. 61–62 The Changing Role of Manga and Anime Magazines in the Japanese Animation Industry 20.500.12657/30562 953459173 Sell Cathy मसायुकी निशिदा के अनुसार, जीवन का अंश एनिमे और मांगा में कभी-कभी कल्पना के तत्व भी सम्मिलित होते हैं, ताकि कुछ संभावित परिस्थितियों में मनुष्यों की “वास्तविकता” को व्यक्त किया जा सके।https://library.oapen.org/handle/20.500.12657/30562 Manga vision : cultural and communicative perspectives Rivera Rusca Renato Monash University Publishing 2016 978-1-925377-07-1 Pasfield-Neofitou Sarah E. Clayton, Vic. 61–62 The Changing Role of Manga and Anime Magazines in the Japanese Animation Industry 20.500.12657/30562 953459173 Sell Cathy रॉबिन ई॰ ब्रेनर की २००७ की पुस्तक अंडरस्टैंडिंग मांगा ऐंड एनिमे के अनुसार, एनिमे और मांगा में “जीवन का अंश” शैली नाट्य से अधिक मेलोड्रामा के समान होती है, और इसमें अल्प समय में अत्यधिक नाटकीय और हास्यपूर्ण घटनाएँ होने के कारण यह कभी-कभी अतिरंजित प्रतीत होती है। यह शैली जापानी मांगा बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा है और प्रायः विद्यालय तथा पारस्परिक सम्बन्धों पर केन्द्रित होती हैNishida Masayuki 2016-06-06 Locality in Japanese Animation: Transboundary Interactions between the Animation Tamayura and Takehara City in Hiroshima, Japan https://so04.tci-thaijo.org/index.php/jsn/article/view/52818 JSN Journal en 6 1 29 2586-937XUnderstanding Manga and Anime https://archive.org/details/understandingman0000bren Brenner Robin Greenwood Publishing Group 2007 978-1-59158-332-5 Westport, CT 112 इस शैली का एक उपश्रेणी कूकि-केई (空気系; “वायु प्रकार”), जिसे निचिजो-केई (日常系; “दैनिक प्रकार”) भी कहा जाता है, है। इसमें गहन व्यक्तिगत या पूर्ण विकसित रोमानी सम्बन्धों के वर्णन को जानबूझकर हटाकर हल्की-फुल्की, गैर-गंभीर कथा कही जाती है, जो बिशोजो पात्रों के दैनिक जीवन और वार्तालाप पर केन्द्रित होती है।Yamamura Takayoshi 2015-01-02 Contents tourism and local community response: Lucky star and collaborative anime-induced tourism in Washimiya Japan Forum 27 1 60–61 10.1080/09555803.2014.962567 0955-5803 143690685 free इसमें स्थान की विशिष्टता और दैनिक जीवन की शांत, हृदयस्पर्शी अनुभूति पर बल दिया जाता है। निचिजो-केई शैली योनकोमा मांगा से विकसित हुई और इसमें अज़ुमांगा दायो, के-ऑन!, सोफतेनी और हिदामारी स्केच जैसे कार्य सम्मिलित हैं। ताकायोशी यामामुरा के अनुसार, २००० के दशक के मध्य में इस उपश्रेणी की लोकप्रियता में वृद्धि ने ऐनिमे में दर्शाए गए स्थलों की मीडिया पर्यटन में भी वृद्धि की।Yamamura Takayoshi 2015-01-02 Contents tourism and local community response: Lucky star and collaborative anime-induced tourism in Washimiya Japan Forum 27 1 60–61 10.1080/09555803.2014.962567 0955-5803 143690685 freeClyde Deirdre 2020-01-02 Pilgrimage and prestige: American anime fans and their travels to Japan https://www.tandfonline.com/doi/full/10.1080/14766825.2020.1707464 Journal of Tourism and Cultural Change en 18 1 63 10.1080/14766825.2020.1707464 1476-6825 213737486 subscription स्टीवी सुआन के अनुसार, अज़ुमांगा दायो जैसे जीवन का अंश ऐनिमे में माध्यम की “परंपरागत अभिव्यक्तियों” के अतिरंजित रूप सम्मिलित होते हैं, जैसे — संकट के समय आँखों में सफ़ेद वृत्त, प्रबल भावनाओं को दर्शाने के लिए चमकती बड़ी आँखें, पसीने की बूँदें, पशु-दाँत, और सरल मानवीय आकृतियाँYamamura Takayoshi 2015-01-02 Contents tourism and local community response: Lucky star and collaborative anime-induced tourism in Washimiya Japan Forum 27 1 60–61 10.1080/09555803.2014.962567 0955-5803 143690685 freeThe anime paradox : patterns and practices through the lens of traditional Japanese theater Suan Stevie Global Oriental 2013 978-90-04-22215-1 Leiden 252 844939529 यह भी देखें अनुकरण संदर्भ श्रेणी:टेलिविज़न पारिभाषिकी श्रेणी:आख्यान तकनीकें श्रेणी:शैली के अनुसार काल्पनिक साहित्य श्रेणी:कहानीकारी श्रेणी:जापानी भाषा पाठ वाले लेख